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Thursday, December 10, 2020

आशा - जफ्फर खां

 Courtesy: 
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आशा जीवन रूपी फूल की सुगंध हैं, किसी कार्य या बात को पूर्ण हो जाने की उम्मीद को आशा कहते हैं |जहां आशा हैं, उत्साह हैं ,वही सफलता है | कार्य कैसा भी हो यदि मनुष्य आशा और उत्साह के साथ काम करता है तो निश्चय ही सफलता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं | 

मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए | जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा और निराशा के क्षण आते-जाते रहते हैं | मनुष्य जिस तरह की भावना रखता हैं वैसी ही  प्रेरणाएं मिलती हैं । आशा वह दीपक हैं जो कठिनाइयों में भी बुझता नहीं है, आत्मा से शक्ति पाकर निरंतर जलता रहता है । सच्ची मित्रता रंग रूप नहीं देखती हैं । मित्रता जीवन को रोमांच से भर देती हैं । मित्र के होने पर हम खुद को अकेला महसूस नहीं करते हैं । व्यक्ति अपने जन्म से ही अपनों के साथ रहता है, खेलता है, उनसे सीखता है पर हर बात व्यक्ति हर किसी को नहीं बताता है। 

वह केवल अपने सच्चे मित्र को ही अपने मन की बात बताता है । जो हमें समय-समय पर जीवन की कठिनाइयों से लड़ने में सहायता प्रदान करता है । हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में दोस्तों की मुख्य भूमिका होती हैं । हम अपना सुख दु:ख तथा हर तरह की बातें उसी के साथ बांट सकते हैं जो हमारे मित्र होते है। मित्रता जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकती हैं । सच्ची दोस्ती हमको सदैव सही मार्ग दिखाती हैं - जैसे मोती की माला के टूट  के बिखर जाने पर हम उन्हें बार-बार पीरोते हैं क्योंकि वह मूल्यवान हैं ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्र भी मूल्यवान होते हैं उनकी मित्रता हमें बनाए रखनी चाहिए । 

संसार में कई दोस्त होते हैं जो हमेशा अपने मित्रों की समृद्धि के समय ही साथ रहते हैं , लेकिन केवल सच्चे, ईमानदार और वफादार दोस्त ही होते हैं जो हमें कभी भी हमारे जीवन में कठिनाई और मुश्किल के समय में अकेला नहीं होने देते हैं और  हमारा  साथ देते हैं तथा  मनोबल बढाते है।सच्चे मित्र ही बिना विचार किए  हमको संकट में देखकर मदद के लिए आगे आ जाते है।
 जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Monday, October 12, 2020

शिष्टाचार और अच्छे संस्कार - Rajeshwari Rathore

बच्चे कोरे कागज यानी खाली कागज की तरह होते हैं जैसे कोई कागज पर लिखेंगे वैसे अक्षर। वे अच्छी लिखावट से लिखेगें तो अच्छे अक्षर उभरेंगे और गंदी लिखावट में लिखेगें तो वैसे हीअक्षर उभरेंगे। इसलिए हमेशा बच्चों के सामने शिष्ट व्यवहार करना चाहिए। सबसे पहले माता-पिता व परिवार के व्यवहार की छाया बच्चों पर पड़ती है ।इसके पश्चात  वह विद्यालय में प्रवेश करते हैं। विद्यालय में अध्यापकगण व साथियों के आचरण का प्रभाव उन पर पड़ता है। छोटे बच्चों के माता-पिता को छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए। और उसे समय-समय पर अच्छे संस्कारों से अवगत  कराते रहना.चाहिए।जैसे अगर बच्चे गलती करते हैं तो प्यार से उनको समझाना चाहिए कि उनको ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए ।

एक बार में नहीं समझे तो बार बार समझाना चाहिए गलती होने पर माफी जरूरी है। बच्चों को सही और गलत का फर्क बताना चाहिए। बच्चों के सामने सच बोलना चाहिए कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए । जब वे पानी व्यर्थ गिरा रहे हो तो उनको बताइए कि पानी कितना मूल्यवान है। जब भी बच्चे खाना खाए तो  जितना खाए उतना ही देना चाहिए थाली में खाना नहीं छोड़ना चाहिए। बच्चों को पर्यावरण के बारे में बताना चाहिए कि कैसे हम सब को उस परत्रध्यान देना चाहिए। 

बच्चों को सिखाइए  कि कचरे को कूड़ेदान में डालें ,अपने बड़ों का आदर करें। उसेअपने से छोटे बच्चों से भी इज्जत से बोलना चाहिए ये सब संस्कार शिक्षक व परिवार से ही छोटी उम्र में ही मिलते हैं। बड़े होने पर जो शिष्टता बचपन में सीखी उसका प्रभाव जीवन भर रहता है। इसलिए हमेशा विनम्रता व शिष्टाचार का आचरण करना चाहिए। उससे ही अच्छे संस्कार बालक में पनपते हैं।

Rajeshwari Rathore
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Sunday, August 30, 2020

आशा - जफ्फर खां

आशा जीवन रूपी फूल की सुगंध हैं, किसी कार्य या बात को पूर्ण हो जाने की उम्मीद को आशा कहते हैं |जहां आशा हैं, उत्साह हैं ,वही सफलता है | कार्य कैसा भी हो यदि मनुष्य आशा और उत्साह के साथ काम करता है तो निश्चय ही सफलता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं | मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए | जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा और निराशा के क्षण आते-जाते रहते हैं | मनुष्य जिस तरह की भावना रखता हैं वैसी ही  प्रेरणाएं मिलती हैं । आशा वह दीपक हैं जो कठिनाइयों में भी बुझता नहीं है, आत्मा से शक्ति पाकर निरंतर जलता रहता है । 

सच्ची मित्रता रंग रूप नहीं देखती हैं । मित्रता जीवन को रोमांच से भर देती हैं । मित्र के होने पर हम खुद को अकेला महसूस नहीं करते हैं । व्यक्ति अपने जन्म से ही अपनों के साथ रहता है, खेलता है, उनसे सीखता है पर हर बात व्यक्ति हर किसी को नहीं बताता है। वह केवल अपने सच्चे मित्र को ही अपने मन की बात बताता है । जो हमें समय-समय पर जीवन की कठिनाइयों से लड़ने में सहायता प्रदान करता है । हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में दोस्तों की मुख्य भूमिका होती हैं । हम अपना सुख दु:ख तथा हर तरह की बातें उसी के साथ बांट सकते हैं जो हमारे मित्र होते है। मित्रता जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकती हैं । 

सच्ची दोस्ती हमको सदैव सही मार्ग दिखाती हैं - जैसे मोती की माला के टूट  के बिखर जाने पर हम उन्हें बार-बार पीरोते हैं क्योंकि वह मूल्यवान हैं ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्र भी मूल्यवान होते हैं उनकी मित्रता हमें बनाए रखनी चाहिए । संसार में कई दोस्त होते हैं जो हमेशा अपने मित्रों की समृद्धि के समय ही साथ रहते हैं , लेकिन केवल सच्चे, ईमानदार और वफादार दोस्त ही होते हैं जो हमें कभी भी हमारे जीवन में कठिनाई और मुश्किल के समय में अकेला नहीं होने देते हैं और  हमारा  साथ देते हैं तथा  मनोबल बढाते है।सच्चे मित्र ही बिना विचार किए  हमको संकट में देखकर मदद के लिए आगे आ जाते है |

जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

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