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Sunday, May 25, 2025

गुरु नानक का प्रकाश पथ - रीना देवी Arthur Foot Academy

 

नाना नाम जहाज है,
जो जपे वह उतरे पार।
मेरा सद्गुरु करता मुझको प्यार,
वही तो है मेरा खेलनहार।

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु थे। उन्होंने एक ईश्वर की उपासना, मानवता की सेवा और सभी धर्मों में समानता का संदेश दिया।
उनका जीवन सादगी, करुणा और सत्य का प्रतीक था। उन्होंने ७ देशों की यात्रा की, जिसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, बांग्लादेश, सऊदी अरब (मक्का मदीना), श्रीलंका, तिब्बत शामिल हैं।
एक सच्चा इंसान वह है जो खुद भी अच्छा जीवन जीता है और दूसरों को भी अच्छा जीवन बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सिखाया कि भगवान एक है और वह सबमें है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या रंग का इंसान हो। उनकी वाणी "एक ओंकार" से यह बात साबित होती है। उन्होंने हमेशा मेहनत से काम करने, सच बोलने और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी।

गुरु नानक जी की यात्राओं और उपदेशों से मैं यह सीखती हूं कि ज्ञान बांटना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कभी किसी से नफरत नहीं की, बल्कि सबको प्रेम का संदेश दिया। वह सभी धर्मों को साथ लेकर चले।
भारत-पाकिस्तान सीमा, करतारपुर, ननकाना साहिब, ऐमनाबाद, शक्करगढ़, और बाबा फरीद के बारे में भी बताया गया।
गुरु नानक की यात्राएं आज भी हमें प्रेरणा देती हैं कि हम अपने विचारों को सीमित न रखें, खुले मन से सभी से सीखें और सच्चाई, प्रेम और सेवा के मार्ग पर चलें।

Sunday class में मैंने वह स्थान देखे जहां पर गुरु नानक जी गए थे और मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मैंने पहले कभी यह सब नहीं देखा था, लेकिन इस कक्षा के माध्यम से मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ।
वह सूफी संतों को भी अपने साथ लेकर चले और उन्होंने यही संदेश दिया कि हम सब एक हैं और ईश्वर भी एक ही है।

इस क्लास में मुझे यह भी अच्छा लगा जब बू अली कलंदर की दरगाह, पानीपत (हरियाणा, इंडिया) दिखाई गई।
हर दम मैं मौला अली का नाम जप करता हूं।
मां को जीत लेना ही ज़िंदगी का मकसद बना।

सूफी एजाज अहमद हाशमी, सेवादार, शेख शरफ-उद-दीन की दरगाह के बारे में बताया गया और वहां पर उनसे बात भी की।
मुझे बहुत अच्छा लगा और घर बैठे-बैठे हमने इतनी सारी जगहें देख लीं, समय का पता ही नहीं चला।
इन्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा, और अच्छी बातें भी सुनने को मिलीं और जानकारी भी प्राप्त हुई।

गुरु नानक देव जी के उपदेश वह ज्ञान का पवित्र प्रकाश हैं, जिसमें संपूर्ण विश्व को प्रकाशवान किया है।

रीना देवी


Friday, January 8, 2021

विज्ञान और मानव कल्याण - उस्मान गनी

Courtesy: deshabandhu.co.in

‘विज्ञान’ का शाब्दिक एवं वस्तुगत अर्थ है किसी विषय का विशेष और क्रियात्मक ज्ञान। क्रियात्मक ज्ञान होने के कारण ही विज्ञान अपने अन्वेषणों-अविष्कारों के रूप में मानव को कुछ दे सकता या वर्तमान में दे रहा है। विज्ञान भौतिक सुख-समृद्धियों का मूल आधार तो है, पर आध्यात्मिक सिद्धियों-समृद्धियों का विरोधी कदापि नहीं है। फिर भी कई बार क्या अक्सर विज्ञान को धर्म और अध्यात्मवाद का विरोधी समझ लिया जाता है। 

जबकि वस्तु सत्य यह है कि धर्म और अध्यात्म-भाव को वैज्ञानिक दृष्टि और विश्लेषण-शक्ति प्रदान कर विज्ञान मानव के हित-साधन में सहायता ही पहुंचाता है। विज्ञान ने उन अनेक रूढ़ियों और अंधविश्वासों पर तीखे प्रहार किए हैं, जिनकी भयानक जकड़ के कारण मानव-प्रगति के द्वार अवरुद्ध हो रहे थे। चेतना कुण्ठित होकर कुछ भी कर पाने में असमर्थ हो रही थी। यह विज्ञान की ही देन है कि आज हम अनेक विभ्रांत धारणाओं के चक्र-जाल से छुटकारा पाकर मानव की सुख-समृद्धि के लिए अनेक नवीन प्रगतिशील क्षितिजों के उदघाटन में समर्थ हो पाए हैं। ऊंच-नीच, जाति-पाति, छुआछूत, आदि अनेक धार्मिक धारणाओं में हमें विज्ञान ने ही मुक्ति दिलवायी है। हम आज खुले मन-मस्तिष्क से सोच-विचार सकते हैं, खुले वातावरण और वायुमंडल में सांस लेकर जी सकते हैं। आज हमारी मानसिकता को अनेकविध व्यर्थ भय के भूत आतंकित नहीं किए रहते। हम किसी भी बात का निर्णय खुले मन-मस्तिष्क से करके अपने व्यवहार को तदनुकूल बना पाने में समर्थ हैं। मानव-कल्याण के लिए इन सब बातों को हम आधुनिक विज्ञान की कल्याणकारी देन निश्चय ही मान सकते हैं।

ज्ञान-विज्ञान की नित नई उपलब्धियों के कारण ही आज शिक्षा का विस्तार संभव हो सका है। मानव को नई और सूझ-बूझपूर्ण आंख मिल सकी है। ज्ञान-विस्तार और मनोरंजन के विभिन्न क्षेत्र एवं संसाधन प्राप्त हो सके हैं। वह गांव-सीमा से उठकर नगर, नगर-सीमा से ऊपर जिला और प्रांत, फिर राष्ट्रीय और सबसे बढक़र अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं तक अपना, अपने मानवीय संबंधों का निरंतर विकास कर सका है। अनेक प्रकार के संक्रामक एंव संघातक रोगों से भी मुक्ति पाने में समर्थ हो सका है। ऐसा क्या नहीं, जो विज्ञान ने मानव को अपने सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए नहीं दिया?

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम मानव अपने मन-मस्तिष्क को विशाल, उदार और संतुलित बनाए। निहित स्वार्थों या दंभों को, सभी प्रकार की कुंठाओं को भुलाकर विज्ञान की गाय के बछड़े बनकर उसका दूध पीने-दुहने का ही प्रयत्न करें, जोंक बनकर रक्त चूसने का नहीं। बस-फिर मानवता का कल्याण ही कल्याण है। अन्य कोई उपाय नहीं है कल्याण का।

धन्यवाद,
उस्मान गनी
The Fabindia School
ugi@fabindiaschools.in

Thursday, October 22, 2020

जीवन मे शिक्षा का महत्व - उस्मान गनी

इल्म, ज्ञान, शिक्षा व नॉलेज शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची है। देखने में सभी शब्द बहुत छोटे हैं मगर इन्ही शब्दों के सहारे पूरी दुनिया चल रही है। यदि एक मिनट के लिए सोचा जाए कि दुनिया से इल्म या ज्ञान पूरी तरह से खत्म हो जाए तो क्या होगा ? तुम तुम्हारे और हम हमारे ! यानि किसी का किसी से कोई लेना-देना ही नहीं होगा। दुनिया पूरी जंगल बन जाएगी और फैल जाएगा जंगलराज। इसलिए इल्म या ज्ञान इंसान के लिए बेपनाह जरूरी है। एक सामान्य जिन्दगी जीने के लिए इंसान को रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह है ज्ञान।  क्योंकि ज्ञान वह बैसाखी है जिसके सहारे इंसान,  इंसानियत का तरीका सीखता है। 

जाहिल इंसान और अनपढ़ इंसान जानवरों से बदतर जिंदगी गुजारते है।  जब तक इंसान के पास ज्ञान या इल्म नहीं है वह तरक्की की राह पर आगे नहीं बढ़ सकता है। मगर इल्म हासिल करने वाला अवश्य ही तरक्की की मंजिलों को तय करता हुआ बुलंदी हासिल करता है। यानि इल्म वो शमां है जो इंसान की जिंदगी की राह को रोशन करती है जिसके ज्ञान के ऊजाले के सहारे इंसान हर तरह से अपनी जिंदगी रोशन करता है। इसलिए इंसान को जहां से भी जो इल्म मिले उसे हासिल करते रहना चाहिए क्योंकि इल्म से ही बुलंदी नसीब होती है। इसलिए कहा गया है -
'खुदी  को  कर  बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे तेरी रजा क्या हैI'

ज्ञान वह इनवेस्टमेंट हैं जिसका मुनाफा जीवन के अंत तक मिलता रहता है। यानि दुनिया की हर वस्तु खर्च करने के बाद अवश्य खत्म होती है। मगर शिक्षा या इल्म ऐसा धन है जिसे जितना अधिक खर्च किया जाएगा वह उतना ही अधिक बढ़ता जाएगा । दुनिया की हर वस्तु की चोरी हो सकती है मगर ज्ञान ऐसा धन है जिसकी कभी चोरी नहीं हो सकती। ज्ञान में कमी तभी हो सकती है जबकि इसे खर्च नहीं किया जाए या इकठ्ठा  करके रखा जाए। इसलिए ज्ञान को बांटते व हासिल करते रहना जरूरी है।

आज के दौर की हर कौम के मुखिया के साथ-साथ परिवार के मुखिया के लिए यह जरूरी हैं कि वे खुद अगर अच्छी शिक्षा नहीं पा सके हैं तो कोई बात नहीं मगर अपने बच्चों को उन्हें पूरी कोशिश कर अच्छी शिक्षा देने के लिए आगे आना चाहिए। केवल सोचते रहने से कुछ नहीं होगा, आगे बढ़कर पहल भी करनी पड़ेगी। इस पहल को अंजाम देने के लिए चाहे घर में दो निवाले कम खाए मगर अपने बच्चों को जरूर पढ़ाए। क्योंकि
'सोचने से कहां मिलते  हैं तमन्नाओं के शहर, चलना भी जरूरी है मंजिल को पाने के लिए।'
*धन्यवाद*
उस्मान गनी

Tuesday, September 15, 2020

पुस्तकों का उपयोग - राजेश्वरी राठौड़

पुस्तक .यानी किताब या ग्रंथ

पुस्तकें गागर में सागर की तरह होती है। 

पुस्तकों का हमारे जीवन में बहुत उपयोगी होती है ।वे एक मित्र के समान होती हैं। वह हमें सभ्य बनाने में सहायता करती है। जब भी हम किसी मुसीबत में होते हैं तो अच्छी पुस्तकें हमें रास्ता दिखाती हैं । हमें संस्कार व ज्ञान देकर एक अच्छा इंसान बनाती है। पुस्तकें कितनी प्रकार की होती है। जितनी ज्यादा आप किताबें पढ़ेंगे उतना ज्यादा ज्ञान अर्जन करेंगे। पुस्तक पढ़ने से कई लाभ मिलते हैं जैसे .मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मददगार ,तनाव कम होता है, बेहतर नींद में मदद ,याददाश्त मजबूत ,शांत और संयमित होना, अकेलापन से निजात ,दिमाग का अभ्यास इत्यादि लाभ मिलते  हैं ।  

प्रेरणादायक पुस्तकें हमारे जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार करती है। इससे आप की शब्दावली और भी विस्तृत हो जाती हैं । नए शब्द उनके अर्थ वह उनका प्रयोग जानने से हमारी लेखन में सुधार आता है।ं कुछ लोगों को पढ़ने का शौक होता है ।कोई भी पुस्तक पढ़ने लगते हैं। अगर आप नियमित रूप से नहीं पड़ते हैं तो आपको इसे शौक के तौर पर पुस्तक पढ़ना शुरू करना चाहिए । हर दिन एक किताब के कुछ पन्ने पढ़ने की धीरे-धीरे आदत डालें और इससे कई फायदे होंगे । आप इसे ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए एक से बढ़कर एक किताब पढ़ सकते हैं जिससे आपको काफी फायदा होगा। इसलिए खाली समय में अच्छी पुस्तकों को अपना साथी बनाना चाहिए और उनसे ज्ञान अर्जित करना चाहिए। 

 राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

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