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Monday, October 5, 2026

हर परिस्थिति में शिक्षा जरूरी है - Chanchal

मेरे विचार से जीवन में परिस्थिति कैसी भी हो, शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं होता। कठिन समय में भी शिक्षा हमें सही रास्ता चुनने और समस्याओं का सामना करने की हिम्मत देती है। कई बार परिस्थितियाँ हमारे सामने ऐसी चुनौतियाँ खड़ी कर देती हैं, जिनके कारण पढ़ाई करना मुश्किल लगता है, लेकिन ऐसे समय में शिक्षा को जारी रखना और भी जरूरी हो जाता है।

शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन को समझने, सही और गलत में अंतर करने तथा अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता देती है। कठिन परिस्थितियों में शिक्षा ही हमारे अंदर आत्मविश्वास और उम्मीद बनाए रखती है।

इसलिए मेरा मानना है कि चाहे परिस्थिति सामान्य हो या कठिन, शिक्षा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। शिक्षा एक ऐसा साधन है जो हमें वर्तमान परिस्थितियों से बाहर निकलने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैl

Chanchal, Sunbeam Gramin School

Sunday, May 24, 2026

सकारात्मक सोच और सही निर्णय- सुनीता त्रिपाठी

सोच ही सब कुछ है, यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिक्षक का व्यवहार ही कक्षा का माहौल तय करता है। इसलिए, एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी विश्वास और अपनी सोच है।

रोमा ने भी यही किया। उन्होंने माता-पिता को बताया, पर बात केवल काउंसलर और अभिभावक तक ही सीमित रखी। रोमा की यह सोच थी कि किसी को शर्मिंदा न किया जाए। उन बच्चियों ने स्वीकार किया कि गलती हुई है। रोमा को लगा कि गलतियों को स्वीकार करना व्यक्तिगत विकास और सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर व्यक्ति गलती करता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम उन गलतियों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। अपनी कमियों को स्वीकार करना ईमानदारी और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ाता है।

इस अध्याय में मैंने सीखा कि असफलता और गलतियां जीवन का अंत नहीं होतीं, बल्कि हमें आगे बढ़ने की सीख देती हैं। हर व्यक्ति से गलती होती है, लेकिन सफल वही बनता है जो हार मानने के बजाय दोबारा प्रयास करता है। हमारी सोच ही तय करती है कि हम जीवन और स्वयं को किस प्रकार देखते हैं। जब हमें विश्वास होता है कि हम सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं, तब हम अधिक मेहनत करते हैं और आसानी से हार नहीं मानते। अच्छी सोच वाले लोग गलतियों को सीख के रूप में देखते हैं। हम जानते हैं कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सुधार करने का एक अवसर है। रोमा ने भी इसी तरह गोपनीयता रखते हुए, अपनी सोच को दर्शाते हुए सही फैसला लिया।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल


Friday, January 8, 2021

साहस का जीवन में महत्व - Krishan Gopal

Courtesy: livehindustan.com
साहस का अर्थ यह नहीं कि हम युद्ध भूमि में जाएँ या किसी के साथ शारीरिक शक्ति से मुकाबला करें। यहाँ साहस का अर्थ केवल परिस्थितियों से मुकाबला करना है। कई बार व्यक्ति डरता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए, कहीं मेरा निर्णय गलत न हो। इस प्रकार के भय से मन आतंकित रहता है। इस भय को दूर करना और कुछ अपने मन की करना, परिणाम चाहे जो कुछ भी हो, इसी का नाम साहस है। हम बहुत कुछ करना चाहते हैं किंतु इसी भय के कारण हम कतराते हैं और यह सोचते हैं जैसा चल रहा है, जो चल रहा है वह ठीक ही है।

माता-पिता अपने बच्चे को भी इसी प्रकार कहते हैं। कुछ करने से बच्चे को चोट लगेगी या विफल हो जाएगा तो मन अशांत हो जाएगा, ऐसा विचार करके बच्चे को कुछ करने से रोक देते हैं। जबकि साहस को बढ़ाने का या बच्चे को साहसी बनाने का यही अवसर होता है। बचपन से ही उसे नया करने की स्वतंत्रता मिले तो वह निश्चित रूप से सफलता या असफलता का सामना करने में सक्षम हो जाएगा।

कभी कुछ करने से पहले हम यही सोचते हैं कि कहीं असफल न हो जाए या हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं। परंतु यह नहीं सोचते कि असफल हो भी गए तो कुछ सीखने को अवश्य मिलेगा और अगर सफल हो गए तो मंजिल तक पहुँच ही जाएँगे। इसलिए मन को सकारात्मक रखते हुए तथा धैर्य को अपना साथी बनाते हुए हमें ऐसे कार्यों के लिए साहसी बनना पड़ेगा।

हमारे अंदर साहस भरा पड़ा है अब उसके उपयोग की। जीवन में ऐसे कई अवसर आते हैं जब हमें कुछ ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो हमारे साहस को ही रेखांकित करते हैं। वास्तव में साहस एक सीढ़ी की तरह है, एक कदम आगे बढ़ाने पर और बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी। जगह-जगह में साहस दिखाने की भी आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए परिणामों की चिंता किए बिना हमेशा साहसी बनना पड़ेगा तथा यह बच्चों को भी सिखाना पड़ेगा। 

Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali
kde@fabindiaschools.in

Monday, May 4, 2020

सहनशीलता और खुशी: सुरेश सिंह नेगी


सहनशीलता एक ऐसा सत्य है, जिससे प्राय: सभी लोगों को अपने जीवनकाल में रूबरू होना पड़ता है। सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है। आज के इस भौतिकवादी दौर में हमें अध्ययन करने, पढ़ाने और सहनशीलता का अभ्यास कराने की और इसे अपने बच्चों में, शिक्षा और अपने स्वयं के उदाहरण दोनों के माध्यम से स्थापित करने की आवश्यकता  है। सहनशीलता कोई पकड़ नहीं है, लेकिन यह एक गुणवत्ता है। जिसे हमें संजोना है और इसका लगातार अभ्यास करते रहना है।

हर पाठ के साथ हम यह सीखते हैं कि हमें एक निर्णय लेना पड़ेगा,  जो कि हमारे भविष्य को निर्धारित करेगा। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि हम भविष्य को देखकर के ही सीख सकते हैं, न कि केवल अतीत या वर्तमान से।

परिवर्तन केवल हमारे हाथों से होता है। हमें उस शक्ति की आवश्यकता है, जो उस घृणा और असहनशीलता को दूर कर सके। हमारा काम एक ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें लोग अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त कर सकें, अपनी खुशी का निर्माण कर  सके  और आनंद ले सके।

इतिहास की सुबह से, खुशी वह सब है जो मानवता ने मांगी है। अरस्तू ने कहा कि राज्य एक जीवित प्राणी है जो व्यक्तियों के लिए नैतिक पूर्णता और खुशी की उपलब्धि की तलाश में विकसित होता है।

खुशी पर ध्यान देना संभव है और यह पूरी तरह से उचित है। खुशी को मापा जा सकता है। इसके अलावा, इसे विकसित भी किया जा सकता है, और इसकी उपलब्धि भौतिक उद्देश्यों से जुड़ी है। अध्ययनों से पता चलता  है कि खुशहाल लोग अधिक उत्पादन करते हैं, लंबे समय तक रहते हैं, और अपने समुदायों और देशों में बेहतर आर्थिक विकास करतें  हैं।

सहनशीलता का गुण आ जाने से दोस्तों और पड़ोसियों के बीच में खुशी का माहौल होता है। जिससे जल्दी से तनाव या क्रोध नहीं आ पाता। इसलिए सहनशील बनकर निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना  चाहिए।
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

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