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Friday, October 16, 2026

अपनी सोच और निर्णयों की स्वतंत्रता: ‘Educated’ से प्रेरित आत्मचिंतन - सरोज पटेल

‘Educated’ पुस्तक के पाँचवें अध्याय को पढ़ते हुए मुझे यह महसूस हुआ कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अपनी सोच और सीखने की इच्छा पर विश्वास करना बहुत ज़रूरी है। टायलर के कॉलेज जाने के निर्णय से हमें यह सीख मिलती है कि कभी-कभी अपने लिए एक नया रास्ता चुनने के लिए साहस की आवश्यकता होती है।

मैंने महसूस किया कि हम कई बार परिवार और समाज की सोच को ही सही मानकर अपने विचारों को पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के जीवन के अनुभव अलग-अलग होते हैं और उसे अपनी परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

कोई भी बदलाव आसान नहीं होता। अपनों से दूर जाना या उनकी सोच से अलग निर्णय लेना कठिन हो सकता है, लेकिन अपने विकास के लिए कभी-कभी नए रास्तों को अपनाना आवश्यक होता है।

हमें दूसरों के विचारों का सम्मान करते हुए अपनी सोच को विकसित करना चाहिए और जीवन में सीखने की इच्छा कभी नहीं छोड़नी चाहिए। अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता और नई परिस्थितियों से सीखने का साहस ही हमें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाता है।

सरोज पटेल
सनबीम ग्रामीण स्कूल

Sunday, October 11, 2026

साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की सीख - स्वाति त्रिपाठी

अध्याय “Apache Women” में साहस, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने की क्षमता को दर्शाया गया है। इस अध्याय में लेखक ने अपने परिवार के अनुभवों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वर्णन किया है। अपाचे महिलाओं की कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत, धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।

इस अध्याय से मुझे यह सीख मिली कि जीवन में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है, लेकिन हमें उनका सामना साहस और सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए। यह अध्याय परिवार के महत्त्व, संघर्षों से सीखने और अपने अनुभवों से मजबूत बनने की प्रेरणा देता है। इससे मुझे दूसरों की परेशानियों को समझने और हर परिस्थिति में धैर्य रखने की सीख मिली।

स्वाति त्रिपाठी 

Monday, October 5, 2026

Choose the Good - लवकुश सिंह यादव

तारा वेस्टओवर के जीवन का वह सबसे कठिन और क्रांतिकारी मोड़ है, जहाँ उन्हें अपनी पहचान और अपने परिवार में से किसी एक को चुनना था। एक तरफ उनका वह परिवार था जिससे वह बेहद प्यार करती थीं, लेकिन जो बदले में उनसे अपनी बुद्धि, मानसिक शांति और सच्चाई की आहुति मांग रहा था। दूसरी तरफ शिक्षा, स्वतंत्रता और एक ऐसा बेहतर जीवन था, जिसकी राह अकेलेपन और अपनों के बिछोह से होकर गुजरती थी।तारा के लिए इस 'अच्छे' को चुनने का फैसला कोई आसान सौदा नहीं था। इसका मतलब था उस कबाड़खाने और उन कट्टर मान्यताओं को पीछे छोड़ना, जिन्होंने बचपन से उनकी दुनिया को घेरा हुआ था। जब उन्होंने अपने भाई के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और अपने माता-पिता के अंधविश्वासों को मानने से इनकार कर दिया, तो उन्हें पूरे परिवार द्वारा झूठा और मानसिक रूप से बीमार घोषित कर दिया गया। 

ऐसे चौराहे पर खड़े होकर, समाज अक्सर परिवार के प्रति अंध-वफादारी को 'अच्छा' मानता है, भले ही वह व्यक्ति को अंदर से खोखला कर दे। लेकिन तारा ने सच्ची शिक्षा के सार को समझा। उन्होंने जाना कि असली अच्छाई खुद के प्रति वफादार रहने और अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करने में है।इस चुनाव की कीमत बहुत भारी थी—उन्हें अपने माता-पिता और कई भाई-बहनों से हमेशा के लिए नाता तोड़ना पड़ा। लेकिन इस गहरे दर्द के बदले उन्हें जो मिला, वह था उनका अपना अस्तित्व। यह रिफ्लेक्शन हमें सिखाता है कि हम यह तय नहीं कर सकते कि हम कहाँ पैदा हुए हैं, लेकिन हम यह जरूर चुन सकते हैं कि हम किस ढर्रे पर जिएंगे। "Choose the Good" का यही संदेश है: चाहे अतीत कितना भी अंधकारमय क्यों न हो, सही रास्ते पर चलने का साहस हमेशा हमारे भीतर ही होता है।का यही संदेश है: चाहे अतीत कितना भी अंधकारमय क्यों न हो, सही रास्ते पर चलने का साहस हमेशा हमारे भीतर ही होता है।

लवकुश सिंह यादव , सनबीम ग्रामीण स्कूल

हर परिस्थिति में शिक्षा जरूरी है - Chanchal

मेरे विचार से जीवन में परिस्थिति कैसी भी हो, शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं होता। कठिन समय में भी शिक्षा हमें सही रास्ता चुनने और समस्याओं का सामना करने की हिम्मत देती है। कई बार परिस्थितियाँ हमारे सामने ऐसी चुनौतियाँ खड़ी कर देती हैं, जिनके कारण पढ़ाई करना मुश्किल लगता है, लेकिन ऐसे समय में शिक्षा को जारी रखना और भी जरूरी हो जाता है।

शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन को समझने, सही और गलत में अंतर करने तथा अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता देती है। कठिन परिस्थितियों में शिक्षा ही हमारे अंदर आत्मविश्वास और उम्मीद बनाए रखती है।

इसलिए मेरा मानना है कि चाहे परिस्थिति सामान्य हो या कठिन, शिक्षा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। शिक्षा एक ऐसा साधन है जो हमें वर्तमान परिस्थितियों से बाहर निकलने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैl

Chanchal, Sunbeam Gramin School

Monday, April 28, 2025

"गलती करने के लिए कोई भी वक़्त सही नहीं है, और गलती सुधारने के लिए कोई भी वक़्त बुरा नहीं है।"- Arthur Foot Academy

 

गलती करना मनुष्य होने की पहचान है। कोई भी व्यक्ति बिल्कुल परिपूर्ण नहीं होता। हम सभी जीवन में कभी न कभी गलती करते हैं — छोटी हो या बड़ी।

लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि हम अपनी गलती को स्वीकार करें। जब हम अपनी गलती मानते हैं, तो हम और अधिक ईमानदार, ज़िम्मेदार और समझदार बनते हैं।
गलती को छुपाने या दूसरों पर थोपने से रिश्ते बिगड़ते हैं। लेकिन जब हम यह कह पाते हैं — "हाँ, यह मेरी गलती थी," तो सामने वाला न केवल हमें माफ करता है बल्कि हमारा सम्मान भी करता है।

गलती मानने से हम झुकते नहीं, बल्कि और ऊँचे उठते हैं।

एक बार मैंने एक छोटी-सी गलती की थी, जिसे पहले मैं छुपाना चाहती थी। लेकिन बाद में जब मैंने उसे स्वीकार किया, तो न केवल मुझे माफ़ी मिली, बल्कि सभी ने मेरी ईमानदारी की सराहना भी की। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि गलती करना गलत नहीं है, गलत है उसे न मानना।

इसलिए मैं मानती हूँ कि हमें अपनी गलतियों से भागने के बजाय, उन्हें अपनाना चाहिए — और कोशिश करनी चाहिए कि वही गलती दोबारा न दोहराएँ।

हर गलती एक नया पाठ होती है, जो हमें और बेहतर, और मजबूत इंसान बनाती है।

इस पाठ से मैंने सीखा है कि गलती करना कोई शर्म की बात नहीं है, लेकिन उसे न मानना और उस पर कुछ न सीखना — यह सबसे बड़ी गलती होती है।
हम हर गलती से कुछ न कुछ सीख सकते हैं; बस ज़रूरत है उसे दिल से अपनाने की।

"जो अपनी गलती मानने का साहस रखता है, वही ज़िंदगी में सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है।"
– साक्षी पाल

Friday, March 14, 2025

साहस: प्रतिबिंब आर्थर फुट अकादमी

 

साहस कहीं और नहीं, बस आपके दिमाग में है।

इस पाठ के माध्यम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमें बार-बार प्रयास करना चाहिए और साहस भी। साहस का अर्थ है बहादुर बनना, न कि डरना। साहस वाली जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। ऐसी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बिल्कुल निडर और बेख़ौफ़ होती है। साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह इस बात की चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं और वह अपना प्रयास जारी रखता है।

मनुष्य के गुणों में साहस सर्वोत्तम है क्योंकि यह सभी गुणों की जननी है। जीना तो उसी का है जिसने जीवन के सूत्र को समझ लिया और भयंकर विपरीत स्थिति पर विजय प्राप्त करने का एक ही रास्ता है, जो साहस है। अगर अंदर साहस है तो हम आत्मनिर्भर बने रहते हैं, जो हमारी कार्यशैली के लिए महत्वपूर्ण है। हमें अपने अनुभवों को उनके सीखने के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। वे जो भी करना चाहते हैं, हमें उन्हें वह करने के लिए साहसी बनने देना चाहिए। यदि असफल हो जाते हैं, तो वे असफलता से भी सीख लेंगे। और अगर वे सफल हो जाते हैं, तो शायद वे दुनिया को एक बेहतर जगह बना पाएंगे।
हमें अपना कार्य सही करने के लिए जब तक प्रयास करना चाहिए, जब तक वह सही न हो जाए। हमें विपरीत स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, साहस और धैर्य से अपने काम को करना चाहिए। साहस ही हमें हमारी मंजिल तक लेकर जा सकता है। सफलता हमें तब तक नहीं मिलेगी जब तक हम साहस और बार-बार प्रयास नहीं करेंगे।
साहस एक ऐसा विचार है, जो मन में आते ही पराजय को पीछे छोड़ते हुए विजय की ओर आगे बढ़ा देता है।
Reena Devi
Principal, Arthur Foot Academy

साहस हमेशा ललकारता नहीं है, कभी-कभी साहस दिन ढलने के बाद एक छोटे से शब्द के माध्यम से प्रकट होता है कि "मैं कल फिर से कोशिश करूंगा"। 

जीवन में डर का न होना साहस नहीं, बल्कि किसी भी प्रकार के डर पर विजय पाना साहस है। पाठ "साहस" से यही शिक्षा मिलती है कि अगर हम कोई भी कार्य कर रहे हैं और वह हमें मुश्किल लग रहा है या फिर हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियाँ आ रही हैं, तो हमें उस कार्य को बीच में ही नहीं छोड़ना चाहिए। बल्कि हमें अपने अंदर इतना साहस होना चाहिए कि हम उस कार्य को पूर्ण करके ही छोड़ें। क्योंकि अगर हम साहसिक व्यक्ति हैं, तो हम अपने डर पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं। साहस मनुष्य को कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। साहस के कारण हृदय में आत्मविश्वास और धैर्य बसते हैं। पाठ "साहस" का सारांश यह बताता है कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी काम में बार-बार असफल हो रहा है, तो हिम्मत और कोशिश करते रहना चाहिए। क्योंकि एक दिन वह भी आएगा जब आप उस कार्य में सफलता प्राप्त कर चुके होंगे।

समस्याएँ हमारे जीवन में बिना किसी वजह के नहीं आतीं। उनका आना एक इशारा है कि हमें अपने जीवन में कुछ बदलना है।
साक्षी पाल

साहस: प्रतिबिंब आर्थर फुट अकादमी

 "डर कहीं और नहीं, बस आपके दिमाग में होता है!"
मनुष्य के सभी गुणों में साहस सर्वोत्तम है क्योंकि यह सभी गुणों की जननी है। मानव के इतिहास में जो कुछ भी कहानियाँ हैं, वे मनुष्य के साहस और विपरीत परिस्थितियों में उसके संघर्ष की कहानियाँ हैं। संकट में साहस से काम लेना चाहिए और अधिक सफलता प्राप्त करनी चाहिए।

जो मनुष्य कभी साहस नहीं छोड़ता, वह कभी हार नहीं मानता। नेपोलियन ने चुनौतियाँ स्वीकार करते हुए कहा था, "कोई अफसोस नहीं है!" वह अपनी सेना को पहाड़ों के पार इटली ले गया और विजय प्राप्त की। साहस के बिना जीवन में कोई भी काम सही नहीं हो सकता। साहस के अभाव में विद्या, सम्मान, और अन्य गुण भी अधूरे रहते हैं। जो कुछ देखकर सुंदर लगता है, वह बिना ठोस आधार के जल्द ही नष्ट हो जाता है।

निर्णय लेना साहस का सबसे बड़ा उदाहरण है, और साहस के बिना किसी कार्य में सफलता प्राप्त करना कठिन होता है। जीवन में साहस का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में खड़ा रहने की ताकत देता है।
"अकेले खड़े होने का साहस रखो, चाहे पूरी दुनिया आपके विरोध में क्यों न हो!"
देवानंद


"कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं।"
पाठ "साहस" से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि हम किसी लक्ष्य को देखते हैं, तो हमें वह प्राप्त करना है, चाहे हम उसमें कितनी बार असफल हो जाएं। हमें अपने लक्ष्य पर अटल रहना है और उसे प्राप्त करने के लिए पूरे मनोबल के साथ मेहनत करनी है।

साहसी लोग बेखौफ तरीके से मेहनत करते हैं, सफलता और असफलता की चिंता किए बिना। वे अपने लक्ष्य के प्रति लगातार पूरी मेहनत से कार्य करते रहते हैं। यदि हमारे अंदर साहस विराजमान है, तो हम विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा कार्य कर सकते हैं।

साहस हमारे अंदर बार-बार किसी कार्य को करने की शक्ति प्रदान करता है, चाहे हम उसमें अनगिनत बार असफल हो चुके हों। यह हमें अलग प्रकार से मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। निराशा में भी हमे आशा की किरण दिखाई देती है यदि हमारे अंदर धैर्य और साहस है।

साहस वह गुण है जिसकी मदद से हम वह काम कर सकते हैं, जो हम करना चाहते हैं। इसलिए साहस बनाए रखना चाहिए।
नीरज कुमार

Friday, January 8, 2021

साहस का जीवन में महत्व - Krishan Gopal

Courtesy: livehindustan.com
साहस का अर्थ यह नहीं कि हम युद्ध भूमि में जाएँ या किसी के साथ शारीरिक शक्ति से मुकाबला करें। यहाँ साहस का अर्थ केवल परिस्थितियों से मुकाबला करना है। कई बार व्यक्ति डरता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए, कहीं मेरा निर्णय गलत न हो। इस प्रकार के भय से मन आतंकित रहता है। इस भय को दूर करना और कुछ अपने मन की करना, परिणाम चाहे जो कुछ भी हो, इसी का नाम साहस है। हम बहुत कुछ करना चाहते हैं किंतु इसी भय के कारण हम कतराते हैं और यह सोचते हैं जैसा चल रहा है, जो चल रहा है वह ठीक ही है।

माता-पिता अपने बच्चे को भी इसी प्रकार कहते हैं। कुछ करने से बच्चे को चोट लगेगी या विफल हो जाएगा तो मन अशांत हो जाएगा, ऐसा विचार करके बच्चे को कुछ करने से रोक देते हैं। जबकि साहस को बढ़ाने का या बच्चे को साहसी बनाने का यही अवसर होता है। बचपन से ही उसे नया करने की स्वतंत्रता मिले तो वह निश्चित रूप से सफलता या असफलता का सामना करने में सक्षम हो जाएगा।

कभी कुछ करने से पहले हम यही सोचते हैं कि कहीं असफल न हो जाए या हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं। परंतु यह नहीं सोचते कि असफल हो भी गए तो कुछ सीखने को अवश्य मिलेगा और अगर सफल हो गए तो मंजिल तक पहुँच ही जाएँगे। इसलिए मन को सकारात्मक रखते हुए तथा धैर्य को अपना साथी बनाते हुए हमें ऐसे कार्यों के लिए साहसी बनना पड़ेगा।

हमारे अंदर साहस भरा पड़ा है अब उसके उपयोग की। जीवन में ऐसे कई अवसर आते हैं जब हमें कुछ ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो हमारे साहस को ही रेखांकित करते हैं। वास्तव में साहस एक सीढ़ी की तरह है, एक कदम आगे बढ़ाने पर और बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी। जगह-जगह में साहस दिखाने की भी आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए परिणामों की चिंता किए बिना हमेशा साहसी बनना पड़ेगा तथा यह बच्चों को भी सिखाना पड़ेगा। 

Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali
kde@fabindiaschools.in

Monday, December 7, 2020

साहस - Krishan Gopal

Courtesy: vividcomm.com
जीवन में कई क्षण ऐसे आते हैं जब हमें ऊहापोह की स्थिति छोड़कर साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ती है।  साहस का अर्थ केवल शारीरिक युद्ध से नहीं है। जीवन में कई ऐसे अवसर आते हैं जब हमें निर्णय लेने में परेशानियों का सामना करना पड़े। कई बार स्थिति गंभीरतम हो जाती है, तब व्यक्ति किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता। ऐसी परिस्थितियों से जूझना और स्वयं को तटस्थ रखना ही साहस है। इन परिस्थितियों का सामना केवल एक बार ही नहीं करना पड़ता बल्कि यह तो सीढी की तरह है, हर कदम पर हमें साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ेगी। 

ऐसे कितने ही उदाहरण भरे पड़े हैं जब विपरीत परिस्थितियों में लोगों ने साहस दिखाकर बेहतर काम करके दिखाया। अधिकांशतः नकारात्मक सोच रखते हुए नकारात्मक परिणाम की कल्पना कर लेते हैं, इसी वजह से कोई नया काम करने में कतराते हैं। सोचिए, वैज्ञानिक कितना साहस दिखाते हुए किसी औषधि की खोज करते हैं परंतु कई बार परिणाम अपेक्षाकृत नहीं मिलते।

 इस कारण वे घबराकर या पराजित होकर अपना कार्य बंद नहीं कर देते हैं बल्कि फिर से नई ऊर्जा के साथ जुट जाते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं। इसका ही परिणाम है कि आज विज्ञान के क्षेत्र में हमने इतनी तरक्की की। यदि सकारात्मकता के साथ किसी काम में जुट जाते हैं और फिर भी असफल  हो जाते हैं तो भी हम बहुत कुछ सीख सकेंगे, की हुई गलतियों को समझ कर उसे दोहराएँगे नहीं। और यदि सफल हो जाते हैं तब तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहेगा। 

एक शिक्षक के रूप में हमें कई स्थानों पर साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ती है। यदि बच्चों को साहसी बनाना है या ये मूल्य उनमें विकसित करना है तो शिक्षक को स्वयं ऐसा बनना पड़ेगा। क्योंकि बालक देखकर सीखता है जैसा आचरण उसके शिक्षक का होगा वैसा आचरण ही एक बालक द्वारा दोहराया जाएगा। सीखना प्रक्रिया सतत चलायमान है।

साहस के साथ धैर्य की भी आवश्यकता पड़ती है। कई बार किए हुए कामों का परिणाम देरी से मिलता है ऐसे में धैर्य की आवश्यकता होती है। परिणामों को प्राप्त होने में निर्धारित समय से अधिक भी लग सकता है। इसलिए नए काम के साहस के साथ धैर्य की भी आवश्यकता रहती है। अगर वांछित परिणाम मिलने में देर हो जाए तो सकारात्मकता के साथ धैर्य से प्रतीक्षा करनी चाहिए। अपने कार्यों में संलग्न रहे और सृजनात्मकता को भी समय देते रहे, निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।  
    
Krishan Gopal 
The Fabindia School, Bali 
kde@fabindiaschools.in 

Monday, November 16, 2020

साहस ही जीवन है - Ayasha Tak

cleanpublicdomain.com 
साहस की जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। ऐसी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बिल्कुल  निडर, बिल्कुल बेखौफ होती है। साहसी मनुष्य की असली पहचान यह होती है कि वह इस बात की चिंता नहीं करता है, कि दूसरे लोग उसके बारे में क्या सोचते है ? अड़ोस - पड़ोस को देख कर चलना यह साधारण मनुष्यों का काम है।

 साहसी व्यक्ति न तो अपने उद्देश्य की तुलना दूसरों से करते है और न ही दूसरों को देखकर अपनी चाल को बदलते है। जो व्यक्ति यह महसूस करता है कि किसी महान निश्चय के समय वह साहस से काम नहीं ले सका, जिंदगी की चुनौती को कबूल नहीं कर  सका , वह कभी सुखी नहीं हो सकता।

जीवन में साहस एक मुख्य भूमिका निभाता है जो हमें निडरता के साथ जिंदगी जीने में  मदद करता है। हम सभी के जीवन में कुछ मुश्किलें पैदा होती है और हमें  कई प्रकार की कठिनाइयों से गुजरना पड़ता हैं। 

लेकिन सभी मुश्किलों में साहसिक व्यक्ति हिम्मत से काम लेते हैं और एक नयी जबरदस्त शुरुआत करते हैं। साहस के साथ कठिनाईयों से लड़ने वाले व्यक्ति अपने जीवन में सफलता की ऊँचाईयों को जरूर प्राप्त करते हैं। खुश रहने का रहस्य है स्वतंत्रता और स्वतंत्र रहने का रहस्य साहस होता है।
 
Ayasha Tak
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Tuesday, March 31, 2020

साहस- राजेश्वरी राठौड़


किसी भी काम को करने के लिए साहस होना चाहिए। यदि आपके अंदर हिम्मत नही होगी तो आप कुछ नही कर पायेंगे। हर चीज के लिए आपको हिम्मत चाहिए। चाहे वह छोटा कार्य ही कयों नाहो। जो आदमी यह महसूस  करता है किसी महान निश्चय के समय वह साहस से काम नहीं ले सका ;जिंदगी की चुनौतियों को कबूल नहीं कर सका; वह सुखी नहीं हो सकता है। बड़े मौके पर साहस नहीं दिखाने पर आप अपना वह लक्ष्य प्राप्त करने में विफल रहते हैं। विश्व के 95% व्यक्ति अपने लक्ष्य को या कार्य को प्रारंभ इसलिए नहीं कर पाते हैं कयोंकि वे इस बात से  डर जाते हैं की वह कहीं कोई गलती कर बैठेंगे या  असफल  हो जाएंगे । 

केवल 5% व्यक्ति ही अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु जोखिम लेने की हिम्मत जुटा पाते हैं ।अंतत अपने लक्ष्य को प्राप्त कर उन 5% महान व्यक्तियों की श्रेणी में सम्मिलित हो जाते हैं ,जिन्हें  यह विश्व महापुरुष के रूप में जानते  हैं । वर्तमान में विश्व में कई चुनोतियाँ  मुंह फैलाये खड़ी हैं ;जिनसे वे ही जीत पाएंगे जो इनका मुकाबला करने की हिम्मत दिखा पायेंगे । विद्यार्थियों को भी हर चुनौती का सामना करने का साहस रखना चाहिए । तभी वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे।

राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School

Saturday, January 4, 2020

कृष्ण गोपाल: खेल से जिज्ञासा


खेल विद्यालयी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। खेल सीखने के लिए आवश्यक है, विद्यार्थी खेल ही खेल में कई प्रकार के कौशल सीख जाता है।  निश्चित रूप से खेल बालकों को चुस्त और स्वस्थ रखता है।  खेलों द्वारा छात्र कई मूल्य सीख जाते हैं जैसे- निष्पक्षता, साहस, नेतृत्व-भावना, दलीय-भावना आदि।  

कक्षा में भी खेल-विधि का प्रयोग कर छात्रों को बहुत कुछ सिखाया जा सकता है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए ये पद्धति अधिक उपयुक्त है।  संख्याओं, पहेलियों और शब्दों के खेलों के माध्यम से पढ़ाया जा सकता है।  खेलों के माध्यम से छात्रों की जिज्ञासा बढ़ती है और वे अधिक सीखने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।  इस प्रकार छात्र कक्षा में अधिक चौकस रहेंगे और जानने के लिए उत्सुक रहेंगे। 

जिज्ञासा,  उत्साह का कारण बनती है। इसी प्रकार एक बच्चे का दिमाग कई दिशाओं में काम करना शुरू कर देता है। उनकी रचनात्मकता और कल्पना में वृद्धि होती है।  नई अवधारणाओं का जन्म होगा।  अपनी समस्याओं का समाधान खोजेंगे और उनका सीखना कभी बंद नहीं होगा। 

एक बार यदि बालक की नींव मजबूत हो जाए तो उच्च कक्षाओं में आसानी रहती है। वे आत्मविश्वास के साथ, बिना किसी डर के दुनिया का सामना करने  लिए सक्षम होंगे। किसी भी परिस्थिति में निर्णय लेने हेतु स्वतंत्र होंगे। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बालकों का मार्गदर्शन और समर्थन करें चाहे बालक किसी स्थान पर असफल हो। इससे उनका आत्मसम्मान बढ़ेगा और बेहतर करने का प्रयास करेंगे ।
Krishan Gopal
kde4fab@gmail.com

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