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Monday, May 4, 2020

सहनशीलता और खुशी: सुरेश सिंह नेगी


सहनशीलता एक ऐसा सत्य है, जिससे प्राय: सभी लोगों को अपने जीवनकाल में रूरू होना पड़ता है। सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है। आज के इस भौतिकवादी दौर में हमें अध्ययन करने, पढ़ाने और सहनशीलता का अभ्यास कराने की और इसे अपने बच्चों में, शिक्षा और अपने स्वयं के उदाहरण दोनों के माध्यम से स्थापित करने की आवश्यकता  है। सहनशीलता कोई पकड़ नहीं है, लेकिन यह एक गुणवत्ता है। जिसे हमें संजोना है और इसका लगातार अभ्यास करते रहना है।

हर पाठ के साथ हम यह सीखते हैं कि हमें एक निर्णय लेना पड़ेगा,  जो कि हमारे भविष्य को निर्धारित करेगा। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि हम भविष्य को देखकर के ही सीख सकते हैं, कि केवल अतीत या वर्तमान से।

परिवर्तन केवल हमारे हाथों से होता है। हमें उस शक्ति की आवश्यकता है, जो उस घृणा और असहनशीलता को दूर कर सके। हमारा काम एक ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें लोग अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त कर सकें, अपनी खुशी का निर्माण कर  सके  और आनंद ले सके।

इतिहास की सुबह से, खुशी वह सब है जो मानवता ने मांगी है। अरस्तू ने कहा कि राज्य एक जीवित प्राणी है जो व्यक्तियों के लिए नैतिक पूर्णता और खुशी की उपलब्धि की तलाश में विकसित होता है।

खुशी पर ध्यान देना संभव है और यह पूरी तरह से उचित है। खुशी को मापा जा सकता है। इसके अलावा, इसे विकसित भी किया जा सकता है, और इसकी उपलब्धि भौतिक उद्देश्यों से जुड़ी है। अध्ययनों से पता चलता  है कि खुशहाल लोग अधिक उत्पादन करते हैं, लंबे समय तक रहते हैं, और अपने समुदायों और देशों में बेहतर आर्थिक विकास करतें  हैं।

सहनशीलता का गुण जाने से दोस्तों और पड़ोसियों के बीच में खुशी का माहौल होता है। जिससे जल्दी से तनाव या क्रोध नहीं पाता। इसलिए सहनशील बनकर निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना  चाहिए।
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Tuesday, October 29, 2019

कृष्ण गोपाल: पठन की महत्ता


पढ़ना हमारी शिक्षा का एक आवश्यक हिस्सा है।  इसके द्वारा हम दूसरों के विचारों को समझ सकते है।  पठन से हम अतीत, वर्तमान या भविष्य की बातों से अद्यतन रहते है।  पठन से हमारा व्यक्तित्व भी निखरता है।  यदि हम पठन करते है तो दूसरों के सामने अपने विचार व्यक्त करने या दूसरों के सामने अपनी बात रखने में मदद करता है। पठन से भाषा में प्रवाह बनता है और हमारे आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ाता है। 

पठन किसी भी भाषा में कर सकते है जिसमें हम सहज है।  यह आदत हमारे से ही होनी चाहिए।  इसकी शुरुआत के लिए अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को अपनी मातृभाषा में कुछ छोटी कहानियाँ पढ़ाएँ। जो बच्चे को रुचिकर लगे।  बचपन में पढ़ी ये कहानियाँ बच्चे को जीवन भर याद रहेगी और साथ ही साथ बच्चे में पठन की रूचि विकसित हो जाएगी।  पठन बालक का शौक बन जाएगा। पढ़ना हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। पुस्तक पढ़ने से एकाग्रता बढ़ती है तथा याददाश्त क्षमता में सुधार लाती है।  प्रेरणादायक पुस्तकें सोचने के तरीके बदल देती है और उन्हें अच्छे जीवन की आशा देती है। 

पढ़ना स्वस्थ मस्तिष्क के लिए परमावश्यक है।  नवीनतम जानकारी के अतिरिक्त हम भाषिक सौंदर्य से भी सराबोर हो जाएँगे।  अलग-अलग लेखकों के लेख पढ़ने से उनके विचारों से साक्षात्कार होगा।  एक ही विषय पर अनेक विचार मिल सकते है। पुस्तक को कहीं भी ले जाना भी बड़ा आसान है। कहीं भी पुस्तक पढ़कर समय का सदुपयोग कर सकते है। 
Krishan Gopal 
The Fabindia School, kde4fab@gmail.com

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