Saturday, October 31, 2026

जहाँ चाह, वहाँ राह — हर बच्चे में छिपी है आगे बढ़ने की संभावना - मंजुला सागर

पुस्तक Educated के “Shield and Buckler” अध्याय को पढ़कर मुझे यह सीख मिली कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने की इच्छा और कुछ कर गुजरने का साहस हो, तो वह अपने लिए रास्ता खोज ही सकता है। “जहाँ चाह, वहाँ राह” केवल एक कहावत नहीं है, बल्कि यह विश्वास दिलाने वाला विचार है कि कठिनाइयाँ हमारी मंजिल का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की चुनौती हैं।

तारा वेस्टओवर के जीवन के अनुभवों से मुझे समझ आया कि हर व्यक्ति अपने संघर्षों से कुछ न कुछ सीखता है। जीवन में कठिन परिस्थितियाँ, असफलताएँ और परेशानियाँ हमें रोकने का प्रयास करती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इसके साथ ही, जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का साथ और प्रोत्साहन भी बहुत महत्त्वपूर्ण होता है, जो हमारी क्षमताओं पर विश्वास करे।

एक शिक्षिका के रूप में मैं इस सीख को अपने कक्षा-कक्ष से जोड़कर देखती हूँ। मेरी कक्षा में भी कुछ बच्चे ऐसे हैं, जिनका पढ़ाई में मन नहीं लगता, जिन्हें पाठ समझने में कठिनाई होती है या जो बार-बार प्रयास करने के बाद भी असफल हो जाते हैं। इस अनुभव से मुझे यह भी महसूस होता है कि हर बच्चा सीख सकता है, बस उसके सीखने का तरीका, गति और परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं। हमें बच्चों की कमियों पर ध्यान देने के बजाय उनकी छोटी-छोटी सफलताओं को पहचानना चाहिए। यदि कोई बच्चा आज एक अक्षर सही लिखना सीखता है या कल की तुलना में एक सवाल अधिक हल कर लेता है, तो यह भी उसकी प्रगति है। एक शिक्षक का प्रोत्साहन बच्चे के मन में वह आशा जगा सकता है, जो उसे कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देती है।

इस अध्याय ने मेरे मन में यह विश्वास और गहरा किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, धैर्य और संघर्ष करने की क्षमता विकसित करना भी है। मैं चाहती हूँ कि मेरी कक्षा का प्रत्येक बच्चा यह विश्वास लेकर आगे बढ़े कि वह अपनी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त कर सकता है।

“जहाँ चाह, वहाँ राह” — इस कहावत को मैं अपने शिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत बनाना चाहती हूँ। यदि बच्चे के मन में सीखने की इच्छा हो और उसे शिक्षक का साथ, मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन मिले, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान बन सकता है। क्योंकि कभी-कभी एक शिक्षक का विश्वास ही बच्चे के जीवन में सफलता की पहली सीढ़ी बन जाता है।

मेरे लिए इसका वास्तविक अर्थ केवल कठिनाइयों को पार करना नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच भी उम्मीद को जीवित रखना है। एक शिक्षक के रूप में मेरा प्रयास होगा कि मैं बच्चों को केवल सफलता की राह न दिखाऊँ, बल्कि उनमें उस राह पर चलने का साहस भी पैदा करूँ। क्योंकि हो सकता है कि जिस बच्चे को आज पूरी कक्षा कमजोर समझ रही हो, वही बच्चा कल अपनी मेहनत से एक नई मिसाल कायम करे।

अंततः, मैं यही मानती हूँ कि हर बच्चे के भीतर एक संभावना छिपी होती है। उसे पहचानने वाली दृष्टि, आगे बढ़ाने वाला मार्गदर्शन और विश्वास जगाने वाला प्रोत्साहन मिल जाए, तो कोई भी कठिनाई उसकी अंतिम मंजिल नहीं बन सकती।

“बच्चों को यह मत बताइए कि वे क्या नहीं कर सकते; उन्हें यह विश्वास दीजिए कि वे प्रयास करके क्या-क्या कर सकते हैं।”

मंजुला सागर
सनबीम ग्रामीण स्कूल

 

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