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Sunday, October 11, 2026

कठिन परिस्थितियाँ और चरित्र की पहचान - रवि प्रकाश

 Educated के “Apache Women” अध्याय पर हुई चर्चा ने मुझे अपने शिक्षक जीवन के एक अनुभव को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया। इस अध्याय से मैंने समझा कि कठिन परिस्थितियाँ केवल हमारे जीवन को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि हमारे सोचने और निर्णय लेने के तरीके को भी बदल देती हैं।

मुझे अपनी कक्षा का एक बच्चा याद आता है, जो हमेशा शांत रहता था और किसी गतिविधि में रुचि नहीं दिखाता था। शुरू में मुझे लगा कि शायद वह पढ़ाई में रुचि नहीं लेता। लेकिन जब मैंने उसके साथ समय बिताकर बात की, तो मुझे उसकी पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में पता चला। उस बातचीत ने मुझे भीतर से प्रभावित किया। मुझे एहसास हुआ कि बच्चे के व्यवहार को समझने से पहले उसके मन को समझना ज़रूरी है।

इस अनुभव ने मेरे शिक्षक के रूप में सोचने का तरीका बदला। अब मैं किसी बच्चे के व्यवहार पर तुरंत निर्णय लेने के बजाय उसके पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करता हूँ। चरित्र निर्माण की चर्चा ने भी मुझे यह समझाया कि बच्चों को केवल विषय का ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है; उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और परिस्थितियों में सही निर्णय लेने वाला इंसान बनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

मेरे लिए इस अध्याय की सबसे बड़ी सीख है—

“परिस्थितियाँ हमारे जीवन की दिशा बदल सकती हैं, लेकिन उनसे मिली सीख हमारे चरित्र की दिशा तय करती है।”

एक शिक्षक के रूप में मैं चाहता हूँ कि मेरे विद्यार्थी केवल अच्छे अंक ही नहीं, बल्कि अच्छे इंसान बनने की सीख भी लेकर आगे बढ़ें।

रवि प्रकाश
सनबीम ग्रामीण स्कूल

Saturday, March 28, 2026

शोर से सीख तक: बच्चों से जुड़कर कक्षा को सकारात्मक बनाना - सुनीता त्रिपाठी

आज जब मैं कक्षा में प्रवेश की तो बच्चे बहुत शोर कर रहे थे। कोई कागज की जहाज उड़ा रहा था, कोई हंस रहा था, तो कोई अपनी जगह से उठकर इधर-उधर घूम रहे थे, एक पल के लिए लगा कि मैं क्या करूं, लेकिन फिर मैंने सोचा अगर मैं उनके साथ जुड़ जाऊं तो शायद वह मुझे बेहतर समझ पाएंगे। मैंने मुस्कुराते हुए बच्चों से कहा, "चलो पहले हम सब एक छोटा सा खेल खेलते हैं। मैंने उनके साथ ताली बजाकर एक छोटा सा राइम गीत शुरू किया। जैसे लालाजी ने केला खाया। केला खाकर मुंह पिचकाया। 

धीरे-धीरे सभी बच्चे उसे खेल में शामिल हो गए कक्षा का शोर अब हंसी और खुशी में बदल गया जब सबका मन शांत और खुश हो गया तब मैंने प्यार से कहा, देखो बच्चों जब हम मिलकर खेलते हैं तो कितना अच्छा लगता है इस तरह अगर हम मिलकर पढ़ेंगे तो हम और भी अच्छा सीखेंगें। उसके बाद बच्चे अब पूरी तरह शांत हो गए थे और ध्यान लगाकर बात सुन रहे थे। इससे यह सीखने को मिला कि पहले मुझे बच्चों से जुड़ना पड़ा। बच्चों के साथ जितना ज्यादा से ज्यादा समय बिताना, उनकी ऊर्जा सही दिशा में उपयोग ला सकता है। 

सनबीम ग्रामीण स्कूल
सुनीता त्रिपाठी

Picture Courtesy - AI

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