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Monday, August 29, 2022

उत्तरदायित्व और सहयोग - ज्योति तड़ियाल


उत्तरदायित्व – उत्तरदायित्व जीवन में यदि न हो तो मनुष्य कभी आगे नहीं बढ़ सकता। हमसब प्रत्येक परिस्थिति और परिणाम के उत्तरदाई स्वयं होते हैं। हमारे ऊपर कई उत्तरदायित्व होते हैं, जिनका हम निर्वहन करते हैं। एक शिक्षिका के रूप में हमारी उत्तरदायित्व बहुत बढ़ जाते हैं। कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों के भविष्य के उत्तरदाई हम स्वयं हो जाते हैं। हम उस विद्यार्थी के प्रति उत्तरदाई हैं जो हमारे दिए ज्ञान को आत्मसात कर जीवन में आगे बढ़ता है, हम उन माता पिता के प्रति भी उत्तरदाई हैं जो अपने अबोध बालकों को हमें सौंपते हैं, हम उस संस्था के प्रति भी उत्तरदाई हैं जहां हम कार्य करते हैं। वैसे ही विद्यार्थी भी उत्तरदाई होते हैं। कक्षा में जब कार्य दिया जाता है तो सभी उसे पूरी मेहनत से करते हैं क्योंकि वे भी उत्तरदाई हैं। इस प्रकार हम सभी उत्तरदायित्वों को पूर्ण करते हुए जीवन मे आगे बढ़ते जाते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं।

सहयोग – सहयोग एक ऐसी भावना है जो समाज की आधारशिला है। सहयोग के बिना मानव समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। जीवन में सभी को सहयोग चाहिए। विद्यार्थी जीवन में सहयोग की भावना अधिक बलवती होती है। कक्षा में सहयोग से अनेक कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। कक्षा के लिए बोर्ड बनाना हो या प्रार्थना सभा कराना इन गतिविधियों में प्रत्येक का सहयोग होता है। एक अध्यापिका के रूप में मुझे भी सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। यह सहयोग अपने सहकर्मियों से , प्रधानाचार्य से, विद्यालय परिवार से और बच्चों से भी प्राप्त होता है। सहयोग लेना जितना आवश्यक है उतना ही सहयोग देना। सभी को साथ लेकर चलना है ताकि कर्तव्य पथ पर कोई छूट न जाए।

सहयोग की इसी भावना पर गुप्त जी की काव्य पंक्तियां उद्धृत करना चाहूंगी –

है कार्य ऐसा कौन सा, साधे न जिसको एकता।
देती नहीं अदभुद अलौकिक शक्ति किसको एकता।
दो एक एकादश हुए, किसने नहीं देखे सुने।
हां शून्य के भीर योग से हैं अंक होते सौ गुने।

प्रेषक – ज्योति तड़ियाल
द दून गर्ल्स स्कूल।

Thursday, February 18, 2021

तनाव को कम करने के तरीके - Ayasha Tak

Courtesy: managementcentre.co.uk
जीवन के किसी बिंदु पर हर कोई तनाव का अनुभव करता है, तनाव काम या नौकरी से संबंधित हो सकता है ,परिवार से संबंधित हो सकता है या आपकी पढ़ाई ,खराब स्वास्थ्य , वित्तीय समस्याओं आदि के कारण हो सकता है। कई बार किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु भी तनाव का कारण बनती है। 

कुछ लोग तनाव को सही ढंग से संभालते हैं , जबकि कुछ लोग अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करने में  विफल रहते हैं। तनाव के लक्षण मानसिक , शारीरिक या सामाजिक हो सकते हैं , इसमें सिरदर्द , हताशा , भूख का घटना या बढ़ना , नींद न आना या बहुत ज्यादा नींद आना शामिल हैं। 

कुछ आसान तरीकों को अपनाकर हम अपने जीवन में तनाव को कम कर सकते हैं।  जैसे - 
 ज़्यादा मुस्कुराए - जितना हो सके मुस्कुराओ। जैसा की मदर टेरेसा ने कहा था - “ शांति की शुरुआत मुस्कान से होती है और हर बार जब आप किसी पर मुस्कुराते हो, तो यह प्यार की एक कार्यवाही है ,उस व्यक्ति को एक उपहार ,एक सुंदर चीज़। “

संगीत -सॉफ्ट और शांत संगीत एक महान संकटमोचक है। संगीत एक व्यक्ति को खुश और हल्का रखता है। आप अपने पसंदीदा गीत को सुन सकते है और साथ में गुनगुना भी सकते है, इससे आपकी आत्माएं जाग उठेगी और आप फिर से खुश और अद्भुत महसूस करेंगे। 

वास्तविक बनो -अपने लक्ष्य को पूरा करने में अपने आप को ज़्यादा जोर न दें। धैर्य रखें , तार्किक और यथार्थवादी बनें। एक ही दिन में सब कुछ पूरा करने की कोशिश करके अपने आप को तनाव न दें। “नहीं” कहना सीखें। 

हँसना - हंसी एक बेहतरीन दवा है। जितना हो सके हंसें , कॉमेडी धारावाहिक और फिल्में देख सकते है। 

दोस्त - अपने दोस्तों के साथ घूमने और अपने जीवन का आनंद लेने के लिए कुछ समय निकालें। आप अपने जीवन का आनंद लेने के लिए पैदा हुए हैं , इसलिए कम चिंता करें और खुश रहें। 

Ayasha Tak
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Monday, February 15, 2021

समय का महत्व - जफ्फर खां

Courtesy: hindikiduniya.com
समय का हमारे जीवन में अति महत्वपूर्ण स्थान है । समय सभी वस्तुओं से यहां तक कि धन से भी अधिक शक्तिशाली और अमूल्य वस्तु है यदि एक बार ये हमारे हाथ से निकल गया तो फिर यह वापस लौटकर नहीं आता है । व्यक्ति बलवान नही होता बल्कि समय बलवान होता है। यह बात भी सत्य है कि जो व्यक्ति समय की अहमियत नहीं समझता, समय भी उस व्यक्ति की अहमियत को नहीं समझता। एक बार ये कीमती समय हमारे हाथ से चला गया तो यह हमेशा के लिए चला जाता है फिर कभी वापस लौटकर नहीं आता क्योंकि यह समय हमेशा आगे की ओर चलता है, पीछे की दिशा में नहीं। हमारे दैनिक कार्य जैसे स्कूल कार्य ,जागने का समय ,व्यायाम, भोजन करना आदि योजना अनुसार और समय अनुसार होना चाहिए हमें कठिन परिश्रम करने का आनंद लेना चाहिए कभी अपनी अच्छी आदतों को बाद में करने के लिए टालना नहीं चाहिए। 

हमें समय के महत्व को समझना चाहिए और इसका प्रयोग रचनात्मक ढंग से करना चाहिए । जो घड़ी हम हाथ में बांध कर चलते हैं वह हमसे कहती है कि मेरे साथ चलो, भले ही आगे चलो पर मेरे से पीछे हो कर नहीं चलना क्योंकि साथ चलने से सदा जीवन सुखी रहता है। मानव जीवन नदी की धारा के समान होता है। जिस तरह से नदी की धारा ऊँची - नीची भूमि को पार करती हुई लगातार आगे बढती है उसी प्रकार जीवन की धारा सुख-दुःख रूपी जीवन के अनेक संघर्षों को सहते-भोगते आगे बढती रहती है। जीवन का उद्देश्य लगातार आगे बढना होता है इसी में सुख है, आनंद है।  जिस किसी ने भी समय के महत्व को पहचाना है और उसका सदुपयोग किया है, वह उन्नति की सीढियों पर चढ़ता चला गया है। लेकिन जिसने इसका तिरस्कार किया है समय ने उसे बर्बाद कर दिया है। समय का सदुपयोग ही विकास और सफलता की कुंजी है।

जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Monday, January 25, 2021

खुद को समय अवश्य दीजिए - राजेश्वरी राठौड़

Courtesy: www.jagruk.in
अगर आपको अपनी जिंदगी को खुशी से जीना है, तो आपको अपने लिए भी समय निकालना चाहिए। आजकल लोग पैसा और नाम कमाने की होड़ में इतना बिजी है की उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए तो दूर की बात, खुद के लिए भी समय निकाल पाना मुश्किल होता है। जब आप अपने कामों और जीवन में से बुरी तरह हताश हो जाएंगे इससे आपको खालीपन  लगने लगेगा और आप तनाव, चिंता आदि के शिकार हो जाएंगे, जिससे आप चिड़चिडे हो जाएंगे।

खुद को समय देने से होते हैं कई फायदे जब आप कोई काम खुशी से करते हैं तो उस काम में आपको जरुर सफलता मिलती हैं। जाहिर है जब आप खुद के लिए समय निकालेंगे तो ,आप दिल से खुश रहेंगे और जब किसी को अंदर से खुशी मिलती है तो उसके चेहरे पर अलग ही मुस्कान होती है। जीवन के लिए योजना बना सकते हैं अगर आपको अपने जीवन को बेहतर मनाने के लिए योजना बनानी हो तो उसका सबसे अच्छा तरीका यह है की आप एकांत में खुद के साथ रहो जाहिर है जल्दी बाजी में आप कई बार अपने लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हो। इसलिए एकांत में रहकर और सोच- समझ कर योजना बनाएंगे तो जीवन सही दिशा में आगे बढ़ेंगे अपनी अच्छी बुरी आदतों को पहचान सकते हैं।

दुनिया में कोई इंसान परफेक्ट नहीं होता है। सभी में कुछ कमियां होती है। अगर आप में भी कुछ है, तो आपको  जानना चाहिए और उनमें सुधार करना चाहिए । इसलिए अच्छी बुरी आदतों को जानने के लिए अपने लिए समय निकाले और उन्हें समझने की कोशिश करें।

राजेश्वरी राठौड़
rre@fabindiaschools.in
The Fabindia School

Tuesday, December 15, 2020

रिश्तों का महत्त्व - Ayasha Tak

Courtesy: clipart-library.com
मनुष्य जीवन रिश्तों से जुड़ा हुआ है। रिश्तों के कारण ही मनुष्य जीवन में आगे बढ़ने की , सफलता पाने की , शिक्षित होने की , कार्य करने की इच्छा रखता है। यदि रिश्ते मजबूत हो तो जीवन खुशहाल व सुखमय बन जाता है, लेकिन रिश्तों में खटास आते ही व्यक्ति भी टूट जाता है। रिश्तों में अपनेपन की भावना की खातिर ही व्यक्ति एक - दूसरे पर मर - मिटने तक को तैयार हो जाते हैं। 

एक माँ के अंदर शुरू से ही अपने बच्चे के प्रति बेहद अपनेपन की भावना कायम हो जाती है। उसे अपना बच्चा सारी दुनिया में सबसे प्रिय व सुंदर लगता है। मनोवैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि अकेले व्यक्ति को भौतिक , भावनात्मक , मानसिक व आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाता है। करीबी रिश्तेदारों एवं मित्रों से व्यक्ति अपने मन की वे सारी बातें करते हैं , जिन्हें वे अन्य व्यक्तियों से नहीं कर पाते हैं। 

रिश्तेदार व परिवार व्यक्ति के बुरे समय में साथ खड़े रहते हैं। ऐसे में अकेले व्यक्ति की पीड़ा पूरे परिवार और रिश्तेदारों की पीड़ा बन जाती हैं। वे एकजुट होकर मुसीबत से लड़ते है और मुसीबत को दूर भगा कर कामयाबी हासिल करते है। दोस्त रिश्तेदार और परिवार दुआ भी बन जाए इसके लिए व्यक्ति को प्रेम , दुआ , विनम्रता और मदद का मार्ग पकड़ लेना चाहिए। इससे ये बंधन मजबूत होकर जीवन को सशक्त , रोगहीन व सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते है।

 रिश्ते निभाना भी समझौते का दूसरा नाम है। रिश्ते केवल खून के ही नहीं होते हैं , भावनात्मक भी होते हैं। कई बार भावनात्मक रिश्ते अटूट बन जाते हैं , क्योंकि उनमें प्रेम , सामंजस्य , धैर्य और ईमानदारी का साथ होता हैं।
  
Ayasha Tak
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Thursday, December 10, 2020

आशा - जफ्फर खां

 Courtesy: 
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आशा जीवन रूपी फूल की सुगंध हैं, किसी कार्य या बात को पूर्ण हो जाने की उम्मीद को आशा कहते हैं |जहां आशा हैं, उत्साह हैं ,वही सफलता है | कार्य कैसा भी हो यदि मनुष्य आशा और उत्साह के साथ काम करता है तो निश्चय ही सफलता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं | 

मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए | जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा और निराशा के क्षण आते-जाते रहते हैं | मनुष्य जिस तरह की भावना रखता हैं वैसी ही  प्रेरणाएं मिलती हैं । आशा वह दीपक हैं जो कठिनाइयों में भी बुझता नहीं है, आत्मा से शक्ति पाकर निरंतर जलता रहता है । सच्ची मित्रता रंग रूप नहीं देखती हैं । मित्रता जीवन को रोमांच से भर देती हैं । मित्र के होने पर हम खुद को अकेला महसूस नहीं करते हैं । व्यक्ति अपने जन्म से ही अपनों के साथ रहता है, खेलता है, उनसे सीखता है पर हर बात व्यक्ति हर किसी को नहीं बताता है। 

वह केवल अपने सच्चे मित्र को ही अपने मन की बात बताता है । जो हमें समय-समय पर जीवन की कठिनाइयों से लड़ने में सहायता प्रदान करता है । हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में दोस्तों की मुख्य भूमिका होती हैं । हम अपना सुख दु:ख तथा हर तरह की बातें उसी के साथ बांट सकते हैं जो हमारे मित्र होते है। मित्रता जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकती हैं । सच्ची दोस्ती हमको सदैव सही मार्ग दिखाती हैं - जैसे मोती की माला के टूट  के बिखर जाने पर हम उन्हें बार-बार पीरोते हैं क्योंकि वह मूल्यवान हैं ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्र भी मूल्यवान होते हैं उनकी मित्रता हमें बनाए रखनी चाहिए । 

संसार में कई दोस्त होते हैं जो हमेशा अपने मित्रों की समृद्धि के समय ही साथ रहते हैं , लेकिन केवल सच्चे, ईमानदार और वफादार दोस्त ही होते हैं जो हमें कभी भी हमारे जीवन में कठिनाई और मुश्किल के समय में अकेला नहीं होने देते हैं और  हमारा  साथ देते हैं तथा  मनोबल बढाते है।सच्चे मित्र ही बिना विचार किए  हमको संकट में देखकर मदद के लिए आगे आ जाते है।
 जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Monday, December 7, 2020

साहस - Krishan Gopal

Courtesy: vividcomm.com
जीवन में कई क्षण ऐसे आते हैं जब हमें ऊहापोह की स्थिति छोड़कर साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ती है।  साहस का अर्थ केवल शारीरिक युद्ध से नहीं है। जीवन में कई ऐसे अवसर आते हैं जब हमें निर्णय लेने में परेशानियों का सामना करना पड़े। कई बार स्थिति गंभीरतम हो जाती है, तब व्यक्ति किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता। ऐसी परिस्थितियों से जूझना और स्वयं को तटस्थ रखना ही साहस है। इन परिस्थितियों का सामना केवल एक बार ही नहीं करना पड़ता बल्कि यह तो सीढी की तरह है, हर कदम पर हमें साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ेगी। 

ऐसे कितने ही उदाहरण भरे पड़े हैं जब विपरीत परिस्थितियों में लोगों ने साहस दिखाकर बेहतर काम करके दिखाया। अधिकांशतः नकारात्मक सोच रखते हुए नकारात्मक परिणाम की कल्पना कर लेते हैं, इसी वजह से कोई नया काम करने में कतराते हैं। सोचिए, वैज्ञानिक कितना साहस दिखाते हुए किसी औषधि की खोज करते हैं परंतु कई बार परिणाम अपेक्षाकृत नहीं मिलते।

 इस कारण वे घबराकर या पराजित होकर अपना कार्य बंद नहीं कर देते हैं बल्कि फिर से नई ऊर्जा के साथ जुट जाते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं। इसका ही परिणाम है कि आज विज्ञान के क्षेत्र में हमने इतनी तरक्की की। यदि सकारात्मकता के साथ किसी काम में जुट जाते हैं और फिर भी असफल  हो जाते हैं तो भी हम बहुत कुछ सीख सकेंगे, की हुई गलतियों को समझ कर उसे दोहराएँगे नहीं। और यदि सफल हो जाते हैं तब तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहेगा। 

एक शिक्षक के रूप में हमें कई स्थानों पर साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ती है। यदि बच्चों को साहसी बनाना है या ये मूल्य उनमें विकसित करना है तो शिक्षक को स्वयं ऐसा बनना पड़ेगा। क्योंकि बालक देखकर सीखता है जैसा आचरण उसके शिक्षक का होगा वैसा आचरण ही एक बालक द्वारा दोहराया जाएगा। सीखना प्रक्रिया सतत चलायमान है।

साहस के साथ धैर्य की भी आवश्यकता पड़ती है। कई बार किए हुए कामों का परिणाम देरी से मिलता है ऐसे में धैर्य की आवश्यकता होती है। परिणामों को प्राप्त होने में निर्धारित समय से अधिक भी लग सकता है। इसलिए नए काम के साहस के साथ धैर्य की भी आवश्यकता रहती है। अगर वांछित परिणाम मिलने में देर हो जाए तो सकारात्मकता के साथ धैर्य से प्रतीक्षा करनी चाहिए। अपने कार्यों में संलग्न रहे और सृजनात्मकता को भी समय देते रहे, निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।  
    
Krishan Gopal 
The Fabindia School, Bali 
kde@fabindiaschools.in 

Thursday, October 22, 2020

जीवन मे शिक्षा का महत्व - उस्मान गनी

इल्म, ज्ञान, शिक्षा व नॉलेज शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची है। देखने में सभी शब्द बहुत छोटे हैं मगर इन्ही शब्दों के सहारे पूरी दुनिया चल रही है। यदि एक मिनट के लिए सोचा जाए कि दुनिया से इल्म या ज्ञान पूरी तरह से खत्म हो जाए तो क्या होगा ? तुम तुम्हारे और हम हमारे ! यानि किसी का किसी से कोई लेना-देना ही नहीं होगा। दुनिया पूरी जंगल बन जाएगी और फैल जाएगा जंगलराज। इसलिए इल्म या ज्ञान इंसान के लिए बेपनाह जरूरी है। एक सामान्य जिन्दगी जीने के लिए इंसान को रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह है ज्ञान।  क्योंकि ज्ञान वह बैसाखी है जिसके सहारे इंसान,  इंसानियत का तरीका सीखता है। 

जाहिल इंसान और अनपढ़ इंसान जानवरों से बदतर जिंदगी गुजारते है।  जब तक इंसान के पास ज्ञान या इल्म नहीं है वह तरक्की की राह पर आगे नहीं बढ़ सकता है। मगर इल्म हासिल करने वाला अवश्य ही तरक्की की मंजिलों को तय करता हुआ बुलंदी हासिल करता है। यानि इल्म वो शमां है जो इंसान की जिंदगी की राह को रोशन करती है जिसके ज्ञान के ऊजाले के सहारे इंसान हर तरह से अपनी जिंदगी रोशन करता है। इसलिए इंसान को जहां से भी जो इल्म मिले उसे हासिल करते रहना चाहिए क्योंकि इल्म से ही बुलंदी नसीब होती है। इसलिए कहा गया है -
'खुदी  को  कर  बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे तेरी रजा क्या हैI'

ज्ञान वह इनवेस्टमेंट हैं जिसका मुनाफा जीवन के अंत तक मिलता रहता है। यानि दुनिया की हर वस्तु खर्च करने के बाद अवश्य खत्म होती है। मगर शिक्षा या इल्म ऐसा धन है जिसे जितना अधिक खर्च किया जाएगा वह उतना ही अधिक बढ़ता जाएगा । दुनिया की हर वस्तु की चोरी हो सकती है मगर ज्ञान ऐसा धन है जिसकी कभी चोरी नहीं हो सकती। ज्ञान में कमी तभी हो सकती है जबकि इसे खर्च नहीं किया जाए या इकठ्ठा  करके रखा जाए। इसलिए ज्ञान को बांटते व हासिल करते रहना जरूरी है।

आज के दौर की हर कौम के मुखिया के साथ-साथ परिवार के मुखिया के लिए यह जरूरी हैं कि वे खुद अगर अच्छी शिक्षा नहीं पा सके हैं तो कोई बात नहीं मगर अपने बच्चों को उन्हें पूरी कोशिश कर अच्छी शिक्षा देने के लिए आगे आना चाहिए। केवल सोचते रहने से कुछ नहीं होगा, आगे बढ़कर पहल भी करनी पड़ेगी। इस पहल को अंजाम देने के लिए चाहे घर में दो निवाले कम खाए मगर अपने बच्चों को जरूर पढ़ाए। क्योंकि
'सोचने से कहां मिलते  हैं तमन्नाओं के शहर, चलना भी जरूरी है मंजिल को पाने के लिए।'
*धन्यवाद*
उस्मान गनी

Monday, October 12, 2020

कठिन परिश्रम कभी असफल नहीं होता - Ayasha Tak

अगर कोई व्यक्ति कठिन परिश्रम कर सकता है , तो वह सफल जरूर होगा। वह किसी भी तरह से विफल नहीं हो सकता है। हम जानते हैं कि कठिन काम आसान नहीं है , यह सभी तरह के लोगों के लिए बहुत मुश्किल है। हर पेशे को कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इसके बिना कुछ भी सुधार नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि कड़ी मेहनत व्यक्ति को कभी असफल नहीं होने देती। अब मैं एक युवा व्यक्ति की कहानी बता रही हूँ। जिन्होंने कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की।

उन्होनें अपनी मेहनत की शुरुआत अपने स्कूली जीवन से की। लड़के ने कड़ी मेहनत से हाई - स्कूल में अच्छा परिणाम प्राप्त किया। उन्होंने अध्ययन में बहुत अधिक समय बिताया। कई तरह के काम उन्हें बिना अध्ययन के पूरे करने पड़ते थे। वह अपने परिवार के साथ नहीं रहता था। क्योंकि उनका स्कूल उनके गाँव से बहुत दूर था। इसलिए वह स्कूल के छात्रावास में रहता था। वहाँ पर उसे अपना हर काम स्वयं करना पड़ता था। इसलिए वह ठीक से सो भी नहीं पाता था। इसके बावजूद उसने अपनी कड़ी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए। अन्यथा यदि आप कड़ी मेहनत करते है ,तो आपकी प्रतिभा में वृद्धि होगी।

स्कूल की पढाई पूरी होने के बाद में उसे कॉलेज में दाखिला लेना था। परन्तु उसका परिवार गरीब होने के कारण उसकी कॉलेज की फीस भरने में असमर्थ था। उसने अपने लिए नौकरी प्राप्त करके फिर अपनी पढाई और नौकरी दोनों ही कामों में कड़ी मेहनत की। आखिरकार, वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने सफलता प्राप्त करने में सक्षम हुआ। अब वह एक बहुत बड़े व्यवसायी है। उन्होनें अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल किया। अगर वह मेहनत नहीं कर पाता तो उन सफलताओं को कभी हासिल नहीं कर पाता

Ayasha Tak, The Fabindia School <atk@fabindiaschools.in>

Monday, September 21, 2020

उद्देश्य का महत्त्व - Ayasha Tak

एक सामान्य शब्द में उद्देश्य या लक्ष्य एक उद्देश्य है। एक प्रचलित कहावत है कि बिना उद्देश्य वाला मनुष्य बिना पतवार के जहाज के समान होता है। इसका मतलब है कि बिना पतवार का जहाज खतरे का सामना करता है। इसी प्रकार बिना लक्ष्य आधारित किए कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाता है।  वह  जीवन के रास्ते में ठोकरें खाता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति का जीवन में कुछ न कुछ उद्देश्य अवश्य होना चाहिए, जिससे जीवन में कुछ करने का सही लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। 

बचपन में एक व्यक्ति एक प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री या फिल्म स्टार या फिर पुलिस अधिकारी बनना चाहता है। उद्देश्य का अर्थ है प्रयास करना ,या आकांक्षा करना। प्रत्येक उद्देश्य आमतौर पर एक लक्ष्य की स्थापना की घोषणा के साथ शुरू होता है , फिर इसे एक निर्धारित समय रेखा पर छोटे - छोटे टुकड़ों में तोड़ना होता है। इस प्रकार इसे प्राप्त करने के लिए  समय - समय पर कई बाधाओं एवं असफलताओं का सामना करना पड़ता है। उद्देश्य जीवन में कुछ हासिल करने के मज़बूत इरादे को दर्शाता है।हर किसी के जीवन में एक उद्देश्य अवश्य होना चाहिए। 

बिना उद्देश्य के मनुष्य एक खिलौने के समान होता है। वह लक्ष्यहीन रूप से बहता रहता है और अपने जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है। तो , एक आदमी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। अपने लक्ष्य को पाने के लिए उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अगर दृढ़ निश्चय हो तो सफलता अवश्य मिलती है। 

इस प्रकार यह तथ्य है कि एक लक्ष्य निर्धारित करना और उसे प्राप्त करने के लिए अभिनय करना एक सफल जीवन के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। सभी को इसके लिए काम शुरू करना चाहिए । सक्रिय दृष्टिकोण के साथ कार्य योजना का समय पर क्रियान्वयन सफलता की कुंजी है।

Ayasha Tak 
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Wednesday, September 2, 2020

संघर्ष ही जीवन है - सुरेश सिंह नेगी

जीवन एक संघर्ष  है जो अंत में विजय का द्वार खोलती है और समस्या का समाधान करती है। जीवन में परिवर्तन
का क्रम चलता रहता है। जब तक जीवन है तब तक संघर्ष है।संघर्ष का दौर तो हमारे इस दुनिया में हमारे  जन्म लेने के साथ ही शुरू  हो जाता है। जब हम छोटे थे उस समय हमें सही से चलने और बोलने के लिए  संघर्ष  करना पड़ता था। जब बड़े हुए तो पढाई के लिए संघर्ष, उसके बाद नौकरी के लिए संघर्ष ‘इसलिए जब तक जीवन  है हमें संघर्ष करते हुए जीना होता है। जीवन  हमेशा आसानी से नहीं गुजरता, हर दिन कोई न कोई चुनौती, कोई न कोई, संघर्ष जीवन  में आता है और आता रहेगा।

ऐसा कोई नहीं हैं जिसके जीवन   में चुनौतियाँ  न हों, दुःख न हों, कठिनाई न हों, रुकावटें न हों। चुनौतियां केवल बुलंदियों को छूने की नहीं होतीं, बल्कि वहां टिके रहने की भी होती हैं। इस दुनिया में हर एक प्राणी संघर्ष कर रहा है।   यह ठीक है कि एक काम करते-करते हम उसमें कुशल हो जाते हैं। उसे करना आसान हो जाता है, पर वही करते रह जाना हमें अपने ही बनाई सुविधा के घेरे में कैद कर लेता है। 

 संघर्ष काल में हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि व्यक्ति के स्वयं के हाथ में कुछ नहीं है। लेकिन उसे लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।   क्योंकि प्रयास सफलता की कुंजी होती है।

हमें जीवन में संघर्षो का स्वागत करते रहना चाहिए। बिना संघर्ष किए जीवन के लक्ष्य प्राप्त नहीं किये जा सकते। कहते हैं कि संघर्ष करने वालो की कभी हार नहीं होती। 

संघर्ष से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। ऐसे व्यक्ति सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति होते है जो अपने आसपास के वातावरण से ही उस सकारात्मकता को ग्रहण करते है। हमें भी अपने सभी पहलुहों से सकारात्मकता ग्रहण करनी चाहिए। हमें अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए और अपने अंदर सकारात्मकता विकसित करनी चाहिए। 

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Saturday, August 15, 2020

समस्या समाधान - उर्मिला राठौड़

किसी समस्या का समाधान (हल) प्राप्त करने के लिये हमें विभिन्न पहलुओं का  क्रमबद्ध तरीके से विश्लेषण करना
पड़ता है। रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत से कारक ऐसे आते है, जिनको समझ लेने की बाद ही निष्कर्ष निकलता है कि इससे कैसे निपटे और उसका सामना कैसे करे ? 

व्यक्ति मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत होगा तभी ऐसी परिस्थितियों से निकल सकता है।इसके लिए हमें अपनी जीवन शैली में बदलाव करने की ज़रुरत है। एक बालक अपनी समस्याओं के निवारण हेतु कोशिश तो करेगा लेकिन सही क्रम अपनाने में गलती कर लेता है। उसके समाधान के लिए वयस्कों की मदद की आवश्कता होती है। 
सबसे पहले व्यक्ति को मानसिक तौर पर मजबूती चाहिए ।  उसके लिए एकाग्रता, सकारात्मकता होना आवश्यक है। यह तभी होगा जब हम नियमित योगाभ्यास करेंगे। अच्छे और प्रेरणास्पद साहित्य पढ़ेंगे और शिष्ट व्यक्तियों के साथ अपने विचारों का आदान प्रदान करेंगे। विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का हौसला होगा। प्रत्येक समस्या अपने साथ समाधान रखती है बस जरूरत है तो धैर्यवान बनने की, नए तरीकों को खोजने की। हम धरती से सभी समस्याओं को मिटा नहीं सकते लेकिन उसके लिए रास्ता तो खोज सकते है। यह धैर्य और सकारात्मता से ही होगा।

 किसी विषय से संबंधित समस्याओें के लिए निरन्तर अभ्यास करना चाहिए। जिससे हमारा भविष्य बेहतर बन सके। क्योंकि हम जो हमेशा कार्य करते है वो सफलता पाने के लिए नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हम कहीं असफल न हो। 

उर्मिला राठौड़
The Fabindia School
ure@fabindiaschools.in 

Monday, August 3, 2020

जीवन को सफल बनाने का मंत्र - उस्मान गनी

एक बेटे ने पिता से पूछा-
पापा.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ?

पिता, बेटे को पतंग उड़ाने ले गए।
बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...

थोड़ी देर बाद बेटा बोला-
पापा.. ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की और नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!  ये और ऊपर चली जाएगी....

 *पिता ने धागा तोड़ दिया *

पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...

तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया...

बेटा..
'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं
जैसे :
           *घर* -
         *परिवार*- 
       *अनुशासन*
      *माता-पिता*
       *गुरू-और*
          *समाज*

और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...

वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं..

'इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो बिन धागे की पतंग का हुआ...'

"अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."

"धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं.।."

अतः इस छोटी सी कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि सम्बन्ध केसा भी हो हमे उसे तोड़ना नही चाहिए। सब से मिलजुल कर रहना चाहिए । जिंदगी में उतार चढ़ाव तो आते रहते है उनका हमे मुकाबला करना चाहिए और अपनी जिंदगी को सफल बनाना चाहिए।

उस्मान गनी
The Fabindia School
ugi@fabindiaschools,in

Monday, May 25, 2020

वाणी का महत्व - धर्मेन्द्र पोद्दार


 
[ अक्सर हमारे मन में यह विचार उत्पन्न होती है कि –हम अपने विचारों और भावों को किस प्रकार अभिव्यक्त करें की वह प्रभावी, आकर्षक, एवं सारगर्भित हो| इस रचना के माध्यम से स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि मानव जीवन में “वाणी का क्या महत्त्व” है ]

हमारे समाज में या यों कहें तो हममें से अधिकांश व्यक्ति यह नहीं जानते की – क्या.. बोलें..?.. कहाँ..बोलें..?  किससे… बोलें…? कितना… बोलें? क्यों.. बोलें…? क्या बोलना प्रासंगिक है या अप्रासंगिक और फिर बोलने का परिणाम क्या होगा? क्या बोलने के पश्च्यात परिणाम सद् परिणाम होगा या दुष्परिणाम आदि |

मनुष्य के जीवन में असफलता, निराशा, दुःख, विषाद, चिन्ता, कष्ट, कलह, अशांति, नफरत, हिंसा, आक्रोश आदि के कारणों पर यदि गहन चिन्तन करें, तो निष्कर्ष के रूप में हम पायेंगे कि – मानव जीवन की समस्याओं, कष्टों, हिंसा, आक्रोश, नफ़रत  तथा विनाश का मूल कारण उनका जीभ का न दबना अर्थात परिणाम की परवाह किए बिना कुछ भी कह देना होता है | कुछ मनुष्य तो बोलने से पहले अपना विवेक और आत्म नियंत्रण इतना खो देते है, कि उन्हें भले बुरे, उचित, अनुचित, न्याय, अन्याय आदि का ज्ञान तक नहीं रहता, और वे क्रोध और आक्रोश के कारण अपना ही विनाश कर लेते हैं, कभी-कभी तो अपना अस्तित्व ही नष्ट कर लेते हैं |

कई बार तो ऐसा होता है कि वक्ता का कथन अथवा वक्तव्य समाप्त होते ही श्रोता अपनी आत्म नियंत्रण तथा संयम एवं सहनशीलता की सीमा खो बैठता है और परिणाम की परवाह किए बिना, बिना विचारे अनाप-सनाप अथवा मन को ठेस पहुँचाने वाली अथवा दिल को चुभने वाली बात कह देता है | और इसके भयंकर दुष्परिणाम देखने को मिलती है |

इतिहास इस बात की साक्षी रही है कि – महाभारत जैसा सर्वनाशी एवं हृदय विदारक संग्राम इसी जीभ के न दबने के परिणाम स्वरूप ही हुई थी | यदि इतिहास के साक्ष्य के आधार पर विचार करें, तो हम  निष्कर्ष के रूप में कह सकते हैं कि – यदि द्रोपदी ने दुर्योधन को “अन्धे के पुत्र भी अन्धे होते हैं” जैसी हृदय विदारक अथवा दिल को ठेस लगने वाली या मन को चुभने वाली बात न कही होती और उसके मन को चोट न पहुँचाई होती अथवा उसके हृदय को न दुखाया होता तो शायद दुर्योधन तथा अन्य कौरवों और पाण्डवों के बीच कटुता, नफ़रत, आक्रोश अर्थात दरार पैदा न हुईं होती | और शायद इतना भीषण परिणाम भी न हुआ होता | कौरवों और पाण्डवों के मध्य हुए महासंग्राम और भीषण रक्तपात में अठारह अक्षौहिणी सेना कट मरी थी |
                                                                           
व्यावहारिक जीवन-गत उदाहरण और महाभारत के परिणाम, इन्हीं सब कारणों से से सिद्ध होता है कि – मनुष्य अपनी जीभ पर जहाँ तक हो चौकसी कर सके करें अर्थात अपने वाणी पर नियंत्रण करें और आवश्यकता अनुसार उसको (जीभ) दबा सके तो दबाये, क्योंकि युद्ध हो अथवा जीवन संग्राम किसी भी झगड़े, युद्ध, क्रोध, आक्रोश, नफ़रत आदि का परिणाम विध्वंस ही होता है|

समय-समय पर होने वाले मानव मन के मतभेद, आक्रोश और विध्वंस का कारण वाणी पर नियंत्रण न होना अथवा जिह्वा (जीभ) की स्वच्छंदता ही तो है | इसी के कारण आपसी मनमुटाव, आक्रोश, मतभेद, विद्रोह, घृणा आदि बुराइयाँ जन्म लेती हैं | जिससे समय-समय पर भयंकर  नुकसान तबाही के साथ-साथ मानव अस्तित्व पर खतरे के बादल मँडराने लगते हैं |

क्योंकि मेरी दृष्टि में युद्ध हो या मतभेद अथवा वैचारिक मतान्तर विरोधी अथवा   हारने वाला पक्ष दोनों पक्ष  का तो सर्वनाश तो होता ही है, वह तो एक  इतिहास हो जाता है | किन्तु जितने वाले पक्ष पर पुनः सृजन की जिम्मेदारी तथा उत्तरदायित्व भी होता है, साथ ही युद्ध अथवा कलह का दुष्परिणाम और नुकसान अलग |

अतः मनुष्य यदि अपनी जिह्वा पर संयम रखकर उचित अनुचित का ध्यान रखकर वाणी को अभिव्यक्ति दे तो जिह्वा के कारण उत्पन्न होने वाले दुष्परिणाम से बचा जा सकता है |

महान सन्त “कबीर दास” जी ने भी वाणी को अभिव्यक्त करने की सलाह देते हुए कहा है –
            “ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय |
              अपना मन शीतल करे,  औरण को सुख होय ||   
                                                            ||समाप्त ||                             
धर्मेन्द्र पोद्दार
भाषा विभाग प्रमुख, सेक्रेड हार्ट स्कूल, सिलीगुड़ी

Sunday, April 19, 2020

मझधार में ज़िन्दगी (जीवन धारा)

(मानव जीवन की कई अवस्थाएँ होती है, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था | वैसे तो बाल्यावस्था, किशोरावस्था और युवावस्था में जीवन सम्बन्धी धारणाये बिलकुल निराली होती है, यह अवस्था अल्हड़पन में ही गुजर जाता है, किन्तु प्रौढ़ावस्था तक पहुँचते-पहुँचते मानव यह सोचने लगता की उसने अपने जीवन में क्या पाया और क्या खोया| यह कविता जीवन दर्शन पर आधारित है |)

न जाने कब, किस करवट, किस और चल रही ज़िन्दगी |
स्वप्न पूरी करने, किस और मुड  चली  ज़िन्दगी |
अधूरे ख्वाब पूरी करने की, प्रयास में मुड़ चली ज़िन्दगी |
धैर्य, हौसला, उत्साह, हिम्मत को सजोने लगी ज़िन्दगी |
                                       
कितनी रातें, कितने दिन प्रयास में बीती ज़िन्दगी |
कुछ सफ़लता,  कुछ आशा, कुछ उम्मीद में कट रही ज़िन्दगी |
यही सोचते-सोचते न जाने कब, मझधार में आ फँसी ज़िन्दगी |
समय के तेज़ प्रवाह में किस ओर बह चली ज़िन्दगी |
नाव में सवार पथिक की तरह है यह ज़िन्दगी |
मझधार में बवण्डर और तूफानों से जूझ रही ज़िन्दगी |
भँवर में और तेज़, आँधी, तूफ़ान, बवण्डरों से लड़ रही ज़िन्दगी |
नाव में बैठे पथिक की तरह शंकातुर ज़िन्दगी.. . |
दिन के उजाले में भी  धूल, धूसड़, अँधियारे सी ज़िन्दगी |
अब,  ज़िन्दगी और मौत के ख़ौफ़ से बे ख़ौफ़ ज़िन्दगी |
अब, परिणाम की परवाह से, बेफिक्र ज़िन्दगी…. |
सिर्फ़ ज़िन्दगी या हो मौत, आलिंगन को बेताब ज़िन्दगी |
धर्मेन्द्र पोद्दार 
                                                                                               भाषा विभाग प्रमुख, सेक्रेड हार्ट स्कूल, सिलीगुड़ी

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