एक शिक्षक के रूप में मैंने महसूस किया कि यह बात बच्चों को केवल समझाने से ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार से भी सिखानी चाहिए। यदि कोई बच्चा पहाड़ा बोलने में झिझकता है या गलती होने के डर से प्रयास नहीं करता, तो हमें उसके छोटे-छोटे प्रयासों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि आज का छोटा प्रयास ही कल के आत्मविश्वास और सफलता की नींव बन सकता है।
कक्षा में दिया गया यह उदाहरण भी बहुत प्रभावशाली लगा कि कोई व्यक्ति आज किसी दुकान में सफाई का काम कर रहा हो, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसकी मंजिल वहीं तक सीमित है। मेहनत, सीखने की इच्छा और निरंतर प्रयास उसे भविष्य में उसी दुकान का मालिक भी बना सकते हैं। व्यक्ति का वर्तमान काम उसकी अंतिम पहचान नहीं होता।
आज मैंने यह भी महसूस किया कि हमें दूसरों की बातों से प्रभावित होकर किसी काम को छोटा नहीं समझना चाहिए। हर काम अपने साथ एक अनुभव, एक सीख और आगे बढ़ने का अवसर लेकर आता है। इसलिए हमें काम को छोटा-बड़ा या ऊँचा-नीचा समझने के बजाय उसे जिम्मेदारी और सम्मान के साथ करना चाहिए।
इस चिंतन ने मुझे अपने शिक्षक जीवन के बारे में भी सोचने का अवसर दिया। बच्चों को केवल विषय का ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके अंदर मेहनत, आत्मसम्मान, जिम्मेदारी और हर कार्य के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी हमारी जिम्मेदारी है।

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