मुझे अपनी कक्षा का एक बच्चा याद आता है, जो हमेशा शांत रहता था और किसी गतिविधि में रुचि नहीं दिखाता था। शुरू में मुझे लगा कि शायद वह पढ़ाई में रुचि नहीं लेता। लेकिन जब मैंने उसके साथ समय बिताकर बात की, तो मुझे उसकी पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में पता चला। उस बातचीत ने मुझे भीतर से प्रभावित किया। मुझे एहसास हुआ कि बच्चे के व्यवहार को समझने से पहले उसके मन को समझना ज़रूरी है।
इस अनुभव ने मेरे शिक्षक के रूप में सोचने का तरीका बदला। अब मैं किसी बच्चे के व्यवहार पर तुरंत निर्णय लेने के बजाय उसके पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करता हूँ। चरित्र निर्माण की चर्चा ने भी मुझे यह समझाया कि बच्चों को केवल विषय का ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है; उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और परिस्थितियों में सही निर्णय लेने वाला इंसान बनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
मेरे लिए इस अध्याय की सबसे बड़ी सीख है—
“परिस्थितियाँ हमारे जीवन की दिशा बदल सकती हैं, लेकिन उनसे मिली सीख हमारे चरित्र की दिशा तय करती है।”
एक शिक्षक के रूप में मैं चाहता हूँ कि मेरे विद्यार्थी केवल अच्छे अंक ही नहीं, बल्कि अच्छे इंसान बनने की सीख भी लेकर आगे बढ़ें।
रवि प्रकाश
सनबीम ग्रामीण स्कूल

No comments:
Post a Comment