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Sunday, September 27, 2020

मेहनत करने से मिलती है मंजिल - Usman Gani

*दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा*

हिन्दी जगत की मशहूर फिल्म मदर इण्डिया के गीत के मर्म को अगर गहराई से जानने की कोशिश करे तो हमें यह मालूम पड़ेगा कि जिन्दगी इम्तिहान का नाम है, संघर्ष का नाम है। ये इम्तिहान इंसान की जिंदगी में मां की गोद से शुरू होकर कब्र की गोद तक जारी रहते हैं। इंसान को हर दिन, हर पल किसी न किसी तरह के इम्तिहान या परीक्षा से गुजरना ही पड़ता है। कुछ लोग इन इम्तिहानों को हंसते-हंसते पार करते है और कुछ घुट-घुट कर इनका सामना करते हैं।

अक्सर देखने में आया हैं कि जिंदगी के इन इम्तिहानों में केवल दो ही तरह के लोग असफल होते हैं एक वे जो सोचते हैं पर करते कुछ नहीं और दूसरे वे जो करते तो बहुत है मगर सोचते कुछ नहीं। बिना सोचे विचारे किया काम कभी सफल नहीं हो सकता, क्योंकि बिन बारिस के मौसम के अगर खेत मे बीज डाले जाएंगे तो वे केवल कचरा ही बनेंगे। उन बीजों से अच्छी फसल की उम्मीद नहीं रखी जा सकती। इसलिए सही समय पर सोच-समझकर किया गया कार्य ही मंजिल की तरफ लेकर जाता है।

मुश्किलों  से  भाग  जाना  आसान  होता है,  हर  पहलू  जिंदगी  का  इम्तिहान  होता  है,                        

डरने वालों को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में,  लडऩे  वालों  के  कदमों  में  जहान  होता है

यदि कड़ी मेहनत को हथियार बनाए जाए तो सफलता अवश्य ही हमारी गुलाम बनती है। हर रोज आकर हमें परेशान करने वाली मुश्किलें, नित-नई पैदा होने वाली समस्याएं, घनघोर बादल की तरह जिंदगी में भूचाल लाने वाली विपदाएं ही वो इम्तिहान है। जिसने इंसान को और अधिक संवारने का कार्य किया है। इतिहास गवाह है माजी (भूतकाल) में इंसान ने हर कदम पर इन मुसीबतों, समस्याओं और विपदाओं का हंसते हुए सामना किया है और इनका हल भी निकाला है। उसी के परिणाम के रूप में उस समय जो समस्याएं थी आज हमारे लिए विज्ञान के आविष्कार बन चुकी है। जिनके बिना आज हमें हमारी जिंदगी अधूरी लगती है।

हिम्मत करने वालों के नसीब एक न एक दिन अवश्य बदलते हैं। जिंदगी में मुसीबतों के सामने कभी घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए, संघर्ष कर सफलता तक पहुंचने वाले को दुनिया हमेशा सलाम करती है। इंसान को जिंदगी में हर लम्हा संघर्ष करते रहना चाहिए। क्योंकि सोना जितना आग में तपता है, उसकी चमक उतनी ही तेज होती है। इसीलिए इंसान को लगातार प्रयास करते ही रहना चाहिए। कहा भी गया है -

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं है, तू इंसान है कोइ अवतार नहीं है, गिर, उठ, चल, दौड़, फिर भाग, जिंदगी संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं है।

उस्मान गनी, द फैबइंडिया स्कूल <ugi@fabindiaschools.in>

Wednesday, September 2, 2020

संघर्ष ही जीवन है - सुरेश सिंह नेगी

जीवन एक संघर्ष  है जो अंत में विजय का द्वार खोलती है और समस्या का समाधान करती है। जीवन में परिवर्तन
का क्रम चलता रहता है। जब तक जीवन है तब तक संघर्ष है।संघर्ष का दौर तो हमारे इस दुनिया में हमारे  जन्म लेने के साथ ही शुरू  हो जाता है। जब हम छोटे थे उस समय हमें सही से चलने और बोलने के लिए  संघर्ष  करना पड़ता था। जब बड़े हुए तो पढाई के लिए संघर्ष, उसके बाद नौकरी के लिए संघर्ष ‘इसलिए जब तक जीवन  है हमें संघर्ष करते हुए जीना होता है। जीवन  हमेशा आसानी से नहीं गुजरता, हर दिन कोई न कोई चुनौती, कोई न कोई, संघर्ष जीवन  में आता है और आता रहेगा।

ऐसा कोई नहीं हैं जिसके जीवन   में चुनौतियाँ  न हों, दुःख न हों, कठिनाई न हों, रुकावटें न हों। चुनौतियां केवल बुलंदियों को छूने की नहीं होतीं, बल्कि वहां टिके रहने की भी होती हैं। इस दुनिया में हर एक प्राणी संघर्ष कर रहा है।   यह ठीक है कि एक काम करते-करते हम उसमें कुशल हो जाते हैं। उसे करना आसान हो जाता है, पर वही करते रह जाना हमें अपने ही बनाई सुविधा के घेरे में कैद कर लेता है। 

 संघर्ष काल में हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि व्यक्ति के स्वयं के हाथ में कुछ नहीं है। लेकिन उसे लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।   क्योंकि प्रयास सफलता की कुंजी होती है।

हमें जीवन में संघर्षो का स्वागत करते रहना चाहिए। बिना संघर्ष किए जीवन के लक्ष्य प्राप्त नहीं किये जा सकते। कहते हैं कि संघर्ष करने वालो की कभी हार नहीं होती। 

संघर्ष से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। ऐसे व्यक्ति सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति होते है जो अपने आसपास के वातावरण से ही उस सकारात्मकता को ग्रहण करते है। हमें भी अपने सभी पहलुहों से सकारात्मकता ग्रहण करनी चाहिए। हमें अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए और अपने अंदर सकारात्मकता विकसित करनी चाहिए। 

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Wednesday, August 5, 2020

शिक्षा और कोविद -१९ - Suresh Negi

कोविद -१९ महामारी के कारण, देश भर की राज्य सरकारों ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अस्थायी
रूप से बंद कर दिया। मौजूदा स्थिति के आधार पर, यह नही कहा जा सकता है कि यें अब कब खुलेंगी। जब स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को फिर से खोला जाएगा तब निस्संदेह, यह शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समय होगा, क्योंकि इस अवधि के दौरान कई स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित की जायेंगी।  

तकनीकी रूप से अब पूरा भारत दो भागों में विभाजित हो चुका है, जँहा एक ओर  तकनीक-गरीबों से वंचित और तकनीक के जानकारों को  अलग कर रहा है, वंही दूसरी ओर लाखों बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं की चुनौतियों का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कोविद -१९ महामारी, जिसने लोगों को अपने घरों में और स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को आभासी कक्षाएं लेने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसके लिए छात्र के पास एक कंप्यूटर या कम से कम एक स्मार्टफोन, एक उचित इंटरनेट कनेक्शन और बिजली की आपूर्ति का होना अति आवश्यक है।शिक्षा का क्षेत्र, जो कभी वास्तविक स्तर पर नहीं पहुंचा था, अब छात्रों, और उनके शिक्षकों के रूप में गांवों, शहरों और कस्बों में समय की माँगों का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

उदाहरण के लिए, गाँवो में जंहा सिगनल पूर्ण रूप से न होने का सामना करना पड़ता है। वंही इस मौसम में बिजली की आपूर्ति का सामना भी करना पड़ रहा है। कई लोंगो के पास एक फोन है, लेकिन आमतौर पर बिजली नहीं है, इसलिए प्रत्येक दिन ऑनलाइन व्याख्यान लेना मुश्किल है।

कुछ लोग जिनके दो बच्चे जो एक ही स्कूल में पढ़ते ही है, उनमे से एक बच्चा ऑनलाइन कक्षाओं में भाग नही ले पाता है, क्योंकि वे दोनों एक मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं। अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ, कि कोविद -१९ का यह दौर जल्दी से जल्दी समाप्त हो जिससे कि जो भी लोग किसी कारणवश शिक्षा से दूर हो गएँ हैं,वो दुबारे से इसका लाभ ले सकें।

Suresh Negi
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Thursday, June 18, 2020

आशा और मित्रता: उर्मिला राठौड़


'समय के साथ सब अच्छा होता है’- ऐसा हम सुनते हुए बड़े हुए और हुआ भी क्योंकि ये शब्द हमें आशावान बनाते है। एक आशावादी व्यक्ति की सोच सदैव सकारात्मक होती है और यही उसके पथप्रदर्शन में सहायक होती है ' आशा ' एक शब्द जो हमारे मन मस्तिष्क में नव जीवन का संचार करती है फिर चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों हो आशावादी इंसान उस पर सफलता हासिल कर ही लेता है। 'आशा' एक जीवन प्रदायिनी जड़ीबूटी है।

वर्षों से दबा हुआ एक छोटा सा बीज़ आशाओं की बारिश में प्रस्फुटित हो जाता, उसके संघर्ष की कहानी कोई कम आसान नहीं होती परन्तु एक आशा की बूंद उसे दोगुना हौसला प्रदान करती है। फिर वो एक महान और विराट वृक्ष बनकर जीव - जंतुओं की आश्रय स्थलीआते - जाते राहगीरों का विश्राम गृह और असंख्य जीवों को जीवन प्रदायिनी वायु का संचार करता है। अर्थात् एक आशावान व्यक्ति उनके संपर्क में आए अन्य व्यक्तियों को किसी किसी तरह सकारात्मक तरीके से अवश्य प्रभावित करता है। निराशा का अंधेरा कितना भी छाया हो लेकिन आशा की एक किरण ही काफ़ी होती है उसे मिटाने की इसलिए हम कितने भी निराश क्यों हो एक आशावादी सोच और कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश हमें ऊँचाइयाँ प्रदान करती है।

एक अच्छा और आशावादी शिक्षक छात्रों में नई चुनौतियों को स्वीकारने का गुण पैदा करता है, उन्हें विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत हारने का कौशल सिखाता है। परीक्षा और परिणाम की चिंता से परे ले जाकर उनमें समाहित शक्तियों का अहसास कराता है, उसे प्रोत्साहित करता है, कुछ अच्छाइयों के लिए प्रेरित करता है, उसकी सराहना करता है, तभी वह सीखने के लिए आतुर होगा। छात्रों को उनकी चिंताओं से ज्यादा नए कौशलों पर ध्यान आकर्षित करता है , जैसे - समाज में मुखर वक्ता बनना, दया और सहयोग की भावना रखना, दूसरों को उनकी अंतर्निहित शक्तियों का आभास करवाना, आदि।  
" एक अच्छा शिक्षक आशा को प्रेरित कर सकता है, कल्पना को प्रज्वलित कर सकता है और सीखने का प्रेम पैदा कर सकता है।" - ब्रेड हेनरी

वैसे ही एक शिक्षक जो आशावान है वो   केवल अपने विद्यार्थियों को बल्कि आसपास के सामाजिक ढाँचे को भी भविष्य के प्रति आशावान बनता है। जब आशावादी विचारधारा का एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को यह शिक्षा देगा तो उनके माध्यम से माता - पिता, परिवार, आस - पड़ोस और पूरे समाज में वो एक अलग पहचान बनाने में कामयाब होगा

आशावान व्यक्ति को मित्र बनाना और उसकी मित्रता को निभाना एक अहम गुण है। हम मित्र बनाते समय यह नहीं देखते कि उनमें कौनसे गुण समाहित है, परन्तु एक मित्र का कर्तव्य होता है कि वो अपने मित्र के प्रति निष्ठावान हो, एक - दूसरे के हृदय की भावनाओं को जाने, स्नेह, प्रेमाधार से और बिना किसी शर्त के सहयोग करें क्योंकि परिवार के बाद मित्र ही व्यक्ति को दिशा निर्देश देता है।

 कवि रहीम जी ने मित्रता पर अनेक दोहे लिखे जिनमें से एक है -
"कहि रहीम सम्पत्ति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपत्ति - कसौटी जे कसे, तेई सांचे मीत।।"

अर्थात् सच्चा मित्र वहीं होता है, जो विपत्ति के समय साथ दे मित्रता केवल सुख के समय में साथ नहीं देती बल्कि दुख में भी ढाल बनती है।

मित्रता हम उम्र में होनी चाहिए तथा कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। यह निस्वार्थ भाव से निभाई जाती है। श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती जगजाहिर है जो भावनाओं की कद्र करना सिखाती  अतएव मित्रता में हम अपने मन की भावनाओं, परेशानियों को साझा कर सकते है। कहते है कि मित्र यदि सज्जन हो तो बार- बार रूठने पर भी मना लेना चाहिए जैसे मोतियों के हार टूटने पर बार - बार उन्हें माला में पिरोया जाता है, इसलिए मोती जैसे महंगे सज्जन मित्रों की मित्रता के लिए हमेशा समझौता कर लेना चाहिए क्योंकि मित्रता दुख को आधा और सुख को दुगुना कर देती है।

कक्षा में शिक्षक को बालकों के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए जिससे वो अपनी परेशानी, कठिनाइयों को बेहिचक साझा कर सके और सीखने - सिखाने की प्रक्रिया खुले विचारों से हो सके।

 बालकों को भी अपने सहपाठियों के साथ अच्छी मित्रता निभानी चाहिए जैसे - एक- दूसरे की मदद करना,  दूसरों की भावनाओं की कद्र करना, अपनी वस्तुओं को साझा करना, किसी भी प्रतियोगिता में प्रतिभागी जरूर बने परन्तु विरोधी नहीं आदि।  
Urmila Rathore
The Fabindia School, Bali

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