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Wednesday, August 19, 2020

अपनी सुरक्षा अपना दायित्व - राजेश्वरी राठौड़

मानव को कोई भी कार्य के दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। सुरक्षा का
अर्थ हानी से बचाव करने की क्रिया और व्यवस्था को सुरक्षा कहते हैं। वर्तमान समय में सुरक्षित रहना हर वर्ग के लिए एक चुनौती सा बन गया है। हमारी स्वयं की सुरक्षा का दायित्व किसका है ? समाज, सरकार या स्वयं हमारा है। इसकी विवेचना करना आवश्यक है। वैसे तो मनुष्य को बचपन से ही हर तरह की  सुरक्षा के बारे में बताया या सिखाया जाता है। जैसे आग से, बिजली से, पानी से ,सड़क दुर्घटना से, औद्योगिक कार्य मे सुरक्षा  से सावधानी से कार्य करना चाहिए। हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जैसे व्यायाम करना ,पौष्टिक खाना खाना  इत्यादि।

एक उदाहरण के माध्यम से अपनी सुरक्षा अपना दायित्व को समझाने का प्रयास कर रही हूं मलेरिया जैसी बीमारी से हर हर साल  कई लोगों की मृत्यु होती है। अगर वह सुरक्षा रखें जैसे घर की सफाई अपने आस-पास पानी इकट्ठा ना होने देने की सफाई का ध्यान रखें तो मच्छर उत्पन्न ही नहीं होंगे रात में मच्छरदानी लगा कर सोना इत्यादि सुरक्षा के उपाय करेंगे तो बीमारी से बच सकते हैं। वैसे आज-कल कोराना जैसी महामारी ने लोगों को  हिला कर रख दिया है। इसके लिए सरकार उपचार कर रही है लेकिन हमको अपनी सुरक्षा स्वयं को करनी है जैसे मास्क बांधकर बाहर जाना सोशल डिस्टेंस बना कर चलना जो सुरक्षा के नियम है उनका सावधानीपूर्वक  निभाना है तभी अपनी सुरक्षा कर सकेंगे।

हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा का उत्तरदायित्व हमारा स्वयं का है सरकार के साथ-साथ हमें भी स्वयं की सुरक्षा करनी चाहिए।  सुरक्षा जीवन का अर्थ सुरक्षा के बिना जीवन व्यर्थ है।

राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Monday, June 1, 2020

जिम्मेदारी और सहयोग: उषा पंवार


मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों तक जिम्मेदारी का दायित्व रहता हैं। उस दायित्व को निभाने पर आत्म विश्वास और खुशी मिलती हैं। जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ना यानी असफलता की ओर ले जाना है, वह गैर जिम्मेदार होता है। मनुष्य की जिम्मेदारी मात्र स्वयं के लिए नहीं बल्कि परिवार, समाज देश के प्रति भी होनी चाहिए। जिम्मेदारी निभाने वाला व्यक्ति ही सफलता की ओर बढ़ता है क्योंकि  वह जानता है कि वह जिम्मेदारी उठा सकता है।

विद्यालय एक बगीचा है जहाँ बच्चे उसके फूल हैं, उन फूलों को शिक्षक शिक्षा के द्वारा पोषण कराते हैं। यही शिक्षक की जिम्मेदारी है और बच्चों के सर्वांगीण विकास, व्यक्तित्व और विचारों से भी जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। विद्यार्थियों को भी जिम्मेदारी देनी चाहिए जैसे- कक्षा में किसी एक बच्चे को मॉनिटर बना कर कक्षा की देख-रेख के साथ उन्हें भी जिम्मेदारियाँ सौंपी जानी चाहिए ताकि उन्हें जिम्मेदारी समझ आए

 हम सभी शिक्षकों का कर्तव्य बनता है कि समाज और विद्यालय के हर बच्चे को सुसंस्कृत एवं संस्कारी बनाने का प्रयास करें, जिससे वह देश और समाज का एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें। अनुशासन प्रेम एवं वात्सल्य के साथ दी गई शिक्षा ही विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बना सकती है।बच्चों को शुरू से ही उनकी जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित करते रहना चाहिए। घर की छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ जैसे- छोटे-मोटे काम करना, सामान लाना, घर में मेहमानों को जलपान करानामाता पिता के काम में हाथ बँटाना आदि से प्रेरित करना चाहिए। इससे बड़े होने पर वे अपनी जिम्मेदारियाँ स्वयं समझ सकेंगे

बच्चों की गलती को प्यार से बताना चाहिए ताकि वे गलतियों को नहीं दोहराए, हमारा दायित्व केवल उन्हें मार्गदर्शन करने का होता है। शिक्षक भावी पीढ़ी का निर्माता होता है। वह नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देते हैं । वह ऐसी शिक्षा देते हैं जो कठिन परिस्थितियों से लड़ना सिखाते हैं । शिक्षकों के ऊपर समाज की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी रहती है क्योंकि वह कई बच्चों के भविष्य के निर्धारक होते हैं।

सहयोग से सफलता मिलती है । सहयोग की आवश्यकता हर क्षेत्र में होती है । मानव समाज की नींव पारस्परिक सहयोग से ही होती है दूसरों को सहयोग देकर ही उन्हें हम अपना सहयोगी बना सकते हैं । बच्चे के लालन- पालन से लेकर वृद्धावस्था तक परिवार, समूह का परस्पर सहयोग रहता है। सहयोग एक भावना है किसी को दबाव से कार्य नहीं करा सकते हैं। सहयोग की आवश्यकता सामाजिक क्षेत्र में, शैक्षणिक क्षेत्र मेंआर्थिक क्षेत्र में होती है

मानव जीवन की सुरक्षा, उन्नति और विकास के लिए सहयोग आवश्यक है। सहयोग से ही व्यक्ति व्यवहार करना सीखता है और निर्णय करने की क्षमता आती है। सहयोग एक दूसरे के माध्यम से होता है। मनुष्य अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति अकेला नहीं कर सकता। बड़े लक्ष्य के लिए और व्यापक प्रभाव के लिए और विकास के लिए उसे हमेशा दूसरों की सहायता की आवश्यकता पड़ती है । दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी कार्य को करने के लिए किया जाने वाला सामूहिक प्रयत्न सहयोग होता है जैसे- हमारे विद्यालय में My Good School की गतिविधियाँ सहयोग पर ही टिकी है। सहयोग से आपस मेंसमूह में कार्य करना, मिलजुल कर कार्य करना सीखते हैं।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali

Monday, March 16, 2020

कर्तव्यनिष्ठा : कृष्ण गोपाल


नैतिक रूप से जिम्मेदारी का वहन करना कर्तव्य है।  यह जिम्मेदारी कई तरह की हो सकती हैं।  माता-पिता की अपने संतान के प्रति, संतान की माता-पिता के प्रति, रोज़गार वाले की अपने कार्य के प्रति और अध्यापक की अपने छात्रों के प्रति इत्यादि।  हर व्यक्ति के पास अधिकार है तो कुछ कर्तव्य भी हैं।  

कर्तव्यों को ठीक प्रकार से निभाना अत्यावश्यक है। परन्तु बाहरी दबाव के कारण हम ऐसा कर रहे हैं, तो उचित नहीं।  नैतिक जिम्मेदारी को खुद अपने स्तर पर पूरा करें। यदि समझ आए तो किसी से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।  

यह काम माता-पिता और अध्यापक का है कि  वे बालक को एक जिम्मेदार नागरिक बनाएँ।  हमेशा ही कहा जाता है कि बालक देख कर सीखता है।  यदि ऐसा है तो वह सर्वप्रथम माता-पिता और इसके उपरांत अपने शिक्षक को देखता है।  इसलिए यह इनका परम दायित्व बन जाता है कि कर्तव्यनिष्ठा की एक मिसाल अपने बालकों के समक्ष प्रस्तुत करें।  स्वयं उत्तरदायित्व को ठीक से निभाएँ, बालक देखकर वैसा ही अनुसरण करेगा। 

अपनी सामग्री के साथ सहपाठियों की सामग्री, विद्यालय की सामग्री आदि का सम्मान करें।  जैसा आप करेंगे वैसा ही फल भी मिलेगा अर्थात आपके सहपाठी भी आपकी सामग्री का सम्मान करेंगे या सुरक्षित रखेंगे। 
Krishan Gopal
kde4fab@gmail.com
The Fabindia School, Bali

Monday, August 12, 2019

ईमानदारी (HONESTY): Jaffer Khan


वास्तव में ईमानदारी एक अच्छी नीति है क्योंकि यह एक उचित तरीके से काम करने वाले रिश्ते की नींव रखती है।  इतना ही नहीं, यह कई तरह से लोगों के जीवन को पोषित करता है।  भरोसा किसी भी रिश्ते का आधार है जो ईमानदारी से प्राप्त किया जाता है। 
आमतौर पर लोगों को ईमानदार होना कठिन लगता है क्योंकि ईमानदारी को बनाए रखने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।  ईमानदारी का मतलब जीवन  सभी पहलुओं में सच्चा होना है, कहीं इसका पालन किया कहीं नहीं किया ये तो स्वयं के साथ भी धोखा होगा।  इसमें किसी से झूठ नहीं बोलना, बुरी आदतों, गतिविधियों या व्यवहार के माध्यम से किसी को भी चोट नहीं पहुँचाना भी शामिल रहता है। 
ईमानदार व्यक्ति कभी भी उन गतिविधियों में शामिल नहीं होता है जो नैतिक रूप से गलत हैं।  ईमानदार व्यक्ति कभी किसी भी नियम को तोड़ते नहीं है, चाहे कितनी बाधाएँ क्यों आए।  अनुशासन में रहकर अच्छी तरह से व्यवहार करें, सच बोलें, वक्त के मुताबिक चलें और ईमानदारी से दूसरों की सहायता करे। 
ईमानदारी का अर्थ यह भी है कि अपने कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन करें।  देश के प्रति जो दायित्व है उन्हें भी निभाना इसी का हिस्सा है।  सम्पूर्ण रूप से ईमानदारी का परिचय दें, तभी एक शिक्षक के रूप में अपने छात्रों को नैतिकता का पाठ सिखा सकेंगे। 
Jaffar Khan 
jkn4fab@gmail.com 

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