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Friday, March 14, 2025

साहस: प्रतिबिंब आर्थर फुट अकादमी

 

साहस कहीं और नहीं, बस आपके दिमाग में है।

इस पाठ के माध्यम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमें बार-बार प्रयास करना चाहिए और साहस भी। साहस का अर्थ है बहादुर बनना, न कि डरना। साहस वाली जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। ऐसी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बिल्कुल निडर और बेख़ौफ़ होती है। साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह इस बात की चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं और वह अपना प्रयास जारी रखता है।

मनुष्य के गुणों में साहस सर्वोत्तम है क्योंकि यह सभी गुणों की जननी है। जीना तो उसी का है जिसने जीवन के सूत्र को समझ लिया और भयंकर विपरीत स्थिति पर विजय प्राप्त करने का एक ही रास्ता है, जो साहस है। अगर अंदर साहस है तो हम आत्मनिर्भर बने रहते हैं, जो हमारी कार्यशैली के लिए महत्वपूर्ण है। हमें अपने अनुभवों को उनके सीखने के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। वे जो भी करना चाहते हैं, हमें उन्हें वह करने के लिए साहसी बनने देना चाहिए। यदि असफल हो जाते हैं, तो वे असफलता से भी सीख लेंगे। और अगर वे सफल हो जाते हैं, तो शायद वे दुनिया को एक बेहतर जगह बना पाएंगे।
हमें अपना कार्य सही करने के लिए जब तक प्रयास करना चाहिए, जब तक वह सही न हो जाए। हमें विपरीत स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, साहस और धैर्य से अपने काम को करना चाहिए। साहस ही हमें हमारी मंजिल तक लेकर जा सकता है। सफलता हमें तब तक नहीं मिलेगी जब तक हम साहस और बार-बार प्रयास नहीं करेंगे।
साहस एक ऐसा विचार है, जो मन में आते ही पराजय को पीछे छोड़ते हुए विजय की ओर आगे बढ़ा देता है।
Reena Devi
Principal, Arthur Foot Academy

साहस हमेशा ललकारता नहीं है, कभी-कभी साहस दिन ढलने के बाद एक छोटे से शब्द के माध्यम से प्रकट होता है कि "मैं कल फिर से कोशिश करूंगा"। 

जीवन में डर का न होना साहस नहीं, बल्कि किसी भी प्रकार के डर पर विजय पाना साहस है। पाठ "साहस" से यही शिक्षा मिलती है कि अगर हम कोई भी कार्य कर रहे हैं और वह हमें मुश्किल लग रहा है या फिर हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियाँ आ रही हैं, तो हमें उस कार्य को बीच में ही नहीं छोड़ना चाहिए। बल्कि हमें अपने अंदर इतना साहस होना चाहिए कि हम उस कार्य को पूर्ण करके ही छोड़ें। क्योंकि अगर हम साहसिक व्यक्ति हैं, तो हम अपने डर पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं। साहस मनुष्य को कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। साहस के कारण हृदय में आत्मविश्वास और धैर्य बसते हैं। पाठ "साहस" का सारांश यह बताता है कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी काम में बार-बार असफल हो रहा है, तो हिम्मत और कोशिश करते रहना चाहिए। क्योंकि एक दिन वह भी आएगा जब आप उस कार्य में सफलता प्राप्त कर चुके होंगे।

समस्याएँ हमारे जीवन में बिना किसी वजह के नहीं आतीं। उनका आना एक इशारा है कि हमें अपने जीवन में कुछ बदलना है।
साक्षी पाल

Wednesday, December 18, 2024

विनम्रता - Arthur Foot Academy


पाठ विनम्रता से मुझे यह सीखने को मिला है कि हम जिंदगी में कितने भी महान बन जाए या कितने भी बड़े आदमी बन जाए पर हमें कभी भी बड़े होने का घमंड नहीं होना चाहिए जैसे पाठ विनम्रता में गांधी जी सचिन तेंदुलकर वे महान खिलाड़ी के साथ वह बहुत अच्छे आदमी भी थे और जैसे लेखक के बेटे देवांग का उदाहरण दिया गया है कि वह अपनी इच्छा से शौचालय साफ करते थे और उनका व्यवहार स्कूल के चौकीदार से लेकर छोटे बच्चों तक मिलनसार था इसी तरह भी करना चाहिए मैंने अपनी जिंदगी में महसूस किया है जब मैं कक्षा 6 में पढ़ती थी तो मेरे एक अध्यापक थे जिनका नाम श्री अमित कुमार था उनका व्यवहार बहुत अच्छा था क्योंकि वह किसी भी बच्चे में भेद भाव नही करते थे और बच्चे भी भी उनसे बहुत लगाव करने लगे क्योंकि वह पढ़ाने के साथ साथ वह बच्चों को खिलाया भी करते थे उन्होंने हमे खो खो खेल खिलाया था जिसमे उन्होंने हमे समझाया कि इसे कैसे खेलते हैं और इसमें कितने बच्चे पार्टिसिपेट कर सकते हैं और फिर हमने खो खो खेल खेलना शुरू किया और मुझे खो-खो खेल बहुत पसंद आया

साक्षी खन्ना
अध्यापक
आर्थर फुट अकादमी


विनम्रता एक अति महत्वपूर्ण नैतिक मूल्य है, जो कि प्रत्येक मनुष्य के अन्दर विद्यमान होना चाहिए। विनम्रता हमें हमारी सभ्यता, संस्कृति तथा अच्छे विचारों से जोड़े रखता है और हमें प्रगति के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करता है। जब हम अपने विद्यार्थी जीवन में होते हैं, हमारे अध्यापक जब हमें पढ़ाते हैं और जब हमसे विनम्र भाव से पूछते हैं या बात करते हैं, यह उनका एक अच्छा स्वभाव होता है। जब हम उनके प्रश्न का उत्तर दे देते हैं, तब हमारे अन्दर उपस्थित हिचकिचाहट समाप्त हो जाती है। यदि हमें चाहे, प्रत्येक व्यक्ति हमें सम्मान दे, हमसे अच्छे से बात करे, हमारे विचारों को समझे, तो हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हमें भी विनम्र भाव से उनसे बात करनी चाहिए। जब मैं विद्यार्थी जीवन में पढ़ता था, मैं एक शांत स्वभाव का विद्यार्थी था। प्रत्येक अध्यापक का ध्यान मेरी ओर आकर्षित होता था और वे विनम्र भाव से मुझसे बातें करते थे। वे मेरा मनोबल बढ़ाते थे। यह मेरा विनम्र स्वभाव ही था जिससे मैं अपने अध्यापक का ध्यान आकर्षित कर पाता था। यदि कोई व्यक्ति चाहे कि उसे भी अपने अन्दर विनम्रता उत्पन्न करनी है, तो एक छोटी सी कार्यशाला परिवर्तन करके अपने अन्दर मानवता की सोच विद्यमान करने के उपरान्त उसके जीवन में भी विनम्रता का भाव प्रकट किया जा सकता है।

नीरज कुमार
अध्यापक
आर्थर फुट अकादमी

पाठ विनम्रता से मुझे यही सीखने को मिला कि हम चाहे कितने भी महान व्यक्ति बन जाए या जीवन में कितनी भी उन्नति हासिल कर ले, हमको कभी बड़े होने का या सर्वश्रेष्ठ होने का घमंड नहीं होना चाहिए | जैसे पाठ विनम्रता में गांधीजी और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर व महान खिलाड़ी कपिल देव के उदाहरण दिए गए हैं, और जैसे लेखक के बेटे देवांग का उदाहरण दिया गया है, कि वह अपनी इच्छा से शौचालय साफ करता था|  उसका व्यवहार स्कूल के चौकीदार से लेकर छोटे बच्चों तक मिलनसार था| इसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में करना चाहिए|

मैंने भी अपने जीवन में यह महसूस किया हैं| जब मैं कक्षा 6 में पढ़ती थीं| मेरे एक अध्यापक थे जिनका नाम श्री महेंद्र सिंह था, मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा और सिर्फ़ वही एक अकेले अध्यापक ऐसे थे, जो बच्चों को पढ़ाने के साथ - साथ खेलने कूदने के लिए भी उत्साहित करते थे| किसी बच्चे के साथ भेद - भाव नहीं करते थे  | सब बच्चों को उनसे बहुत लगाव था| उन्होंने हमको बताया की कोई भी खेल खेलते हैं तो उसके कुछ नियम होते हैं | उन्होंने बताया की कबड्डी खेल में कितने खिलाड़ी होते हैं| कितनी रेखा बनी होती हैं कौन सी रेखा पर नंबर मिलेगा और किस रेखा से बाहर जाने पर आप आउट हो जाएंगे| सामने वाले को किस तरीके से पकड़ना हैं |

 इसी प्रकार उन्होंने बाकी खेलों के नियम बताए और फिर उन्होंने हमारी प्रतियोगिता दूसरे गांव के स्कूल के बच्चों से कराई, जहां हमने प्रथम स्थान प्राप्त किया इसी प्रकार महेंद्र सिंह सर हमें ब्लॉक स्तर, जिला स्तर, और राज्य स्तर तक हमारी प्रतियोगिता कराई | हमारे लिए और हमारे स्कूल गांव के लिए यही बहुत बड़ी बात थी की पहली बार स्कूल के बच्चे और बंदरजूड  गांव के कुछ बच्चे राज्य स्तर तक खेल कर आए हैं| 

उस स्कूल से कक्षा 8 पास करने के बाद मैंने दूसरे स्कूल में एडमिशन लिया वहां ऐसा कोई अध्यापक नहीं मिला जो खेल कूद के बारे में पूछे | इसलिए महेंद्र सिंह सर आज भी बहुत याद आते हैं अतः मैं यह कहना चाहूंगी कि उनके जैसे अध्यापक जीवन में बहुत कम मिलते हैं | जो बिना स्वार्थ के बच्चों के लिए बहुत कुछ कर देते हैं|

साक्षी पाल
अध्यापक
आर्थर फुट अकादमी


विनम्रता पाठ से मुझे ये सीखने को मिला कि  कि एक विनम्र व्यक्ति की समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार में विनम्रता नजर आती है तो समाज के सभी लोग उससे मिलना चाहते हैं और किसी दूसरे स्थान पर जाकर भी उनके व्यवहार की चर्चा करते हैं क्योंकि विनम्रता के जरिए हम किसी का भी दिल जीत सकते हैं जैसे इस पाठ में गांधी ने विनम्रता पर चर्चा की गई है। ऐसे ही मेरे गांव में मेरे चाचा जी थे श्री रमेश चंद जो कि आर्मी के जवान थे। जब वे छुट्टी में घर आते तो गांव के कुछ लड़के उन्हें देखकर ये सोचते कि काश हम भी आर्मी में होते। क्योंकि जब भी चाचा जी घर आते तो सारे लड़के अपने सारे काम छोड़कर चाचा जी के पास आ जाते और उनसे बातें करते और चाचा जी को भी उनसे बातें करना अच्छा लगता था।

 एक दिन कुछ लड़के इनके पास आए और बोले हमें भी आपके जैसे बनना है। चाचा जी ने बिना किसी को पूछे उनकी तैयारी शुरू करा दी थी। वे सभी भी खुश होकर तैयारी शुरू करने लगे। जब उनके माता-पिता को पता चला तो उन्होंने चाचा जी के साथ जाकर लड़ने लगे लेकिन चाचा जी मुस्कुराते रहे और उन्होंने कुछ भी नहीं बोला। जहां पर वे तैयारी करते थे वह किसी और का खेत था। खेत वालों ने वहां पर तैयारी करने से मना कर दिया और फिर वे सब परेशान हो गए लेकिन चाचा जी ने फिर भी हार नहीं मानी। उधर पास में ही एक जंगल था। चाचा जी ने कुछ जगह को साफ किया और वहां पर तैयारी करने लगे और उन लड़कों के माता-पिता ने चाचा जी से बात करना भी कर दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वे सुबह शाम मेहनत करते रहे और फिर कुछ महीनों बाद चाचा जी की मेहनत रंग लाई और 12 में से 7 बच्चे सिलेक्ट हो गए जिससे उनके माता-पिता को बहुत खुशी हुई और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने अपनी गलती की माफी मांगी और उनका धन्यवाद किया। चाचा जी मुस्कुराते हुए बोले कि मैंने तो सिर्फ कोशिश की, मेहनत तो बच्चों ने की है। आज भी उन्हें कोई नहीं भूल पाया। उन्होंने अपनी विनम्रता से पूरे गांव में अपनी एक अलग पहचान बनाई क्योंकि उन्होंने ये सब निस्वार्थ भाव से किया था। ये उनकी विनम्रता थी।
ललिता पाल
अध्यापक
आर्थर फुट अकादमी

विनम्रता हमारे जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक मनुष्य में यह विद्यमान होना चाहिए। जब हम अपने विद्यार्थी जीवन में होते हैं, हमारे अध्यापक जब हमें अच्छी शिक्षा प्रदान करते हैं, यह हमारे अध्यापकों का एक विनम्र भाव होता है जो हम सीख पाते हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए अग्रसर रहते हैं। विनम्रता के एक अच्छे व्यवहार के कारण ही हम सदैव उन्हें याद करते हैं। विनम्रता एकमात्र मनुष्य का अमूल्य रत्न है जो हमें अच्छे संस्कारों, प्रतिष्ठा, और अच्छे आचरण से संजोए रखता है। यदि हमारे अंदर विनम्र भाव की छवि है, तभी हम विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा कर सकते हैं, चाहे हमारा कितना भी बड़ा शत्रु क्यों न हो। यदि हमारे अंदर विनम्रता विद्यमान है, उसे भी हम वश में कर सकते हैं तथा उसे भी हम विनम्रता के गुण से अवगत करा सकते हैं। सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट जगत में 16 साल की उम्र में कदम रखा था। उस समय भी उनके अंदर विनम्रता विद्यमान थी और आज भी उन्होंने उसे विनम्रता को संजोया। उन्हें एक बार एक गलत निर्णय से अंपायरों द्वारा आउट दिया गया, तब भी वे एक विनम्र भाव से मैदान से चले गए। इसी कारण उन्होंने क्रिकेट जगत में सभी को आकर्षित किया। उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाई तथा हमारे भारत देश का नाम गर्व से ऊंचा किया। विनम्रता के कारण ही दूसरे देश के खिलाड़ी भी उनसे अत्यधिक प्रभावित होते हैं। सभी मनुष्य के अंदर विनम्रता का अमूल्य गुण विद्यमान होना चाहिए। यदि मनुष्य चाहता है कि मेरे अंदर भी विनम्रता होनी चाहिए, उन्हें एक छोटा सा कार्य करके अपने अंदर विद्यमान अहंकार को त्याग कर विनम्रता का भाव अपनाकर अपने से छोटे-बड़े सभी का सम्मान करके तथा सभी से अच्छे से बात करके और उनकी बातें सुनकर एक अच्छी विचारधारा से जोड़कर हम भी उन्हें विनम्रता के पद पर ले जा सकते हैं। 

जैसे कि विनम्रता पाठ के माध्यम से हमें बताया गया, लेखक का बेटा देवांग और गांधीजी, सचिन तेंदुलकर, कपिल देव, जिनकी कप्तानी में भारत ने प्रथम बार 1983 में विश्व कप जीता, और यह पूरे देश के लिए गौरव की बात थी। ऐसे ही हमारे सर संदीप दत्त हैं। जब मैं पहली बार स्टूडेंट क्लास ली थी और मेरी समझ में इतना कुछ नहीं आया, और जो हमारे आर्थर फुट अकादमी के मालिक हैं, असद खान सर ने मुझसे पूछा क्लास के बारे में जो मेरी समस्या थी, मैंने उनको बताई। फिर सर ने मेरी बात कराई संदीप दत्त सर से। मैं उनसे ही उनकी शिकायत कर रही थी, जो सर हमें पढ़ाते हैं संडे क्लास में। मेरी समझ में इतना कुछ नहीं आता। यह उनकी विनम्रता थी कि मैंने उनकी शिकायत उनसे ही की, क्योंकि मुझे पता ही नहीं था कि यह वही सर हैं जो हमें संडे क्लास में पढ़ाते हैं। 

3 नवंबर 2024 को जब मैं खान सर के फार्म हाउस पर मिली, जो हमारे स्कूल आर्थर फूड अकादमी के लिए उपहार लेकर आए थे, उन्होंने मुझे महसूस भी नहीं होने दिया कि मैं उनकी शिकायत उनसे ही की थी। यह उनकी बहुत बड़ी विनम्रता है। फिर उन्होंने 5-12-2024 को हमारी ऑनलाइन क्लास ली। क्लास में जो मेरी समस्या थी, वह संदीप दत्त सर द्वारा हल हुई। मीनाक्षी मैम और मनीषा मैम हमारे साथ थीं और मुझे बहुत अच्छा लगा जब मैं विनम्रता के बारे में ऑनलाइन पढ़ा। यह मेरी जिंदगी का एक यादगार पल रहा। हमारे जीवन में विनम्रता का होना बहुत महत्वपूर्ण है।
सुश्री रीना
प्रिंसिपल
आर्थर फुट अकादमी

विनम्रता मनुष्य के जीवन का आभूषण है। इसके माध्यम से हमारा व्यक्तित्व खुबसूरत बनता है। क्योंकि विनम्रता के कारण ही हम एक-दूसरे से जुड़ पाते हैं। विनम्रता ना केवल हमारे जीवन में निखार लाती है बल्कि कई बार हमारी सफलता का कारण भी बनती है। कई लोगों का मानना है कि विनम्र होने का मतलब आत्मविश्वास की कमी होना है। लेकिन यह इसके विपरीत है। विनम्रता का मतलब है कि चाहे हम कितने भी महान व्यक्ति बन जाएं या जीवन में कितनी भी उन्नति हासिल कर लें, हमें कभी इस बात का घमंड नहीं होना चाहिए और खुद को सर्वोत्तम नहीं समझना चाहिए। जैसे पाठ विनम्रता में गांधी जी, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, और महान खिलाड़ी कपिल देव जी, ये सभी एक महान व्यक्ति के साथ अच्छे इंसान भी थे। मैंने महसूस किया है जब मैं अपने भाई के साथ एक हॉस्पिटल में गई थी, तो वहाँ एक व्यक्ति को लाया गया जिसके सिर और शरीर पर चोट लगी थी। वह दर्द से चीख रहा था। उसका जल्दी से जल्दी इलाज होना था। तो उसके दोस्त ने हॉस्पिटल के स्टाफ को बोला कि इसे अडमिट करें और इनका इलाज शुरू कर दीजिए। उसने बोला कि मैं पैसे कुछ देर के बाद में जमा कर दूंगा, लेकिन हॉस्पिटल के स्टाफ ने मना कर दिया। तभी वहाँ पर डॉक्टर आए और स्टाफ से बोले कि जो भी इनके इलाज के पैसे में दूंगा, आप इलाज शुरू करें। जब उनका इलाज हो गया, तो उन्होंने डॉक्टर जी को पैसे देने के लिए गए। तो डॉक्टर जी ने पैसे लेने से मना कर दिया। यह देखने के बाद मुझे काफी अच्छा लगा। इसलिए हम सब में विनम्रता होनी चाहिए, चाहे हम जीवन में कितनी भी उन्नति हासिल कर लें। हम में बिल्कुल भी घमंड नहीं होना चाहिए।
स्वाति
अध्यापक
आर्थर फुट अकादमी


Humility is the ornament of a person's personality. Through this our personality becomes beautiful, because only by being humble can we earn eligibility. By being humble, we learn to accept, and due to humility, we are able to connect with others. When we are in our student life, when our teachers teach us and when they ask us or talk to us in a humble manner. It is their good nature when we answer their questions. And eliminate the hesitation present in us.
 
If we want every person to respect us, talk to us well, and understand our thoughts, it becomes our responsibility. That we should also talk to them in a humble manner. When I was a student, I used to create a lot of ruckus in the class. The attention of every teacher was attracted towards me. And they used to talk to me in a humble manner. And used to explain to me.

 It was because of my humble nature and the nature of creating a ruckus that I was able to attract the attention of my teachers. If someone wants that, he also has to develop humility within himself. By making a small change in one's work style and inculcating the feeling of humanity in oneself, a sense of humility can also be brought about in his life.
Devanand 
Teacher
Arthur Foot Academy 

Thursday, March 18, 2021

शिक्षा का महत्व - जफ्फर खां

Courtesy: surejob.in
शिक्षा ही एकमात्र मूल्यवान संपत्ति है जो मनुष्य प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा शिक्षा एकमात्र आधार है जिस पर मानव जाति का भविष्य निर्भर करता है। संक्षेप में शिक्षा का अर्थ ज्ञान प्राप्त करना है। एक अच्छी शिक्षा अपने बच्चे के लिए हर माता-पिता का एक सपना है क्योंकि शिक्षा एक अच्छे जीवन का नेतृत्व करने के लिए एक प्रलाप है। चाहे कोई भी राष्ट्र, धर्म, जातीयता या संस्कृति किसी भी व्यक्ति के पास है । शिक्षा दोनों वित्तीय के लिए महत्वपूर्ण है साथ ही व्यक्तिगत समृद्धि। शिक्षा आपको मानव जाति द्वारा बनाई गई किसी भी अदृश्य बाधाओं या पूर्वाग्रहों से परे दुनिया को देखने और समझने में मदद करती है। शिक्षा एक राष्ट्र में प्रत्येक नागरिक का एक मौलिक अधिकार है शिक्षित नागरिक के पास न केवल बेहतर जीवन और अवसर होंगे, बल्कि वह निश्चित रूप से राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।हमारा पहला शिक्षक हमारे माता-पिता हैं वे हमें सिखाते हैं कि कैसे हमारी मातृभाषा बोलें और हमारे चारों ओर की चीजों की पहचान करें। शिक्षा हमें नियमों और विनियमों को जानने में मदद करती है और हमारे देश के जिम्मेदार नागरिक बनाती है। हर कोई जानता है कि शिक्षा हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 
         
शिक्षा के साथ हम बहुत सी चीज़ें कर सकते हैं आजकल हर चीज के लिए शिक्षा मूलभूत आवश्यकता है जिसे हम करना चाहते हैं अगर हमें काम करने की ज़रूरत है, तो हमारे नियोक्ता हमारी शिक्षा के बारे में पूछेंगे। जब शादी हो रही है, दुल्हन या दुल्हन के परिवार से हमारी शैक्षिक योग्यता भी पूछेगा। जीवन में सफल होने और पैसे कमाने के लिए हमें शिक्षा की आवश्यकता है शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमें समृद्ध बनने में मदद मिलती है। यह हमें सिखाता है कि हमारे कौशल को पहचानने और उपयोग कैसे किया जाए और उन्हें नौकरी या व्यापार के लिए उपयोग करना चाहिए। ये कौशल समाज, हमारे देश और पूरे विश्व के सुधार के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। शिक्षा एक ऐसा सूरज है जो अपना प्रकाश मनुष्य पर डालता है। और इस से प्रवर्तित किरणें न केवल परिवार, समाज, देश बल्कि सारी दुनियाँ को चमकती है। शिक्षा मनुष्य के अंदर एक ऐसा इत्र है जो अपनी खुशबु से समाज को सुगन्धित करती रहती है।  शिक्षा हमें जीवन जीने की उच्चतम शैली सिखलाती है। यह मनुष्य में अच्छे चरित्र का निर्माण करती है।

जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Monday, February 15, 2021

समय का महत्व - जफ्फर खां

Courtesy: hindikiduniya.com
समय का हमारे जीवन में अति महत्वपूर्ण स्थान है । समय सभी वस्तुओं से यहां तक कि धन से भी अधिक शक्तिशाली और अमूल्य वस्तु है यदि एक बार ये हमारे हाथ से निकल गया तो फिर यह वापस लौटकर नहीं आता है । व्यक्ति बलवान नही होता बल्कि समय बलवान होता है। यह बात भी सत्य है कि जो व्यक्ति समय की अहमियत नहीं समझता, समय भी उस व्यक्ति की अहमियत को नहीं समझता। एक बार ये कीमती समय हमारे हाथ से चला गया तो यह हमेशा के लिए चला जाता है फिर कभी वापस लौटकर नहीं आता क्योंकि यह समय हमेशा आगे की ओर चलता है, पीछे की दिशा में नहीं। हमारे दैनिक कार्य जैसे स्कूल कार्य ,जागने का समय ,व्यायाम, भोजन करना आदि योजना अनुसार और समय अनुसार होना चाहिए हमें कठिन परिश्रम करने का आनंद लेना चाहिए कभी अपनी अच्छी आदतों को बाद में करने के लिए टालना नहीं चाहिए। 

हमें समय के महत्व को समझना चाहिए और इसका प्रयोग रचनात्मक ढंग से करना चाहिए । जो घड़ी हम हाथ में बांध कर चलते हैं वह हमसे कहती है कि मेरे साथ चलो, भले ही आगे चलो पर मेरे से पीछे हो कर नहीं चलना क्योंकि साथ चलने से सदा जीवन सुखी रहता है। मानव जीवन नदी की धारा के समान होता है। जिस तरह से नदी की धारा ऊँची - नीची भूमि को पार करती हुई लगातार आगे बढती है उसी प्रकार जीवन की धारा सुख-दुःख रूपी जीवन के अनेक संघर्षों को सहते-भोगते आगे बढती रहती है। जीवन का उद्देश्य लगातार आगे बढना होता है इसी में सुख है, आनंद है।  जिस किसी ने भी समय के महत्व को पहचाना है और उसका सदुपयोग किया है, वह उन्नति की सीढियों पर चढ़ता चला गया है। लेकिन जिसने इसका तिरस्कार किया है समय ने उसे बर्बाद कर दिया है। समय का सदुपयोग ही विकास और सफलता की कुंजी है।

जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Wednesday, January 20, 2021

भारत की सामाजिक समस्या - Kusum Dangi

मानव  समाज  ना  तो कभी सामाजिक समस्याओं से पूर्ण मुक्त रहा है और ना ही रहने की संभावना निकट नजर आती हैं। परंतु इतना तो निश्चित है कि आधुनिक समय में विद्यमान संचार  की क्रांति तथा शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता के फल स्वरुप मनुष्य इन समस्याओं के प्रति संवेदनशील एवं सजग  हो गया हैं।  

सामाजिक समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने में जनसंचार के माध्यम टेलीविजन, अखबार एवं रेड़ियो  ने  महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन किया हैं।  जो समाज इतना अधिक परिवर्तनशील होगा उसमें उतनी ही अधिक समस्या आएगी समाज का ताना-बाना इतना जटिल हैं कि इसकी एक इकाई में होने वाला परिवर्तन अन्य इकाइयों  को प्रभावित करता हैं। 

भारतीय समाज की प्रमुख समस्याओं में निर्धनता, बेरोजगारी, असमानता, अशिक्षा, गरीबी, आतंकवाद ,दहेज प्रथा, बाल विवाह आदि  हैं।  इन समस्याओं के निराकरण के लिए यह अत्यावश्यक है कि इनकी प्रकृति को समझा जाए एवं स्वरूपों  की व्याख्या की जाए इन समस्याओं के निराकरण के लिए एक नई सोच प्रस्तुत करना अति आवश्यक हैं।

Kusum Dangi
The Fabindia School 
kdi@fabindiaschools.in
Courtesy Source:  https://hi.m.wikipedia.org/

Tuesday, December 22, 2020

कलम की ताकत - राजेश्वरी राठौड

Courtesy: ru.depositphotos.com
"कलम तलवार की तुलना में शक्तिशाली है" का अर्थ है कि कलम बेहद शक्तिशाली है आकार में छोटी होने के बावजूद यह उन चीजों को पूरा करने की शक्ति रखती हैं जो एक शक्तिशाली तेज धार वाली तलवार पूरा नहीं कर सकती कलम तलवार से भी अधिक शक्तिशाली है इसका मतलब की लेखन का कार्य हिंसा के कार्य की बजाए लोगों पर अधिक प्रभाव डाल सकती हैं। 

यह कलम अंधकार को मिटाकर प्रकाश उजागर करती है। कलम ऐसे चमत्कार पैदा कर रही है जैसे की लिखित जानकारी ज्ञान के रूप में फैल जाती हैं जो लोगों के जीवन काल के लिए संरक्षित हैं। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि लेखकों ने अपने लेखन के माध्यम से दुनिया को बदल दिया है। महात्मा गांधी, जॉन कीट्स, स्वामी विवेकानंद और कई अन्य लोगों ने अपने लेखन के माध्यम से समाज व देश में सुधार किये हैं। लेखक अपने उपदेश और ज्ञान के माध्यम से विभिन्न सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ते हैं और समाज में परिवर्तन लाते हैं। यह कलम है जो पुस्तक को शक्तिशाली बनाती है ऐसी पराक्रमी कलम है।

लेखन लोगों को सामाजिक या राष्ट्रीय बुराई के खिलाफ खड़े होने के लिए एकजुट कर सकता है। कलम की शक्ति को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है की परीक्षा आदि के दौरान उत्तर पुस्तिका में लिखा गया एक गलत उत्तर हम पर भारी पड़ सकता है। लेखक आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान और जानकारी को कलम बंद कर सके। कलम यह बताती है कि शब्दों में बल से अधिक प्रभावी ढंग से समस्याओं को हल करने की क्षमता है। कलम का जीवन में बहुत महत्व है।

राजेश्वरी राठौड
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Wednesday, October 28, 2020

इंटरनेट आज की जरूरत - सुरेश सिंह नेगी

आधुनिक समय की सबसे उपयोगी तकनीक जो न केवल हमारे दैनिक जीवन में बल्कि पेशेवर जीवन में भी हमारी मदद करती है। शैक्षिक उद्देश्यों के लिए, इसका उपयोग व्यापक रूप से जानकारी इकट्ठा करने और विभिन्न विषयों के ज्ञान को जोड़ने या अनुसंधान करने के लिए किया जाता है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस आधुनिक युग में हर कोई अपने प्रश्नों, समस्याओं या संदेह के लिए गूगल  को पसंद कर  रहा है। क्योंकि यह  कुछ ही समय हमें  में सूचना  प्रदान कर देता  हैं। इसमें ज्ञान का अपार भंडार  है जिसे कभी भी खोजा जा सकता है। 

आज इंटरनेट शिक्षा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।जिस  प्रकार से सभी विद्यालय आभासी कक्षाओं का संचालन कर रहें हैं वो सब इंटरनेट की वजह से ही संभव हो पा रहा  है। शिक्षक गूगल कक्षा में  अपनी शिक्षण सामग्री भेज करके इसे एक शिक्षण उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। शिक्षक छात्रों का ध्यान खींचने के लिए एनीमेशन, पावरपॉइंट स्लाइड, वीडियो , और थिंग लिंक का  उपयोग कर रहे हैं। आप  शिक्षा संबंधी सामग्री इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं।  यहां तक कि परिणाम, एडमिट कार्ड, विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन फॉर्म इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध हैं। अब तो सभी विषयों  किताबें भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 

यह छात्रों को सीखने की प्रक्रिया में मदद करता है क्योंकि यह ज्ञान को सरल बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, आप इंटरनेट से किसी भी प्रकार की जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं।

आज इंटरनेट लोगों के लिए लाभदायक साबित हो रहा  है, जिसका उपयोग पूरी दुनिया में किया जा रहा  है। इसलिए, इसका उपयोग अच्छे उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। यदि यह बच्चों के विकास स्तर को पूरा करने वाले उपयुक्त तरीकों से उपयोग किया जाता है, तो वे इंटरनेट से बहुत सारी चीजें  सीख सकते हैं।

सुरेश सिंह नेगी, The Fabindia School <sni@fabindiaschools.in>


Wednesday, September 2, 2020

परिवर्तन - Krishan Gopal

परिवर्तन प्रकृति का महत्वपूर्ण अंग है। जब प्रकृति में परिवर्तन होता है तो कोई भी प्राणी इस परिवर्तन से अछूता
नहीं रह जाता। यह आवश्यक हो जाता है कि वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करें तथा उसके अनुकूल बनाने का प्रयास करें। प्रकृति को अपने अनुसार मोड़ने की भूल कदापि न करें। जब प्रकृति के साथ छेड़छाड़ होने लगती है तब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है।
मनुष्य भी इस परिवर्तन का एक अंग है अतः हर क्षेत्र में समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं। न  केवल प्रकृति  वरन अन्य कई क्षेत्रों में भी परिवर्तन होते हैं। बात करें तो रहन- सहन, खानपान आदि से लगाकर शिक्षा तक परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है। इन होने वाले परिवर्तनों के लिए हमें तैयार रहना चाहिए तथा चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता होनी चाहिए। 
प्राचीन युग से लगाकर आज तक शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन होते रहे हैं। गुरुकुल में आचार्य बिना पाठ्य-पुस्तकों के अध्ययन करवाते थे। छात्र स्वयं भी अपनी योग्यता के अनुसार प्रदर्शन करते थे। धीरे धीरे परिवर्तन होते गए। परिवर्तनों का कारण कुछ भी हो सकता है यथा- विदेशी आक्रमण, समय की मांग या फिर विदेशियों की गुलामी। 

शिक्षा महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। जिस प्रकार जैसी आवश्यकता लगी उसके अनुसार समय-समय पर परिवर्तन होते गए। कहते हैं- ‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है।’ अर्थात जैसी आवश्यकता महसूस हुई, नई रीति या प्रणाली अपनाई गई। शिक्षा प्रदान करने के तरीकों में भी अंतर आया है। आज पूरा विश्वास कोरोना महामारी से  ग्रसित है। पाँच महीनों से भी अधिक का समय हो गया है विद्यालय खुल नहीं पाए। संक्रमण का खतरा देखते हुए सरकार द्वारा कोई निर्देश इस संबंध में नहीं मिल रहे हैं। किंतु इस चुनौती को स्वीकार किया और हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रह गए। 

एक बार पाँच महीने पहले की स्थिति पर गौर करते हैं। पढ़ाने में टेक्नोलॉजी का बहुत कम मात्रा में प्रयोग हो रहा था। न ऐसा सोचा था कि टेक्नोलॉजी का उपयोग इस तरह से, इतने बड़े पैमाने पर करना पड़ेगा। किंतु समय के साथ सब कुछ बदला शिक्षक, बच्चे और अभिभावक सभी पूर्ण मनोयोग से इस कार्य में जुट गए। शिक्षा पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो गई। ऑनलाइन क्लास से बच्चों के घर तक पहुँच गए है। 

जहाँ किसी तरह की खुद में कमी देखी, उसे दूर करने का प्रयास किया। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जो वर्षों से नहीं सीखा था, वह कुछ महीनों में सीख गए और उसका उचित उपयोग भी करने लग गए। नए काम में कई प्रकार की चुनौतियाँ सामने में आती है लेकिन शिक्षक-छात्र और अभिभावकों ने मिलकर इन चुनौतियों को दूर किया। शिक्षा के क्षेत्र में इसे बहुत बड़ा बदलाव या क्रांति कहा जा सकता है। हो सकता है कुछ चुनौतियाँ अभी भी रही हो किंतु यह हर्ष का विषय है कि इस बदलाव में सभी का योगदान रहा। इस बदलाव को स्वीकार भी करते जा रहे है। 

Krishan Gopal 
The Fabindia School
kde@fabindiaschools.in

Sunday, August 30, 2020

टेक्नोलॉजी - Usman Gani

टेक्नोलॉजी से तात्पर्य उन सभी मेथड, सिस्टम अथवा डिवाइसेस से है, जिसका इस्तेमाल विज्ञान की दुनिया में किसी खोज के प्रयोग के लिए किया जाता है। हालांकि, विज्ञान की दुनिया में इसका उपयोग करने के लिए उचित कौशल, ज्ञान और सामर्थ्य की जरूरत होती है।

टेक्नोलॉजी का महत्व
आज टेक्नोलॉजी का हर किसी के जीवन में खास महत्व है क्योंकि यह न सिर्फ व्यक्ति के विकास में मद्द करती है, बल्कि देश-दुनिया के विकास में भी अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाती है। वहीं अगर किसी भी देश की विकास की दर धीमी है तो इसका मतलब साफ है कि उस देश की टेक्नोलॉजी काफी पिछड़ी हुई है। टेक्नोल़ॉजी की मद्द से पिछड़ी हुई औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं की सामाजिक व्यवस्था को भी सुधार लाने में मद्द मिलती है। आज जिंदगी से संबंधित हर काम टेक्नोलॉजी से जुड़ गया है, जिससे जीवन स्तर में न सिर्फ सुधार हुआ है, बल्कि विकास को एक नई दिशा मिली है।

विज्ञान और टेक्नोलॉजी
विज्ञान और टेक्नोलॉजी एक-दूसरे के पूरक है, अथवा उन्नत तकनीकी का इस्तेमाल कर ही आज विज्ञान नई-नई खोजें कर रहा है और विकास की दर को बढ़ाने में मद्द कर रहा है। वहीं आज का युग विज्ञान और तकनीकी का युग है, जिसमें मानव जीवन पूरी तरह विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो चुका है। आज टेक्नोलॉजी और विज्ञान की मद्द से ही इंसान समुद्र की गहराइयों से लेकर आसमान की ऊंचाई तक को माप सकता है। यही नहीं विज्ञान और तकनीकी ने इंसान की पहुंच अंतरिक्ष तक बना दी है।

निष्कर्ष
टेक्नोलॉजी ने आज मानव जीवन को जितना आसान बना दिया और देश -दुनिया की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना पूर्ण रुप से सहयोग दिया है तो वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी के इस बढ़ते इस्तेमाल ने मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है, इसलिए हम सभी को जरूरत के वक्त ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

Usman Gani
The Fabindia School
ugi@fabindiaschools.in

Wednesday, August 5, 2020

शिक्षा और कोविद -१९ - Suresh Negi

कोविद -१९ महामारी के कारण, देश भर की राज्य सरकारों ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अस्थायी
रूप से बंद कर दिया। मौजूदा स्थिति के आधार पर, यह नही कहा जा सकता है कि यें अब कब खुलेंगी। जब स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को फिर से खोला जाएगा तब निस्संदेह, यह शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समय होगा, क्योंकि इस अवधि के दौरान कई स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित की जायेंगी।  

तकनीकी रूप से अब पूरा भारत दो भागों में विभाजित हो चुका है, जँहा एक ओर  तकनीक-गरीबों से वंचित और तकनीक के जानकारों को  अलग कर रहा है, वंही दूसरी ओर लाखों बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं की चुनौतियों का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कोविद -१९ महामारी, जिसने लोगों को अपने घरों में और स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को आभासी कक्षाएं लेने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसके लिए छात्र के पास एक कंप्यूटर या कम से कम एक स्मार्टफोन, एक उचित इंटरनेट कनेक्शन और बिजली की आपूर्ति का होना अति आवश्यक है।शिक्षा का क्षेत्र, जो कभी वास्तविक स्तर पर नहीं पहुंचा था, अब छात्रों, और उनके शिक्षकों के रूप में गांवों, शहरों और कस्बों में समय की माँगों का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

उदाहरण के लिए, गाँवो में जंहा सिगनल पूर्ण रूप से न होने का सामना करना पड़ता है। वंही इस मौसम में बिजली की आपूर्ति का सामना भी करना पड़ रहा है। कई लोंगो के पास एक फोन है, लेकिन आमतौर पर बिजली नहीं है, इसलिए प्रत्येक दिन ऑनलाइन व्याख्यान लेना मुश्किल है।

कुछ लोग जिनके दो बच्चे जो एक ही स्कूल में पढ़ते ही है, उनमे से एक बच्चा ऑनलाइन कक्षाओं में भाग नही ले पाता है, क्योंकि वे दोनों एक मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं। अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ, कि कोविद -१९ का यह दौर जल्दी से जल्दी समाप्त हो जिससे कि जो भी लोग किसी कारणवश शिक्षा से दूर हो गएँ हैं,वो दुबारे से इसका लाभ ले सकें।

Suresh Negi
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Monday, May 25, 2020

सीखने को रोक नहीं सकते - सुरेश सिंह नेगी

कोविड -१९ के इस दौर में जंहा लोग घर के अंदर रहने को मजबूर हैं, वंही दूसरी ओर कुछ लोग ऐंसे भी हैं जो
घर पर ही बैठकर ऑनलाइन काम कर रहे हैं।  जो  इंसान  पहले  फोन का उपयोग बहुत कम करता था।  वह भी अब इसका उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने लगा है,  और करे भी क्यों न काम ऑनलाइन जो करना पड़ता है, या फिर समय व्यतीत करने  के लिए कुछ न कुछ तो करना ही है।

जंहा विद्यालय विद्यार्थीयों   को   ऑनलाइन पढाने  का भरपूर प्रयास कर  रहें है।   वंही   माता -पिता भी अपने बच्चों का पूरा साथ दे रहें है।  उनमें  से कुछ माता -पिता तो ऐंसे  भी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रहने  के लिए  बाजार  के बंद  होने के बावजूद  भी स्मार्ट फोन  खरीदा है।  इस समय की मार सबसे ज्यादा विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावक  पर पडी है ।  अब तो ज्यादातर शिक्षकों का  फ़ोन  भी रुक -रुक चलने   लगा है और वह दिन भर इतना गर्म रहता है, कि लगता है की कभी भी फट सकता है।

हालांकि इसके विपरीत अच्छी बात यह है कि हमें तकनीकी  के क्षेत्र  में काफी कुछ नया सीखने को मिला  है। जिसमे से गूगल कक्षा में अपने फोन की स्क्रीन कैसे दूसरों से शेयर करतें हैं। ऑनलाइन पढ़ाई तो हमने  बहुत देखी थी पर ऑनलाइन कैंसे पढ़ाया जाता है यह भी हमने इसी समय सीखा है।

अंत में मै उन विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में और कम  संसाधनों के चलते  अपने  बच्चों  की पढ़ाई के प्रति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School 

Sunday, November 3, 2019

कक्षा में युद्ध एवम शांति का वातावरण

शिक्षक एक कुम्हार की भाँति होती है जो विद्यार्थी रुपी घड़े को बनाने के लिए बाहरी हाथ से हल्की सी चोट भी देता है , लेकिन घड़े के अंदर यानी हमारी आत्मा को भी सहारा देता है ।
एक बार एक कक्षा में सभी विद्यार्थी जब अध्यन कर रहे थे । तभी अगले विषय का समय आरम्भ होने पर शिक्षक कक्षा में से
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चले गए तथा सभी विद्यार्थी एक दूसरे से बात करने में लीन हो गए यह वार्ता कब युद्व में परिवर्तित हो गई इस बात का पता विद्यार्थियों को नहीं लगा । सब एक दूसरे से लगातार बहस करते जा रहे थे । बहस ये थी कि हर कार्य में बालिकाएं ज्यादा तेज हैं या बालक, धीरे धीरे यह झगड़ा युद्ध मे परिवर्तित हो गया । उनको पता ही न चला कि अध्यापिका कब कक्षा में प्रवेश कर गई वह शांति के साथ उनके झगड़े को देख रही थी और समझने का प्रयास कर रही थी कि आखिर क्या हो रहा है ? अचानक से बच्चों की नज़र अध्यापिका पर पड़ी और सब धीरे धीरे अपनी जगह पर बैठ गए । उन्होंने शांत भाव से बच्चों से पूछा कि ,’क्या हुआ और आप सब इतनी तेज तेज़ झगड़ा क्यों कर रहे थे ।‘ सबसे पहले तो बच्चों ने उनसे माफी मांगी और फिर झगड़े का कारण बताया , कारण जान कर अध्यापिका ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी फिर उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि सभी मनुष्य के अंदर अपने कुछ खास गुण होते हैं जिनके चलते वह सभी अपनी पहचान किसी न किसी रूप में अवश्य बनाते हैं , जैसे यहां से शिक्षा प्राप्त कर कोई गायक बनेगा कोई खिलाड़ी तो कोई डॉक्टर बनेगा और कोई कुछ और व्यवसाय चुनेगा जिसमें की वह निपुण होगा । इसलिए कभी भी किसी को नीचा या कम नहीं समझना चाहिए ।अध्यापिका की समझदारी वाली बातें सुनकर सभी विद्यार्थि शर्मिंदा भी हुए और उन्होंने शिक्षिका से अपने व्यवहार की एक बार फिर से माफी मांगी । 
इस कहानी की महत्वपूर्ण विशेषता यह है की प्रत्येक शिक्षक में धैर्यता को होना अत्यंत आवश्यक है । इसी धैर्य की वजह से शिक्षिका ने कक्षा की युद्ध पूर्ण स्थिति को शांति से हल कर दिया । 
एक अच्छा शिक्षक हमारी समस्याओं का समाधान ही नहीं करता , बल्कि उस समस्या से कैसे निबटा जाए यह भी सिखाता है ।
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