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Sunday, October 11, 2026

साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की सीख - स्वाति त्रिपाठी

अध्याय “Apache Women” में साहस, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने की क्षमता को दर्शाया गया है। इस अध्याय में लेखक ने अपने परिवार के अनुभवों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वर्णन किया है। अपाचे महिलाओं की कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत, धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।

इस अध्याय से मुझे यह सीख मिली कि जीवन में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है, लेकिन हमें उनका सामना साहस और सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए। यह अध्याय परिवार के महत्त्व, संघर्षों से सीखने और अपने अनुभवों से मजबूत बनने की प्रेरणा देता है। इससे मुझे दूसरों की परेशानियों को समझने और हर परिस्थिति में धैर्य रखने की सीख मिली।

स्वाति त्रिपाठी 

Monday, October 5, 2026

शिक्षा का महत्व और आत्मनिर्भरता - ममता

इस अंश को पढ़कर मुझे यह समझने का अवसर मिला कि शिक्षा केवल स्कूल जाने या किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे सोचने, समझने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता देती है। लेखिका का बचपन सामान्य बच्चों से बहुत अलग था। उनके परिवार में बच्चों का स्कूल जाना, डॉक्टर के पास जाना और सरकारी व्यवस्था से जुड़ना भी नहीं होता था। इसके बावजूद लेखिका अपने आसपास की परिस्थितियों को समझने और अपने परिवार के जीवन को ध्यान से देखने का प्रयास करती थी।

इस अंश से मुझे यह भी सीख मिली कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सीखने की इच्छा व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। शिक्षा हमें अपने अधिकारों और दुनिया के बारे में जागरूक बनाती है। एक शिक्षक के रूप में मुझे महसूस हुआ कि प्रत्येक बच्चे को सीखने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षा उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

ममता, सनबीम ग्रामीण स्कूल 


हर परिस्थिति में शिक्षा जरूरी है - Chanchal

मेरे विचार से जीवन में परिस्थिति कैसी भी हो, शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं होता। कठिन समय में भी शिक्षा हमें सही रास्ता चुनने और समस्याओं का सामना करने की हिम्मत देती है। कई बार परिस्थितियाँ हमारे सामने ऐसी चुनौतियाँ खड़ी कर देती हैं, जिनके कारण पढ़ाई करना मुश्किल लगता है, लेकिन ऐसे समय में शिक्षा को जारी रखना और भी जरूरी हो जाता है।

शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन को समझने, सही और गलत में अंतर करने तथा अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता देती है। कठिन परिस्थितियों में शिक्षा ही हमारे अंदर आत्मविश्वास और उम्मीद बनाए रखती है।

इसलिए मेरा मानना है कि चाहे परिस्थिति सामान्य हो या कठिन, शिक्षा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। शिक्षा एक ऐसा साधन है जो हमें वर्तमान परिस्थितियों से बाहर निकलने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैl

Chanchal, Sunbeam Gramin School

जीवन के अनुभवों से मिलने वाली शिक्षा - अशोक कुमार मौर्य


आज की कहानी में यह दिखाया गया कि एक बच्चा परिवार, समाज, हर जगह शिक्षा एवं ज्ञान प्राप्त करता है। जरूरी नहीं है कि वह विद्यालय में ही सब कुछ सीखे। एक बच्चे की कहानी है, जिसमें वह बच्ची पढ़ी-लिखी नहीं है, लेकिन वह अपने माता-पिता के बीच रहकर अपने माता-पिता से सब कुछ सीखती है कि कैसे उसके माता-पिता संघर्ष कर रहे हैं। इस कहानी में एक दाई से लेकर एक सिपाही तक की कहानी दिखाई गई है कि उसके सामने ही उसके माता-पिता एवं भाई पर जो संकट आता है, वह खुद उसको देखती है।

इस कहानी में व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग कामों को दर्शाया गया है कि हर व्यक्ति का जीवन कितना संघर्षमय रहता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में आए संघर्षों को झेलते हुए सभी समस्याओं को दूर करते हुए आगे बढ़ता है।

अशोक कुमार मौर्य


Sunday, September 27, 2026

Educated Chapter 3: “Cream Shoes” - मनोज कुमार & अशोक कुमार मौर्य

अध्याय – Cream Shoes

इस अध्याय से हमें यह महसूस हुआ कि तारा एक वयस्क के रूप में अपने माता-पिता के अतीत को नए दृष्टिकोण से देखती है। वह अपने पिता के व्यक्तित्व में समय के साथ आए बदलाव को समझने का प्रयास करती है और बाद में अपनी शिक्षा के माध्यम से उनके व्यवहार के बारे में कुछ संभावित व्याख्याएँ समझ पाती है। इससे हमें यह सीख मिली कि शिक्षा व्यक्ति को केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि अपने अतीत और अनुभवों को नए दृष्टिकोण से समझने की क्षमता भी देती है।

एक शिक्षक के रूप में मुझे यह महसूस हुआ कि यह अध्याय परिवार, पहचान, सामाजिक दबाव और शिक्षा के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित करता है। व्यक्ति की परिस्थितियाँ उसके जीवन और व्यक्तित्व को प्रभावित करती हैं तथा कठिन अनुभवों से भी सीख प्राप्त की जा सकती है।

मनोज कुमार, Sunbeam Gramin School

आज की क्लास से यह शिक्षा मिलती है कि अगर कोई बच्चा विद्यालय नहीं आता है या विद्यालय में देर से आता है, स्कूल का काम पूरा नहीं करता है या पढ़ने-लिखने में काफी कमजोर है, तो इसके पीछे उसका परिवार एवं उसके घर के आसपास का माहौल हो सकता है। यह भी कहा जा सकता है कि उसके माता-पिता पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान नहीं देते होंगे। ऐसे बच्चों को हम कमजोर नहीं कह सकते। एक शिक्षक को चाहिए कि ऐसे बच्चों के पास बैठे और उनसे बातें करे, माता-पिता से भी बच्चों के बारे में बात करे और सही मार्गदर्शन देकर ऐसे बच्चों की समस्याओं को दूर करे।

अशोक कुमार मौर्य, Sunbeam Gramin School

Saturday, September 5, 2026

शिक्षा से बदलाव और संघर्ष से सीख - Sunbeam Gramin School

शिक्षा और संघर्ष से मिली प्रेरणा

आज Educated पुस्तक के बारे में जानकर मुझे बहुत प्रेरणा मिली। यह पुस्तक तारा वेस्टओवर के जीवन-संघर्ष और शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को बदलने की कहानी प्रस्तुत करती है। उनकी कठिन पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास जारी रखा और आगे बढ़कर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय तक पहुँचीं।

इससे मुझे यह सीख मिली कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, शिक्षा और दृढ़ संकल्प व्यक्ति को अपने सपनों को पूरा करने की शक्ति देते हैं। एक शिक्षक के रूप में मुझे यह भी महसूस हुआ कि प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। इसलिए हमें बच्चों को केवल उनकी वर्तमान स्थिति से नहीं, बल्कि उनकी संभावनाओं को ध्यान में रखकर प्रोत्साहित करना चाहिए।

यह पुस्तक मुझे विश्वास दिलाती है कि सही अवसर, शिक्षा और निरंतर प्रयास किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
ममता

Educated पुस्तक परिचय

Educated पुस्तक परिचय में मुझे यह महसूस हुआ कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान या डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सोचने, समझने और अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को विकसित करती है। तारा वेस्टओवर की जीवन यात्रा से यह जाना कि कठिन परिस्थितियाँ, सीखने की इच्छा और निरंतर प्रयास के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।

प्रत्येक विद्यार्थी की परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं। इसलिए हमें केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों को देखकर मूल्यांकन नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी परिस्थितियों, संघर्षों और सीखने की क्षमता को भी समझना चाहिए। शिक्षक का कार्य केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच विकसित करना भी है। उन्हें यह विश्वास दिलाना कि शिक्षा उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

मनोज कुमार

Reflection: हर चुनौती एक सीख

मेरी ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। कभी परिस्थितियाँ मेरे पक्ष में रहीं, तो कभी ऐसा लगा कि चीज़ें मेरी उम्मीदों के अनुसार नहीं हो रही हैं। लेकिन समय के साथ मैंने यह सीखा कि जीवन में आने वाली हर चुनौती हमें कुछ न कुछ सिखाने के लिए आती है।

कई बार व्यक्तिगत जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आईं, जब मुझे अपने फैसलों, अपनी क्षमताओं और अपने धैर्य पर दोबारा विश्वास करना पड़ा। कुछ समय ऐसा भी रहा, जब जिम्मेदारियों और परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था। लेकिन मैंने हर बार खुद को संभाला, परिस्थिति को समझा और धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही।

इसी तरह अपने कार्यक्षेत्र में भी कई चुनौतियाँ सामने आईं। बच्चों की अलग-अलग सीखने की क्षमता, उनकी भावनाओं को समझना, नई जिम्मेदारियों को निभाना और हर परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करना—इन सबने मुझे एक बेहतर शिक्षक और एक बेहतर इंसान बनने में मदद की। कई बार किसी गतिविधि या प्रयास का परिणाम वैसा नहीं मिला जैसा सोचा था, लेकिन उन अनुभवों ने मुझे अपनी गलतियों से सीखने और अगली बार बेहतर करने का अवसर दिया।

अब मैं अपनी चुनौतियों को केवल परेशानियों के रूप में नहीं देखती। मैंने समझा है कि हर up और down हमें मजबूत बनाता है, हर असफलता हमें कुछ सिखाती है और हर कठिन परिस्थिति हमें अपने भीतर की क्षमता पहचानने का अवसर देती है।

पीछे मुड़कर देखती हूँ तो महसूस होता है कि जिन परिस्थितियों को कभी मुश्किल समझा था, वही आज मेरी सीख और मेरी ताकत का हिस्सा हैं। मेरा विश्वास है कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमें रुकना नहीं है। हमें हर अनुभव से सीखते हुए, खुद पर विश्वास रखते हुए और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहना है।

मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सबक यही है—चुनौतियाँ रास्ते को कठिन जरूर बनाती हैं, लेकिन वही हमें आगे बढ़ने के लिए और मजबूत भी बनाती हैं।
Swati Tripathi

रास्ते का एक मोड़ और शिक्षा से मिली सीख

एक दिन मैं एक रास्ते पर चल रही थी। रास्ते में एक मोड़ आया और मैंने अपना रास्ता बदल लिया। उस समय मुझे लगा कि मैंने केवल दिशा बदली है, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि जीवन और शिक्षा में भी ऐसे ही कई मोड़ आते हैं। हर मोड़ हमें कुछ नया सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देता है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी शिक्षक और विद्यार्थी को कई परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कभी कोई रास्ता आसान होता है तो कभी कठिन। ऐसे समय में सही निर्णय लेना बहुत जरूरी होता है। एक शिक्षक का काम केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें सही दिशा दिखाना भी होता है।

इस अनुभव से मैंने महसूस किया कि यदि किसी बच्चे को सीखने में कठिनाई हो रही है, तो हमें उसके लिए अपना तरीका बदलना चाहिए। जैसे रास्ते का मोड़ हमें नई दिशा देता है, वैसे ही शिक्षा में नई गतिविधियाँ, नए तरीके और सकारात्मक सोच बच्चों को सीखने की नई दिशा दे सकती हैं।

मेरे लिए इस रास्ते का मोड़ एक सीख बन गया कि जीवन में रास्ते बदल सकते हैं, लेकिन सीखने और आगे बढ़ने का प्रयास कभी नहीं रुकना चाहिए। एक शिक्षक के रूप में हमें भी हर परिस्थिति में बच्चों के लिए सही रास्ता खोजते रहना चाहिए।
चंचल

Educated

तारा वेस्टओवर की 'Educated' विपरीत परिस्थितियों में मानवीय हौसले की जीत की एक शक्तिशाली प्रेरणा है। यह संस्मरण एक ऐसे कठिन और कट्टर धार्मिक माहौल में बीते बचपन की कहानी है, जहाँ से निकलकर लेखिका ने यह बताया कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान या डिग्री नहीं, बल्कि आत्म-खोज और पुरानी बेड़ियों से मानसिक आजादी का माध्यम है।

पुस्तक का सबसे गहरा संघर्ष स्वयं की पहचान बनाने और परिवार के प्रति वफादारी के बीच का टकराव है। अपनों को खोने के दर्द के बावजूद, लेखिका खुद के प्रति ईमानदार रहना चुनती है। संक्षेप में, यह विवरण हमें सिखाता है कि अतीत चाहे कितना भी भयानक हो, दृढ़ संकल्प और साहस से भाग्य को बदला जा सकता है। यह अत्यंत दर्द और क्रूरता के बीच भी पाठक के मन में आशा, प्रेरणा और आत्म-निर्माण का एक गहरा संदेश छोड़ जाता है।
लवकुश सिंह यादव

Educated

Educated पुस्तक हमें शिक्षा की उस परिवर्तनकारी शक्ति का एहसास कराती है, जो केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि इंसान को अपने जीवन की दिशा स्वयं चुनने का साहस भी देती है। पुस्तक में एक ऐसी ग्रामीण परिवार में पली-बढ़ी लड़की है, जहाँ उसके पिता औपचारिक शिक्षा के पक्ष में नहीं थे। विद्यालय जाना उसके लिए आसान नहीं था। परिवार की सोच, परिस्थितियाँ और विरोध उसके सामने बड़ी बाधाएँ थीं। फिर भी उसके भीतर सीखने की ऐसी जिज्ञासा थी, जिसने उसे हार मानने नहीं दिया। उसने संघर्ष किया, स्वयं पढ़ना शुरू किया और अंततः विद्यालय तथा उच्च शिक्षा की दुनिया तक पहुँच गई।

यही शिक्षा की असली परिवर्तनकारी शक्ति है—वह व्यक्ति को केवल पढ़ना नहीं सिखाती, बल्कि उसे यह समझने की क्षमता देती है कि उसके सामने मौजूद सीमाएँ अंतिम सत्य नहीं हैं।

मेरे जीवन से जुड़ा एक उदाहरण—मैं भी एक ऐसे ही ग्रामीण विद्यालय में शिक्षिका हूँ। एक शिक्षक के रूप में मैंने ऐसे बच्चों को देखा है जो पढ़ाई में बहुत तेज नहीं हैं, घर से उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त सहयोग भी नहीं मिलता या वे अपने भीतर आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं। एक बच्चा लगातार कक्षा में चुप रहता था और गतिविधियों में भाग लेने से बचता था। यदि उसे केवल उसके अंकों से आँका जाता, तो शायद उसकी प्रतिभा कभी सामने नहीं आती, लेकिन शिक्षक के रूप में मैंने उसे एक छोटी-सी जिम्मेदारी दी—कक्षा के सामने कहानी सुनाने की।

शुरुआत में वह झिझका, शब्द भूल गया, रुक-रुककर बोला। मगर एक शिक्षक होने के कारण मैंने उसे डाँटने के बजाय कहा, “गलती होना सीखने का हिस्सा है, तुम दोबारा प्रयास करो।” धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। कुछ समय बाद वही बच्चा गतिविधियों में आगे आने लगा और अपने विचार खुलकर व्यक्त करने लगा।

इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि कभी-कभी बच्चे को बदलने के लिए बड़े साधनों की नहीं, केवल एक शिक्षक के विश्वास की आवश्यकता होती है। Educated से मेरी सबसे बड़ी सीख यही है कि हर बच्चा अपनी परिस्थितियों से बड़ा हो सकता है। हमें उसके रास्ते की कठिनाइयों को देखकर उसकी क्षमता का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।

शिक्षा वह शक्ति है जो परिस्थितियों की दीवार में एक खिड़की खोल देती है। शिक्षक उस खिड़की से दिखाई देने वाली नई दुनिया पर विश्वास करना सिखाता है।

इसलिए मेरा संकल्प है—मैं किसी बच्चे को उसकी पारिवारिक परिस्थिति, आर्थिक स्थिति या वर्तमान प्रदर्शन से नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं से पहचानूँगी। क्योंकि एक किताब किसी व्यक्ति को शिक्षित कर सकती है, लेकिन एक संवेदनशील शिक्षक पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है।
गुलाबी

🌸 रिफ्लेक्शन – शिक्षा का महत्व और अपने निर्णय लेने का साहस

इस विषय को पढ़ने के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि शिक्षा केवल किताबों और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने जीवन के सही निर्णय लेने की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास देती है। तारा की कहानी यह सिखाती है कि जब परिवार या समाज किसी व्यक्ति की सोच और सपनों के रास्ते में बाधा बनते हैं, तब शिक्षा उसे अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाने की शक्ति देती है।

मुझे सबसे अधिक प्रभावित यह बात करती है कि तारा ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपना रास्ता बनाया। उसके संघर्ष से यह समझ आता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, सीखने की इच्छा और दृढ़ संकल्प इंसान को आगे बढ़ने का रास्ता दिखा सकते हैं।

एक शिक्षक के रूप में इस विषय ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि हमें बच्चों को केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाना चाहिए, बल्कि उनमें प्रश्न पूछने, अपनी बात रखने, सही-गलत को समझने और अपने सपनों के लिए प्रयास करने का साहस भी विकसित करना चाहिए। हर बच्चे की परिस्थिति अलग होती है; इसलिए एक शिक्षक का काम केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि उसकी क्षमता को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर देना भी है।

अंततः, मैंने यही सीखा कि शिक्षा वह रोशनी है जो व्यक्ति को केवल ज्ञानवान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक और निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
सुनीता त्रिपाठी

शिक्षा का मोड

आज के रिफ्लेक्शन में हम यह बताने जा रहे हैं कि हमारी शिक्षा किस दिशा में मुड़ी। पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद हमारी शिक्षा वहीं पर रुक गई। उसके बाद मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ, क्या न करूँ, और हम 5 वर्ष तक इसी तरह भटकते रहे। लेकिन 5 वर्ष बाद केंद्र सरकार की एक योजना आई, जिसके तहत मैं शिक्षा के काबिल हो गया। अब हमारी शिक्षा एक और मोड़ की ओर बढ़ गई और हमारे जीवन में मंजिल पाने का एक रास्ता खुल गया। अब हम शिक्षा की सही मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। हमें विश्वास है कि एक दिन हमें शिक्षा की सही मंजिल मिल जाएगी।
अशोक कुमार मौर्य

Educated (Reflection) "शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है।"

तारा वेस्टओवर की आत्मकथा Educated पढ़ते हुए मुझे लगा कि यदि इरादे मजबूत हों, मन में कुछ करने की इच्छा-शक्ति हो और स्वयं पर विश्वास हो, तो परिस्थितियाँ रास्ते नहीं रोक सकतीं। यह केवल तारा के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि सभी के लिए एक प्रेरणा भी है।

तारा ने कठिन परिस्थितियों के बीच शिक्षा की राह चुनी और धीरे-धीरे अपनी सोच और पहचान को समझ लिया। जो लड़की 17 साल की उम्र तक कभी स्कूल नहीं गई हो, उसके लिए पढ़ाई करना कितना मुश्किल रहा होगा। काफी परेशानियों से गुजरना पड़ा होगा। लेकिन उन्होंने इतने बड़े और नामचीन कैंब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की। उनकी इस यात्रा ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि शिक्षा वास्तव में इंसान को बदलने से पहले उसकी सोच को बदलती है।

अपने जीवन में भी मैंने महसूस किया है कि जब हम किसी नई बात को सीखते हैं या किसी समझदार व्यक्ति से सही मार्गदर्शन मिलता है, तो हमारी सोचने का नजरिया बदल जाता है। कई बार हम किसी बात को केवल इसलिए सही मान लेते हैं क्योंकि हम उसे बचपन से देखते या सुनते आए हैं। लेकिन शिक्षा हमें प्रश्न करना और चीजों को अपने अनुभव और समझ के आधार पर परखना सिखाती है।

तारा की तरह हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे पल आते हैं, जब उसे अपने लिए कोई कठिन निर्णय लेना पड़ता है। मेरे जीवन में भी कुछ ऐसे अवसर आए हैं, जब परिस्थितियाँ मन के अनुसार नहीं थीं और आगे का रास्ता स्पष्ट नहीं था। ऐसे समय में मुझे यह समझ आया कि डर के कारण रुक जाना आसान है, लेकिन अपने विश्वास के साथ आगे बढ़ना ही वास्तविक साहस है। Educated ने इस अनुभव को और गहराई से महसूस कराया।

सीख यह मिली कि किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसकी पूरी पहचान नहीं होनी चाहिए। एक शिक्षक के रूप में मैं यह भी महसूस करती हूँ कि कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने साथ एक अलग कहानी लेकर आता है। कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर हो सकता है, कोई चुप रहता है और कोई बार-बार गलती करता है, लेकिन उसके भीतर सीखने की इच्छा हो सकती है। इसलिए शिक्षक का काम केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चे के भीतर छिपी क्षमता पर विश्वास करना भी है।

तारा की कहानी ने मुझे यह विश्वास दिया कि शिक्षा हमें केवल दुनिया के बारे में नहीं सिखाती, बल्कि हमें अपने बारे में भी जानने का अवसर देती है। परिस्थितियाँ हमारी शुरुआत तय कर सकती हैं, लेकिन अपनी सोच, मेहनत और सीखने की इच्छा से हम अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं। जैसा कि तारा ने बदला। Educated मेरे लिए सबसे सुंदर और भावनात्मक संदेश छोड़ती है।
मंजुला सागर

बच्चों की परिस्थिति को समझकर शिक्षा देना

कक्षा के दौरान हमें तारा वेस्टओवर द्वारा लिखित पुस्तक “Educated” के बारे में संक्षेप में बताया गया। अभी हमने यह पुस्तक पूरी तरह नहीं पढ़ी है, लेकिन तारा के जीवन और शिक्षा के प्रति उनके संघर्ष की कहानी ने मुझे एक शिक्षिका के रूप में सोचने के लिए प्रेरित किया। मुझे महसूस हुआ कि हर बच्चे को सीखने के लिए समान परिस्थितियाँ नहीं मिलतीं, लेकिन सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वह अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकता है।

इस बात को मैंने अपने विद्यालय के एक बच्चे के अनुभव से जोड़कर देखा। मेरी कक्षा में एक बच्चा था, जो पढ़ाई में अन्य बच्चों की तुलना में थोड़ा पीछे रहता था। वह कक्षा में बहुत कम बोलता था और जब भी मैं प्रश्न पूछती, तो उत्तर जानते हुए भी हाथ नहीं उठाता था। शुरू में मुझे लगा कि शायद उसमें पढ़ाई के प्रति रुचि कम है।

बाद में मैंने उसके साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उसकी पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में जानने का प्रयास किया। उसे छोटी-छोटी गतिविधियों में शामिल करना शुरू किया। मैंने पाया कि वह मौखिक रूप से अपनी बात बहुत अच्छी तरह समझा सकता था, लेकिन लिखित कार्य में उसे कठिनाई होती थी। इसलिए मैंने उसकी मौखिक अभिव्यक्ति को भी सीखने का माध्यम बनाया और धीरे-धीरे उसे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।

कुछ समय बाद उस बच्चे में परिवर्तन दिखाई देने लगा। वह स्वयं आगे आकर उत्तर देने लगा और अपनी गतिविधियाँ कक्षा में प्रस्तुत करने लगा।

इस अनुभव से मुझे महसूस हुआ कि किसी बच्चे की क्षमता केवल उसके अंकों या लिखित कार्य से नहीं पहचानी जा सकती। शिक्षक को बच्चे की रुचि, परिस्थिति और सीखने के तरीके को समझना भी आवश्यक है।

तारा वेस्टओवर के बारे में बताए गए सारांश ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि यदि किसी व्यक्ति में सीखने की इच्छा है, तो शिक्षा उसके जीवन को नई दिशा दे सकती है।

इस अनुभव से मेरी सोच में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब मैं किसी बच्चे के शांत रहने, कम अंक पाने या किसी कार्य में पीछे रहने को उसकी अंतिम क्षमता नहीं मानती। मैं उसके भीतर छिपी प्रतिभा को समझने और उसे प्रोत्साहित करने का प्रयास करती हूँ।

“हर बच्चे की सीखने की यात्रा अलग होती है। एक शिक्षक का विश्वास, प्रोत्साहन और सही अवसर उस यात्रा को नई दिशा दे सकता है।”

Educated पुस्तक के बारे में बताए गए सारांश ने मुझे अपने शिक्षण और बच्चों को देखने के दृष्टिकोण पर विचार करने का अवसर दिया है।
सरोज पटेल

Sunday, September 27, 2020

मेहनत करने से मिलती है मंजिल - Usman Gani

*दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा*

हिन्दी जगत की मशहूर फिल्म मदर इण्डिया के गीत के मर्म को अगर गहराई से जानने की कोशिश करे तो हमें यह मालूम पड़ेगा कि जिन्दगी इम्तिहान का नाम है, संघर्ष का नाम है। ये इम्तिहान इंसान की जिंदगी में मां की गोद से शुरू होकर कब्र की गोद तक जारी रहते हैं। इंसान को हर दिन, हर पल किसी न किसी तरह के इम्तिहान या परीक्षा से गुजरना ही पड़ता है। कुछ लोग इन इम्तिहानों को हंसते-हंसते पार करते है और कुछ घुट-घुट कर इनका सामना करते हैं।

अक्सर देखने में आया हैं कि जिंदगी के इन इम्तिहानों में केवल दो ही तरह के लोग असफल होते हैं एक वे जो सोचते हैं पर करते कुछ नहीं और दूसरे वे जो करते तो बहुत है मगर सोचते कुछ नहीं। बिना सोचे विचारे किया काम कभी सफल नहीं हो सकता, क्योंकि बिन बारिस के मौसम के अगर खेत मे बीज डाले जाएंगे तो वे केवल कचरा ही बनेंगे। उन बीजों से अच्छी फसल की उम्मीद नहीं रखी जा सकती। इसलिए सही समय पर सोच-समझकर किया गया कार्य ही मंजिल की तरफ लेकर जाता है।

मुश्किलों  से  भाग  जाना  आसान  होता है,  हर  पहलू  जिंदगी  का  इम्तिहान  होता  है,                        

डरने वालों को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में,  लडऩे  वालों  के  कदमों  में  जहान  होता है

यदि कड़ी मेहनत को हथियार बनाए जाए तो सफलता अवश्य ही हमारी गुलाम बनती है। हर रोज आकर हमें परेशान करने वाली मुश्किलें, नित-नई पैदा होने वाली समस्याएं, घनघोर बादल की तरह जिंदगी में भूचाल लाने वाली विपदाएं ही वो इम्तिहान है। जिसने इंसान को और अधिक संवारने का कार्य किया है। इतिहास गवाह है माजी (भूतकाल) में इंसान ने हर कदम पर इन मुसीबतों, समस्याओं और विपदाओं का हंसते हुए सामना किया है और इनका हल भी निकाला है। उसी के परिणाम के रूप में उस समय जो समस्याएं थी आज हमारे लिए विज्ञान के आविष्कार बन चुकी है। जिनके बिना आज हमें हमारी जिंदगी अधूरी लगती है।

हिम्मत करने वालों के नसीब एक न एक दिन अवश्य बदलते हैं। जिंदगी में मुसीबतों के सामने कभी घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए, संघर्ष कर सफलता तक पहुंचने वाले को दुनिया हमेशा सलाम करती है। इंसान को जिंदगी में हर लम्हा संघर्ष करते रहना चाहिए। क्योंकि सोना जितना आग में तपता है, उसकी चमक उतनी ही तेज होती है। इसीलिए इंसान को लगातार प्रयास करते ही रहना चाहिए। कहा भी गया है -

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं है, तू इंसान है कोइ अवतार नहीं है, गिर, उठ, चल, दौड़, फिर भाग, जिंदगी संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं है।

उस्मान गनी, द फैबइंडिया स्कूल <ugi@fabindiaschools.in>

Wednesday, September 2, 2020

संघर्ष ही जीवन है - सुरेश सिंह नेगी

जीवन एक संघर्ष  है जो अंत में विजय का द्वार खोलती है और समस्या का समाधान करती है। जीवन में परिवर्तन
का क्रम चलता रहता है। जब तक जीवन है तब तक संघर्ष है।संघर्ष का दौर तो हमारे इस दुनिया में हमारे  जन्म लेने के साथ ही शुरू  हो जाता है। जब हम छोटे थे उस समय हमें सही से चलने और बोलने के लिए  संघर्ष  करना पड़ता था। जब बड़े हुए तो पढाई के लिए संघर्ष, उसके बाद नौकरी के लिए संघर्ष ‘इसलिए जब तक जीवन  है हमें संघर्ष करते हुए जीना होता है। जीवन  हमेशा आसानी से नहीं गुजरता, हर दिन कोई न कोई चुनौती, कोई न कोई, संघर्ष जीवन  में आता है और आता रहेगा।

ऐसा कोई नहीं हैं जिसके जीवन   में चुनौतियाँ  न हों, दुःख न हों, कठिनाई न हों, रुकावटें न हों। चुनौतियां केवल बुलंदियों को छूने की नहीं होतीं, बल्कि वहां टिके रहने की भी होती हैं। इस दुनिया में हर एक प्राणी संघर्ष कर रहा है।   यह ठीक है कि एक काम करते-करते हम उसमें कुशल हो जाते हैं। उसे करना आसान हो जाता है, पर वही करते रह जाना हमें अपने ही बनाई सुविधा के घेरे में कैद कर लेता है। 

 संघर्ष काल में हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि व्यक्ति के स्वयं के हाथ में कुछ नहीं है। लेकिन उसे लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।   क्योंकि प्रयास सफलता की कुंजी होती है।

हमें जीवन में संघर्षो का स्वागत करते रहना चाहिए। बिना संघर्ष किए जीवन के लक्ष्य प्राप्त नहीं किये जा सकते। कहते हैं कि संघर्ष करने वालो की कभी हार नहीं होती। 

संघर्ष से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। ऐसे व्यक्ति सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति होते है जो अपने आसपास के वातावरण से ही उस सकारात्मकता को ग्रहण करते है। हमें भी अपने सभी पहलुहों से सकारात्मकता ग्रहण करनी चाहिए। हमें अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए और अपने अंदर सकारात्मकता विकसित करनी चाहिए। 

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Wednesday, August 5, 2020

शिक्षा और कोविद -१९ - Suresh Negi

कोविद -१९ महामारी के कारण, देश भर की राज्य सरकारों ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अस्थायी
रूप से बंद कर दिया। मौजूदा स्थिति के आधार पर, यह नही कहा जा सकता है कि यें अब कब खुलेंगी। जब स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को फिर से खोला जाएगा तब निस्संदेह, यह शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समय होगा, क्योंकि इस अवधि के दौरान कई स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित की जायेंगी।  

तकनीकी रूप से अब पूरा भारत दो भागों में विभाजित हो चुका है, जँहा एक ओर  तकनीक-गरीबों से वंचित और तकनीक के जानकारों को  अलग कर रहा है, वंही दूसरी ओर लाखों बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं की चुनौतियों का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कोविद -१९ महामारी, जिसने लोगों को अपने घरों में और स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को आभासी कक्षाएं लेने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसके लिए छात्र के पास एक कंप्यूटर या कम से कम एक स्मार्टफोन, एक उचित इंटरनेट कनेक्शन और बिजली की आपूर्ति का होना अति आवश्यक है।शिक्षा का क्षेत्र, जो कभी वास्तविक स्तर पर नहीं पहुंचा था, अब छात्रों, और उनके शिक्षकों के रूप में गांवों, शहरों और कस्बों में समय की माँगों का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

उदाहरण के लिए, गाँवो में जंहा सिगनल पूर्ण रूप से न होने का सामना करना पड़ता है। वंही इस मौसम में बिजली की आपूर्ति का सामना भी करना पड़ रहा है। कई लोंगो के पास एक फोन है, लेकिन आमतौर पर बिजली नहीं है, इसलिए प्रत्येक दिन ऑनलाइन व्याख्यान लेना मुश्किल है।

कुछ लोग जिनके दो बच्चे जो एक ही स्कूल में पढ़ते ही है, उनमे से एक बच्चा ऑनलाइन कक्षाओं में भाग नही ले पाता है, क्योंकि वे दोनों एक मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं। अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ, कि कोविद -१९ का यह दौर जल्दी से जल्दी समाप्त हो जिससे कि जो भी लोग किसी कारणवश शिक्षा से दूर हो गएँ हैं,वो दुबारे से इसका लाभ ले सकें।

Suresh Negi
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Thursday, June 18, 2020

आशा और मित्रता: उर्मिला राठौड़


'समय के साथ सब अच्छा होता है’- ऐसा हम सुनते हुए बड़े हुए और हुआ भी क्योंकि ये शब्द हमें आशावान बनाते है। एक आशावादी व्यक्ति की सोच सदैव सकारात्मक होती है और यही उसके पथप्रदर्शन में सहायक होती है । ' आशा ' एक शब्द जो हमारे मन मस्तिष्क में नव जीवन का संचार करती है फिर चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो आशावादी इंसान उस पर सफलता हासिल कर ही लेता है। 'आशा' एक जीवन प्रदायिनी जड़ीबूटी है।

वर्षों से दबा हुआ एक छोटा सा बीज़ आशाओं की बारिश में प्रस्फुटित हो जाता, उसके संघर्ष की कहानी कोई कम आसान नहीं होती परन्तु एक आशा की बूंद उसे दोगुना हौसला प्रदान करती है। फिर वो एक महान और विराट वृक्ष बनकर जीव - जंतुओं की आश्रय स्थली, आते - जाते राहगीरों का विश्राम गृह और असंख्य जीवों को जीवन प्रदायिनी वायु का संचार करता है। अर्थात् एक आशावान व्यक्ति उनके संपर्क में आए अन्य व्यक्तियों को किसी न किसी तरह सकारात्मक तरीके से अवश्य प्रभावित करता है। निराशा का अंधेरा कितना भी छाया हो लेकिन आशा की एक किरण ही काफ़ी होती है उसे मिटाने की । इसलिए हम कितने भी निराश क्यों न हो एक आशावादी सोच और कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश हमें ऊँचाइयाँ प्रदान करती है।

एक अच्छा और आशावादी शिक्षक छात्रों में नई चुनौतियों को स्वीकारने का गुण पैदा करता है, उन्हें विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का कौशल सिखाता है। परीक्षा और परिणाम की चिंता से परे ले जाकर उनमें समाहित शक्तियों का अहसास कराता है, उसे प्रोत्साहित करता है, कुछ अच्छाइयों के लिए प्रेरित करता है, उसकी सराहना करता है, तभी वह सीखने के लिए आतुर होगा। छात्रों को उनकी चिंताओं से ज्यादा नए कौशलों पर ध्यान आकर्षित करता है , जैसे - समाज में मुखर वक्ता बनना, दया और सहयोग की भावना रखना, दूसरों को उनकी अंतर्निहित शक्तियों का आभास करवाना, आदि।  
" एक अच्छा शिक्षक आशा को प्रेरित कर सकता है, कल्पना को प्रज्वलित कर सकता है और सीखने का प्रेम पैदा कर सकता है।" - ब्रेड हेनरी

वैसे ही एक शिक्षक जो आशावान है वो  न केवल अपने विद्यार्थियों को बल्कि आसपास के सामाजिक ढाँचे को भी भविष्य के प्रति आशावान बनता है। जब आशावादी विचारधारा का एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को यह शिक्षा देगा तो उनके माध्यम से माता - पिता, परिवार, आस - पड़ोस और पूरे समाज में वो एक अलग पहचान बनाने में कामयाब होगा ।

आशावान व्यक्ति को मित्र बनाना और उसकी मित्रता को निभाना एक अहम गुण है। हम मित्र बनाते समय यह नहीं देखते कि उनमें कौनसे गुण समाहित है, परन्तु एक मित्र का कर्तव्य होता है कि वो अपने मित्र के प्रति निष्ठावान हो, एक - दूसरे के हृदय की भावनाओं को जाने, स्नेह, प्रेमाधार से और बिना किसी शर्त के सहयोग करें क्योंकि परिवार के बाद मित्र ही व्यक्ति को दिशा निर्देश देता है।

 कवि रहीम जी ने मित्रता पर अनेक दोहे लिखे जिनमें से एक है -
"कहि रहीम सम्पत्ति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपत्ति - कसौटी जे कसे, तेई सांचे मीत।।"

अर्थात् सच्चा मित्र वहीं होता है, जो विपत्ति के समय साथ दे। मित्रता केवल सुख के समय में साथ नहीं देती बल्कि दुख में भी ढाल बनती है।

मित्रता हम उम्र में होनी चाहिए तथा कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। यह निस्वार्थ भाव से निभाई जाती है। श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती जगजाहिर है जो भावनाओं की कद्र करना सिखाती । अतएव मित्रता में हम अपने मन की भावनाओं, परेशानियों को साझा कर सकते है। कहते है कि मित्र यदि सज्जन हो तो बार- बार रूठने पर भी मना लेना चाहिए जैसे मोतियों के हार टूटने पर बार - बार उन्हें माला में पिरोया जाता है, इसलिए मोती जैसे महंगे सज्जन मित्रों की मित्रता के लिए हमेशा समझौता कर लेना चाहिए क्योंकि मित्रता दुख को आधा और सुख को दुगुना कर देती है।

कक्षा में शिक्षक को बालकों के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए जिससे वो अपनी परेशानी, कठिनाइयों को बेहिचक साझा कर सके और सीखने - सिखाने की प्रक्रिया खुले विचारों से हो सके।

 बालकों को भी अपने सहपाठियों के साथ अच्छी मित्रता निभानी चाहिए जैसे - एक- दूसरे की मदद करना,  दूसरों की भावनाओं की कद्र करना, अपनी वस्तुओं को साझा करना, किसी भी प्रतियोगिता में प्रतिभागी जरूर बने परन्तु विरोधी नहीं आदि।  
Urmila Rathore
The Fabindia School, Bali

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