आज जब मैं कक्षा में प्रवेश की तो बच्चे बहुत शोर कर रहे थे। कोई कागज की जहाज उड़ा रहा था, कोई हंस रहा था, तो कोई अपनी जगह से उठकर इधर-उधर घूम रहे थे, एक पल के लिए लगा कि मैं क्या करूं, लेकिन फिर मैंने सोचा अगर मैं उनके साथ जुड़ जाऊं तो शायद वह मुझे बेहतर समझ पाएंगे। मैंने मुस्कुराते हुए बच्चों से कहा, "चलो पहले हम सब एक छोटा सा खेल खेलते हैं। मैंने उनके साथ ताली बजाकर एक छोटा सा राइम गीत शुरू किया। जैसे लालाजी ने केला खाया। केला खाकर मुंह पिचकाया।
धीरे-धीरे सभी बच्चे उसे खेल में शामिल हो गए कक्षा का शोर अब हंसी और खुशी में बदल गया जब सबका मन शांत और खुश हो गया तब मैंने प्यार से कहा, देखो बच्चों जब हम मिलकर खेलते हैं तो कितना अच्छा लगता है इस तरह अगर हम मिलकर पढ़ेंगे तो हम और भी अच्छा सीखेंगें। उसके बाद बच्चे अब पूरी तरह शांत हो गए थे और ध्यान लगाकर बात सुन रहे थे। इससे यह सीखने को मिला कि पहले मुझे बच्चों से जुड़ना पड़ा। बच्चों के साथ जितना ज्यादा से ज्यादा समय बिताना, उनकी ऊर्जा सही दिशा में उपयोग ला सकता है।
सनबीम ग्रामीण स्कूल
सुनीता त्रिपाठी
Picture Courtesy - AI
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