Monday, October 5, 2026

बालमन, शिक्षा का अधिकार और प्रकृति से जुड़ाव - सुनीता त्रिपाठी

इस कहानी ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि हर बच्चा केवल किताबों से नहीं, बल्कि अपने आसपास की सोचनेऔर परिस्थितियों से भी सीखता है। तारा की कहानी में सबसे गहरी बाद मुझे यह लगी कि जब किसी बच्चे के सामने सीखने के रास्ते सीमित कर दिए जाते हैं,। तब भी उसके भीतर आगे बढ़ाने की इच्छा एक नई राह खोज सकती है।
इससे मुझे महसूस हुआ की शिक्षा केवल पढ़ना लिखना सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने लिए सोने और सही गलत की समझने की आजादी भी है। कई बार बच्चे अपनी परिस्थितियों के कारण वह नहीं देख पाते जो उनके लिए संभव है। ऐसे में किसी व्यक्ति का विश्वास, एक अवसर या एक छोटा सा प्रोत्साहन उनके जीवन की दिशा बदल सकता है। 
तारा की कहानी ने मुझे यह भी सिखाया कि बदलाव हमेशा बाहर की दुनिया बदलने से नहीं आता, कभी-कभी शुरुआत अपने भीतर सवाल पूछने सेहोती है। यही इस अध्याय की बात मुझे सबसे अधिक छू गई। 
 
सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल

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