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Sunday, May 10, 2026

अलग विचारों से समझ की ओर - सुनीता त्रिपाठी

 "Like versus unlike" अध्याय पढ़ने के बाद मुझे एक स्टाफ रूम का अनुभव याद आता है, जब हम सभी शिक्षक एक बच्चे के बारे में समूह में चर्चा कर रहे थे। हर शिक्षक की उस बच्चे के प्रति अलग-अलग राय थी।

किसी को उसका व्यवहार अच्छा लगता था, तो किसी को उसकी पढ़ाई में कमी दिखाई देती थी। उसी समय मैंने महसूस किया कि हमारी सोच और नजरिया एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं, लेकिन हर राय अपने अनुभव के आधार पर सही होती है। यदि उन बातों को ध्यान से सुनें, तो हमें उस बच्चे को बेहतर समझने में मदद मिलती है। इस अनुभव से मैंने सीखा कि किसी एक नजरिए से किसी बच्चे को आंकना सही नहीं होता। "Unlike" विचार हमें नई समझ देते हैं और हमें संतुलित निर्णय लेने में मदद करते हैं। अब मैं कोशिश करती हूं कि जब भी किसी बच्चे के बारे में चर्चा हो, तो मैं सभी की बातों को सम्मानपूर्वक सुनूं और एक सकारात्मक दृष्टि बनाए रखूं।

एक शिक्षक के रूप में यह समझ बहुत जरूरी है, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है और हमें उसकी विशेषताओं को पहचान कर उसे सही दिशा देनी चाहिए। इस अध्याय ने मुझे यह भी सिखाया कि हमें दूसरों की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए और उनके विचारों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं और आपसी समझ बढ़ती है। अलग-अलग "like" और "unlike" ही हमें एक-दूसरे के करीब लाते हैं, क्योंकि इन्हीं में समझ और सीख छिपी होती है। जब हम दूसरों की भावनाओं और विचारों को दिल से स्वीकार करते हैं, तभी सच्चे मायनों में इंसानियत और अपनापन झलकता है।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल


Friday, April 24, 2026

रिफ्लेक्शन: स्टाफ रूम में मेरा अनुभव - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज का सत्र, जो कि वांटेड बैक बैंचर एंड लास्ट रैंकर टीचर के तीसरे अध्याय पर आधारित था, हमें एक नई सीख देता है। हर बच्चे का पारिवारिक और सामाजिक वातावरण अलग-अलग होता है, इसलिए उसके सीखने का तरीका और व्यवहार भी अलग होता है। बच्चा किस माहौल से आता है, यह उसके सीखने की प्रक्रिया को बहुत प्रभावित करता है। कुछ बच्चे ऐसे माहौल से आते हैं जहाँ पढ़ाई के लिए शांत वातावरण, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, जबकि कुछ बच्चों को ये सुविधाएँ नहीं मिल पातीं। हर बच्चे की अपनी-अपनी समस्याएँ भी हो सकती हैं। शिक्षक यदि बच्चों से व्यक्तिगत रूप से बात करें और उसकी समस्या को समझें, तथा उसे व्यक्तिगत रूप से किसी को न बताते हुए सहानुभूति दिखाएँ और प्रोत्साहित करें, तो बच्चे में पढ़ाई के प्रति रुचि जाग सकती है।

जो बच्चे कठिन परिस्थितियों से आते हैं, वे पढ़ाई में पीछे रह सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कम बुद्धिमान हैं। उनकी सीखने की गति, तरीका और पढ़ाई के प्रति रुचि अलग हो सकती है। इसलिए शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चों की पृष्ठभूमि को समझे और उसी के अनुसार पढ़ाने का तरीका अपनाए। जब शिक्षक सहानुभूति और सहयोग से पढ़ाता है, तो हर बच्चा धीरे-धीरे आगे बढ़ सकता है। इसलिए मेरे विचार से शिक्षक के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि शिक्षा में केवल परिणाम ही नहीं, बल्कि परिस्थिति और प्रयास को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

मंजुला सागर

आज विद्यालय में नए बच्चों का प्रवेश हुआ। स्टाफ रूम में बैठकर जब मैं इन छोटे-छोटे बच्चों को देख रही थी, तो उनके चेहरों पर अलग-अलग भाव साफ दिखाई दे रहे थे—कहीं खुशी, कहीं डर, तो कहीं झिझक। कुछ बच्चे रो रहे थे, और कुछ अपने माता-पिता का हाथ कसकर पकड़े हुए थे।

इन दृश्यों ने मुझे यह एहसास कराया कि स्कूल का पहला दिन बच्चों के लिए कितना महत्वपूर्ण और भावनात्मक होता है। एक नई जगह, नए लोग और नया वातावरण—यह सब उनके लिए थोड़ा कठिन होता है। लेकिन साथ ही, यह उनके जीवन की एक नई और सुंदर शुरुआत भी होती है।

मैंने महसूस किया कि एक शिक्षक के रूप में हमारी भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को प्यार, सुरक्षा और अपनापन देना भी उतना ही जरूरी है। जब शिक्षक बच्चों को स्नेह से समझते हैं और उन्हें सहारा देते हैं, तो धीरे-धीरे उनका डर कम होकर खुशी में बदल जाता है।

आज का अनुभव मेरे लिए बहुत सीख देने वाला रहा। स्टाफ रूम में बैठकर मैंने सोचा कि मेरी भी एक शुरुआत थी। अब फिर से उसी मोड़ पर आकर खड़ी हूँ।

सुनीता त्रिपाठी

Tuesday, May 18, 2021

स्वतंत्रता व शान्ति - मीनाक्षी पंवार

अपनी इच्छाओं का दमन करना फिर चाहे कारण पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि कोई भी 
हो, बंधन ही कहलायेगा। बन्धन का स्वरूप सभी के लिए समान नहीं है।बन्धनों से पूर्णत मुक्त होना ही स्वतंत्रता अथवा आजादी हैं। स्वतंत्रता एक ऐसा एहसास है जो जीवन का परिचय जीवन से कराती है वरना  जीवन तो सभी जीते हैं अगर स्वतंत्रता न हो तो जीवन के मायने बदल जाते हैं। कई जगह वह एक बोझ लगने लगती हैं इसलिए जीवन में स्वतंत्रता बहुत महत्पूर्ण है तभी हम खुश रहेंगे और दूसरों को भी खुशी दे पायेंगे।

स्वतंत्रता और शान्ति का आपस में घनिष्ट संबंध है। जब तक कि हम पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है हम आंतरिक शान्ति का अनुभव नहीं कर सकते। यह अमूल्य है। इसका कोई मुल्य नहीं है। इसकी तलाश में व्यक्ति अपने लक्ष्य से भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि यह कहीं
बाहर भौतिक, सांसारिक वस्तुओं में नहीं अपितु हमारे भीतर ही हैं। शान्त मन से ही नये विचारों का स्रजन होता है।नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करना व सकारात्मकता को अपनाना ही आंतरिक शान्ति की तरफ अग्रसर करता है....

मिलता नहीं सुकून जब शानो-शौकत,
दुनिया और दुनियादारी में,
और लगतीं हैं खुशियां फीकी सी, 
जमाने भर की ठेकेदारी में,
तब एक राहत सी महसूस होती है, 
अपने उस अकेलेपन मे,
कुछ पल अपने साथ,
अपने लिए कभी कभी छिपा कर रखती हूँ,
शान्त मन से बढ़कर, नहीं हैं जीवन में कुछ और इस पर मैं विश्वास रखती हूँ।।

मीनाक्षी पंवार 
The Doon Girls' School, Dehradun

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