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Thursday, February 27, 2025

Jab Jago Tabhi Savera - Arthur Foot Academy

                                     

उठ जाग देख नभ में प्रकाश। क्यों है निराश, मत छोड़ आस

अध्याय "जब जागो, तब सवेरा" से हमें यह शिक्षा मिलती है। यदि हमने व्यतीत समय में गलतियाँ कीं, जिससे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सके। पुरानी गलतियों को अपने मन से माफ करके तथा गलतियाँ दोबारा नहीं दोहराई जाएं। भले ही हमसे नई गलती हो जाए, वह हमें स्वीकार करनी है। सबसे पहले हमें अपने आप को चुनौती देनी है। स्वयं में परिवर्तन करके, एक सही दिशा में मेहनत करके लगातार अग्रसर, अपने कार्य को एक ईमानदारी से मेहनत करके हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। कुछ पुरानी गलतियों से सीखकर, कुछ अपने पुराने अनुभव को अपने जीवन में लागू करके, हम सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ सकते हैं। हमें अपने निर्णय से कई बार निराशा भी प्राप्त होगी। परंतु हमें पीछे नहीं हटना है। बल्कि हमें उसमें स्वयं सुधार करके आगे बढ़ना है।

नीरज कुमार आर्थर फुट अकादमी 

देरी होने का ये मतलब नहीं है कि आप हार गए हैं। हो सकता है कि आप लंबी छलांग की तैयारी में हों।  

जब जागो, तब सवेरा। जो बीत गया, सो बीत गया। अगर आपकी जिंदगी में आपका अतीत बहुत बुरा हो रहा है, तो उसके बारे में सोचकर आप अपना भविष्य और अपना वर्तमान खराब मत कीजिए। अतीत को लेकर अफसोस नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो हमारा प्रेजेंट है, हम सारा फोकस उसी पर करना है। अगर हमारा प्रेजेंट अच्छा हो गया, तो आने वाला फ्यूचर भी अच्छा हो जाएगा। मैंने कहीं पर पढ़ा था कि जो आज आपका पास्ट है, वह पहले कभी प्रेजेंट था, और जो आज आपका प्रेजेंट है, वह फ्यूचर में कभी-कभी आपका पास्ट बन जाएगा। इसलिए ध्यान रखिए, अपने प्रेजेंट पर पूरा फोकस रखिए। अगर प्रेजेंट अच्छा हो गया, तो आपके व्रत में गलतियां छुप जाएंगी। प्रेजेंट अच्छा होगा, और आपका भविष्य बहुत अच्छा होगा । 

देवानंद आर्थर फुट अकादमी

Tuesday, October 13, 2020

आत्म निर्भर - कविता देवडा

जीवन में हम सब को आत्मनिर्भर होना चाहिए क्योंकि आज के दौर में अगर हम आत्म निर्भर रहेंगे तो ही आगे बढ़ पाएंगे। हर चीज को सीखने के लिए हमें हमेशा आगे बढ़कर विनम्र होकर तैयार रहना चाहिए। जब हम कोई कार्य सीखते हैं तो मन में सवाल जवाब तो रहते ही हैं लेकिन उन सवालों का जवाब ढूंढने का प्रयास हमें करना चाहिए। जब हम आत्मनिर्भर रहेंगे तो हमारे आने वाली पीढ़ी भी हमें देखकर प्रयास करेगी। जब हम आत्म निर्भर रहने की कोशिश करेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी हमें देखकर सीखने की कोशिश करेंगी।

हम जैसे भी हैं पहले स्वीकार करें  स्वयं को  नहीं तो  हम  मजबूत  और आत्मनिर्भर  नहीं बन सकते हैं। हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता या हम किसी के जैसे नहीं बन सकते हैं। हमारे पास कुछ भी करने का हुनर तो बहुत है लेकिन हम कुछ बहाने बनाकर उसको नकारते हैं। कोई भी नया कार्य करने का अगर सोचते हैं तो उसकी शुरुआत तो हमें ही करनी होगी लेकिन अगर हम कुछ करने से पहले ही  पीछे हट जाएंगे  तो हम  आगे कैसे बढ़ेंगे। हम कुछ  गलती करने के लिए ही तैयार नहीं होंगे तो उसमें सुधार कैसे करेंगे। स्वयं की गलती को भी स्वीकारना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। दूसरों को कोसने की बजाय हमें पहले स्वयं में झांकना होगा और अपनी गलतियों को अपनाना और सुधार करना होगा।

 एक छोटे बच्चे को ही ले लीजिए वह भी अगर कुछ काम करना चाहे तो पहले तो वह खुद कोशिश करेगा फिर जब नहीं होगा उससे तो वह बड़ों से मदद लेगा। वैसे ही हम लोगों को भी प्रयास करते रहना चाहिए और लोग क्या कहेंगे इस बारे में नहीं सोचना है लोग तो हमेशा दोनों तरफ से बोलेंगे अगर हम सफलता पाते हैं तो भी बोलेंगे और नहीं पाते हैं तो भी बोलेंगे इसीलिए स्वयं पर निर्भर होना सीखिए धन्यवाद।

कविता देवडा, द फैबइंडिया स्कूल <kda@fabindiaschools.in>

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