War जैसी कक्षा में शिक्षक बहुत सख्त होते हैं, बच्चों को डाँटते हैं, डर का माहौल बनाते हैं और उन्हें अपनी बात कहने का अवसर नहीं देते। ऐसे माहौल में बच्चे डरते हैं, पढ़ाई में उनकी रुचि कम हो जाती है और वे खुलकर सीख नहीं पाते।
इसके विपरीत Peaceful कक्षा में शिक्षक बच्चों के साथ प्रेम, सहानुभूति और समझदारी से व्यवहार करते हैं। यहाँ बच्चे बिना डर के सवाल पूछते हैं, अपनी राय व्यक्त करते हैं और सीखने में आनंद महसूस करते हैं। एक अच्छे शिक्षक को कक्षा में शांति, सहयोग और सम्मान का वातावरण बनाना चाहिए। जब कक्षा का माहौल शांत और मित्रतापूर्ण होता है, तब बच्चे बेहतर तरीके से सीखते हैं, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें पढ़ाई में आनंद आता है।
लेकिन इसके लिए सबसे पहले शिक्षक को कक्षा के वातावरण को शांतिपूर्ण बनाना पड़ता है। यदि शिक्षक के कक्षा में प्रवेश करने के बाद वहाँ युद्ध जैसा माहौल हो, तो सबसे पहले उस माहौल को सामान्य बनाना आवश्यक होता है, न कि चिल्लाना। शिक्षक कुछ रोचक गतिविधियाँ जैसे—कहानी, कविता, गहरी साँस लेना, गीत या बोर्ड पर कुछ प्रश्न—करवाकर बच्चों का ध्यान अपनी ओर केंद्रित कर सकता है। इससे बच्चे शिक्षक की बात सुनने के लिए तैयार होते हैं। इसके बाद शिक्षक उनकी समस्याएँ समझकर उनका समाधान कर सकता है, जिससे कक्षा को नियंत्रण में लिया जा सके और शिक्षक एवं छात्रों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हो सके।
इस अध्याय से यह निष्कर्ष निकलता है कि कक्षा में युद्ध जैसा माहौल नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण और सकारात्मक वातावरण होना चाहिए, क्योंकि यही बच्चों के सीखने और समग्र विकास के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
मंजुला सागर
सनबीम ग्रामीण स्कूल

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