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Tuesday, July 27, 2021

देखभाल: राजेश्वरी राठौड़

जीवन में एक दूसरे की चिंता करना और देखभाल करना, ख्याल रखना बहुत मायने रखता है चाहे कोई व्यक्ति हमारे परिवार का हो या ना हो हमें हर किसी के बारे में अच्छा सोचना चाहिए और मुश्किल समय में उनकी देखभाल और चिंता करनी चाहिए। मदद और देखभाल ऐसी चीज होती है, जो आप लोगों को जितना देंगे उतना ही वह आपके पास लौट कर अपने आप मिलता हैघर पर रहने वाले निकटतम लोगों की देखभाल करके प्यार शुरू होता है

ऐसे ही परिवार में अपने बड़े बुजुर्गों की देखभाल करना हमारा नैतिक कर्तव्य हैंजिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते हमें पता होना चाहिए कि अपने बड़ों की देखभाल कैसे करें बूढ़े व्यक्ति घर परिवार का मुखिया होते हैं। बुजुर्गों की देखभाल के लिए सबसे जरूरी है कि आप उनको प्यार करें उनको सम्मान दे और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उनको सक्रिय और फिट रखें अपने बड़ों की देखभाल के लिए थोड़ा समय निकाल कर और थोड़ी मेहनत कर अपने दादा- दादी, नाना- नानी या फिर अन्य परिवार में बुजुर्ग इंसान के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। इसके लिए उनकी मानसिक, शारीरिक और भावात्मक देखभाल होनी चाहिए

विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थियों को अपने बड़े व अपने मित्रों की भी देखभाल करनी चाहिए कभी स्वार्थ नहीं रखना चाहिएनिस्वार्थ भाव से देखभाल करनी चाहिएऐसे ही हमें अपनी चीजों के प्रति भी देखभाल रखनी चाहिए। देखभाल का मतलब है सही काम करें, श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंअपने कर्तव्यों को जिम्मेदारी से पूरा करें

Rajeshwari Rathod
rre@fabindiaschools.in
The Fabindia School, Bali

Wednesday, March 31, 2021

विद्यार्थी के दायित्व - राजेश्वरी राठौड़

Courtesy: schooltonic.com
विद्यार्थी जीवन हमारे पूरे जीवन की नींव होती है और इसी समय हमें अपने कुछ दायित्व निर्धारित कर लेने चाहिए। दायित्व का अर्थ है जिम्मेदारी या दूसरे शब्दों में किसी कार्य की पूर्ति का भार। विद्यार्थी आने वाले समय के भारत के भविष्य हैं। विद्यार्थी देश और समाज के आधार है। 

अनुशासन में रहना विद्यार्थी का दायित्व विद्यार्थी को दायित्व संभालने से पहले यह विचार कर लेना चाहिए कि देश को किस क्षेत्र में उनका सहयोग चाहिए। आज हमारे देश में अशिक्षा और अस्वास्थ्य यह दो बड़ी समस्या इसलिए विद्यार्थियों को यह दायित्व लेना चाहिए कि वह पूरे भारत को शिक्षित और स्वस्थ बनाएंगे एक विद्यार्थी अपने नैतिक गुणों से अशिक्षित को शिक्षा प्रदान करें , तो जल्दी ही देश का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित हो जाएगा धार्मिक संस्कारों को 

अपने हृदय में विकसित करना अपने माता-पिता और बड़ों का कहना मानना चाहिए। इसी तरह हम समाज में रहते हैं समाज कीअन्य समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए। विद्यार्थी जीवन का उद्देश्य जीवन के सभी रूपों का खुले नजरिए से देखना है और समस्याओं का समाधान करना जिससे देश और समाज की प्रगति हो।

राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Saturday, July 4, 2020

एकता एवं देखभाल: राजेश्वरी राठौड़


एकता अर्थात संगठन पूर्वक कोई कार्य करना। एकता हमारे जीवन में कई बाहर झलकती है जैसे परिवार की एकता, देश की एकताकई कार्यालय में एकता, विद्यालयों में एकता इत्यादि पर मूल रूप से इन सभी का अर्थ है, किसी को अकेला नहीं छोड़, कंधे से कंधा मिलाते हुए, कार्य में सहयोग करना। हम सभी ने सुना है, एकता में अटूट शक्ति है। इस पंक्ति का अभिप्राय है, जब हम अपने साथियों के साथ मिल कर कुछ कार्य करें, तब उस कार्य का सफल होना तय होता और वहीं अगर हम अहंकार पूर्वक वह कार्य अकेले करें तो शायद ही वह कार्य सफल होगा। 

हम सामान्य तौर पर एक विद्यालय को हमारा दूसरा घर समझते हैं, क्योंकि वहाँ हमें वह अटूट आपसी बंधन एवं अपनापन दिखाई देता है। जो हमें हमारे घर में नजर आता है और इसका स्पष्ट कारण है वहाँ सीखा गया एकता पूर्वक कार्य का गुण। अतः एक दूसरे को जो कार्य दिया जाता है अपनी जिम्मेदारी समझ कर पूरा किया जाता है। उस कार्य को निष्ठा पूर्वक किया जाता है। सभी एक दूसरे के सहयोग से ही कार्य में सफलता मिलती है

देखभाल का अर्थ है, किसी की परवाह करना सेवा करना संभालना इत्यादिदेखभाल एक ऐसी स्थिति है, जो मानव जीवन में बहुत महत्व रखती है। यह मनुष्य की करुणा का स्त्रोत है। जीवन में एक दूसरे की चिंता करना देखभाल करना खयाल रखना बहुत मायने रखता है। चाहे कोई व्यक्ति हमारे परिवार का हो या ना हो, हमें किसी के बारे में अच्छा सोचना चाहिए और मुश्किल के समय में उनकी देखभाल और चिंता करनी चाहिए। 

मदद और देखभाल ऐसी चीज होती है जो आप लोगों को जितना देंगे उतना ही वो आपके पास लौटकर अपने आप मिलती है। देखभाल, जैसे छोटे बच्चों की करना, बड़े-बूढ़ों की देखभाल करना कोई कार्य दिया हो तो देखभाल करके पूर्ण करवाना या करना, किसी पशु-पक्षी की दया करना व देखभाल करना। अतः विद्यार्थियों के जीवन में भी ये नैतिक मूल्य होना चाहिए। एक दूसरे के प्रति प्रेम व दया अवश्य होनी चाहिएएक दूसरे की देखभाल अवश्य करनी चाहिए
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

Monday, June 1, 2020

जिम्मेदारी और सहयोग: राजेश्वरी राठौड़


मनुष्य के जीवन में जिम्मेदारी का बहुत महत्व है। उससे भी जरूरी है जीवन में मिलने वाली जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाना अगर बचपन से ही छोटे-छोटे काम करें और उनका महत्व समझे तो वह थोड़ा बड़े होने पर अपने काम के प्रति जिम्मेदार बन जाएगा। यह जिम्मेदारी शुरू से बालक के संस्कार में आनी चाहिए

शिक्षकों द्वारा भी छात्रों में जिम्मेदारी से कार्य करने की आदत डालनी चाहिए जिससे वह आगे चलकर जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करें जैसे- कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चों को काम दिया जाता है, बच्चे उसे अपनी जिम्मेदारी समझ कर पूरा करके दिखाते हैंऐसे ही घर में, छोटे-छोटे काम माता-पिता द्वारा बताया जाना चाहिए, जिससे कि बालक की शुरू से ही काम करने की आदत पड़ जाती हैं

वह शुरू से ही कार्य में रुचि लेगा, तो उसमें जिम्मेदारी की भावना आएगी अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभाएगाखुद के प्रति जिम्मेदार होगा, तब ही परिवार के प्रति जिम्मेदार होगा और अपने परिवार का पूरा ख्याल रख सकेगाइसी तरह समाज के प्रति बालक कार्य करेगा तो जिम्मेदारी निभाएगाइसी तरह शिक्षा के माध्यम से एक अच्छा नागरिक बन कर देश की सेवा कर सकता है। इसलिए मनुष्य को जिम्मेदारी समझकर हर कार्य को रुचि से करना चाहिएउसे पूर्ण रूप से निभाना चाहिएइससे आगे चलकर वह अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं

हयोग का अर्थ है मिलजुल कर कार्य करना मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैउसे समाज में जीने के लिए मिलजुल कर रहना सीखना चाहिए और यह भावना हम छात्रों में विद्यार्थी जीवन में ही उत्पन्न कर सकते हैंहयोग की भावना एक छात्र में जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न करती है, साथ ही अन्य नैतिक मूल्यों के विकास को भी प्रोत्साहन देती है

संगठित होकर कार्य करने से छात्र-छात्राएँ अभिमान रहित और विनम्रता पूर्वक कार्य करना सीखते हैं, जो उनके विवेक को विकसित करता है। सहयोग पूर्वक कार्य करने से, विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों में रिश्ता जुड़ता है। इसी की नींव पर एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित होता है इसलिए मिलजुल कर रहना चाहिए व कार्य करना चाहिए   
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

Wednesday, May 6, 2020

कर्तव्य: जफ्फर खा

कर्तव्य हमारे जीवन के वह कार्य हैं जिन्हें हमारे मन से दूसरे के लिए करना है | परिवार और बच्चों की देखभाल
करना उसका कर्तव्य होता है कि वह अपने परिवार के लिए पैसे कमाए कर्तव्य की मांग के आधार पर ही  मनुष्य के साथ समाज का बंधन है | 

उसके परिवार का जो बंधन है उसमें भी कर्तव्य का समावेश है हमें अपने कर्तव्यों को हमेशा याद रखना चाहिए अपने बच्चों की सुख सुविधा का ध्यान  रखना चाहिए यह माता पिता का कर्तव्य होता है कर्तव्य का एक मात्र यही आदेश है कि हम दूसरों से जो लेना चाहते हैं उसे अपने पास से देने की गुंजाइश प्रत्येक मनुष्य में होनी चाहिए  कर्तव्य बुद्धि से प्रेरित होकर कार्य करना चाहिए यह निश्चित है कि यदि हम दूसरों के साथ अच्छा करेंगे तो प्रतिफल स्वरूप हमें अपने आप ही अच्छा मिल जाएगा |

 एक व्यक्ति अपने हित के लिए अपनी इच्छा के अनुसार कई कार्य करता है और कई नहीं करता है अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करना या न करना कड़वा नहीं कहा जा सकता है | नैतिक कर्तव्य अपने जीवन के कई पहलू हैं हर मनुष्य अपने कर्तव्यों को पूरा करने का भरसक प्रयास करता है | हमारे माता,पिता ,परिवार, मित्र ,शिक्षक, देश एवं समाज सभी के लिए होता है | 

सभी के लिए हमारी नैतिकता जो कुछ करने के लिए कहती हैं | वही हमारा कर्तव्य है बिना अपेक्षा के जो हमें करना चाहिए वही कर्तव्य की श्रेणी में आता है कर्तव्य अलग-अलग मनुष्य के लिए अलग-अलग पायदान पर अलग-अलग होता  है| 

जफ्फर  खा
द फैब इण्डिया स्कूल  

ईमानदारी और सम्मान: आयशा टॉक


ईमानदार व्यक्ति सभी का सम्मान करता है एवं बदले में सम्मान पाता भी है। ईमानदारी का गुण किसी व्यक्ति के नैतिक चरित्र को पहचान देता है। ईमानदार व्यक्ति अपनी ईमानदारी के बल पर जीवन में सफलता जरूर प्राप्त करता है। परिवार, समाज, दोस्तों  और दुनिया भर में ईमानदारी हमेशा सराहनीय है। ईमानदारी और सम्मान एक ऐसा अभ्यास है जो धीरे - धीरे और धैर्यपूर्वक पहले घर और फिर विद्यालय में सिखाया जाता है। इसलिए घर और विद्यालय एक बच्चे के लिए उसके बढ़ते समय से ईमानदारी एवं सम्मान की भावना को विकसित करने के लिए सबसे अच्छी जगह है। 

हमें हर व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए। सर्वप्रथम हमारे माता - पिता , परिवार के लोग एवं गुरुजन उनका सम्मान करना चाहिए। क्योंकि वे हमसे बहुत प्रेम करते हैं एवं हमारा बहुत ख्याल रखते हैं। अनजाने में भी हमारे द्वारा बोले गए कटु शब्द उन्हें आघात पहुँचा सकते हैं, दुखी कर सकते हैं। अतः हमें मधुर वाणी द्वारा उन्हें सम्मान देना चाहिए। जैसा व्यवहार हम दूसरों से अपने  लिए  चाहते है, वैसा ही व्यवहार  हमें उनके लिए रखना चाहिए। अगर हमारे परिवार में कोई छोटे बच्चे, बीमार या बूढ़े व्यक्ति होते हैं, अगर हम उनकी सही ढंग से देखभाल करके एवं उनके किसी काम में मदद करके भी उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित कर सकते है। 

Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali.

Monday, April 6, 2020

कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी: आयशा टॉक


कर्तव्यनिष्ठा अपने कार्य के प्रति सावधान या मेहनती होने के व्यक्तित्त्व की विशेषता है। किसी भी कार्य को पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी से करना एवं दूसरों के प्रति अपने दायित्वों को गंभीरता से निर्वाह करना। कर्त्तव्यनिष्ठ लोग आसानी से पहचाने जाने और उच्छृंखल होने के विपरीत कुशल और संगठित होते है। सफल लोगों का सबसे महत्त्वपूर्ण गुण ईमानदारी होता है। यह गुण आपको एक मज़बूत नैतिक कम्पास बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता हैं। ईमानदार लोग भी नियमों और मानदंडों का पालन करना पसंद करते हैं।  हर कोई व्यक्ति अपनी दैनिक योजनाएँ बनाकर एवं उनके अनुसार अपना कार्यक्रम निर्धारित करें। दैनिक योजना के अनुसार कार्य करना संगठन और आत्म - अनुशासन को प्रोत्साहित करता है। बार - बार अभ्यास के माध्यम से, ये कौशल सीखा जा सकता है और सहज हो सकता है। प्रारंभ में हमें ऐसा लग सकता है कि हम कोई अभिनय कर रहे हैं। 

  यह गुण शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होता है। एक शिक्षक को अपने विद्यार्थियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ कर उस के बारे में योजना बना कर विद्यार्थियों की प्रगति के लिए उचित कार्य पूर्ण ईमानदारी एवं    कर्तव्यनिष्ठा के साथ करके विद्यार्थियों के भविष्य को उज्जवल बना सकते है। जब तक कोई भी व्यक्ति अपने कार्य को अपने जीवन का अहम हिस्सा एवं जिम्मेदारी समझेगा तब तक वह उस कार्य में सफल नहीं हो सकता है। इस प्रकार सफलता के लिए ईमानदारी एवं कर्त्तव्यनिष्ठा बहुत आवश्यक है। ये दोनों गुण एक - दूसरे के बिना पूर्ण नहीं हो सकते है। 
Ayasha Tak
atk4Fab@gmail.com
The Fabindia School, Bali

Monday, March 16, 2020

कर्तव्यनिष्ठा : कृष्ण गोपाल


नैतिक रूप से जिम्मेदारी का वहन करना कर्तव्य है।  यह जिम्मेदारी कई तरह की हो सकती हैं।  माता-पिता की अपने संतान के प्रति, संतान की माता-पिता के प्रति, रोज़गार वाले की अपने कार्य के प्रति और अध्यापक की अपने छात्रों के प्रति इत्यादि।  हर व्यक्ति के पास अधिकार है तो कुछ कर्तव्य भी हैं।  

कर्तव्यों को ठीक प्रकार से निभाना अत्यावश्यक है। परन्तु बाहरी दबाव के कारण हम ऐसा कर रहे हैं, तो उचित नहीं।  नैतिक जिम्मेदारी को खुद अपने स्तर पर पूरा करें। यदि समझ आए तो किसी से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।  

यह काम माता-पिता और अध्यापक का है कि  वे बालक को एक जिम्मेदार नागरिक बनाएँ।  हमेशा ही कहा जाता है कि बालक देख कर सीखता है।  यदि ऐसा है तो वह सर्वप्रथम माता-पिता और इसके उपरांत अपने शिक्षक को देखता है।  इसलिए यह इनका परम दायित्व बन जाता है कि कर्तव्यनिष्ठा की एक मिसाल अपने बालकों के समक्ष प्रस्तुत करें।  स्वयं उत्तरदायित्व को ठीक से निभाएँ, बालक देखकर वैसा ही अनुसरण करेगा। 

अपनी सामग्री के साथ सहपाठियों की सामग्री, विद्यालय की सामग्री आदि का सम्मान करें।  जैसा आप करेंगे वैसा ही फल भी मिलेगा अर्थात आपके सहपाठी भी आपकी सामग्री का सम्मान करेंगे या सुरक्षित रखेंगे। 
Krishan Gopal
kde4fab@gmail.com
The Fabindia School, Bali

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