Monday, October 5, 2026

शिक्षक: छिपी प्रतिभा को अवसर देने वाला मार्गदर्शक - लवकुश सिंह यादव

तारा वेस्टओवर की किताब का यह अंश दो बेहद अलग महिलाओं—लेखिका की माँ और दाई—के चरित्र और उनके समाज में स्थान को खूबसूरती से दर्शाता है। पहली नज़र में यह दृश्य जड़ी-बूटियों के लेन-देन का लगता है, लेकिन गहराई से देखने पर यह पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी समाज में महिलाओं की आंतरिक असुरक्षा और ताकत के टकराव को दिखाता है।

एक तरफ दाई का किरदार है, जिसके पास कोई औपचारिक डिग्री या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वह पूरे आत्मविश्वास से भरी है। उसके भारी शरीर, बेतरतीब बाल और बिना मेकअप वाले चेहरे से उसका समाज की परवाह न करने वाला बेबाकपन झलकता है। वह अपने ‘रसूख’ और हुनर के दम पर खुद को साबित करती है।

दूसरी तरफ लेखिका की माँ हैं, जो पारंपरिक रूप से सुंदर हैं, हर सुबह सजती-संवरती हैं, लेकिन भीतर से घबराहट और असुरक्षा से भरी हैं। वे दाई के सामने खुद को छोटा महसूस करती हैं और अनजाने में ही सही, हर बात के लिए माफी माँगती हैं। यह दिखाता है कि कैसे समाज महिलाओं को हमेशा ‘परफेक्ट’ और दूसरों को खुश रखने के साँचे में ढाल देता है।

अंश का अंत तारा के अकेलेपन को उजागर करता है, जो स्कूल न जाने के कारण अपनी जैसी सहेलियों के लिए तरसती है। यह पूरा प्रसंग शिक्षा, पहचान और आत्मविश्वास के बीच के जटिल रिश्ते को बहुत ही मार्मिक ढंग से बयाँ करता है।
लवकुश सिंह यादव

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