Showing posts with label सफलता. Show all posts
Showing posts with label सफलता. Show all posts

Sunday, May 24, 2026

सकारात्मक सोच और सही निर्णय- सुनीता त्रिपाठी

सोच ही सब कुछ है, यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिक्षक का व्यवहार ही कक्षा का माहौल तय करता है। इसलिए, एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी विश्वास और अपनी सोच है।

रोमा ने भी यही किया। उन्होंने माता-पिता को बताया, पर बात केवल काउंसलर और अभिभावक तक ही सीमित रखी। रोमा की यह सोच थी कि किसी को शर्मिंदा न किया जाए। उन बच्चियों ने स्वीकार किया कि गलती हुई है। रोमा को लगा कि गलतियों को स्वीकार करना व्यक्तिगत विकास और सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर व्यक्ति गलती करता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम उन गलतियों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। अपनी कमियों को स्वीकार करना ईमानदारी और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ाता है।

इस अध्याय में मैंने सीखा कि असफलता और गलतियां जीवन का अंत नहीं होतीं, बल्कि हमें आगे बढ़ने की सीख देती हैं। हर व्यक्ति से गलती होती है, लेकिन सफल वही बनता है जो हार मानने के बजाय दोबारा प्रयास करता है। हमारी सोच ही तय करती है कि हम जीवन और स्वयं को किस प्रकार देखते हैं। जब हमें विश्वास होता है कि हम सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं, तब हम अधिक मेहनत करते हैं और आसानी से हार नहीं मानते। अच्छी सोच वाले लोग गलतियों को सीख के रूप में देखते हैं। हम जानते हैं कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सुधार करने का एक अवसर है। रोमा ने भी इसी तरह गोपनीयता रखते हुए, अपनी सोच को दर्शाते हुए सही फैसला लिया।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल


Sunday, May 18, 2025

आर्थर फ़ुट अकैडमी का संदेश: रुचि से किया कार्य बने जीवन की पहचान

 

संघर्ष ही जीवन का सार है, इसके बिना कोई सफलता नहीं मिलती। अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनो। हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब उसे यह सोचना पड़ता है कि वह कौन सा कार्य अपनाए। यह सोचना जीवन में सफलता की ओर ले जाता है। रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनने से व्यक्ति कठिनाइयों का सामना भी धैर्य और लगन से करता है। यदि कोई व्यक्ति अपने मनपसंद कार्यों को अपने मन और दिल से करता है, तो उसमें उसे सफलता जरूर मिलती है। अगर हम कोई काम करते हैं, तो उस काम में हमारी रुचि होनी चाहिए। अगर कोई काम हम अपनी रुचि और लगाव से करते हैं, तो उस काम में हमें मजा आता है और हमारा ध्यान भी रहता है। इसलिए हमें अपने काम में रुचि और लगाव रखना चाहिए।

– साक्षी खन्ना

"जीवन में सफलता का राज है, संघर्ष को हर दिन नई ऊँचाइयों की ओर धकेलना।"

यह पाठ हमें यह सिखाता है कि जीवन में किसी भी पेशे या करियर को चुनते समय सबसे ज़रूरी बात है — अपनी रुचि। जब हम वही कार्य करते हैं जिसमें हमारी रुचि होती है, तो हम उसे मन लगाकर करते हैं और उसमें सफलता पाने की संभावना बढ़ जाती है। यह पाठ यह भी समझाता है कि समाज और परिवार की अपेक्षाएँ ज़रूरी हो सकती हैं, लेकिन हमें अपने अंदर की आवाज़ को भी सुनना चाहिए।

मुझे यह पाठ प्रेरणादायक लगा क्योंकि यह हमें आत्म-विश्लेषण करने की प्रेरणा देता है। अब मैं समझ सकी हूँ कि केवल पैसा या प्रसिद्धि लंबे समय तक ख़ुशी नहीं दे सकते। असली संतोष और सफलता तभी मिलती है जब हम अपनी रुचि के कार्य करें।

यह पाठ हर विद्यार्थी के लिए मार्गदर्शक की तरह है जो अपने भविष्य के बारे में सोच रहा है।

"रुचि को राह दिखी, फिर से चेहरे पर मुस्कुराहट आई।"

"जो व्यक्ति खुद के बनाए रास्ते पर चलता है, वह हमेशा तरक्की करता है।"
रीना देवी

"जिसमें हो दिल की लगन, वही बने जीवन का चयन!"

पाठ "अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनो" ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि हम अपने जीवन का रास्ता चुनते समय दूसरों की अपेक्षाओं से अधिक अपने मन की आवाज़ क्यों नहीं सुनते। यह पाठ हमें यह समझाता है कि हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई विशेष प्रतिभा और रुचि होती है, और यदि हम उसी दिशा में कार्य करें जिसमें हमारा मन रमता है, तो हम न केवल सफलता पा सकते हैं, बल्कि ख़ुशी और संतुष्टि का भी अनुभव करते हैं।

समाज में अक्सर यह देखा गया है कि बच्चे अपने माता-पिता या समाज के दबाव में आकर कोई ऐसा व्यवसाय चुन लेते हैं, जिसमें उनकी कोई रुचि नहीं होती। इसका परिणाम यह होता है कि वे जीवन भर उस काम को बोझ समझकर करते हैं। जबकि यदि वही बच्चा अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुने — चाहे वह संगीतकार बनना चाहे, शिक्षक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी या फिर कोई कलाकार — तो वह पूरे मन और उत्साह से अपने कार्य को करता है।

यह पाठ मुझे यह प्रेरणा देता है कि मैं स्वयं को बेहतर जानूं, अपने सपनों को पहचानूं और उसी दिशा में आगे बढ़ूं, जहां मेरा मन, मेरी रुचि और मेरी शक्ति एक साथ काम करें।
यही सच्ची सफलता और आत्मसंतोष की कुंजी है।
साक्षी पाल

"जिस काम में दिल लगे, वहीं काम कर — हर दिन हो खुशियों से भरपूर सफर।
रुचि के बिना जो किया जाए, कभी वो बन जाता है बोझ उम्र भर।"

हर व्यक्ति की अपनी अलग-अलग रुचियाँ और क्षमताएँ होती हैं। अगर हम अपने शौक और रुचियों के अनुसार व्यवसाय चुनते हैं, तो न केवल सफलता, बल्कि ख़ुशी और संतुष्टि भी पा सकते हैं। रुचि से किया गया काम बोझ नहीं लगता, बल्कि प्रेरणा देता है। इसलिए व्यवसाय चुनने से पहले अपनी रुचियों को पहचानना और उसी क्षेत्र में करियर बनाना बुद्धिमानी है।

हमें वही व्यवसाय चुनना चाहिए जिसमें हमारी रुचि हो। रुचि अनुसार किया गया काम ख़ुशी देता है और सफलता भी। इससे जीवन में संतोष और तरक़्क़ी दोनों मिलती है।

"मन की मुरादें जब-जब बोल उठें,
रुचि की राहें जब खोल उठें।
चुनो वही व्यवसाय प्यारे,
जो सपनों को दे आकार हमारे।"

-ललिता पाल

"रूचि जीवन की सूची है
जिसके सहारे आप अपना जीवन बुन सकते हैं।" 
रूचि या शौक ऐसी क्रियाएं होती है। जिसमें खेल, कला, और संगीत आदि कार्य सम्मिलित होते हैं। हम रुचि के अनुसार अपने कार्य को करने में समर्थ हो सकते हैं। उन कार्यों को करने से हमें अधिक प्रशंसा मिलती है। हमारे जीवन के लिए अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकते है। यदि हम जिन कार्यों को करने में असमर्थ होते हैं। उन कार्यों को करने में हमें प्रशंसा नहीं मिलती है। और ना ही हम उन कार्यों को पूर्णता से कर पाते हैं। अपनी रुचि के अनुसार अपने व्यवसाय को करना चाहिए। हमारे शौक हमारे जीवन की दैनिक भीड़ से अलग रखकर हमारे दिमाग को ताजा और शांत बनाते हैं।
इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है। कि हमें अपनी रुचि के अनुसार अपना कार्य करना चाहिए।
- रूबल कौर

एक व्यक्ति का जीवन कई विकल्पों से भरा होता है, खासकर तब जब वह अपना भविष्य बना रहा होता है। किसी का पेशा या काम और करियर चुनना जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है, जो न केवल हमारी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है, बल्कि हमारी मानसिक संतुष्टि और जीवन की गुणवत्ता को भी निर्धारित करता है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि हम अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार अपना पेशा चुनें।

जब हम अपनी रुचि के अनुसार काम करते हैं, तो हमें थकान महसूस नहीं होती, बल्कि उस काम को करने में मज़ा आता है, क्योंकि तब काम एक ज़िम्मेदारी नहीं रह जाता, बल्कि यह एक उत्सव बन जाता है। इससे व्यक्ति अधिक आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, अगर हम दबाव में या केवल आर्थिक लाभ के लिए कोई ऐसा काम चुनते हैं, जिसमें हमारी रुचि नहीं है, तो वह समय के साथ बोझ बन सकता है।

इसलिए ज़रूरी है कि हम अपने मन के अंदर झाँककर अपनी रुचियों, योग्यताओं और सपनों को पहचानें और उसी के आधार पर अपना व्यवसाय और करियर चुनें।

"अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनना न केवल एक समझदारी भरा निर्णय है, बल्कि यह एक सुखद और संतुलित जीवन की कुंजी भी है।"
स्वाति

"रास्ते कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे पक्के हैं तो मंज़िल ज़रूर मिलती है।"

पाठ – "अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनो"
मैंने इस पाठ से यह सीखा है कि मुझे वही काम करना चाहिए जिसमें मेरी रुचि हो — चाहे वह काम कठिन हो या सरल, मैं उसे करने से पीछे नहीं हटती।

इंसान कोई भी हो, व्यवसाय की ज़रूरत सबको होती है। इसलिए कोई भी काम हो, उसमें रुचि रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि व्यवसाय जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी काम में हमारी रुचि होती है, तो हम उस काम को बहुत अच्छे से करते हैं। जो भी कार्य हम करें, उसमें रुचि होना आवश्यक है।

व्यवसाय कुछ भी हो, हर कोशिश में सफलता नहीं मिलती — लेकिन हर सफलता का कारण कोशिश ही होती है। इसलिए हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपनी रुचि के अनुसार कार्य करते रहना चाहिए।

— सिमरन कौर


Tuesday, November 29, 2022

स्वतंत्रता और शांति - ज्योति तड़ियाल


स्वतंत्रता और शांति
स्वतंत्रता का शाब्दिक अर्थ है – स्व+तंत्र+ता अर्थात स्वयं की इच्छा के अनुसार कार्य करना। जब हम स्वयं की इच्छानुसार मार्ग चयनित करते हैं और ऐच्छिक कार्य कर पाते हैं।

तिलक जी के अनुसार, “ स्वतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है।” यानि कि स्वतंत्रता हमारा अधिकार है और यदि कोई इसका हनन करता है तो भारतीय संविधान हमें सुरक्षा प्रदान करता है। परंतु बंधनहीन स्वतंत्रता अराजकता उत्पन्न करती है।

फ़्रांस के महान दार्शनिक रूसो ने लिखा था, “ मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, किंतु वह सर्वत्र बंधनों में जकड़ा हुआ है।“ रूसो का यह कथन फ़्रांस की राजक्रांति का नेतृत्व वाक्य बना और वह १७८९ में राजशाही से मुक्त हो गया।

स्वतंत्रता
विद्यार्थी जीवन की तीन घटनाएं जब मुझे स्वतंत्रता का अभाव अनुभव हुआ –
प्रथम – विषय चयन के समय मुझे अपना चयनित विषय नहीं मिल पा रहा था। कारण अंक कम आना। शिक्षिका की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी क्योंकि उन्हें अपने परीक्षाफल का भय था। परंतु उस विषय में मेरी पकड़ ठीक ठाक थी। केवल १२ वीं कक्षा में अंक कम आए थे। फिर भी क्यों हमें इस बात की स्वतंत्रता नहीं मिलती कि मेहनत से परिणाम सुधारा जा सकता है। बहरहाल बहुत परेशानियों के बाद मुझे वह विषय मिला और स्नातक में मेरे उसी विषय में सर्वाधिक अंक थे।

द्वितीय – बात कक्षा ८ की है। नए ऐच्छिक विषय के रूप में मेरे द्वारा संगीत का चयन किया गया। परंतु अध्यापिका को मेरी आवाज़ पसंद नहीं आई। मुझे अवसर ही नहीं मिल पाया। और विवशता में कला विषय कर चयन करना पड़ा। तृतीय – कभी कभी केवल ऊपरी तौर पर देख लेने भर से ही किसी के प्रति राय बना ली जाती है। कक्षा में भी जो छात्र थोड़ा संकोची होता है, उसे कुछ उत्तरदायित्व ही नहीं दिया जाता और प्रायः ऐसी परिस्थितियों से हम परिचित होते ही रहते हैं।

सार यही है कि केवल पुस्तकीय भाषा में स्वतंत्रता लिखने भर से ही स्वतंत्रता नहीं मिलती इसके लिए हृदय विशाल और धैर्य धारण करना आवश्यक है। साथ ही यह कुछ बंधनसहित होनी चाहिए।

शांति
शांति वह मानसिक अवस्था है जब मस्तिष्क तनाव व हिंसा से मुक्त हो। जब असफलता का भय मनुष्य को पीड़ित न करे। जब किए गए कार्य में कोई मीन मेख न निकले। जब दूसरे को नीचा दिखाने किर इच्छा बलवती न हो। देखा जाए तो अनेक सामाजिक कारण ऐसे होते हैं जब किसी के द्वारा शांति का मार्ग छोड़ हिंसा का मार्ग पकड़ लिया जाता है।

हम प्रायः अपने विद्यालय या आस पास भी ऐसा देखते हैं कि कुछ विद्यार्थी स्वयं को ठीक से प्रकट नहीं कर पाते हैं और हिंसक हो उठते हैं, कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरे विद्यार्थियों पर प्रभाव जमाने के लिए कुछ विद्यार्थी उग्र व हिंसक हो उठते हैं।

कक्षा कक्ष के संदर्भ में वायलेंस शब्द के अनेक अर्थ लिए जा सकते हैं। जैसे – हिंसा, आवेग, उग्रता, उग्र व्यवहार, बल, तीव्रता, उत्पात आदि। मेरा मानना है कि कक्षा में वायलेंस शब्द को भली भांति विद्यार्थियों को समझाया जाना चाहिए। इनका भेद भी स्पष्ट करना चाहिए कि केवल बल प्रयोग ही वायलेंस नहीं है। मौखिक व्यवहार द्वारा किसी को दुःखी करना भी वायलेंस है।

मेरा मानना है कि आज सबके ऊपर अपेक्षाओं का इतना भार है कि न चाहते हुए भी वह वायलेंस का शिकार हो जाता है, शांति कोसों दूर चली जाती है। इसलिए परिवार, विद्यालय, संस्थाओं, कार्यालयों का यह दायित्व बन जाता है कि वे यथासंभव वातावरण को शांत बनाए रखने का प्रयत्न करें, जिससे वॉयलेंस में कमी आ सके।

लक्ष्य कठिन अवश्य है परंतु असंभव नहीं है और पहल करने से ही अगर सफलता मिल पाएगी।।

प्रेषक
ज्योति तड़ियाल
द दून गर्ल्स स्कूल

Wednesday, July 20, 2022

सरलता और विश्वास - ज्योति तड़ियाल

सरलता
भूमिका मनुष्य को अपना व्यवहार इतना सरल रखना चाहिए कि जरूरत के समय वह सबकी पहुंच में हो। 

एक अध्यापिका के रूप में व्यवहार की सरलता उतनी ही आवश्यक है जितनी श्यामपट्ट के लिए चाक। विद्यार्थी तभी बिना किसी भय व झिझक के अपनी समस्या साझा करे पाते हैं। उनके मन में यह दुविधा नहीं रहती कहें या ना कहें।

व्यवहार की सरलता व सादगी का ज्वलंत उदाहरण रहे हैं राष्ट्रपति अब्दुल कलाम। उनसे बातें करना अपनत्व का अनुभव कराता था। यही अपनत्व विद्यार्थी शिक्षक अनुभव करे तो ही अध्यापन काल सार्थक व सफल है।

विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया

जब कक्षा कक्ष में सरलता का व्यवहार किया गया, सादगी को अपनाया गया तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन दृष्टिगत हुआ। वे विद्यार्थी जो मुखर थे उनसे घनिष्ठता बढ़ी, साथ ही वह विद्यार्थी जो अंतिम पंक्ति पर बैठा था अपनी बात व विचार रख पाया। व्यवहार की सरलता का प्रभाव दूरगामी होता है और कब यह किसके मन को कितना प्रभावित कर देती है यह कहना सरल तो नहीं है परंतु निश्चित ही इसके परिणाम सकारात्मक मिलते हैं।

विश्वास

विश्वास पर ही दुनिया कायम है। विश्वास की नींव पर ही सफलता का भवन  खड़ा है। इस विश्वास की शुरुआत परिवार से होती है, जहां माता पिता व बच्चे इस विश्वास की बेल को पोषित करते हैं और फिर इस विश्वास की परिणीति उस वट वृक्ष के रूप में होती है जिसे हम समाज के रूप में देखते हैं, घनिष्ट मित्रता के रूप में देखते हैं।

विश्वास की कसौटी पर विद्यार्थी

मुझे विश्वास है कि मेरे विद्यार्थी उस ज्ञान को ग्रहण कर रहे हैं जो मैं उन्हें दे रही हूं। उस कला को सीख रहे हैं जो मैं उन्हें सिखाना चाहती हूं।

यही विश्वास होता है जब किसी प्रतियोगिता के लिए हम प्रतिभागियों का चयन करते हैं। यह हमारा विश्वास होता है कि चयनित प्रतिभागी श्रेष्ठ है, और इस विश्वास पर खरा उतरने के लिए वह भी जी जान से जुट जाता है। और जब वह सफल होता है तो निःसंदेह उस विश्वास की जीत होती है जो दोनों का एक दूसरी पर  था।

विश्वास की इसी जीत पर राष्ट्रकवि की कुछ पंक्तियां लिखना चाहूंगी

सौ सौ निराशाए रहें, विश्वास यह दृढ़ मूल है,

इस आत्मलीला भूमि के, वह विभु न सकता भूल है।

अनुकूल अवसर पर दयामय, फिर दया दिखलाएंगे,

वे दिन यहां फिर आयेंगे, फिर आयेंगे, फिर आयेंगे।

( कविता हमारी सभ्यता और कवि मैथिलीशरण गुप्त)


प्रेषक ज्योति तड़ियाल
विद्यालय द दून गर्ल्स स्कूल  JOL परियोजना ४ सरलता और विश्वास LFIN 2022 के हैप्पी टीचर्स प्रोग्राम


Thursday, December 10, 2020

आशा - जफ्फर खां

 Courtesy: 
https://images.app.goo.gl/YRfjEKCyatgh3iSj6
आशा जीवन रूपी फूल की सुगंध हैं, किसी कार्य या बात को पूर्ण हो जाने की उम्मीद को आशा कहते हैं |जहां आशा हैं, उत्साह हैं ,वही सफलता है | कार्य कैसा भी हो यदि मनुष्य आशा और उत्साह के साथ काम करता है तो निश्चय ही सफलता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं | 

मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए | जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा और निराशा के क्षण आते-जाते रहते हैं | मनुष्य जिस तरह की भावना रखता हैं वैसी ही  प्रेरणाएं मिलती हैं । आशा वह दीपक हैं जो कठिनाइयों में भी बुझता नहीं है, आत्मा से शक्ति पाकर निरंतर जलता रहता है । सच्ची मित्रता रंग रूप नहीं देखती हैं । मित्रता जीवन को रोमांच से भर देती हैं । मित्र के होने पर हम खुद को अकेला महसूस नहीं करते हैं । व्यक्ति अपने जन्म से ही अपनों के साथ रहता है, खेलता है, उनसे सीखता है पर हर बात व्यक्ति हर किसी को नहीं बताता है। 

वह केवल अपने सच्चे मित्र को ही अपने मन की बात बताता है । जो हमें समय-समय पर जीवन की कठिनाइयों से लड़ने में सहायता प्रदान करता है । हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में दोस्तों की मुख्य भूमिका होती हैं । हम अपना सुख दु:ख तथा हर तरह की बातें उसी के साथ बांट सकते हैं जो हमारे मित्र होते है। मित्रता जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकती हैं । सच्ची दोस्ती हमको सदैव सही मार्ग दिखाती हैं - जैसे मोती की माला के टूट  के बिखर जाने पर हम उन्हें बार-बार पीरोते हैं क्योंकि वह मूल्यवान हैं ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्र भी मूल्यवान होते हैं उनकी मित्रता हमें बनाए रखनी चाहिए । 

संसार में कई दोस्त होते हैं जो हमेशा अपने मित्रों की समृद्धि के समय ही साथ रहते हैं , लेकिन केवल सच्चे, ईमानदार और वफादार दोस्त ही होते हैं जो हमें कभी भी हमारे जीवन में कठिनाई और मुश्किल के समय में अकेला नहीं होने देते हैं और  हमारा  साथ देते हैं तथा  मनोबल बढाते है।सच्चे मित्र ही बिना विचार किए  हमको संकट में देखकर मदद के लिए आगे आ जाते है।
 जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Tuesday, November 24, 2020

समय का सदुपयोग - उस्मान गनी

Courtesy: Quora.com
समय चक्र की गति बड़ी अदभुद है। समय का चक्र निरंतर गतिशील रहता है रुकना इसका धर्म नहीं है। विश्व में समय सबसे अधिक महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान धन माना गया है। यदि मनुष्य की अन्य धन सम्पति नष्ट हो जाए तो संभव है वह परिश्रम, प्रयत्न एवं संघर्ष से पुनः प्राप्त कर सकता है किन्तु बीता हुआ समय वापस नहीं आता। इसी कारण समय को सर्वाधिक मूल्यवान धन मानकर उसका सदुपयोग करने की बात कही जाती है।

समय के सदुपयोग में ही जीवन की सफलता का रहस्य निहित है जो व्यक्ति समय का चक्र पहचान कर उचित ढंग से कार्य करें तो उसकी उन्नति में चार चाँद लग सकता हैं। कहते हैं हर आदमी के जीवन में एक क्षण या समय अवश्यक आया करता है कि व्यक्ति उसे पहचान – परख कर उस समय कार्य आरम्भ करें तो कोई कारण नहीं कि उसे सफलता न मिल पाए। समय का सदुपयोग करने का अधिकार सभी को समान रूप से मिला है। किसी का इस पर एकाधिकार नहीं है। संसार में जितने महापुरुष हुए हैं वे सभी समय के सदुपयोग करने के कारण ही उस मुकाम पर पहुंच सके है। काम को समय पर संपन्न करना ही सफलता का रहस्य है।

एक – एक सांस लेने का अर्थ है समय की एक अंश कम हो जाना जीवन का कुछ छोटा होना और मृत्यु की और एक – एक कदम बढ़ाते जाना। पता नहीं कब समय समाप्त हो जाये और मृत्यु आकर साँसों का अमूल्य खजाना समेत ले जाये। इसलिए महापुरुषों ने इस तथ्य को अच्छी तरह समझकर एक सांस या एक पल को न गवाने की बात कही है। संत कबीर का यह दोहा समय के सदुपयोग का महत्व प्रतिपादित करने वाला है।

"काल्ह करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल मैं परले होयेगी, बहुरि करोगे कब"I

उस्मान गनी
The Fabindia School
ugi@fabindiaschools.in

Monday, October 19, 2020

धैर्य - जफर खान

धैर्य हमारे जीवन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि हम अपने जीवन में धैर्य रखते हैं तो बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं, यहां तक की बड़ी से बड़ी सफलता भी हम धैर्य रखकर प्राप्त कर सकते हैं बहुत सारे लोगों ने यह साबित किया है कि धैर्य रखकर हम अपने सारे सपनों को भी पूरा कर सकते हैं हम कोई कार्य शुरू करते हैं उसमें हमको बार-बार असफलता मिलती है तो हम उस कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं यानी हम  धैर्य नहीं रखते हैं तो हमको उसका कोई परिणाम नहीं मिलता है | 

लेकिन यदि हम बार-बार अपने कार्य को करते रहते हैं, तो निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है यदि हमारे पास कार्य करने का सही तरीका और हमने लगातार प्रयास किया है तो हमें सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता है | जिंदगी में हमें हर किसी की जरूरत पड़ती है साथ में धैर्य की भी आवश्यकता पड़ती है क्योंकि किसी भी कार्य में सफलता हमेशा समय से पहले नहीं मिलती है | यदि हम बिल्कुल भी धैर्य नहीं रखेंगे और समय का इंतजार बिल्कुल भी नहीं करेंगे तो हम जीवन में पीछे रह जाएंगे | हमें अपने जीवन में यह सोचने की जरूरत है कि क्या  हम वह कार्य सही दिशा में कर रहे हैं, सही तरह से कर रहे हैं तब हमको सफलता जरूर मिलेगी धैर्य के बिना जीवन में किसी बड़े कार्य में सफलता नहीं मिल सकती  है | 

हम कोई बिजनेस शुरू करते हैं और यदि हम उस में तुरंत ही सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो यह संभव नहीं है | हमको उस बिजनेस को समझने की जरूरत है, उस बिजनेस के हर पहलू के बारे में समझ कर यदि हम बिजनेस को करेंगे तो हमको सफलता मिलेगी इसके लिए हम को कुछ समय तो जरूर ही देना पड़ेगा इसका मतलब है हमको धैर्य जरूर रखना पड़ेगा | धैर्य के बगैर कुछ भी बड़ा हम अपने जीवन में नहीं कर पाएंगे | मानव जाति में  धैर्य की बहुत आवश्यकता होती हैं इसलिए सभीी को धैर्य रखकर कार्य करना चाहिए  जिससे हमारा हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम अच्छा कार्य कर सकते है|

 जफर खान, The Fabindia School <zkn@fabindiaschools.in>


Tuesday, July 28, 2020

सफलता - उषा पंवार

"मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।"

सफलता किसी को भी एक झटके में नहीं मिलती या रातों-रात हासिल नहीं होती है लेकिन लगातार प्रयास करते
रहने से एक दिन जरूर मिलती है। सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके जीवन में एक लक्ष्य होता है और वे अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार होते हैं ।अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करें और सभी दूसरे विचारों को अपने दिमाग से निकाल दें यही सफलता की कुंजी है।

अतः सभी छात्रों को अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। हर किसी के पास अपना अलग सामर्थ्य और काबिलियत होती है, कोई छात्र पढ़ाई में अव्वल होता है ,तो कोई छात्र खेलकूद में ,फोटोग्राफी में ,संगीत में, नृत्य में ,तो कोई चित्रकारी और शिल्पकारी मेंअव्वल होते हैं। कई छात्र ऐसे भी होते हैं जो सफल तो होना चाहते हैं लेकिन इसके लिए प्रयास नहीं करते ,जरूरी नहीं है कि आप अपने क्लास में अव्वल आए बल्कि जरूरी है आप अपने अंदर की काबिलियत को समझे और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने लक्ष्य को निर्धारित करें।

रुपया ,पैसा, धन-दौलत कोई भी चुरा सकता है छीन सकता है लेकिन नहीं छीनी जा सकती है तो उसकी काबिलियत गुण। अतः हम में हुनर है तो कदर है।

धन्यवाद,
उषा पंवार

Sunday, May 17, 2020

साहस और धैर्य: आयशा टॉक

साहस का उपयोग करने से हम जीवन में आने वाली मुश्किलों को जीत पाते हैं। हर व्यक्ति के मन में भय या डर होता है, लेकिन जब वह साहस का उपयोग करते हुए आगे बढ़ता है और उस डर का सामना करता है, तो उस व्यक्ति का विकास होता है। संसार में आधे से अधिक लोग तो इसलिए असफल हो जाते है कि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे बहुत जल्दी घबरा जाते हैं। असफल होने के बाद भी सफलता के लिए कोशिश करते रहना ही साहस है। यदि आपके पास काम करने का सही तरीका है और आपने लगातार साहस किया है तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता।


जिंदगी में किसी भी कार्य को करने के लिए हमें धैर्यवान होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि किसी भी कार्य में सफलता हमेशा समय से पहले नहीं मिलती है। धैर्य एवं सहनशीलता के बिना हम जीवन में कुछ भी बड़ा काम नहीं कर पाएँगे। कभी - कभी हम किसी कार्य को बिना धैर्य रखें, समाप्त करने की सोचते हैं और वह कार्य हम सही ढंग से नहीं कर पाएँगे या बीच में ही छोड़ देंगे और हमें सफलता नहीं मिलेगी।

इस प्रकार जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए साहस एवं धैर्य का होना बहुत जरूरी होता है। जैसे कक्षा में सभी विद्यार्थी पढ़ाई में एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ विद्यार्थी डर के मारे किसी कार्य में आगे आने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते हैं, ऐसी परिस्थिति में कक्षा के अध्यापक को उन विद्यार्थियों में सबसे पहले साहस जगाना होता है। उनकी गलतियों को धैर्यपूर्वक सुधारना चाहिए एवं उनको उनकी कमियों के साथ हर हाल में स्वीकार करना होता है। तभी उन विद्यार्थियों में साहस एवं धैर्य का संचार हो सकता हैं और वे जीवन में कुछ अच्छा कर सकेंगे। 
Ayasha Tak
The Fabindia School

Blog Archive