Showing posts with label गलतियाँ. Show all posts
Showing posts with label गलतियाँ. Show all posts

Sunday, May 24, 2026

सकारात्मक सोच और सही निर्णय- सुनीता त्रिपाठी

सोच ही सब कुछ है, यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिक्षक का व्यवहार ही कक्षा का माहौल तय करता है। इसलिए, एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी विश्वास और अपनी सोच है।

रोमा ने भी यही किया। उन्होंने माता-पिता को बताया, पर बात केवल काउंसलर और अभिभावक तक ही सीमित रखी। रोमा की यह सोच थी कि किसी को शर्मिंदा न किया जाए। उन बच्चियों ने स्वीकार किया कि गलती हुई है। रोमा को लगा कि गलतियों को स्वीकार करना व्यक्तिगत विकास और सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर व्यक्ति गलती करता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम उन गलतियों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। अपनी कमियों को स्वीकार करना ईमानदारी और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ाता है।

इस अध्याय में मैंने सीखा कि असफलता और गलतियां जीवन का अंत नहीं होतीं, बल्कि हमें आगे बढ़ने की सीख देती हैं। हर व्यक्ति से गलती होती है, लेकिन सफल वही बनता है जो हार मानने के बजाय दोबारा प्रयास करता है। हमारी सोच ही तय करती है कि हम जीवन और स्वयं को किस प्रकार देखते हैं। जब हमें विश्वास होता है कि हम सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं, तब हम अधिक मेहनत करते हैं और आसानी से हार नहीं मानते। अच्छी सोच वाले लोग गलतियों को सीख के रूप में देखते हैं। हम जानते हैं कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सुधार करने का एक अवसर है। रोमा ने भी इसी तरह गोपनीयता रखते हुए, अपनी सोच को दर्शाते हुए सही फैसला लिया।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल


Saturday, April 4, 2026

गलतियाँ नहीं, सुधार के अवसर - सुनीता त्रिपाठी

बच्चों की गलतियों पर चर्चा करें या ना करें — इस संदर्भ में एक छोटा सा लेख

बच्चों की गलतियों पर चर्चा तभी सही है जब उसका उद्देश्य सुधार और मार्गदर्शन हो। यह विचार एक शिक्षक के वास्तविक कर्तव्य को दर्शाता है। एक शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व को संवारने वाला मार्गदर्शक होता है। इसलिए जब भी बच्चे से कोई गलती होती है, तो उसे एक अवसर की तरह देखना चाहिए, न कि दोष के रूप में।

मुझे ऐसा लगता है कि शिक्षक संवेदनशीलता और गोपनीयता बनाए रखते हुए बच्चे को समझाएँ। इससे उसके अंदर सुधार की इच्छा आती है और वह बिना डर के अपनी कमियों को स्वीकार कर पाता है। इसके विपरीत, यदि उसकी गलती को सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाए, तो उसके मन में डर, संकोच और हीन भावना उत्पन्न हो सकती है।

सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने वाला शिक्षक बच्चों के मन में विश्वास और अपनापन पैदा करता है। यही विश्वास बच्चों को आगे बढ़ने और सीखने के लिए प्रेरित करता है। एक बच्चा स्कूल में शिक्षक पर विश्वास करता है। एक शिक्षक वही है, जो बच्चे की गलतियों को छुपाकर नहीं, बल्कि समझदारी और संवेदनशीलता के साथ सुधारने का प्रयास करता है, ताकि बच्चा एक अच्छा और आत्मविश्वासी इंसान बन सके।

सनबीम ग्रामीण स्कूल
सुनीता त्रिपाठी

Monday, April 28, 2025

गलतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही सच्ची सफलता की कुंजी है- Arthur Foot Academy

"गलतियाँ हमेशा क्षमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकार करने का साहस हो।"

इस पाठ से मैंने सीखा है कि जीवन में कोई इंसान ऐसा नहीं है जिससे गलती न होती हो। हर इंसान से गलती होती है।
परंतु हमें अपने जीवन में किसी भी कार्य या उन्नति को हासिल करने के लिए, अपनी की हुई गलती को लेकर कभी निराश नहीं होना चाहिए। हमें कभी भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए और अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए।
तथा अपनी गलतियों में सुधार कर, अपने जीवन में आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

"इंसान की फितरत है
दूसरों की गलतियाँ निकालना,
अपनी गलतियों को छिपाना,
फिर
अपनी गलतियों पर पछताना!"

बहुत मुश्किल होता है, अपनी कमियों को दिल से स्वीकार कर पाना। क्योंकि कहीं ना कहीं हमारा अहंकार हमें स्वीकार करने नहीं देता है। हम कभी भी अपनी गलतियों या कमियों को स्वीकार नहीं कर पाते। परन्तु दिल से जान सब जाते हैं। फिर चाहे कोई भी इंसान हमारा कितना ही अपना क्यों न हो, उसके कहने पर भी हम अपनी कमियों को स्वीकार नहीं पाते। क्योंकि सब अपने बारे में यही सोचते हैं कि मैं कभी कोई गलती नहीं कर सकता और ना ही मुझमें कोई कमी है। बस यही अहंकार सबके सामने आ जाता है। इसी वजह से कोई अपनी कमियों को स्वीकार नहीं कर पाता है।

शायद इंसान का स्वभाव ही ऐसा है कि वह दूसरों की कमियों को पहले देखता है, क्योंकि वे सामने होती हैं, जबकि खुद की कमियाँ या गलतियाँ उसे दिखाई नहीं देती हैं।

"जितना आसान है दूसरों की गलतियाँ निकालना, उससे कहीं मुश्किल है, खुद में कमी ढूंढना।"

– स्वाति

Blog Archive