आज के सेशन में हमने "कन्वेंशनल बनाम कंटेम्पररी स्कूल मैनेजमेंट" पर चर्चा की। संदीप दत्त सर जी ने हमें इनोवेटिव टीचिंग तरीकों और गैर-पारंपरिक टीचरों की नियुक्ति के बारे में बताया। स्टूडेंट्स के व्यवहार से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए टीचर्स की काउंसलर के रूप में भूमिका पर भी बात हुई।
मेरे लिए इस सेशन से यह समझ में आया कि शिक्षकों को नए और प्रभावी तरीकों से पढ़ाने के लिए प्रेरित करना और उन्हें टेक्नोलॉजी के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना बहुत जरूरी है। गैर-पारंपरिक तरीकों से पढ़ाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति भी एक अच्छा विचार है।
मैंने सीखा कि स्टूडेंट्स के व्यवहार से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए टीचर्स को काउंसलर की भूमिका निभानी चाहिए और उन्हें व्यक्तिगत ध्यान देना चाहिए। शिक्षा में टेक्नोलॉजी का प्रभावी ढंग से उपयोग करने से स्टूडेंट्स को और भी प्रभावी तरीके से पढ़ाया जा सकता है।
मैं इस सेशन से मिली जानकारी को अपने शिक्षण में लागू करने की कोशिश करूंगी और स्टूडेंट्स के लिए और भी प्रभावी तरीके खोजूंगी।
सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल

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