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Wednesday, January 20, 2021

भारत की सामाजिक समस्या - Kusum Dangi

मानव  समाज  ना  तो कभी सामाजिक समस्याओं से पूर्ण मुक्त रहा है और ना ही रहने की संभावना निकट नजर आती हैं। परंतु इतना तो निश्चित है कि आधुनिक समय में विद्यमान संचार  की क्रांति तथा शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता के फल स्वरुप मनुष्य इन समस्याओं के प्रति संवेदनशील एवं सजग  हो गया हैं।  

सामाजिक समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने में जनसंचार के माध्यम टेलीविजन, अखबार एवं रेड़ियो  ने  महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन किया हैं।  जो समाज इतना अधिक परिवर्तनशील होगा उसमें उतनी ही अधिक समस्या आएगी समाज का ताना-बाना इतना जटिल हैं कि इसकी एक इकाई में होने वाला परिवर्तन अन्य इकाइयों  को प्रभावित करता हैं। 

भारतीय समाज की प्रमुख समस्याओं में निर्धनता, बेरोजगारी, असमानता, अशिक्षा, गरीबी, आतंकवाद ,दहेज प्रथा, बाल विवाह आदि  हैं।  इन समस्याओं के निराकरण के लिए यह अत्यावश्यक है कि इनकी प्रकृति को समझा जाए एवं स्वरूपों  की व्याख्या की जाए इन समस्याओं के निराकरण के लिए एक नई सोच प्रस्तुत करना अति आवश्यक हैं।

Kusum Dangi
The Fabindia School 
kdi@fabindiaschools.in
Courtesy Source:  https://hi.m.wikipedia.org/

Saturday, September 26, 2020

हमारे प्राचीन ग्रंथ - Krishan Gopal

वर्तमान में हम आधुनिक हो चले हैं, समय के साथ बदलना ठीक भी है। जो समय के साथ चलता है, वह सफल रहता है। रहने का ढंग बदल गया, खानपान बदल गया, हमारे तौर-तरीके और रीति-रिवाज भी बदल गए। बदलाव का यह दौर ऐसा चला कि हमने बहुत कुछ बदल दिया। कुछ जगह बदलाव नहीं होना चाहिए था, वहाँ भी बदलाव हो गया। समय के साथ बदलने का तात्पर्य है, हम भी जमाने की दौड़ में साथ रहें किंतु इसका अर्थ यह नहीं कि हमारा जिससे अस्तित्व है, वही समाप्त कर दिया जाए। 

हमारे प्राचीन ग्रंथों में एक से बढ़कर एक मूल्यों की बात कही गई है। आज इन्हीं मूल्यों का विघटन होते हुए देख रहे हैं। मूल्यों के विकास की चर्चाएँ की जाती है, छात्रों में मूल्य कैसे जागृत हो इस पर मंथन किया जाता है। साथ ही कई स्थानों पर इस पर टिप्पणियाँ भी की जाती है- पहले ऐसा होता था या वैसा होता था, अब नहीं होता। इन सबके लिए जिम्मेदार भी हम ही हैं। अपने ग्रंथों में दिए गए तथ्यों को पढ़ते नहीं या उन्हें स्वीकार करते नहीं क्योंकि हम बदल चुके हैं। 

 हमारे ग्रंथों ने हमें बहुत कुछ दिया है, इनमें जीवन मूल्य भी सम्मिलित है। कई बातों को पाप और पुण्य की अवधारणा से जोड़ दिया गया, जिससे मन में थोड़ा सा भय रहे और मनुष्य प्रकृति के साथ खिलवाड़ न करें या जीवन मूल्यों का त्याग ना करें। जब तक इन प्राचीन ग्रंथों को लोग श्रद्धा पूर्वक पढ़ते थे, उन पर मनन करते थे तब तक कभी सांप्रदायिक दंगों का नामोनिशान नहीं था। प्रकृति से खिलवाड़ नहीं होता था। यही कारण था कि उस समय कभी कहीं अनावृष्टि या अतिवृष्टि नहीं होती थी।

 इन प्राचीन ग्रंथों में धार्मिक ग्रंथ भी है, जिन्हें कोई पढ़ता नहीं है परंतु इनके लिए आपस में लड़ जाने के लिए तैयार रहते हैं। समाज को सही दिशा देने के लिए मनीषियों ने इन ग्रंथों की रचना की होगी, इनकी रचना में न जाने कितना समय तथा कितनी श्रम लगा होगा। हमारा काम तो सिर्फ इन्हें पढ़ना और अनुकूल वातावरण तैयार करना है। कुछ ग्रंथ तो हम पढ़ भी नहीं सकते क्योंकि वे जिस भाषा में लिखे गए हैं, वह हमारी समझ से दूर होती जा रही है। यह भी बदलाव का ही परिणाम है।

सीखो सब पर अपनी चीजों को, अपने वैभव को मत भूलो। आज यदि विश्व के साथ तालमेल रखना है तो हमें बहुत कुछ नया भी सीखना पड़ेगा। तभी हम विश्व में अपने देश को स्थान दिला पाएँगे परंतु ऐसा नहीं हो कि अपनी सभ्यता से मुँह मोड़ लें। अपने साहित्य पर हमें गर्व होना चाहिए, साथ ही  इनका अध्ययन भी करते रहना चाहिए।  कई सारे जीवन उपयोगी तथ्य हम अध्ययन मात्र से ही सीख जाएँगे।

Krishan Gopal 
The Fabindia School, Bali 
kde4fab@gmail.com 

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