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Tuesday, June 1, 2021

गुरु का जीवन मे महत्व: ज्योति सैन

गुरु: ब्रह्मा गुरु: विष्णु, गुरु:.देवो महेश्वर:
 गुरु:.साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः”।

यह गुरु ब्रह्मा विष्णु और महेश की तरह होते हैं गुरु ईश्वर का दिया वह उपहार है जो बिना स्वार्थ के मार्गदर्शन करता है। गुरु का जीवन में होना विशेष मायने रखता है गुरु हमारे दुर्गुणों को हटाता है गुरु के बिना हमारा जीवन अंधकारमय होता है अंधेरे में जैसे हम कोई चीज टटोलते हैं, और नहीं मिलती है वैसे गुरु के बिना जिंदगी अंधकारमय बन जाती है। जहाँ ज्ञान व संस्कार कुछ भी सीखने व पाने जैसा नहीं होता है।

गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। माता-पिता हम सभी के प्रथम गुरु होते हैं परंतु एक आध्यात्मिक गुरु का होना जीवन का मार्ग बदलने की तरह होता है। गुरु इस संसार का सबसे शक्तिशाली उपहार होता है। हम कोई भी विद्या बिना गुरु अर्जित नही कर सकते है। विभिन्न क्रिया-कौशल सीखने के लिए अलग-अलग गुण के गुरु की आवश्यकता होती है।

 गुरु शिष्य की परंपरा सदियों से चली आ रही है इस परंपरा का पालन करने वाला ही सच्चा गुरु व शिष्य कहलाएगा तथा तभी उसका जीवन सार्थक वह गौरवशाली बन पाएगा। गुरु को अपनी मर्यादा पालते हुए आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करनी चाहिए और अगर शिष्य गुरु के प्रति समर्पित होकर शिक्षा लेता है तो कोई बाधाएँ उन्हें रोक नहीं सकती और वह एक महान लक्ष्य को हासिल करता है।

Jyoti Sain 
The Fabindia School, Bali 

Monday, October 12, 2020

शिष्टाचार और अच्छे संस्कार - Rajeshwari Rathore

बच्चे कोरे कागज यानी खाली कागज की तरह होते हैं जैसे कोई कागज पर लिखेंगे वैसे अक्षर। वे अच्छी लिखावट से लिखेगें तो अच्छे अक्षर उभरेंगे और गंदी लिखावट में लिखेगें तो वैसे हीअक्षर उभरेंगे। इसलिए हमेशा बच्चों के सामने शिष्ट व्यवहार करना चाहिए। सबसे पहले माता-पिता व परिवार के व्यवहार की छाया बच्चों पर पड़ती है ।इसके पश्चात  वह विद्यालय में प्रवेश करते हैं। विद्यालय में अध्यापकगण व साथियों के आचरण का प्रभाव उन पर पड़ता है। छोटे बच्चों के माता-पिता को छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए। और उसे समय-समय पर अच्छे संस्कारों से अवगत  कराते रहना.चाहिए।जैसे अगर बच्चे गलती करते हैं तो प्यार से उनको समझाना चाहिए कि उनको ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए ।

एक बार में नहीं समझे तो बार बार समझाना चाहिए गलती होने पर माफी जरूरी है। बच्चों को सही और गलत का फर्क बताना चाहिए। बच्चों के सामने सच बोलना चाहिए कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए । जब वे पानी व्यर्थ गिरा रहे हो तो उनको बताइए कि पानी कितना मूल्यवान है। जब भी बच्चे खाना खाए तो  जितना खाए उतना ही देना चाहिए थाली में खाना नहीं छोड़ना चाहिए। बच्चों को पर्यावरण के बारे में बताना चाहिए कि कैसे हम सब को उस परत्रध्यान देना चाहिए। 

बच्चों को सिखाइए  कि कचरे को कूड़ेदान में डालें ,अपने बड़ों का आदर करें। उसेअपने से छोटे बच्चों से भी इज्जत से बोलना चाहिए ये सब संस्कार शिक्षक व परिवार से ही छोटी उम्र में ही मिलते हैं। बड़े होने पर जो शिष्टता बचपन में सीखी उसका प्रभाव जीवन भर रहता है। इसलिए हमेशा विनम्रता व शिष्टाचार का आचरण करना चाहिए। उससे ही अच्छे संस्कार बालक में पनपते हैं।

Rajeshwari Rathore
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Tuesday, September 15, 2020

पुस्तकों का उपयोग - राजेश्वरी राठौड़

पुस्तक .यानी किताब या ग्रंथ

पुस्तकें गागर में सागर की तरह होती है। 

पुस्तकों का हमारे जीवन में बहुत उपयोगी होती है ।वे एक मित्र के समान होती हैं। वह हमें सभ्य बनाने में सहायता करती है। जब भी हम किसी मुसीबत में होते हैं तो अच्छी पुस्तकें हमें रास्ता दिखाती हैं । हमें संस्कार व ज्ञान देकर एक अच्छा इंसान बनाती है। पुस्तकें कितनी प्रकार की होती है। जितनी ज्यादा आप किताबें पढ़ेंगे उतना ज्यादा ज्ञान अर्जन करेंगे। पुस्तक पढ़ने से कई लाभ मिलते हैं जैसे .मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मददगार ,तनाव कम होता है, बेहतर नींद में मदद ,याददाश्त मजबूत ,शांत और संयमित होना, अकेलापन से निजात ,दिमाग का अभ्यास इत्यादि लाभ मिलते  हैं ।  

प्रेरणादायक पुस्तकें हमारे जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार करती है। इससे आप की शब्दावली और भी विस्तृत हो जाती हैं । नए शब्द उनके अर्थ वह उनका प्रयोग जानने से हमारी लेखन में सुधार आता है।ं कुछ लोगों को पढ़ने का शौक होता है ।कोई भी पुस्तक पढ़ने लगते हैं। अगर आप नियमित रूप से नहीं पड़ते हैं तो आपको इसे शौक के तौर पर पुस्तक पढ़ना शुरू करना चाहिए । हर दिन एक किताब के कुछ पन्ने पढ़ने की धीरे-धीरे आदत डालें और इससे कई फायदे होंगे । आप इसे ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए एक से बढ़कर एक किताब पढ़ सकते हैं जिससे आपको काफी फायदा होगा। इसलिए खाली समय में अच्छी पुस्तकों को अपना साथी बनाना चाहिए और उनसे ज्ञान अर्जित करना चाहिए। 

 राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Monday, June 1, 2020

जिम्मेदारी और सहयोग: राजेश्वरी राठौड़


मनुष्य के जीवन में जिम्मेदारी का बहुत महत्व है। उससे भी जरूरी है जीवन में मिलने वाली जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाना अगर बचपन से ही छोटे-छोटे काम करें और उनका महत्व समझे तो वह थोड़ा बड़े होने पर अपने काम के प्रति जिम्मेदार बन जाएगा। यह जिम्मेदारी शुरू से बालक के संस्कार में आनी चाहिए

शिक्षकों द्वारा भी छात्रों में जिम्मेदारी से कार्य करने की आदत डालनी चाहिए जिससे वह आगे चलकर जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करें जैसे- कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चों को काम दिया जाता है, बच्चे उसे अपनी जिम्मेदारी समझ कर पूरा करके दिखाते हैंऐसे ही घर में, छोटे-छोटे काम माता-पिता द्वारा बताया जाना चाहिए, जिससे कि बालक की शुरू से ही काम करने की आदत पड़ जाती हैं

वह शुरू से ही कार्य में रुचि लेगा, तो उसमें जिम्मेदारी की भावना आएगी अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभाएगाखुद के प्रति जिम्मेदार होगा, तब ही परिवार के प्रति जिम्मेदार होगा और अपने परिवार का पूरा ख्याल रख सकेगाइसी तरह समाज के प्रति बालक कार्य करेगा तो जिम्मेदारी निभाएगाइसी तरह शिक्षा के माध्यम से एक अच्छा नागरिक बन कर देश की सेवा कर सकता है। इसलिए मनुष्य को जिम्मेदारी समझकर हर कार्य को रुचि से करना चाहिएउसे पूर्ण रूप से निभाना चाहिएइससे आगे चलकर वह अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं

हयोग का अर्थ है मिलजुल कर कार्य करना मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैउसे समाज में जीने के लिए मिलजुल कर रहना सीखना चाहिए और यह भावना हम छात्रों में विद्यार्थी जीवन में ही उत्पन्न कर सकते हैंहयोग की भावना एक छात्र में जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न करती है, साथ ही अन्य नैतिक मूल्यों के विकास को भी प्रोत्साहन देती है

संगठित होकर कार्य करने से छात्र-छात्राएँ अभिमान रहित और विनम्रता पूर्वक कार्य करना सीखते हैं, जो उनके विवेक को विकसित करता है। सहयोग पूर्वक कार्य करने से, विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों में रिश्ता जुड़ता है। इसी की नींव पर एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित होता है इसलिए मिलजुल कर रहना चाहिए व कार्य करना चाहिए   
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

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