बच्चों की गलतियों पर चर्चा करें या ना करें — इस संदर्भ में एक छोटा सा लेख
बच्चों की गलतियों पर चर्चा तभी सही है जब उसका उद्देश्य सुधार और मार्गदर्शन हो। यह विचार एक शिक्षक के वास्तविक कर्तव्य को दर्शाता है। एक शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व को संवारने वाला मार्गदर्शक होता है। इसलिए जब भी बच्चे से कोई गलती होती है, तो उसे एक अवसर की तरह देखना चाहिए, न कि दोष के रूप में।
मुझे ऐसा लगता है कि शिक्षक संवेदनशीलता और गोपनीयता बनाए रखते हुए बच्चे को समझाएँ। इससे उसके अंदर सुधार की इच्छा आती है और वह बिना डर के अपनी कमियों को स्वीकार कर पाता है। इसके विपरीत, यदि उसकी गलती को सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाए, तो उसके मन में डर, संकोच और हीन भावना उत्पन्न हो सकती है।
सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने वाला शिक्षक बच्चों के मन में विश्वास और अपनापन पैदा करता है। यही विश्वास बच्चों को आगे बढ़ने और सीखने के लिए प्रेरित करता है। एक बच्चा स्कूल में शिक्षक पर विश्वास करता है। एक शिक्षक वही है, जो बच्चे की गलतियों को छुपाकर नहीं, बल्कि समझदारी और संवेदनशीलता के साथ सुधारने का प्रयास करता है, ताकि बच्चा एक अच्छा और आत्मविश्वासी इंसान बन सके।
सनबीम ग्रामीण स्कूल
सुनीता त्रिपाठी

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