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Friday, September 11, 2020

गुणवत्ता और स्नेह: उषा पंवार

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मतलब ऐसी शिक्षा है जो हर बच्चे के काम आए इसके साथ ही हर बच्चे की क्षमताओं का संपूर्ण विकास हो। विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना चाहिए। शैक्षिक गतिविधियों को अधिक जोर देना चाहिए। अच्छी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का माहौल होना चाहिए।

प्रेम-धरती पर रहने वाले सभी व्यक्ति, जीव-जंतु प्रेम महसूस करते हैं और प्रेम, वात्सल्य के मोहताज होते हैं। मानवता ही प्रेम व संयम का पाठ पढ़ाती हैं। मानवता, इंसान के साथ साथ संपूर्ण परिवेश से प्रेम करना सिखाती है। प्रकृति की गोद में पल रहे सभी प्राणी प्रेम की कामना करते हैं। प्रेम ही ईश्वर है सभी प्राणियों से सच्चा प्रेम करना ही ईश्वर से प्रेम करना है। किसी के प्रति ईर्ष्या, नफरत नहीं रखना चाहिए।

प्रकृति बहुत सुंदर है प्रकृति की सच्ची सुंदरता और शक्ति का अनुभव उसके साथ एक होने से ही हो सकता है। प्रकृति हमसे उतना ही प्यार करती है जितना हम प्रकृति से प्यार करते हैं। हमें भी प्रकृति की तरह नि:स्वार्थ भाव से दूसरों से प्रेम करना चाहिए।

एक शिक्षक बच्चों के प्रति प्यार की भावना रखता है उसे छात्रों द्वारा प्यार मिलता है और जो कठोर होते हैं उन्हें कोई भी पसंद नहीं करते हैं। अतः प्यार एक खूबसूरत एहसास है।

विशेष रूप से छोटे बच्चे विद्यालय में आते हैं तो बच्चे घर का प्यार ममतामय वातावरण छोड़कर एकाएक विद्यालय में आता है, वह घर से भाई-बहन, माता-पिता से पाने वाले प्यार स्नेह को जब विद्यालय में नहीं पाता तो उसे विद्यालय में अच्छा नहीं लगता और घर जाने को लालायित होता हैं। अतः विद्यालय में शिक्षक को बच्चे के प्रति मधुर होना, प्यार से बातें करना, खेलना आदि करना चाहिए। खेल खेल में ज्ञान बढ़ाना चाहिए। शिक्षक अपने छात्र को बिना किसी अपेक्षा के पढ़ाते हैं। प्यार सबसे महान गुण है।

Usha Panwar

The Fabindia School

Monday, June 1, 2020

जिम्मेदारी और सहयोग: उषा पंवार


मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों तक जिम्मेदारी का दायित्व रहता हैं। उस दायित्व को निभाने पर आत्म विश्वास और खुशी मिलती हैं। जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ना यानी असफलता की ओर ले जाना है, वह गैर जिम्मेदार होता है। मनुष्य की जिम्मेदारी मात्र स्वयं के लिए नहीं बल्कि परिवार, समाज व देश के प्रति भी होनी चाहिए। जिम्मेदारी निभाने वाला व्यक्ति ही सफलता की ओर बढ़ता है क्योंकि  वह जानता है कि वह जिम्मेदारी उठा सकता है।

विद्यालय एक बगीचा है जहाँ बच्चे उसके फूल हैं, उन फूलों को शिक्षक शिक्षा के द्वारा पोषण कराते हैं। यही शिक्षक की जिम्मेदारी है और बच्चों के सर्वांगीण विकास, व्यक्तित्व और विचारों से भी जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। विद्यार्थियों को भी जिम्मेदारी देनी चाहिए जैसे- कक्षा में किसी एक बच्चे को मॉनिटर बना कर कक्षा की देख-रेख के साथ उन्हें भी जिम्मेदारियाँ सौंपी जानी चाहिए ताकि उन्हें जिम्मेदारी समझ आए ।

 हम सभी शिक्षकों का कर्तव्य बनता है कि समाज और विद्यालय के हर बच्चे को सुसंस्कृत एवं संस्कारी बनाने का प्रयास करें, जिससे वह देश और समाज का एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें। अनुशासन प्रेम एवं वात्सल्य के साथ दी गई शिक्षा ही विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बना सकती है।बच्चों को शुरू से ही उनकी जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित करते रहना चाहिए। घर की छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ जैसे- छोटे-मोटे काम करना, सामान लाना, घर में मेहमानों को जलपान कराना, माता पिता के काम में हाथ बँटाना आदि से प्रेरित करना चाहिए। इससे बड़े होने पर वे अपनी जिम्मेदारियाँ स्वयं समझ सकेंगे ।

बच्चों की गलती को प्यार से बताना चाहिए ताकि वे गलतियों को नहीं दोहराए, हमारा दायित्व केवल उन्हें मार्गदर्शन करने का होता है। शिक्षक भावी पीढ़ी का निर्माता होता है। वह नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देते हैं । वह ऐसी शिक्षा देते हैं जो कठिन परिस्थितियों से लड़ना सिखाते हैं । शिक्षकों के ऊपर समाज की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी रहती है क्योंकि वह कई बच्चों के भविष्य के निर्धारक होते हैं।

सहयोग से सफलता मिलती है । सहयोग की आवश्यकता हर क्षेत्र में होती है । मानव समाज की नींव पारस्परिक सहयोग से ही होती है । दूसरों को सहयोग देकर ही उन्हें हम अपना सहयोगी बना सकते हैं । बच्चे के लालन- पालन से लेकर वृद्धावस्था तक परिवार, समूह का परस्पर सहयोग रहता है। सहयोग एक भावना है किसी को दबाव से कार्य नहीं करा सकते हैं। सहयोग की आवश्यकता सामाजिक क्षेत्र में, शैक्षणिक क्षेत्र में, आर्थिक क्षेत्र में होती है ।

मानव जीवन की सुरक्षा, उन्नति और विकास के लिए सहयोग आवश्यक है। सहयोग से ही व्यक्ति व्यवहार करना सीखता है और निर्णय करने की क्षमता आती है। सहयोग एक दूसरे के माध्यम से होता है। मनुष्य अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति अकेला नहीं कर सकता। बड़े लक्ष्य के लिए और व्यापक प्रभाव के लिए और विकास के लिए उसे हमेशा दूसरों की सहायता की आवश्यकता पड़ती है । दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी कार्य को करने के लिए किया जाने वाला सामूहिक प्रयत्न सहयोग होता है जैसे- हमारे विद्यालय में My Good School की गतिविधियाँ सहयोग पर ही टिकी है। सहयोग से आपस में, समूह में कार्य करना, मिलजुल कर कार्य करना सीखते हैं।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali

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