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Saturday, May 1, 2021

गलतियों से सीखना - Ayasha Tak

Courtesy: shutterstock.com
गलतियाँ सीखने की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। सीखने में गलतियों के बिना , आपका दिमाग कुछ नहीं सीखेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर गलती करने के बाद हताशा में हार मानने के बजाय , हम गलती को समझने के लिए रचनात्मक रूप में काम करते हैं , तो समस्या को हल करने की रणनीति हमारे साथ बेहतर हैं , अगर हम समाधान को याद करते हैं। 

इसके बावजूद , हमारी शैक्षिक प्रणाली में , गलतियों को अक्सर सीखने के अवसर के रुप में देखा जाता है। तब हम अपने छात्रों को उनकी गलतियों से सीखने में मदद के लिए क्या कर  सकते हैं ? सबसे पहले , आइए देखें कि कैसे गलतियाँ सीखने की प्रक्रिया को उत्तेजित कर सकती हैं। 

यदि छात्रों को अपनी गलतियों से सीखने की अनुमति दी जाती है , तो उन्हें गलतियाँ करने की अनुमति दी जानी चाहिए।  साथ ही , एक गलती के अनुकूल सीखने का माहौल बनाने में मदद करें , जहाँ छात्र अपनी गलतियों पर शर्म महसूस न करें। अपने छात्रों को हार न मानने और सही समाधान पर काम करना जारी रखने के लिए प्रेरित करें। इस तरह , सीखने का प्रतिफल फोकस बना रहता है और गलतियों से निपटने का एक रचनात्मक तरीका इस का एक महत्त्वपूर्ण आधार है। 
 Ayasha Tak
The Fabindia School 
atk@fabindiaschools.in


Monday, February 15, 2021

समय का महत्व - जफ्फर खां

Courtesy: hindikiduniya.com
समय का हमारे जीवन में अति महत्वपूर्ण स्थान है । समय सभी वस्तुओं से यहां तक कि धन से भी अधिक शक्तिशाली और अमूल्य वस्तु है यदि एक बार ये हमारे हाथ से निकल गया तो फिर यह वापस लौटकर नहीं आता है । व्यक्ति बलवान नही होता बल्कि समय बलवान होता है। यह बात भी सत्य है कि जो व्यक्ति समय की अहमियत नहीं समझता, समय भी उस व्यक्ति की अहमियत को नहीं समझता। एक बार ये कीमती समय हमारे हाथ से चला गया तो यह हमेशा के लिए चला जाता है फिर कभी वापस लौटकर नहीं आता क्योंकि यह समय हमेशा आगे की ओर चलता है, पीछे की दिशा में नहीं। हमारे दैनिक कार्य जैसे स्कूल कार्य ,जागने का समय ,व्यायाम, भोजन करना आदि योजना अनुसार और समय अनुसार होना चाहिए हमें कठिन परिश्रम करने का आनंद लेना चाहिए कभी अपनी अच्छी आदतों को बाद में करने के लिए टालना नहीं चाहिए। 

हमें समय के महत्व को समझना चाहिए और इसका प्रयोग रचनात्मक ढंग से करना चाहिए । जो घड़ी हम हाथ में बांध कर चलते हैं वह हमसे कहती है कि मेरे साथ चलो, भले ही आगे चलो पर मेरे से पीछे हो कर नहीं चलना क्योंकि साथ चलने से सदा जीवन सुखी रहता है। मानव जीवन नदी की धारा के समान होता है। जिस तरह से नदी की धारा ऊँची - नीची भूमि को पार करती हुई लगातार आगे बढती है उसी प्रकार जीवन की धारा सुख-दुःख रूपी जीवन के अनेक संघर्षों को सहते-भोगते आगे बढती रहती है। जीवन का उद्देश्य लगातार आगे बढना होता है इसी में सुख है, आनंद है।  जिस किसी ने भी समय के महत्व को पहचाना है और उसका सदुपयोग किया है, वह उन्नति की सीढियों पर चढ़ता चला गया है। लेकिन जिसने इसका तिरस्कार किया है समय ने उसे बर्बाद कर दिया है। समय का सदुपयोग ही विकास और सफलता की कुंजी है।

जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Wednesday, June 24, 2020

आजादी और शांति: कुसुम डाँगी


आजादी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लोगों  को बाहरी प्रतिबंधों के बिना बोलने, करने और अपने सुख को प्राप्त करने का अवसर मिलता हैं। आजादी हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उससे हमें अपने नए विचार, रचनात्मक कला, उत्पादन और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने का मौका मिलता हैं। इससें व्यक्ति अपनी  इच्छानुसार कोई भी कार्य कर सकता हैं, जिससें वो अपना मन लगाकर करेगा क्योंकि अगर किसी पर भी कोई कार्य थोंपा जाएगा तो आगे वाला उसे बोझ समझ कर करेगा जिससें वह कार्य सफल नहीं हो पाएगा।

शांति  का अर्थ है, मन की स्थिरता। जब तक मन की चंचलता है, तब तक मन अशांत रहता हैं।
हमें एक-दूसरे के साथ अच्छा व्यवहार रखना चाहिए तभी शांति बनी रहेगी।

आजादी और शांति एक-दूसरे से संबंधित है। अगर हमें आजादी मिलेगी, तभी हम अपने मन से कार्य कर पाएँगे और जब मन से कार्य होगा तो व्यक्ति खुश रहेगा और मन खुश रहेगा तो शांति बनी रहेगी ।

"जब तुम्हारा मन टूटने लगे तब भी यह आशा रखो कि प्रकाश की कोई किरण कही ना कही उदय होगी।"
Kusum Dangi
The Fabindia School, Bali

Tuesday, April 7, 2020

गृहकार्य और ट्युशन: कृष्ण गोपाल

वर्तमान में गृहकार्य देने की परंपरा बदल गयी है।  बालको को गृहकार्य दिया जाना चाहिए ऐसा मेरा मानना है।  लेकिन गृहकार्य रचनात्मक होना चाहिए।  केवल किताबों या अन्य किसी स्थान से उठाकर देने में मानसिक विकास नहीं हो पाता।  जब ऐसा गृहकार्य दिया जाएगा तो बालक भी चतुर है, वह भी कहीं न कहीं से लिख देगा, और वह भी इसलिए कि उसके गुरूजी ने दिया है तो जैसे-तैसे करके पूरा करना है।  अब देखा जाए तो उसने अपने मन से तो कुछ किया ही नहीं, सोचिए इसप्रकार का गृहकार्य बालक को कोई लाभ देगा। 

गृहकार्य ऐसा हो जिसमें बालक का  चिंतन कौशल बढ़े, या उसे अपनी सामग्री एकत्र करने के लिए खोज-बीन करनी पड़े।  गृहकार्य बालक की रुचि के अनुसार भी होना आवश्यक है।  यदि रुचिकर नहीं हुआ तो बालक इधर-उधर से करेगा या नहीं करेगा। बालकों की रुचि को जानना अध्यापकों के लिए आवश्यक है।  तभी तो उसके लिए उचित गृहकार्य की व्यवस्था की जा सकेगी।

आजकल कई स्थानों पर एक प्रवृत्ति देखने में आ रही है कि अभिभावक अपने बालकों को ट्युशन भेजते है।  पढ़ने के लिए अलग गृहकार्य करने के लिए अलग।  यदि गृहकार्य पेचिदा होगा तो बालकों को छोड़ो उनके अभिभावकों को भी समझ में नहीं आएगा।  ऐसे में अभिभावकों के लिए एक ही मार्ग बचता है और वह है ट्युशन । इसलिए गृहकार्य रचनात्मक होना चाहिए।  जहाँ तक बात है ट्युशन की यदि लगे कि वास्तव में बालक पढ़ने में कमजोर है तो ट्युशन भेज सकते है, परन्तु वह भी स्कूल के अध्यापक के पास नहीं किसी और के पास। 
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

Wednesday, April 1, 2020

गृह कार्य और ट्यूशन: उषा पंवार

विद्यार्थियो को गृह कार्य मिलना चाहिए। गृह कार्य करने से बच्चे व्यस्त रहते हैं और उस पाठ का दोहरान भी हो जाता हैं इससे बच्चे की लेखन एवं वाचन क्षमता का विकास होता है। गृह कार्य रचनात्मक, क्रियात्मक होने चाहिए जिसे करने से विद्यार्थी में जीवन कौशल का विकास हो सके, सोचने समझने की क्षमता बढ़े। गृह कार्य से विद्यार्थियों में सीखने की क्षमता का पता लगता है इसके अंतर्गत कक्षा में शिक्षक द्वारा पाठ पढ़ाने के बाद ही विद्यार्थियों को गृह कार्य दिया जाता है गृह कार्य एवं कक्षा कार्य के द्वारा ही मालूम होता है कि विद्यार्थियों को पाठ समझ में आया या नहीं। नहीं तो समझाने के लिए कोई नया तरीका अपनाते हैं।

गृह कार्य करने से विद्यार्थियों की कक्षा में एकाग्रता बढ़ती है। गृह कार्य ऐसा देना चाहिए जिससे बच्चा खुशी-खुशी कर सके। माता-पिता भी अपने बच्चों की पढ़ाई पर नजर रख पाते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में कैसा है और उसको पढ़ाई में कहां ज्यादा परेशानी आ रही है स्कूल में जाकर शिक्षक से पढ़ाई के बारे में बात कर सकते हैं और पढ़ाई करने के तरीके में सुधार करने में सहयोग दे सकते हैं। गृह कार्य पुनरावृति स्मृति को बढ़ाने में मदद करता है कक्षा की अवधि के दौरान शिक्षकों को, छात्रों को पढ़ाने के लिए सीमित समय होता है इसलिए गृह कार्य देकर सीखने का समय बढ़ा देते हैं विद्यार्थियों ने कक्षा में क्या सीखा गृह कार्य के ही जरिए मालूम होता है। विद्यार्थी गृह कार्य को बोझ नहीं समझे बल्कि समय पर पूरा करने की कोशिश करें। कई बच्चे खुद ही इतने समझदार होते हैं कि अपनी पढ़ाई की समय सारणी बनाकर रखते हैं। बच्चों को अगर अभिभावक भी पढ़ाने में मदद करें तो वह ज्यादा बेहतर होगा।

कुछ अभिभावक व बच्चे गृह कार्य के विरुद्ध भी होते हैं वह गृह कार्य को केवल समय बर्बादी मानते हैं।

गृह कार्य कम और रोचक पूर्ण देना चाहिए जिसे बच्चा खुशी-खुशी कर सके। अधिक ग्रह कार्य से बच्चों का बचपन मुरझा रहा है गृह कार्य एक सीमा तक ही सही रहता है जरूरत से ज्यादा गृह कार्य से एक पढ़ाई में रुकावट करता है और कुछ नया नहीं सीख पाता है गृह कार्य पूरा नहीं होने के डर से बच्चे कहीं घूमने नहीं जा सकते रात को आराम की नींद नहीं ले पाते हैं जिससे मानसिक रोग के शिकार हो जाते हैं अधिक गृह कार्य मिलने से बच्चा पूरा नहीं कर पाता है तो परिजन ही पूरा करते हैं। अतः बच्चों को गृह कार्य बच्चों की क्षमता के अनुसार मिलना चाहिए ताकि बच्चे उसे सहजता से एवं रुचि पूर्वक कर सके।

शिक्षक को अपने विषय को रुचि पूर्वक बनाकर पढ़ाना चाहिए ताकि बच्चा आसानी से समझ सके अगर उसको समझ में नहीं आएगा तो अभिभावक को बार बार पूछेगा अभिभावक परेशान होकर बच्चे के ट्यूशन लगा देंगे ट्यूशन में पढ़ाने का तरीका अलग और विद्यालय में अलग होता है तो विद्यार्थी का दिमाग दो भागों में विभाजित हो जाता है इसलिए विद्यालय में ऐसे शिक्षक रखने चाहिए जो अनुभवी एवं प्रशिक्षित हो जो बच्चों की भावनाओं को समझ प्रकरण को रोचक बना कर उन्हें कक्षा में समझाएं और गृह कार्य भी देवे तो उसे छात्र खुशी खुशी सहजता से स्वयं ही कर सके।
Usha Panwar
upr4fab@gmail.com
The Fabindia School Bali.

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