स्वतंत्रता व शान्ति - मीनाक्षी पंवार

अपनी इच्छाओं का दमन करना फिर चाहे कारण पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि कोई भी 
हो, बंधन ही कहलायेगा। बन्धन का स्वरूप सभी के लिए समान नहीं है।बन्धनों से पूर्णत मुक्त होना ही स्वतंत्रता अथवा आजादी हैं। स्वतंत्रता एक ऐसा एहसास है जो जीवन का परिचय जीवन से कराती है वरना  जीवन तो सभी जीते हैं अगर स्वतंत्रता न हो तो जीवन के मायने बदल जाते हैं। कई जगह वह एक बोझ लगने लगती हैं इसलिए जीवन में स्वतंत्रता बहुत महत्पूर्ण है तभी हम खुश रहेंगे और दूसरों को भी खुशी दे पायेंगे।

स्वतंत्रता और शान्ति का आपस में घनिष्ट संबंध है। जब तक कि हम पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है हम आंतरिक शान्ति का अनुभव नहीं कर सकते। यह अमूल्य है। इसका कोई मुल्य नहीं है। इसकी तलाश में व्यक्ति अपने लक्ष्य से भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि यह कहीं
बाहर भौतिक, सांसारिक वस्तुओं में नहीं अपितु हमारे भीतर ही हैं। शान्त मन से ही नये विचारों का स्रजन होता है।नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करना व सकारात्मकता को अपनाना ही आंतरिक शान्ति की तरफ अग्रसर करता है....

मिलता नहीं सुकून जब शानो-शौकत,
दुनिया और दुनियादारी में,
और लगतीं हैं खुशियां फीकी सी, 
जमाने भर की ठेकेदारी में,
तब एक राहत सी महसूस होती है, 
अपने उस अकेलेपन मे,
कुछ पल अपने साथ,
अपने लिए कभी कभी छिपा कर रखती हूँ,
शान्त मन से बढ़कर, नहीं हैं जीवन में कुछ और इस पर मैं विश्वास रखती हूँ।।

मीनाक्षी पंवार 
The Doon Girls' School, Dehradun

Good Schools of India Journal @ www.GSI.IN

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