स्वतंत्रता और शांति - ज्योति तड़ियाल


स्वतंत्रता और शांति
स्वतंत्रता का शाब्दिक अर्थ है – स्व+तंत्र+ता अर्थात स्वयं की इच्छा के अनुसार कार्य करना। जब हम स्वयं की इच्छानुसार मार्ग चयनित करते हैं और ऐच्छिक कार्य कर पाते हैं।

तिलक जी के अनुसार, “ स्वतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है।” यानि कि स्वतंत्रता हमारा अधिकार है और यदि कोई इसका हनन करता है तो भारतीय संविधान हमें सुरक्षा प्रदान करता है। परंतु बंधनहीन स्वतंत्रता अराजकता उत्पन्न करती है।

फ़्रांस के महान दार्शनिक रूसो ने लिखा था, “ मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, किंतु वह सर्वत्र बंधनों में जकड़ा हुआ है।“ रूसो का यह कथन फ़्रांस की राजक्रांति का नेतृत्व वाक्य बना और वह १७८९ में राजशाही से मुक्त हो गया।

स्वतंत्रता
विद्यार्थी जीवन की तीन घटनाएं जब मुझे स्वतंत्रता का अभाव अनुभव हुआ –
प्रथम – विषय चयन के समय मुझे अपना चयनित विषय नहीं मिल पा रहा था। कारण अंक कम आना। शिक्षिका की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी क्योंकि उन्हें अपने परीक्षाफल का भय था। परंतु उस विषय में मेरी पकड़ ठीक ठाक थी। केवल १२ वीं कक्षा में अंक कम आए थे। फिर भी क्यों हमें इस बात की स्वतंत्रता नहीं मिलती कि मेहनत से परिणाम सुधारा जा सकता है। बहरहाल बहुत परेशानियों के बाद मुझे वह विषय मिला और स्नातक में मेरे उसी विषय में सर्वाधिक अंक थे।

द्वितीय – बात कक्षा ८ की है। नए ऐच्छिक विषय के रूप में मेरे द्वारा संगीत का चयन किया गया। परंतु अध्यापिका को मेरी आवाज़ पसंद नहीं आई। मुझे अवसर ही नहीं मिल पाया। और विवशता में कला विषय कर चयन करना पड़ा। तृतीय – कभी कभी केवल ऊपरी तौर पर देख लेने भर से ही किसी के प्रति राय बना ली जाती है। कक्षा में भी जो छात्र थोड़ा संकोची होता है, उसे कुछ उत्तरदायित्व ही नहीं दिया जाता और प्रायः ऐसी परिस्थितियों से हम परिचित होते ही रहते हैं।

सार यही है कि केवल पुस्तकीय भाषा में स्वतंत्रता लिखने भर से ही स्वतंत्रता नहीं मिलती इसके लिए हृदय विशाल और धैर्य धारण करना आवश्यक है। साथ ही यह कुछ बंधनसहित होनी चाहिए।

शांति
शांति वह मानसिक अवस्था है जब मस्तिष्क तनाव व हिंसा से मुक्त हो। जब असफलता का भय मनुष्य को पीड़ित न करे। जब किए गए कार्य में कोई मीन मेख न निकले। जब दूसरे को नीचा दिखाने किर इच्छा बलवती न हो। देखा जाए तो अनेक सामाजिक कारण ऐसे होते हैं जब किसी के द्वारा शांति का मार्ग छोड़ हिंसा का मार्ग पकड़ लिया जाता है।

हम प्रायः अपने विद्यालय या आस पास भी ऐसा देखते हैं कि कुछ विद्यार्थी स्वयं को ठीक से प्रकट नहीं कर पाते हैं और हिंसक हो उठते हैं, कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरे विद्यार्थियों पर प्रभाव जमाने के लिए कुछ विद्यार्थी उग्र व हिंसक हो उठते हैं।

कक्षा कक्ष के संदर्भ में वायलेंस शब्द के अनेक अर्थ लिए जा सकते हैं। जैसे – हिंसा, आवेग, उग्रता, उग्र व्यवहार, बल, तीव्रता, उत्पात आदि। मेरा मानना है कि कक्षा में वायलेंस शब्द को भली भांति विद्यार्थियों को समझाया जाना चाहिए। इनका भेद भी स्पष्ट करना चाहिए कि केवल बल प्रयोग ही वायलेंस नहीं है। मौखिक व्यवहार द्वारा किसी को दुःखी करना भी वायलेंस है।

मेरा मानना है कि आज सबके ऊपर अपेक्षाओं का इतना भार है कि न चाहते हुए भी वह वायलेंस का शिकार हो जाता है, शांति कोसों दूर चली जाती है। इसलिए परिवार, विद्यालय, संस्थाओं, कार्यालयों का यह दायित्व बन जाता है कि वे यथासंभव वातावरण को शांत बनाए रखने का प्रयत्न करें, जिससे वॉयलेंस में कमी आ सके।

लक्ष्य कठिन अवश्य है परंतु असंभव नहीं है और पहल करने से ही अगर सफलता मिल पाएगी।।

प्रेषक
ज्योति तड़ियाल
द दून गर्ल्स स्कूल

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