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Monday, October 5, 2026

शिक्षा का महत्व और आत्मनिर्भरता - ममता

इस अंश को पढ़कर मुझे यह समझने का अवसर मिला कि शिक्षा केवल स्कूल जाने या किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे सोचने, समझने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता देती है। लेखिका का बचपन सामान्य बच्चों से बहुत अलग था। उनके परिवार में बच्चों का स्कूल जाना, डॉक्टर के पास जाना और सरकारी व्यवस्था से जुड़ना भी नहीं होता था। इसके बावजूद लेखिका अपने आसपास की परिस्थितियों को समझने और अपने परिवार के जीवन को ध्यान से देखने का प्रयास करती थी।

इस अंश से मुझे यह भी सीख मिली कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सीखने की इच्छा व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। शिक्षा हमें अपने अधिकारों और दुनिया के बारे में जागरूक बनाती है। एक शिक्षक के रूप में मुझे महसूस हुआ कि प्रत्येक बच्चे को सीखने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षा उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

ममता, सनबीम ग्रामीण स्कूल 


Saturday, September 12, 2026

शिक्षा, परिस्थितियाँ और सही चुनाव - Manjula Sagar


Educated by Dr Tara Westover, narrated by Brinda Ghosh, every Saturday at 3:30 PM

Reflection Chapter 1 – Choose the Good

को पढ़ते समय मुझे सबसे पहले Tara Westover का बचपन बहुत अलग और असामान्य लगा। वह Idaho के पहाड़ी इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थीं, जहाँ उनका परिवार बाहरी समाज से काफी अलग जीवन जीता था। उनके पिता का सरकार और बाहरी संस्थाओं पर विश्वास नहीं था। इसलिए Tara और उनके भाई-बहनों का स्कूल जाना और अस्पताल जैसी सामान्य सुविधाओं का उपयोग करना उनके जीवन का हिस्सा नहीं था।

इस अध्याय की घटनाओं को पढ़कर मुझे सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात पर हुआ कि Tara के लिए ऐसी जिंदगी सामान्य थी। जिस तरह हम स्कूल जाने, डॉक्टर के पास जाने और सुरक्षित वातावरण में रहने को अपने जीवन का सामान्य हिस्सा मानते हैं, Tara के बचपन में ये चीजें बहुत अलग थीं। इससे मुझे महसूस हुआ कि हम जिस वातावरण में बड़े होते हैं, उसे ही अक्सर अपनी पूरी दुनिया समझने लगते हैं। Tara और उनके भाई-बहनों का कम उम्र में ही परिवार के कामों में शामिल होना भी मुझे बहुत प्रभावित करता है। पहाड़ों पर काम करना और घर की जिम्मेदारियों में हाथ बँटाना उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा था। इसे पढ़ते हुए मुझे लगा कि बच्चों के जीवन में शिक्षा और अपने आसपास की दुनिया को जानने का अवसर कितना महत्वपूर्ण है।

स्कूल जाना, किताबें पढ़ना और अलग-अलग लोगों से विचार साझा करना मेरे लिए सामान्य बातें हैं, लेकिन Tara की कहानी ने मुझे समझाया कि ये अवसर हर बच्चे को समान रूप से नहीं मिलते।

मेरे लिए इस अध्याय की सबसे महत्वपूर्ण सीख यह है कि हमारी परिस्थितियाँ हमारी सोच को प्रभावित करती हैं, लेकिन नई चीजें सीखने और अलग दृष्टिकोण समझने से हमारी सोच का विस्तार हो सकता है। Tara की कहानी ने मुझे दूसरों को उनके अनुभवों के आधार पर समझने और बिना तुरंत निर्णय लिए उनकी परिस्थितियों को देखने की सीख दी। किसी व्यक्ति की सोच उसके वातावरण से बनती है, लेकिन सीखने और नई चीजों को समझने का अवसर मिलने पर वह अपनी सोच को बदल भी सकता है।

Manjula Sagar



Sunday, June 7, 2020

विनम्रता और प्रशंसा: कुसुम डाँगी


विनम्रता का अर्थ है किसी के मन को ठेस ना पहुँचाना, किसी से इज्ज़त या सरलता से बात करना भी विनम्रता हैं। इस शब्द के कई मतलब हो  सकते है, जैसे - अंहकार, घंमड ना करना अगर आप किसी भी ऊँचे पद पर हो फिर भी हर कर्मचारी के साथ सरलता से बात करते हो, उनकी समस्या को समझते हो, ये भी विनम्रता है।

विनम्र व्यक्ति हर जगह सम्मान का पात्र बनता है और लोग उनकी बातों  को ध्यान से सुनते हैं। ऐसे लोगों में धैर्य भी अधिक होता हैं, जिससे वे सफलता को आसानी से प्राप्त करते हैं। यदि आप विनम्र होंगे तो दूसरों  के साथ आपका रिश्ता भी अच्छा होता हैं। कभी बच्चों को उनकी मनपसंद चीज़ चाहे ना मिले तो भी वे शिकायत नहीं करेंगे बल्कि जो उनके पास हैं, उसी में खुश रहेंगे जिससे वे संयम से जीना सीखेंगे। और ऐसे लोगों को मन की शांति भी मिलती हैं।

जिस प्रकार दूसरों को अपना समय, धन, या सलाह देकर उनका भला करते हैं। उसी तरह प्रोत्साहित करके भी भला कर सकते हैं। जब कोई इंसान कोई कार्य करता हैं, उसमें अगर उसको दूसरों से प्रशंसा मिल जाती हैं तो वह इंसान अगली बार वह उससें भी बेहतर करने की कोशिश करता हैं और अधिक मन लगाकर काम करता हैं।

विनम्रता और प्रशंसा दोनों ही बच्चों के लिए आवश्यक है। ऐसे लोगों में अंहकार नहीं होता है जिससें वे दूसरों की खुलकर प्रशंसा करते हो और दूसरों को बेहतर भविष्य निर्माण में योगदान देते हैं।

"अपने आपको कम सोचना नहीं बल्कि अपने बारे में कम सोचना विनम्रता हैं"
Kusum Dnagi
The Fabindia School, Bali

Monday, April 6, 2020

कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी: आयशा टॉक


कर्तव्यनिष्ठा अपने कार्य के प्रति सावधान या मेहनती होने के व्यक्तित्त्व की विशेषता है। किसी भी कार्य को पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी से करना एवं दूसरों के प्रति अपने दायित्वों को गंभीरता से निर्वाह करना। कर्त्तव्यनिष्ठ लोग आसानी से पहचाने जाने और उच्छृंखल होने के विपरीत कुशल और संगठित होते है। सफल लोगों का सबसे महत्त्वपूर्ण गुण ईमानदारी होता है। यह गुण आपको एक मज़बूत नैतिक कम्पास बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता हैं। ईमानदार लोग भी नियमों और मानदंडों का पालन करना पसंद करते हैं।  हर कोई व्यक्ति अपनी दैनिक योजनाएँ बनाकर एवं उनके अनुसार अपना कार्यक्रम निर्धारित करें। दैनिक योजना के अनुसार कार्य करना संगठन और आत्म - अनुशासन को प्रोत्साहित करता है। बार - बार अभ्यास के माध्यम से, ये कौशल सीखा जा सकता है और सहज हो सकता है। प्रारंभ में हमें ऐसा लग सकता है कि हम कोई अभिनय कर रहे हैं। 

  यह गुण शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होता है। एक शिक्षक को अपने विद्यार्थियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ कर उस के बारे में योजना बना कर विद्यार्थियों की प्रगति के लिए उचित कार्य पूर्ण ईमानदारी एवं    कर्तव्यनिष्ठा के साथ करके विद्यार्थियों के भविष्य को उज्जवल बना सकते है। जब तक कोई भी व्यक्ति अपने कार्य को अपने जीवन का अहम हिस्सा एवं जिम्मेदारी न समझेगा तब तक वह उस कार्य में सफल नहीं हो सकता है। इस प्रकार सफलता के लिए ईमानदारी एवं कर्त्तव्यनिष्ठा बहुत आवश्यक है। ये दोनों गुण एक - दूसरे के बिना पूर्ण नहीं हो सकते है। 
Ayasha Tak
atk4Fab@gmail.com
The Fabindia School, Bali

Tuesday, October 29, 2019

कृष्ण गोपाल: पठन की महत्ता


पढ़ना हमारी शिक्षा का एक आवश्यक हिस्सा है।  इसके द्वारा हम दूसरों के विचारों को समझ सकते है।  पठन से हम अतीत, वर्तमान या भविष्य की बातों से अद्यतन रहते है।  पठन से हमारा व्यक्तित्व भी निखरता है।  यदि हम पठन करते है तो दूसरों के सामने अपने विचार व्यक्त करने या दूसरों के सामने अपनी बात रखने में मदद करता है। पठन से भाषा में प्रवाह बनता है और हमारे आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ाता है। 

पठन किसी भी भाषा में कर सकते है जिसमें हम सहज है।  यह आदत हमारे से ही होनी चाहिए।  इसकी शुरुआत के लिए अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को अपनी मातृभाषा में कुछ छोटी कहानियाँ पढ़ाएँ। जो बच्चे को रुचिकर लगे।  बचपन में पढ़ी ये कहानियाँ बच्चे को जीवन भर याद रहेगी और साथ ही साथ बच्चे में पठन की रूचि विकसित हो जाएगी।  पठन बालक का शौक बन जाएगा। पढ़ना हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। पुस्तक पढ़ने से एकाग्रता बढ़ती है तथा याददाश्त क्षमता में सुधार लाती है।  प्रेरणादायक पुस्तकें सोचने के तरीके बदल देती है और उन्हें अच्छे जीवन की आशा देती है। 

पढ़ना स्वस्थ मस्तिष्क के लिए परमावश्यक है।  नवीनतम जानकारी के अतिरिक्त हम भाषिक सौंदर्य से भी सराबोर हो जाएँगे।  अलग-अलग लेखकों के लेख पढ़ने से उनके विचारों से साक्षात्कार होगा।  एक ही विषय पर अनेक विचार मिल सकते है। पुस्तक को कहीं भी ले जाना भी बड़ा आसान है। कहीं भी पुस्तक पढ़कर समय का सदुपयोग कर सकते है। 
Krishan Gopal 
The Fabindia School, kde4fab@gmail.com

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