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Monday, October 5, 2026

जीवन के अनुभवों से मिलने वाली शिक्षा - अशोक कुमार मौर्य


आज की कहानी में यह दिखाया गया कि एक बच्चा परिवार, समाज, हर जगह शिक्षा एवं ज्ञान प्राप्त करता है। जरूरी नहीं है कि वह विद्यालय में ही सब कुछ सीखे। एक बच्चे की कहानी है, जिसमें वह बच्ची पढ़ी-लिखी नहीं है, लेकिन वह अपने माता-पिता के बीच रहकर अपने माता-पिता से सब कुछ सीखती है कि कैसे उसके माता-पिता संघर्ष कर रहे हैं। इस कहानी में एक दाई से लेकर एक सिपाही तक की कहानी दिखाई गई है कि उसके सामने ही उसके माता-पिता एवं भाई पर जो संकट आता है, वह खुद उसको देखती है।

इस कहानी में व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग कामों को दर्शाया गया है कि हर व्यक्ति का जीवन कितना संघर्षमय रहता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में आए संघर्षों को झेलते हुए सभी समस्याओं को दूर करते हुए आगे बढ़ता है।

अशोक कुमार मौर्य


Sunday, May 24, 2026

सकारात्मक सोच और सही निर्णय- सुनीता त्रिपाठी

सोच ही सब कुछ है, यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिक्षक का व्यवहार ही कक्षा का माहौल तय करता है। इसलिए, एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी विश्वास और अपनी सोच है।

रोमा ने भी यही किया। उन्होंने माता-पिता को बताया, पर बात केवल काउंसलर और अभिभावक तक ही सीमित रखी। रोमा की यह सोच थी कि किसी को शर्मिंदा न किया जाए। उन बच्चियों ने स्वीकार किया कि गलती हुई है। रोमा को लगा कि गलतियों को स्वीकार करना व्यक्तिगत विकास और सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर व्यक्ति गलती करता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम उन गलतियों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। अपनी कमियों को स्वीकार करना ईमानदारी और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ाता है।

इस अध्याय में मैंने सीखा कि असफलता और गलतियां जीवन का अंत नहीं होतीं, बल्कि हमें आगे बढ़ने की सीख देती हैं। हर व्यक्ति से गलती होती है, लेकिन सफल वही बनता है जो हार मानने के बजाय दोबारा प्रयास करता है। हमारी सोच ही तय करती है कि हम जीवन और स्वयं को किस प्रकार देखते हैं। जब हमें विश्वास होता है कि हम सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं, तब हम अधिक मेहनत करते हैं और आसानी से हार नहीं मानते। अच्छी सोच वाले लोग गलतियों को सीख के रूप में देखते हैं। हम जानते हैं कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सुधार करने का एक अवसर है। रोमा ने भी इसी तरह गोपनीयता रखते हुए, अपनी सोच को दर्शाते हुए सही फैसला लिया।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल


Sunday, May 10, 2026

अलग विचारों से समझ की ओर - सुनीता त्रिपाठी

 "Like versus unlike" अध्याय पढ़ने के बाद मुझे एक स्टाफ रूम का अनुभव याद आता है, जब हम सभी शिक्षक एक बच्चे के बारे में समूह में चर्चा कर रहे थे। हर शिक्षक की उस बच्चे के प्रति अलग-अलग राय थी।

किसी को उसका व्यवहार अच्छा लगता था, तो किसी को उसकी पढ़ाई में कमी दिखाई देती थी। उसी समय मैंने महसूस किया कि हमारी सोच और नजरिया एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं, लेकिन हर राय अपने अनुभव के आधार पर सही होती है। यदि उन बातों को ध्यान से सुनें, तो हमें उस बच्चे को बेहतर समझने में मदद मिलती है। इस अनुभव से मैंने सीखा कि किसी एक नजरिए से किसी बच्चे को आंकना सही नहीं होता। "Unlike" विचार हमें नई समझ देते हैं और हमें संतुलित निर्णय लेने में मदद करते हैं। अब मैं कोशिश करती हूं कि जब भी किसी बच्चे के बारे में चर्चा हो, तो मैं सभी की बातों को सम्मानपूर्वक सुनूं और एक सकारात्मक दृष्टि बनाए रखूं।

एक शिक्षक के रूप में यह समझ बहुत जरूरी है, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है और हमें उसकी विशेषताओं को पहचान कर उसे सही दिशा देनी चाहिए। इस अध्याय ने मुझे यह भी सिखाया कि हमें दूसरों की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए और उनके विचारों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं और आपसी समझ बढ़ती है। अलग-अलग "like" और "unlike" ही हमें एक-दूसरे के करीब लाते हैं, क्योंकि इन्हीं में समझ और सीख छिपी होती है। जब हम दूसरों की भावनाओं और विचारों को दिल से स्वीकार करते हैं, तभी सच्चे मायनों में इंसानियत और अपनापन झलकता है।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल


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