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Friday, April 18, 2025

पाठ दबाव से निपटना - आर्थर फूट अकैडमी


"शासन संचालन का है विज्ञान,
सबसे प्यारा हमारा संविधान।
भारतीय संविधान के रचनाकार,
बाबासाहेब की हो जय जयकार।
संविधान हिन्दुस्तान की जान है।"

दबाव से निपटने से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारी जीवनशैली में दबाव का होना बहुत ज़रूरी है। लेकिन हमें दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। जीवन में दबाव तब ज़्यादा बढ़ता है, जब हम अपने काम को समय से नहीं करते और सोचते हैं, "आज नहीं, कल," और वह कल दबाव में बदल जाता है। इसलिए हमें अपने काम को समय पर करके लेना चाहिए, जिससे दबाव हमारे ऊपर हावी न हो, क्योंकि अगर ऐसा होता है, तो हम अपने लक्ष्य से पीछे हटते चले जाएंगे। अगर हम मेहनत और लगन से अपने कार्य को करते हैं, तो हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। "क्योंकि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।"

जैसे पाठ के माध्यम से भी बताया गया है, एक बार मुझे एक न्यूरोसर्जन से मिलने का मौका मिला, जो दबाव का सामना अच्छे से करते हैं। हम योजना बनाने में चाहे कितने भी हो, लेकिन दबाव कभी नहीं जाता। दबाव जीवन का अभिन्न अंग होता है। प्रत्येक व्यक्ति दैनिक जीवन में लगभग असंख्य चुनौतियों का सामना करता है, जो व्यक्ति में अपने सामर्थ्य अनुसार दबाव की अनुभूति को प्रेरित करती है। व्यक्ति को सार्थक और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिए इन चुनौतियों से निपटने की जरूरत होती है।

दबाव से निपटने (coping) का मतलब होता है दबाव पर नियंत्रण करना, उसे कम करना, या फिर उसे सहन करने के लिए अपने मानसिक संसाधनों को जागरूकता के साथ जैसे स्वयं के लिए प्रयोग करना, और व्यक्तिगत और पारस्परिक समस्याओं का समाधान योजना।

क्योंकि अमृता हमारे स्कूल में ऐसी बच्ची है, जिसे बहुत कुछ पढ़ना आता है, पर वह अपने माता-पिता को नहीं बता पाती। लेकिन जब स्कूल में उसके माता-पिता यह शिकायत लेकर आते हैं, तो वह उनके सामने कुछ ही बता पाती है, लेकिन लिखकर सब देती है। जो उससे बोलते हैं।

दबाव से निपटने के लिए:
"भरपूर दबाव पड़ने पर भी,
कभी अनुचित काम न करें।

जिस कार्य को करने के लिए
आपका मन गवाही न दे, उसे किसी आदरणीय व्यक्ति के
कहने पर भी न करें।"
रीना

पाठ दबाव से निपटना से मुझे यह सीखने को मिला कि ज़िंदगी में दबाव होना ज़रूरी है, पर वह दबाव जो हमें मंज़िल की ओर लेकर जाए, हमें ज़िंदगी में कुछ नया सिखा कर जाए — वह दबाव ज़िंदगी में होना ज़रूरी है।
जैसे न्यूरोसर्जन डॉ. बेन कार्सन से पूछा गया कि आप दबाव का सामना कैसे करते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया — 

"आप दबाव से युद्ध मत कीजिए, बल्कि दबाव को ही बदल दीजिए। उसको बेहतरीन प्रेरणा में ले जाइए, ताकि आपको वह दबाव न लगे, बल्कि वह आपको अच्छी राह दिखाए।"
ऐसा नहीं है कि ज़िंदगी में हमें ही दबाव है, बल्कि हर व्यक्ति दबाव में होता है। पर अगर हम सोच के ही हार मान लें कि हमारे ऊपर दबाव है, तो हम पहले ही हार जाते हैं। मगर अगर हम यह सोचें कि यह दबाव हमें हमारी मंज़िल की ओर लेकर जाएगा, तो ज़िंदगी में यह दबाव होना ज़रूरी है।
कुछ-कुछ दबाव ज़िंदगी में ऐसे भी होते हैं जो हमें हमारे ऊपर 'दबाव' ही लगते हैं। तो ऐसे दबाव में हमें नहीं रहना चाहिए।
साक्षी खन्ना 
बहुत ज़्यादा दबाव पड़ने पर भी कभी अनुचित काम न करें। जिस काम को करने के लिए आपका मन गवाही न दे, उसे किसी आदरणीय व्यक्ति के कहने पर भी न करें।
पाठ 'दबाव से निपटना' से हमने सीखा कि हम सभी के जीवन में अलग-अलग तरह के दबाव होते हैं। इनमें से कुछ दबावों का हमारे जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, तो कुछ का गलत प्रभाव, जो हमारे जीवन को पूरी तरह से बदल सकता है।
परंतु अगर हम दबाव की स्थिति में भी शालीनता बनाए रखने का साहस रखते हैं, तो कहीं न कहीं हमारी ज़िंदगी भी बदल सकती है और हमें एक सही दिशा या मंज़िल मिल सकती है।

"दबाव हद से ज़्यादा बढ़ जाए तो दो ही चीज़ें होती हैं — या तो हम टूटकर बिखर जाते हैं, या भयंकर दबाव को तोड़ने की ऐसी ताक़त हासिल कर लेते हैं, जो कि अब तक हम में थी ही नहीं।"
स्वाति

"होके मायूस ना, यूं शाम की तरह ढलते रहिए,
ज़िंदगी एक भोर है, सूरज की तरह निकलते रहिए।"

पाठ "दबाव से निपटना" से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। और जैसे कि पाठ में कई किस्से सुनने को मिले हैं, ठीक उसी प्रकार सबके जीवन में दबाव होता है। स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं पर अपने माता-पिता का दबाव या फिर अध्यापकों का भी हो सकता है। आजकल हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई-लिखाई और हर गतिविधि में आगे हो। और माता-पिता की ये शिकायतें अध्यापकों से भी करते हैं कि हमारा बच्चा कक्षा में, स्कूल में सबसे होशियार होना चाहिए।

इस प्रकार, अगर उनके पड़ोसी का बच्चा अपनी कक्षा में प्रथम आ जाए, तो वे अपने बच्चे को डांटते-धमकाते हैं, प्रथम आने वाले बच्चे से उसकी तुलना करते हैं। जिससे कभी-कभी बच्चे का मनोबल कम होने लगता है, और उसके मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं।

तथा इस पाठ में बताया गया है कि हमारे सामने अनेकों चुनौतियां और काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। और इन चुनौतियों और कठिनाइयों पर हमें किस प्रकार विजय प्राप्त करनी है। जैसे कि पाठ में एक पंक्ति लिखी हुई है, "मज़बूत बनो, दबाव में आकर काम मत करो, दबाव पर काम करो।"

जीवन आनंद लेने के लिए है, सहने के लिए नहीं।
साक्षी पाल

"कोई भी मुश्किल थका नहीं सकती,
रास्ते की रुकावट गिरा नहीं सकती,
अगर जूनून है जितने का, तो हार भी हरा नहीं सकती।"

दबाव से निपटना — ऐसे तो हर इंसान के जीवन में दबाव होते हैं, और उनका होना भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर किसी के जीवन में दबाव न हो, तो फिर किसी का भी कोई लक्ष्य नहीं होगा। क्योंकि अगर हमारे सामने किसी भी क्षेत्र में कोई दबाव हो, तो हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति करने की पूरी कोशिश करते हैं और उसे प्राप्त भी कर लेते हैं।

मुझे इस पाठ में न्यूरोसर्जन डॉ. बेन कार्सन की यह लाइन बहुत अच्छी लगी, जब उनसे पूछा गया कि दबाव का सामना आप कैसे करते हैं, तो उन्होंने जो जवाब दिया:

"आप योजना बनाने में चाहे कितने ही अच्छे हों, लेकिन दबाव कभी नहीं जाता। इसलिए उससे युद्ध मत करो, मैं तो बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दबाव को प्रेरणा में बदल देता हूं।"

तो मैं भी यही चाहती हूँ कि मैं अपने बच्चों को बहुत अच्छे से समझा पाऊं, जिससे उन्हें स्कूल आना और पढ़ना किसी भी प्रकार से दबाव न लगे, बल्कि वे इंतजार करें कि कब रात बीते और कब सुबह हो और हम स्कूल जाएं। एक नई उमंग के साथ हर उस चुनौती का सामना करें जो उनके जीवन में आए, चाहे वो पढ़ाई हो या फिर किसी खेल में भाग लेना हो। जो भी कला उनके अंदर छिपी हो, उसका ऐसा प्रदर्शन करें कि हर दबाव से आगे निकल जाएं और हर दबाव को चुनौती दें कि हम इन सबके लिए पहले से तैयार हैं।
ललिता पाल

"सीखने का जुनून पैदा करो, अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपकी सफलता निश्चित है।"

मैं सिमरन, आर्थर फुट एकेडमी की अध्यापिका हूं।
मैंने साहस पाठ से यही सिखा कि अगर जिंदगी में एक बार कामयाबी नहीं मिली, तो बार-बार उसी कार्य को करना चाहिए।
वह कार्य कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर हमारे अंदर साहस और हिम्मत है, तो हम उसे जरूर कर सकते हैं।
जैसे मैं अंग्रेजी बोलने और पढ़ने में कमजोर हूं, तो मैं अंग्रेजी बोलना और पढ़ना जरूर सीखूंगी।
अगर मैं सीखने का साहस करूंगी, तो जरूर सीख जाऊंगी और बच्चों को भी सीख दूंगी।
ज़िंदगी में कैसी भी परिस्थितियाँ क्यों न आ जाएं, मैं उनका सामना करने का साहस और हिम्मत जरूर रखूंगी।
सिमरन कौर

हमें दबाव से निपटने के उपाय ढूंढ़ने चाहिए, जैसा कि बच्चों पर बहुत दबाव होता है। उन्हें अपने माता-पिता, दादा-दादी और स्कूल का दबाव भी होता है। उन्हें परीक्षा में उत्तीर्ण होने का दबाव होता है और वह दबाव के कारण अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। इस कारण बच्चों के परीक्षा में अंक कम आते हैं और उस पर माता-पिता का भी अधिक दबाव पड़ जाता है।

हाल ही में मैंने देखा कि 14 साल के बच्चे का वजन 4 महीने में 10 किलो कम हो गया। इस तरह वजन घटना कहीं बीमारियों का संकेत हो सकता है। बच्चे की डॉक्टर से जांच भी कराई गई और पता चला कि बच्चे को किसी बात का दबाव था। उस बच्चे से पूछने पर पता चला कि उसके स्कूल में कुछ बच्चे उसके मोटापे पर उसका मजाक उड़ाते थे और उसने यह बात दिल पर ले ली। इस कारण उस बच्चे ने खाना-पीना भी छोड़ दिया, जिस कारण वह बहुत कमजोर हो गया और उस पर इस बात का बहुत दबाव पड़ा। उस बच्चे को डॉक्टर से दवाई चलाई गई, जिस कारण वह कुछ महीनों के बाद ठीक से खाना-पीना शुरू कर दिया।

रूबल कौर

Friday, March 14, 2025

साहस: प्रतिबिंब आर्थर फुट अकादमी

 "डर कहीं और नहीं, बस आपके दिमाग में होता है!"
मनुष्य के सभी गुणों में साहस सर्वोत्तम है क्योंकि यह सभी गुणों की जननी है। मानव के इतिहास में जो कुछ भी कहानियाँ हैं, वे मनुष्य के साहस और विपरीत परिस्थितियों में उसके संघर्ष की कहानियाँ हैं। संकट में साहस से काम लेना चाहिए और अधिक सफलता प्राप्त करनी चाहिए।

जो मनुष्य कभी साहस नहीं छोड़ता, वह कभी हार नहीं मानता। नेपोलियन ने चुनौतियाँ स्वीकार करते हुए कहा था, "कोई अफसोस नहीं है!" वह अपनी सेना को पहाड़ों के पार इटली ले गया और विजय प्राप्त की। साहस के बिना जीवन में कोई भी काम सही नहीं हो सकता। साहस के अभाव में विद्या, सम्मान, और अन्य गुण भी अधूरे रहते हैं। जो कुछ देखकर सुंदर लगता है, वह बिना ठोस आधार के जल्द ही नष्ट हो जाता है।

निर्णय लेना साहस का सबसे बड़ा उदाहरण है, और साहस के बिना किसी कार्य में सफलता प्राप्त करना कठिन होता है। जीवन में साहस का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में खड़ा रहने की ताकत देता है।
"अकेले खड़े होने का साहस रखो, चाहे पूरी दुनिया आपके विरोध में क्यों न हो!"
देवानंद


"कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं।"
पाठ "साहस" से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि हम किसी लक्ष्य को देखते हैं, तो हमें वह प्राप्त करना है, चाहे हम उसमें कितनी बार असफल हो जाएं। हमें अपने लक्ष्य पर अटल रहना है और उसे प्राप्त करने के लिए पूरे मनोबल के साथ मेहनत करनी है।

साहसी लोग बेखौफ तरीके से मेहनत करते हैं, सफलता और असफलता की चिंता किए बिना। वे अपने लक्ष्य के प्रति लगातार पूरी मेहनत से कार्य करते रहते हैं। यदि हमारे अंदर साहस विराजमान है, तो हम विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा कार्य कर सकते हैं।

साहस हमारे अंदर बार-बार किसी कार्य को करने की शक्ति प्रदान करता है, चाहे हम उसमें अनगिनत बार असफल हो चुके हों। यह हमें अलग प्रकार से मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। निराशा में भी हमे आशा की किरण दिखाई देती है यदि हमारे अंदर धैर्य और साहस है।

साहस वह गुण है जिसकी मदद से हम वह काम कर सकते हैं, जो हम करना चाहते हैं। इसलिए साहस बनाए रखना चाहिए।
नीरज कुमार

Thursday, February 27, 2025

Jab Jago Tabhi Savera - Arthur Foot Academy

                                     

उठ जाग देख नभ में प्रकाश। क्यों है निराश, मत छोड़ आस

अध्याय "जब जागो, तब सवेरा" से हमें यह शिक्षा मिलती है। यदि हमने व्यतीत समय में गलतियाँ कीं, जिससे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सके। पुरानी गलतियों को अपने मन से माफ करके तथा गलतियाँ दोबारा नहीं दोहराई जाएं। भले ही हमसे नई गलती हो जाए, वह हमें स्वीकार करनी है। सबसे पहले हमें अपने आप को चुनौती देनी है। स्वयं में परिवर्तन करके, एक सही दिशा में मेहनत करके लगातार अग्रसर, अपने कार्य को एक ईमानदारी से मेहनत करके हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। कुछ पुरानी गलतियों से सीखकर, कुछ अपने पुराने अनुभव को अपने जीवन में लागू करके, हम सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ सकते हैं। हमें अपने निर्णय से कई बार निराशा भी प्राप्त होगी। परंतु हमें पीछे नहीं हटना है। बल्कि हमें उसमें स्वयं सुधार करके आगे बढ़ना है।

नीरज कुमार आर्थर फुट अकादमी 

देरी होने का ये मतलब नहीं है कि आप हार गए हैं। हो सकता है कि आप लंबी छलांग की तैयारी में हों।  

जब जागो, तब सवेरा। जो बीत गया, सो बीत गया। अगर आपकी जिंदगी में आपका अतीत बहुत बुरा हो रहा है, तो उसके बारे में सोचकर आप अपना भविष्य और अपना वर्तमान खराब मत कीजिए। अतीत को लेकर अफसोस नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो हमारा प्रेजेंट है, हम सारा फोकस उसी पर करना है। अगर हमारा प्रेजेंट अच्छा हो गया, तो आने वाला फ्यूचर भी अच्छा हो जाएगा। मैंने कहीं पर पढ़ा था कि जो आज आपका पास्ट है, वह पहले कभी प्रेजेंट था, और जो आज आपका प्रेजेंट है, वह फ्यूचर में कभी-कभी आपका पास्ट बन जाएगा। इसलिए ध्यान रखिए, अपने प्रेजेंट पर पूरा फोकस रखिए। अगर प्रेजेंट अच्छा हो गया, तो आपके व्रत में गलतियां छुप जाएंगी। प्रेजेंट अच्छा होगा, और आपका भविष्य बहुत अच्छा होगा । 

देवानंद आर्थर फुट अकादमी

Monday, January 27, 2025

प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना - Arthur Foot Academy

Tailored PLP Solutions for Schools  
Join us for our engaging PLP Monthly Sessions at the Arthur Foot Academy! Discover innovative strategies and collaborative learning experiences designed to enhance your educational journey. Don't miss out on this opportunity to empower your school community!

Is Your Child Ready To Face The World, a bestselling book by Dr Anupam Sibal, a Learning Forward India Foundation board member. The Arthur Foot Academy customised Professional Learning Program is construted around book reading; the reachers meet every month to read a chapter and share their reflections.


In honour of Arthur Edward Foot's ideals, a dedicated group of Old Boys of The Doon School with Asad Khan leading have joined forces to create a lasting legacy for their first Headmaster, the Arthur Foot Academy. The academy is committed to providing a well-rounded education to the children of Bandarjhud, a small village near Dehradun. 


The Arthur Foot Academy, as a member of the Good Schools Alliance, is dedicated to fostering the personal and social development of each student. The academy emphasizes service, skill development, athletics, and academic study as core components of its educational approach. The mission of the school is to equip students with the confidence to navigate the world successfully. In January 2025, the academy hosted a Professional Learning Program (PLP) session, during which teachers demonstrated their enthusiasm for learning and shared insights into the joy of educational experiences.

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प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना इस पाठ के माध्यम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें जीवन में कभी बहाने और किस्मत को दोष नहीं देना चाहिए। अगर हम ऐसा करते हैं तो यह हमारे जीवन की हार होती है। अगर मेरे पास पैसे होते तो मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेती। मेरे पास अगर बहुत ज्यादा पैसे हो तो मैं अपने जीवन में सफल हो जाती ज्यादा पैसा होने से मनुष्य की इच्छा कभी पूरी नहीं हो सकती इच्छा हमेशा बढ़ती ही जाती है जिससे जिससे हम खुश नहीं हो पाए क्योंकि इच्छा असीमित होती है जो कभी पूरी नहीं होती। जैसे हमारी लाइफ में प्रॉब्लम है तो हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए हमें उनका सामना करना चाहिए और हमारे जीवन का एकमात्र यही लक्ष्य होना चाहिए। जब माता-पिता बच्चों के सामने बहाने बनाते हैं और बच्चे उन्हें ऐसा करते देखे हैं तभी वह भी बहाने बनाने सीख जाते हैं और अपने कम से पीछे हट जाते हैं। और सिमी जिसने 2003 में एक क्लीनिक में एक मैनेजर के रूप काम करना शुरू किया जिसकी हंसी बहुत ही प्यारी थी और उसका व्यवहार सबको बहुत अच्छा लगता था। सिमी बहुत बीमार हुई उसने अपनी लाइफ में बहुत ही ज्यादा संघर्ष किया और परेशानियों का सामना किया उसकी बहुत सर्जरी हुई लेकिन उसने कभी किसी को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह इतनी ज्यादा परेशानियों से गुजर रही है। और ना ही वह किसी की दया की पात्र बनना चाहती थी। ऐसे बहुत से उदाहरण है हमें भी अपने जीवन शैली में कभी घबराना नहीं चाहिए। उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए। दूसरों से अच्छी बातें सीखनी चाहिए। और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने चाहिए तभी हम अपने लक्ष्य की प्रति कर सकेंगे क्योंकि बहाने बनाने से कुछ नहीं होता है इससे हम वैदिक को देते हैं जो हमें पाना था । 

रीना 


पाठ में मैंने पढ़ा कि एक लड़की सिमी जो संधि शोध की बीमारी से पीड़ित होती हैं| तथा किस प्रकार उसने अपनी बिमारी को बहाना नहीं बनाया और इसी प्रकार संगीतकार बीथोवेन और स्टीवन स्पीलबर्ग, रूजवेल्ट, बॉबी के उदाहरण दिए गए है | इन सभी लोगों को देखकर हमको यही शिक्षा मिलती हैं। कि अगर हमको ईश्वर ने हाथ, पांव व देखने के लिए आँखें दी है। और हमारा शरीर बिल्कुल ठिक है। तो हम भी वह कर सकते हैं। जो हम चाहते है। लेकिन वह तभी संभव है। जब हम मेहनत करेंगे और हमारे पास कोई बहाना बनाने का समय न हो। जैसे कि पाठ में आया एक वाक्य "मैं सपने रात में नहीं दिन में देखता हूँ।" सपने दिन में देखने का मतलब हैं, की खुली आंखों से सपने देखना तथा ऐसे सपने जो आपको नींद ही न आने दे। इस प्रकार पाठ में मैंने यही सीखा की अगर हमें अपनी मंज़िल तक पहुंचना हैं। तो हमें हर परेशानी को स्वीकार करना होगा,और आगे बढ़ना होगा। क्योंकि कहते हैं की बिना संघर्ष किए कुछ प्राप्त नहीं होता।प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना वैसे तो सभी अपनी जिंदगी में किसी न किसी तरह से हर मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते है और जिन्हे नहीं कुछ नहीं करना होता है तो बहुत से बहाने बनाकर अपने मन को शांत करने कि कोई करते है  जो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना हिम्मत और लगन से कर सकते है तो उनकी जीत निश्चित है जैसे इस पाठ में मुझे स्ट्रटजमैन की कहानीअच्छी लगी जो बिना हाथों के भी सबसे लंबे सही निशाने के लिए गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया क्योंकि देखा जाय तो बिना हाथों के इंसान कुछ भी नहीं है लेकिन उनकी कहानी पढ़कर ऐसा लगता है कि अगर इंसान चाहे तो कुछ भी मुश्किल नहीं है जब वे बिना हाथों के अपने सारे कार्य कर दिया है तो जैसे उन्होंने 2012 में लंदन के पैरालिंपि गेमज मैं उन्होंने तीरंदाजी में रजत पदक जीता अगर बिना हाथों के भी वे विश्व रिकॉर्ड बना सकते है तो दुनिया में परिश्रम करने वाले कभी हार नही सकते इसलिए हमें प्रतिकूल परिस्थितियों को देखकर कभी घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका सामना करना चाहिए फिर जीत निश्चित है

ललिता पाल

हमे अपने जीवन में हर प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।अपना लक्ष्य पाने के लिए हमें कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता होती है।हमें खुद को कमजोर ना समझकर हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए।सफल होने का आत्मविश्वास हमारे अन्दर चाहिए।जैसे पाठ प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना। में हमनें पढ़ा हैं कि कैसे जीन डोमिनिक बॉबी जी का उदाहरण दिया गया है। की कैसे वह तैतालिस साल की उम्र में एक भयानक रूप से लकवा मार गया। और वह कोमा में चले गए। इन परिस्थितियों के बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कभी भी अपनी किस्मत को दोष नहीं दिया। बल्कि हर परिस्थिति का सामना करते हुए। प्रसिद्ध पुस्तक थे डाइविंग बेल एंड द बटरफ्लाई नामक किताब लिखी। हमें इनसे प्रेरणा मिलती है कि हमें जीवन में हर परिस्थिति का काम करने का आत्मविश्वास हमारे अंदर होना चाहिए। अपने जीवन में किसी भी परिस्थिति को लेकर हार नहीं माननी चाहिए। बल्कि उसका सामना करना चाहिए।

स्वाति


हमें जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना चाहिए ना कि उनसे हमें भागना चाहिए जैसे सिम्मी किशोर अवस्था मेथी जब उन्हें संधि शोथ की बीमारी हुई तो उनके जोड़ों में दर्द और जोड़ों में सूजन आती थी उन्होंने जोड़ों के सूजन के की दवाई ले रही थी तो उनकी हालत सही होने के बावजूद बिगड़ ने लगी 21 वर्ष की सिम्मी को घुटनों में इतना दर्द रहने लगा कि उनको प्रत्यारोपण करवाने की नौबत आ गई थी पर सीमी किशोर ने  कभी एहसास नहीं होने दिया कि उनको कोई परेशानी है वह सामने वालों को  खुश रखना ही उनकी आदत थी उन्होंने कभी बहाने नहीं बना कि मुझे यह दिक्कत या परेशानी है ऐसे ही हमें भी अगर बहानो। का ख्याल आए तो हमें सिम्मी की बहादुरी देखनी चाहिए उन्होंने कभी हार नहीं मानी ऐसे ही हमें मुश्किलों का सामना करना चाहिए ।

साक्षी खन्ना

समय और परिस्थितियाँ के प्रतिकुल होने पर हमें जीवन में, कब या किन परिस्थितियों में हमें बिना लड़े, हालत से समझौता कर लेना चाहिए या स्थिति को चुपचाप स्वीकार करना चाहिए? मैं शायद उन लोगों में से नही हूँ जो परिस्थितियों से लगातार लड़ते रहते है और न ही उन लोगों में से हूँ जो परिस्थितियों के सामने झुक जाते है ,उन्हें स्वीकार कर लेते है।

मेरा मानना है कि आपको हर परिस्थिति को पहले समझना होंगा ।उसके सही और गलत परिणामों पर विचार करना होंगा ।फिर आपको कब लड़ना है और कब झुकना है ये स्वयं ही समझ आ जायेगा। कभी कभी जीवन में भी लड़ना जरूरी   होता है और कभी कभी झुकना ।मैं यहां लड़ना नही बोलुंगा  बल्कि कोशिश करना बोलुंगा उस परिस्थिति में खुद को संभालने की।

जीवन ऐसा जिये कि कभी अपने किसी काम के लिए पछतावा न हो कि अगर ये कर लिया होता या फिर ये नही किया होता। परिस्थितियाँ सर्वशक्तिमान होती है लेकिन फिर भी वक़्त के साथ इनको भी बदलना पड़ता है । समय का हाथ पकड़ लो तो आप हर मुश्किल को आसान बना लेंगें।

मैं जब भी कभी किसी बदलाव को आते देखता हूँ तो पहले अपनी तरफ से हर सम्भव कोशिश कर्ता हूँ कि उस बदलाव के सभी पक्षों को स्पष्ट रूप से देख सकूँ और जहां तक बोलने या कुछ करने की जरूरत होती है तो कर्ता  हूँ और जब लगता है अपने हाथ में नही है ये स्थिति ,तो उसे ईश्वर पर इस विश्वास के साथ छोड़कर कि वो जरूर अच्छा ही करेंगे ,स्वयं को साक्षी के रूप में देखने की कोशिश करने मुझे लगता  हूँ।

अभी तक का अनुभव अच्छा ही रहा है । परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन बनी हो पर परिणाम हमेशा मेरे पक्ष में ही आये है।

देवानंद

पाठ  प्रतिकूल परिस्थितियों  का सामना करने से हमे यह शिक्षा मिलती है। यदि हमे अपने जीवन मे सफल होना है। हमने अपने जीवन मे जो लक्ष्य देखा है। उसे प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना चाहिए। और हमें बहाने नहीं बनाने चाहिए की मेरे भाग्य ने साथ नहीं दिया और मैं अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाया।               

सपने वे नहीं होते जो हम नींद में देखते हैं। बल्कि सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते। वास्तविक जीवन में ऐसे बहुत से व्यक्तियों से इतिहास भरा पड़ा है जिन्होंने अजय लगने वाली विपरीत परिस्थितियों को जीत कर दिखाया है। सिमी सिंह जो एक क्लीनिक में मैनेजर थी लेकिन अधिक बीमार हो जाने के कारण तथा अपने पैरों पर खड़ा ना होने के कारण उन्होंने धैर्य नहीं  खोया कठिन परिस्थितियों में भी वे मुस्कराती रही। और वह अपने लिए खुद ही खड़े होना चाहती थी। वह अपने जीवन मे किसी के उपकार का हिस्सा नहीं बनना नहीं चाहती थी। वे आत्मनिर्भर बनना चाहती थी। जिस कारण संसार उन्हें एक सकारात्मक सोच के नजरिए से उन्हें देख सके। तथा दूसरे व्यक्ति भी उनसे प्रोत्साहित हो सके। तथा अपने जीवन मे  अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके। 

नीरज कुमार    


पाठ में मैंने पढ़ा कि एक लड़की सिमी जो संधि शोध की बीमारी से पीड़ित होती हैं| तथा किस प्रकार उसने अपनी बिमारी को बहाना नहीं बनाया और इसी प्रकार संगीतकार बीथोवेन और स्टीवन स्पीलबर्ग, रूजवेल्ट, बॉबी के उदाहरण दिए गए है | इन सभी लोगों को देखकर हमको यही शिक्षा मिलती हैं। कि अगर हमको ईश्वर ने हाथ, पांव व देखने के लिए आँखें दी है। और हमारा शरीर बिल्कुल ठिक है। तो हम भी वह कर सकते हैं। जो हम चाहते है। लेकिन वह तभी संभव है। जब हम मेहनत करेंगे और हमारे पास कोई बहाना बनाने का समय न हो।

 जैसे कि पाठ में आया एक वाक्य "मैं सपने रात में नहीं दिन में देखता हूँ।" सपने दिन में देखने का मतलब हैं, की खुली आंखों से सपने देखना तथा ऐसे सपने जो आपको नींद ही न आने दे। इस प्रकार पाठ में मैंने यही सीखा की अगर हमें अपनी मंज़िल तक पहुंचना हैं। तो हमें हर परेशानी को स्वीकार करना होगा,और आगे बढ़ना होगा। क्योंकि कहते हैं की बिना संघर्ष किए कुछ प्राप्त नहीं होता। 
साक्षी पाल 

Tuesday, November 29, 2022

स्वतंत्रता और शांति - ज्योति तड़ियाल


स्वतंत्रता और शांति
स्वतंत्रता का शाब्दिक अर्थ है – स्व+तंत्र+ता अर्थात स्वयं की इच्छा के अनुसार कार्य करना। जब हम स्वयं की इच्छानुसार मार्ग चयनित करते हैं और ऐच्छिक कार्य कर पाते हैं।

तिलक जी के अनुसार, “ स्वतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है।” यानि कि स्वतंत्रता हमारा अधिकार है और यदि कोई इसका हनन करता है तो भारतीय संविधान हमें सुरक्षा प्रदान करता है। परंतु बंधनहीन स्वतंत्रता अराजकता उत्पन्न करती है।

फ़्रांस के महान दार्शनिक रूसो ने लिखा था, “ मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, किंतु वह सर्वत्र बंधनों में जकड़ा हुआ है।“ रूसो का यह कथन फ़्रांस की राजक्रांति का नेतृत्व वाक्य बना और वह १७८९ में राजशाही से मुक्त हो गया।

स्वतंत्रता
विद्यार्थी जीवन की तीन घटनाएं जब मुझे स्वतंत्रता का अभाव अनुभव हुआ –
प्रथम – विषय चयन के समय मुझे अपना चयनित विषय नहीं मिल पा रहा था। कारण अंक कम आना। शिक्षिका की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी क्योंकि उन्हें अपने परीक्षाफल का भय था। परंतु उस विषय में मेरी पकड़ ठीक ठाक थी। केवल १२ वीं कक्षा में अंक कम आए थे। फिर भी क्यों हमें इस बात की स्वतंत्रता नहीं मिलती कि मेहनत से परिणाम सुधारा जा सकता है। बहरहाल बहुत परेशानियों के बाद मुझे वह विषय मिला और स्नातक में मेरे उसी विषय में सर्वाधिक अंक थे।

द्वितीय – बात कक्षा ८ की है। नए ऐच्छिक विषय के रूप में मेरे द्वारा संगीत का चयन किया गया। परंतु अध्यापिका को मेरी आवाज़ पसंद नहीं आई। मुझे अवसर ही नहीं मिल पाया। और विवशता में कला विषय कर चयन करना पड़ा। तृतीय – कभी कभी केवल ऊपरी तौर पर देख लेने भर से ही किसी के प्रति राय बना ली जाती है। कक्षा में भी जो छात्र थोड़ा संकोची होता है, उसे कुछ उत्तरदायित्व ही नहीं दिया जाता और प्रायः ऐसी परिस्थितियों से हम परिचित होते ही रहते हैं।

सार यही है कि केवल पुस्तकीय भाषा में स्वतंत्रता लिखने भर से ही स्वतंत्रता नहीं मिलती इसके लिए हृदय विशाल और धैर्य धारण करना आवश्यक है। साथ ही यह कुछ बंधनसहित होनी चाहिए।

शांति
शांति वह मानसिक अवस्था है जब मस्तिष्क तनाव व हिंसा से मुक्त हो। जब असफलता का भय मनुष्य को पीड़ित न करे। जब किए गए कार्य में कोई मीन मेख न निकले। जब दूसरे को नीचा दिखाने किर इच्छा बलवती न हो। देखा जाए तो अनेक सामाजिक कारण ऐसे होते हैं जब किसी के द्वारा शांति का मार्ग छोड़ हिंसा का मार्ग पकड़ लिया जाता है।

हम प्रायः अपने विद्यालय या आस पास भी ऐसा देखते हैं कि कुछ विद्यार्थी स्वयं को ठीक से प्रकट नहीं कर पाते हैं और हिंसक हो उठते हैं, कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरे विद्यार्थियों पर प्रभाव जमाने के लिए कुछ विद्यार्थी उग्र व हिंसक हो उठते हैं।

कक्षा कक्ष के संदर्भ में वायलेंस शब्द के अनेक अर्थ लिए जा सकते हैं। जैसे – हिंसा, आवेग, उग्रता, उग्र व्यवहार, बल, तीव्रता, उत्पात आदि। मेरा मानना है कि कक्षा में वायलेंस शब्द को भली भांति विद्यार्थियों को समझाया जाना चाहिए। इनका भेद भी स्पष्ट करना चाहिए कि केवल बल प्रयोग ही वायलेंस नहीं है। मौखिक व्यवहार द्वारा किसी को दुःखी करना भी वायलेंस है।

मेरा मानना है कि आज सबके ऊपर अपेक्षाओं का इतना भार है कि न चाहते हुए भी वह वायलेंस का शिकार हो जाता है, शांति कोसों दूर चली जाती है। इसलिए परिवार, विद्यालय, संस्थाओं, कार्यालयों का यह दायित्व बन जाता है कि वे यथासंभव वातावरण को शांत बनाए रखने का प्रयत्न करें, जिससे वॉयलेंस में कमी आ सके।

लक्ष्य कठिन अवश्य है परंतु असंभव नहीं है और पहल करने से ही अगर सफलता मिल पाएगी।।

प्रेषक
ज्योति तड़ियाल
द दून गर्ल्स स्कूल

Thursday, February 18, 2021

तनाव को कम करने के तरीके - Ayasha Tak

Courtesy: managementcentre.co.uk
जीवन के किसी बिंदु पर हर कोई तनाव का अनुभव करता है, तनाव काम या नौकरी से संबंधित हो सकता है ,परिवार से संबंधित हो सकता है या आपकी पढ़ाई ,खराब स्वास्थ्य , वित्तीय समस्याओं आदि के कारण हो सकता है। कई बार किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु भी तनाव का कारण बनती है। 

कुछ लोग तनाव को सही ढंग से संभालते हैं , जबकि कुछ लोग अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करने में  विफल रहते हैं। तनाव के लक्षण मानसिक , शारीरिक या सामाजिक हो सकते हैं , इसमें सिरदर्द , हताशा , भूख का घटना या बढ़ना , नींद न आना या बहुत ज्यादा नींद आना शामिल हैं। 

कुछ आसान तरीकों को अपनाकर हम अपने जीवन में तनाव को कम कर सकते हैं।  जैसे - 
 ज़्यादा मुस्कुराए - जितना हो सके मुस्कुराओ। जैसा की मदर टेरेसा ने कहा था - “ शांति की शुरुआत मुस्कान से होती है और हर बार जब आप किसी पर मुस्कुराते हो, तो यह प्यार की एक कार्यवाही है ,उस व्यक्ति को एक उपहार ,एक सुंदर चीज़। “

संगीत -सॉफ्ट और शांत संगीत एक महान संकटमोचक है। संगीत एक व्यक्ति को खुश और हल्का रखता है। आप अपने पसंदीदा गीत को सुन सकते है और साथ में गुनगुना भी सकते है, इससे आपकी आत्माएं जाग उठेगी और आप फिर से खुश और अद्भुत महसूस करेंगे। 

वास्तविक बनो -अपने लक्ष्य को पूरा करने में अपने आप को ज़्यादा जोर न दें। धैर्य रखें , तार्किक और यथार्थवादी बनें। एक ही दिन में सब कुछ पूरा करने की कोशिश करके अपने आप को तनाव न दें। “नहीं” कहना सीखें। 

हँसना - हंसी एक बेहतरीन दवा है। जितना हो सके हंसें , कॉमेडी धारावाहिक और फिल्में देख सकते है। 

दोस्त - अपने दोस्तों के साथ घूमने और अपने जीवन का आनंद लेने के लिए कुछ समय निकालें। आप अपने जीवन का आनंद लेने के लिए पैदा हुए हैं , इसलिए कम चिंता करें और खुश रहें। 

Ayasha Tak
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Monday, October 12, 2020

कठिन परिश्रम कभी असफल नहीं होता - Ayasha Tak

अगर कोई व्यक्ति कठिन परिश्रम कर सकता है , तो वह सफल जरूर होगा। वह किसी भी तरह से विफल नहीं हो सकता है। हम जानते हैं कि कठिन काम आसान नहीं है , यह सभी तरह के लोगों के लिए बहुत मुश्किल है। हर पेशे को कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इसके बिना कुछ भी सुधार नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि कड़ी मेहनत व्यक्ति को कभी असफल नहीं होने देती। अब मैं एक युवा व्यक्ति की कहानी बता रही हूँ। जिन्होंने कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की।

उन्होनें अपनी मेहनत की शुरुआत अपने स्कूली जीवन से की। लड़के ने कड़ी मेहनत से हाई - स्कूल में अच्छा परिणाम प्राप्त किया। उन्होंने अध्ययन में बहुत अधिक समय बिताया। कई तरह के काम उन्हें बिना अध्ययन के पूरे करने पड़ते थे। वह अपने परिवार के साथ नहीं रहता था। क्योंकि उनका स्कूल उनके गाँव से बहुत दूर था। इसलिए वह स्कूल के छात्रावास में रहता था। वहाँ पर उसे अपना हर काम स्वयं करना पड़ता था। इसलिए वह ठीक से सो भी नहीं पाता था। इसके बावजूद उसने अपनी कड़ी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए। अन्यथा यदि आप कड़ी मेहनत करते है ,तो आपकी प्रतिभा में वृद्धि होगी।

स्कूल की पढाई पूरी होने के बाद में उसे कॉलेज में दाखिला लेना था। परन्तु उसका परिवार गरीब होने के कारण उसकी कॉलेज की फीस भरने में असमर्थ था। उसने अपने लिए नौकरी प्राप्त करके फिर अपनी पढाई और नौकरी दोनों ही कामों में कड़ी मेहनत की। आखिरकार, वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने सफलता प्राप्त करने में सक्षम हुआ। अब वह एक बहुत बड़े व्यवसायी है। उन्होनें अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल किया। अगर वह मेहनत नहीं कर पाता तो उन सफलताओं को कभी हासिल नहीं कर पाता

Ayasha Tak, The Fabindia School <atk@fabindiaschools.in>

Monday, September 21, 2020

उद्देश्य का महत्त्व - Ayasha Tak

एक सामान्य शब्द में उद्देश्य या लक्ष्य एक उद्देश्य है। एक प्रचलित कहावत है कि बिना उद्देश्य वाला मनुष्य बिना पतवार के जहाज के समान होता है। इसका मतलब है कि बिना पतवार का जहाज खतरे का सामना करता है। इसी प्रकार बिना लक्ष्य आधारित किए कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाता है।  वह  जीवन के रास्ते में ठोकरें खाता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति का जीवन में कुछ न कुछ उद्देश्य अवश्य होना चाहिए, जिससे जीवन में कुछ करने का सही लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। 

बचपन में एक व्यक्ति एक प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री या फिल्म स्टार या फिर पुलिस अधिकारी बनना चाहता है। उद्देश्य का अर्थ है प्रयास करना ,या आकांक्षा करना। प्रत्येक उद्देश्य आमतौर पर एक लक्ष्य की स्थापना की घोषणा के साथ शुरू होता है , फिर इसे एक निर्धारित समय रेखा पर छोटे - छोटे टुकड़ों में तोड़ना होता है। इस प्रकार इसे प्राप्त करने के लिए  समय - समय पर कई बाधाओं एवं असफलताओं का सामना करना पड़ता है। उद्देश्य जीवन में कुछ हासिल करने के मज़बूत इरादे को दर्शाता है।हर किसी के जीवन में एक उद्देश्य अवश्य होना चाहिए। 

बिना उद्देश्य के मनुष्य एक खिलौने के समान होता है। वह लक्ष्यहीन रूप से बहता रहता है और अपने जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है। तो , एक आदमी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। अपने लक्ष्य को पाने के लिए उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अगर दृढ़ निश्चय हो तो सफलता अवश्य मिलती है। 

इस प्रकार यह तथ्य है कि एक लक्ष्य निर्धारित करना और उसे प्राप्त करने के लिए अभिनय करना एक सफल जीवन के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। सभी को इसके लिए काम शुरू करना चाहिए । सक्रिय दृष्टिकोण के साथ कार्य योजना का समय पर क्रियान्वयन सफलता की कुंजी है।

Ayasha Tak 
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Tuesday, July 28, 2020

सफलता - उषा पंवार

"मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।"

सफलता किसी को भी एक झटके में नहीं मिलती या रातों-रात हासिल नहीं होती है लेकिन लगातार प्रयास करते
रहने से एक दिन जरूर मिलती है। सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके जीवन में एक लक्ष्य होता है और वे अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार होते हैं ।अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करें और सभी दूसरे विचारों को अपने दिमाग से निकाल दें यही सफलता की कुंजी है।

अतः सभी छात्रों को अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। हर किसी के पास अपना अलग सामर्थ्य और काबिलियत होती है, कोई छात्र पढ़ाई में अव्वल होता है ,तो कोई छात्र खेलकूद में ,फोटोग्राफी में ,संगीत में, नृत्य में ,तो कोई चित्रकारी और शिल्पकारी मेंअव्वल होते हैं। कई छात्र ऐसे भी होते हैं जो सफल तो होना चाहते हैं लेकिन इसके लिए प्रयास नहीं करते ,जरूरी नहीं है कि आप अपने क्लास में अव्वल आए बल्कि जरूरी है आप अपने अंदर की काबिलियत को समझे और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने लक्ष्य को निर्धारित करें।

रुपया ,पैसा, धन-दौलत कोई भी चुरा सकता है छीन सकता है लेकिन नहीं छीनी जा सकती है तो उसकी काबिलियत गुण। अतः हम में हुनर है तो कदर है।

धन्यवाद,
उषा पंवार

Saturday, July 4, 2020

एकता और देखभाल: सुरेश सिंह नेगी


समाज के साथ-साथ पूरे देश के लिए एकता का अत्यधिक महत्व है।  एक साथ मिलजुल काम करने को एकता कहते हैं। एकता में बहुत शक्ति होती है। किसी भी छोटे या बड़े काम को अगर एक साथ किया जाए तो उस काम को बड़ी जल्दी और आसानी से किया जा सकता है। एक साथ काम करने से जहाँ बोरियत का अनुभव भी नहीं होता है वंही दूसरी ओर उस काम में काम करने वालों को आनंद भी आता है। एकता में लोग अपने स्वयं के उद्देश्यों को पूरा करने के बजाय एक सामान्य लक्ष्य की दिशा में काम करते हैं।

एकसाथ काम करने से लोगों में मनमुटाव समाप्त होने के साथ-साथ उनमें आपसी समझ और भाईचारा भी बढ़ता है। लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं। मेरा मानना है कि एकल परिवार के बजाय संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बेहतर जीवन शैली और राष्ट्र के विकास के लिए एकता का आपस में होना अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रकार, हम देखते हैं कि एकता में रहने के बेशुमार लाभ हैं। हम बड़े कार्यों को पूरा कर सकते हैं, जरूरत के समय में लोगों पर भरोसा कर सकते हैं और बेहतर तरीके से युवा शक्ति का पोषण कर सकते हैं।

दूसरों  की परवाह करना, दूसरों के बारें में अच्छा सोचना, आपस में मिलजुलकर रहना, चीजों को एक -दूसरे से साझा करना, दूसरों  के प्रति ईर्ष्या और  मनमुटाव रखना  ही देखभाल कहलाता है। चीजों को एक दूसरे से साझा करने से यह पता चलता है कि आप दूसरों की देखभाल करते हैं साथ ही साथ यह आपको  एक इंसान के रूप में आत्म-विकास करने और दूसरों के प्रति निस्वार्थ, विनम्र और सशक्त बनाने में भी मदद करता है। चीजों को एक-दूसरे से साझा करने से जहाँ एक व्यक्ति में सामाजिक-कौशल का निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास होता है वहीं दूसरी ओर वह हमेशा दूसरों के द्वारा सराहा जाता है।
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Wednesday, June 10, 2020

आशा और मित्रता: कृष्ण गोपाल


हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, कठिन और सुखद दिन तो आते रहते हैं।  निराशा व्यक्ति को पतन की और ले जाती है जबकि आशा एक नई शक्ति का संचार करती है।  परोपकार करने से आशा बलवती होती है।  अपने सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य अवश्य करें। 

आशा जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।  प्रसन्नचित मन और सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति को कभी बीमारियाँ नहीं घेरती। जीवन में लक्ष्य प्राप्ति करनी है तो आशावादी बने रहो, चाहे असफलता मिले किसी काम में, फिर भी आशा  दामन छोड़ो।  राष्ट्रकवि  मैथिलीशरण गुप्त के शब्दों में -

समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।  

सच ही कहा गया है कि आशा अमर धन है।  व्यक्ति जब निराश हो जाता है तब कुछ भी करने की इच्छा नहीं रहती। यदि इसी प्रकार निठल्ला बैठ जाएगा तो प्रगति का चक्र ही रुक जाएगा।  निराशा का भाव मन में जगते  देर नहीं लगती।  ऐसे अवसर तो जैसे तैयार ही बैठे है।  जब कुछ करने की चाह हो और उसमें असफलता मिले तो निराश हो सकते है।  उचित सहयोग  मिले तो निराश हो सकते है।  अर्थात निराश होने के कई बहाने है।  

आशा का एक और रूप है- मित्रता।  मित्र होने पर आशा भी बलवती हो जाती है।  सच्चा मित्र व्याधि हर लेता है जबकि दुष्ट मित्र हमेशा कष्ट देता रहता है। मित्र से सहानुभूति रखें, आवश्यकतानुसार सहयोगी बनें, प्रसन्नचित, उदार और हितैषी बने।  हम सामाजिक प्राणी है अतः मित्रों की आवश्यकता रहती ही है।  मित्रों की संख्या में वृद्धि करें और प्रसन्न रहें। 

मित्र ऐसे हो जो हर कठिनाई में मदद करे, परन्तु केवल अपेक्षा ही रखें।  मित्रता का सठीक नियम है, देना।  पहले देने की मंशा रखें, मिलना तो स्वतः ही होता रहेगा।  यदि लेने की चाह में मित्र का हाथ थामा है, तो यह नियम के विरुद्ध है। सच्चा मित्र संकट में साथ नहीं छोड़ता ये बात आप पर भी लागु होगी।  अपने मित्र का साथ हर परिस्थिति में निभाइए, फिर मित्रता का आनंद लीजिए। 
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

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