Thursday, October 22, 2026

जीवन स्वयं एक पाठशाला है - सुनीता त्रिपाठी

तारा की कहानी पढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ कि हर बच्चे के जीवन में कुछ ऐसे अनुभव होते हैं, जो उसकी सोच और भविष्य की दिशा को बदल देते हैं। हम अक्सर बच्चों के व्यवहार को देखते हैं, लेकिन उस व्यवहार के पीछे छिपी परिस्थितियों को समझने की कोशिश नहीं करते।

इस कहानी ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि हर बच्चा केवल विद्यालय में ही नहीं, बल्कि घर के माहौल, रिश्तों और रोज़मर्रा की परिस्थितियों से भी सीखता है। कभी-कभी घर में सीखी गई बातें बच्चे को आगे बढ़ने की ताकत देती हैं, तो कभी वही परिस्थितियाँ उसके सपनों की राह में रुकावट बन जाती हैं।

एक शिक्षिका के रूप में मैं समझती हूँ कि हमें बच्चों को केवल उनके अंकों के आधार पर नहीं पहचानना चाहिए, बल्कि उनकी परिस्थितियों और भावनाओं को भी समझना चाहिए। हमें ऐसा वातावरण प्रदान करना चाहिए, जहाँ बच्चा बिना किसी डर के अपनी बात कह सके और अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से सोच सके।

इस कहानी से मुझे सबसे बड़ी सीख यह मिली कि शिक्षा का अर्थ केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चे को अपने जीवन को समझने, सवाल पूछने और अपने लिए सही रास्ता चुनने का अवसर देना भी है।

क्योंकि किताबें हमें ज्ञान देती हैं, लेकिन जीवन के अनुभव हमें उस ज्ञान का सही अर्थ समझाते हैं।

सुनीता त्रिपाठी
सनबीम ग्रामीण स्कूल


 

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