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Monday, November 29, 2021

संकल्पशीलता: सुरेश सिंह नेगी

संकल्पशील होना आज के दौर में बहुत जरूरी है क्योंकि संकल्पशील होकर ही आप अपने लक्ष्य  को प्राप्त कर सकते हैं। विजेता कभी हार नहीं मानते और हार मानने वाले कभी नहीं जीतते। चाहे आप इसे दृढ़ संकल्प कहें, धैर्य कहें या मेहनत, चलते रहने की इच्छा सफलता का एक महत्वपूर्ण घटक है। वास्तव में संकल्पशील होना स्मार्ट होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बुद्धि और प्रतिभा स्वाभाविक रूप से निष्क्रिय गुण है, लेकिन दृढ़ संकल्प सक्रिय है। इसका मतलब है कि जन्मजात प्रतिभाएँ अवसर पैदा कर सकती हैं, लेकिन उन अवसरों को साकार करने के लिए वास्तविक कार्य करना होगा। कड़ी मेहनत इतनी महत्वपूर्ण है कि, भले ही आपके पास औसत स्तर की प्रतिभा हो, फिर भी आपके  पास जो कुछ भी है उसे सफलता में बदलने के लिए दृढ़ संकल्प का होना अति आवश्यक है।

दृढ़ संकल्प एक लक्ष्य पर केंद्रित रहने के बारे में है। और जब तक आपके पास एक लक्ष्य है, आप उस लक्ष्य के लिए रास्ता बना सकते हैं, जो आप चाहते हैं।

इसके के लिए आपको छोटे-छोटे लक्ष्यों को लेकर संकल्प लेना चाहिए क्योंकि बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर बूँद-बूँद करके ही घड़ा भरता है, एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने के लिए भी एक बच्चे को कई छोटी-छोटी परीक्षाएँ देनी पड़ती हैं। संकल्पशील होने के लिए मन की शक्ति का होना बहुत जरूरी है। मन एक चलायमान है क्योंकि पूरी दुनिया में मन से तेज कोई भी चीज नहीं दौड़ती है। इसलिए मन को एक जगह पर एकाग्र करना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

अतः अपना ध्यान भविष्य पर केंद्रित करें, अतीत को आपका मार्गदर्शन करने दें।

कल की गलतियाँ आपके लिए सबक होनी चाहिए, निराशा की वजह नहीं। अपने आप पर यकीन रखें क्योंकि आप ही हैं जो अपने जीवन को नियंत्रित कर सकते हैं। सबसे कठिन क्षणों में भी, आपको ही तय करना है कि आपको आगे क्या करना है। अपने लक्ष्यों तक पहुँचने की अपनी क्षमता पर विश्वास करें। लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। यदि आप संकल्पशील और सकारात्मक रहते हैं, तो आप भी अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं।

Suresh Singh Negi
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Tuesday, July 27, 2021

देखभाल: राजेश्वरी राठौड़

जीवन में एक दूसरे की चिंता करना और देखभाल करना, ख्याल रखना बहुत मायने रखता है चाहे कोई व्यक्ति हमारे परिवार का हो या ना हो हमें हर किसी के बारे में अच्छा सोचना चाहिए और मुश्किल समय में उनकी देखभाल और चिंता करनी चाहिए। मदद और देखभाल ऐसी चीज होती है, जो आप लोगों को जितना देंगे उतना ही वह आपके पास लौट कर अपने आप मिलता हैघर पर रहने वाले निकटतम लोगों की देखभाल करके प्यार शुरू होता है

ऐसे ही परिवार में अपने बड़े बुजुर्गों की देखभाल करना हमारा नैतिक कर्तव्य हैंजिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते हमें पता होना चाहिए कि अपने बड़ों की देखभाल कैसे करें बूढ़े व्यक्ति घर परिवार का मुखिया होते हैं। बुजुर्गों की देखभाल के लिए सबसे जरूरी है कि आप उनको प्यार करें उनको सम्मान दे और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उनको सक्रिय और फिट रखें अपने बड़ों की देखभाल के लिए थोड़ा समय निकाल कर और थोड़ी मेहनत कर अपने दादा- दादी, नाना- नानी या फिर अन्य परिवार में बुजुर्ग इंसान के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। इसके लिए उनकी मानसिक, शारीरिक और भावात्मक देखभाल होनी चाहिए

विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थियों को अपने बड़े व अपने मित्रों की भी देखभाल करनी चाहिए कभी स्वार्थ नहीं रखना चाहिएनिस्वार्थ भाव से देखभाल करनी चाहिएऐसे ही हमें अपनी चीजों के प्रति भी देखभाल रखनी चाहिए। देखभाल का मतलब है सही काम करें, श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंअपने कर्तव्यों को जिम्मेदारी से पूरा करें

Rajeshwari Rathod
rre@fabindiaschools.in
The Fabindia School, Bali

Sunday, May 17, 2020

खुशी और सहनशीलता: जफ्फर खां


हमको जीवन में सच्ची खुशी तब मिलेगी जब हमको यह पता चलेगा कि खुशी का उद्देश्य केवल हम को खुश करना है सच्ची खुशी हमारे भीतर होती है यह दूसरों से नहीं आती है हमें यह समझने की जरूरत है कि खुशी मूलतः मन की अवस्था है यह उन चीजों से हासिल नहीं की जा सकती जिसे हम बाहर देखते हमारे पास सकारात्मक भावनाओं की सहायता से इन अवस्थाओं को बनाने की शक्ति है, जो अच्छे विचारों से प्राप्त की जा सकती है विभिन्न स्थितियों में अति उत्साहित या उदास होने के बजाय हमको इन सक्रिय भावनाओं जैसे शांति और संतोष को निष्क्रिय करने में परिवर्तन करना चाहिए

 सहनशीलता एक ऐसा सत्य हैं जिससे प्राय सभी लोगों को अपने जीवन काल मैं रूबरू होना पड़ता है सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है आज हमारे जीवन में दुख और तनाव हावी हैं इसका परिणाम यह है कि थोड़े से कष्टों से शीघ्र हम घबरा जाते हैं और क्रोधित हो जाते हैं हम सहनशील बने ताकि हमारे कर्म और व्यवहार से किसी को कोई कष्ट ना हो सहनशीलता का गुण अभ्यास से सिखाया जाता है

 प्रत्येक कार्य करने की योजना एक सुनिश्चित ढंग से बनाने और उस पर अमल करने से ही सही दिशा में बदलाव संभव है सहनशीलता का गुण जाने से दोस्तों और पड़ोसियों के बीच आदर होता है जल्द ही तनाव या क्रोध नहीं पाता इसलिए सहनशील रहकर निजी लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए     
Jaffar Khan
The Fabindia School

Monday, March 16, 2020

जिज्ञासा का महत्त्व : आयशा टॉक


किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने और उसे बेहतर करने की जिज्ञासा महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि हम सवाल पूछते हैं, दूसरों से सीखते हैं, और अपने कार्य को बेहतर तरीके से करने के उपाय खोजते हैं। जिज्ञासु लोगों का दिमाग सक्रिय होता हैं। जिज्ञासा हर उम्र में सीखने की प्रक्रिया को दर्शाती है। जिज्ञासु लोग ज्यादा खुश रहते हैं ।

जिज्ञासा हमारे अंदर सहानुभूति का विस्तार कर सकती है। जब हम दूसरों के बारे में जानने के लिए उत्सुक होते हैं और अपने सामान्य सामाजिक दायरे के बाहर के लोगों से बात करते हैं, तो हम अपने जीवन से अलग जीवन के अनुभव और दुनिया के साथ को समझने में सक्षम हो जाते हैं। 

खेल के माध्यम से बच्चे सामाजिक और संज्ञानात्मक कौशल विकसित कर सकते हैं, भावनात्मक रूप से परिपक़्व हो सकते हैं, और नए अनुभवों एवं वातावरण में संलग्न होने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास प्राप्त कर सकते हैं। छोटे बच्चों में जिज्ञासा का पोषण बहुत आवश्यक होता है। उन बच्चों में जिज्ञासा उत्पन्न करने के लिए सर्वप्रथम उन्हें चित्र का ज्ञान करवाया जाए, उनसे प्रश्न पूछे जाए। जिससे बच्चे खुल कर हमारे सामने जवाब दे पाएँ वे कुछ भी जवाब देने में संकोच करें।

इसलिए बच्चों के अनुरूप वातावरण तैयार किया जाए। अगर वे कुछ गलत जवाब भी दें, तो उन्हें एकदम से नकारना नहीं चाहिए। बल्कि उन्हें दोबारा समझाकर उनकी जिज्ञासा को बढ़ाने का प्रयत्न करें, शायद दूसरी बार में वे सही जवाब देने में सक्षम हो जाएँ हमेशा प्रोत्साहन देने का प्रयत्न किया जाना चाहिए। 
Ayasha Tak
atk4fab@gmail.com
The Fabindia School Bali

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