Showing posts with label धैर्य. Show all posts
Showing posts with label धैर्य. Show all posts

Friday, March 20, 2026

नए शिक्षक के लिए कक्षा में बच्चों को संभालने पर एक चिंतन - सुनीता त्रिपाठी

जब कोई नई शिक्षिका कक्षा में आती है और बच्चे डरे हुए, मासूम और संकोची होते हैं, तो सबसे पहले शिक्षिका का कर्तव्य होता है कि वह बच्चों में विश्वास और अपनापन पैदा करें। छोटे बच्चे अक्सर नए व्यक्ति से घबरा जाते हैं, इसलिए शिक्षिका को कठोरता के बजाय प्यार, धैर्य और मुस्कान के साथ बच्चों से बात करनी चाहिए।

शिक्षिका को चाहिए कि वह पहले बच्चों से हल्की-फुल्की बातचीत करें, उनका नाम पूछें, उनकी रुचियों के बारे में जानें और उन्हें यह महसूस कराएँ कि कक्षा उनके लिए एक सुरक्षित और खुशहाल स्थान है। जब बच्चे शिक्षक को मित्रवत और सहायक रूप में देखते हैं, तो उनका डर धीरे-धीरे कम हो जाता है और वे पढ़ाई में रुचि लेने लगते हैं।

बच्चों के साथ अपनापन बढ़ाने के लिए जब शिक्षक उनके साथ अपना टिफिन साझा करते हैं, उनके साथ बेंच पर बैठते हैं और कभी-कभी बच्चों की तरह छोटी-छोटी गलतियाँ भी करते हैं, तो बच्चों को लगता है कि उनकी शिक्षिका भी उन्हीं की तरह है। इससे बच्चों के मन का डर समाप्त हो जाता है और वे शिक्षक को अपना समझने लगते हैं।

ऐसा व्यवहार बच्चों के दिल में विश्वास और स्नेह उत्पन्न करता है। बच्चे खुलकर बात करने लगते हैं, अपनी समस्याएँ बताते हैं और पढ़ाई में भी अधिक रुचि लेने लगते हैं। शिक्षक और बच्चों के बीच का यह अपनापन कक्षा के वातावरण को सहज, सकारात्मक और सीखने योग्य बना देता है।

जब शिक्षक बच्चों के साथ मित्र की तरह व्यवहार करते हैं, तो बच्चे उन्हें केवल शिक्षक नहीं, बल्कि अपना मार्गदर्शक और सच्चा साथी मानने लगते हैं। यही सच्ची शिक्षा की शुरुआत होती है।

यह अनुभव और कार्य दोनों ही मैंने स्वयं अनुभव किए हैं।

सुनीता त्रिपाठी, सनबीम ग्रामीण स्कूल

Monday, November 29, 2021

संकल्पशीलता: सुरेश सिंह नेगी

संकल्पशील होना आज के दौर में बहुत जरूरी है क्योंकि संकल्पशील होकर ही आप अपने लक्ष्य  को प्राप्त कर सकते हैं। विजेता कभी हार नहीं मानते और हार मानने वाले कभी नहीं जीतते। चाहे आप इसे दृढ़ संकल्प कहें, धैर्य कहें या मेहनत, चलते रहने की इच्छा सफलता का एक महत्वपूर्ण घटक है। वास्तव में संकल्पशील होना स्मार्ट होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बुद्धि और प्रतिभा स्वाभाविक रूप से निष्क्रिय गुण है, लेकिन दृढ़ संकल्प सक्रिय है। इसका मतलब है कि जन्मजात प्रतिभाएँ अवसर पैदा कर सकती हैं, लेकिन उन अवसरों को साकार करने के लिए वास्तविक कार्य करना होगा। कड़ी मेहनत इतनी महत्वपूर्ण है कि, भले ही आपके पास औसत स्तर की प्रतिभा हो, फिर भी आपके  पास जो कुछ भी है उसे सफलता में बदलने के लिए दृढ़ संकल्प का होना अति आवश्यक है।

दृढ़ संकल्प एक लक्ष्य पर केंद्रित रहने के बारे में है। और जब तक आपके पास एक लक्ष्य है, आप उस लक्ष्य के लिए रास्ता बना सकते हैं, जो आप चाहते हैं।

इसके के लिए आपको छोटे-छोटे लक्ष्यों को लेकर संकल्प लेना चाहिए क्योंकि बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर बूँद-बूँद करके ही घड़ा भरता है, एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने के लिए भी एक बच्चे को कई छोटी-छोटी परीक्षाएँ देनी पड़ती हैं। संकल्पशील होने के लिए मन की शक्ति का होना बहुत जरूरी है। मन एक चलायमान है क्योंकि पूरी दुनिया में मन से तेज कोई भी चीज नहीं दौड़ती है। इसलिए मन को एक जगह पर एकाग्र करना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

अतः अपना ध्यान भविष्य पर केंद्रित करें, अतीत को आपका मार्गदर्शन करने दें।

कल की गलतियाँ आपके लिए सबक होनी चाहिए, निराशा की वजह नहीं। अपने आप पर यकीन रखें क्योंकि आप ही हैं जो अपने जीवन को नियंत्रित कर सकते हैं। सबसे कठिन क्षणों में भी, आपको ही तय करना है कि आपको आगे क्या करना है। अपने लक्ष्यों तक पहुँचने की अपनी क्षमता पर विश्वास करें। लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। यदि आप संकल्पशील और सकारात्मक रहते हैं, तो आप भी अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं।

Suresh Singh Negi
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Tuesday, March 30, 2021

धैर्य सफलता की कुंजी - Kusum Dangi

Courtesy: medium.com
"धैर्य  वह सवारी है जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती ना किसी के कदमों में और ना किसी की नजरों में"
 
संसार में रहते हुए अनेक कठिनाइयों तथा मुश्किल परिस्थितियों का आना   स्वाभाविक हैं। लेकिन जो इंसान अपने विवेक को धारण करते हुए धैर्य  के साथ आगे बढ़ता है वही सफलता को प्राप्त कर सकता हैं। इस संसार में अनेक प्राणी मौजूद हैं ,परन्तु मनुष्य को छोड़कर ऐसा कोई प्राणी  नहीं है जिसके पास विवेक और  सोचने की शक्ति हो सकता है I

"धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए  फल होय "
 अर्थात  एक बीज को पौधा बनने में एवं फल देने में समय लगता हैं जिसका  हम सभी को धैर्य से इंतजार करना चाहिए अर्थात हमें कर्म  करते रहना चाहिए और धैर्य से अपने परिणाम का इंतजार करना चाहिए। हमे बच्चों को भी सीखाना चाहिए कि किसी कार्य में जल्दबाजी ना करे क्योंकि इससे वो कार्य बिगडऩे की संभावना अधिक रहती हैं।और हमे अच्छे परिणाम नहीं मिल पाते हैं। इसलिए धैर्य से हम कठिन से कठिन कार्य को सरल बना सकते हैं जिससे हम सफलता को प्राप्त कर सकते हैं।

Kusum Dangi
The Fabindia School
kdi@fabindiaschools.in

Monday, October 19, 2020

धैर्य - जफर खान

धैर्य हमारे जीवन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि हम अपने जीवन में धैर्य रखते हैं तो बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं, यहां तक की बड़ी से बड़ी सफलता भी हम धैर्य रखकर प्राप्त कर सकते हैं बहुत सारे लोगों ने यह साबित किया है कि धैर्य रखकर हम अपने सारे सपनों को भी पूरा कर सकते हैं हम कोई कार्य शुरू करते हैं उसमें हमको बार-बार असफलता मिलती है तो हम उस कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं यानी हम  धैर्य नहीं रखते हैं तो हमको उसका कोई परिणाम नहीं मिलता है | 

लेकिन यदि हम बार-बार अपने कार्य को करते रहते हैं, तो निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है यदि हमारे पास कार्य करने का सही तरीका और हमने लगातार प्रयास किया है तो हमें सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता है | जिंदगी में हमें हर किसी की जरूरत पड़ती है साथ में धैर्य की भी आवश्यकता पड़ती है क्योंकि किसी भी कार्य में सफलता हमेशा समय से पहले नहीं मिलती है | यदि हम बिल्कुल भी धैर्य नहीं रखेंगे और समय का इंतजार बिल्कुल भी नहीं करेंगे तो हम जीवन में पीछे रह जाएंगे | हमें अपने जीवन में यह सोचने की जरूरत है कि क्या  हम वह कार्य सही दिशा में कर रहे हैं, सही तरह से कर रहे हैं तब हमको सफलता जरूर मिलेगी धैर्य के बिना जीवन में किसी बड़े कार्य में सफलता नहीं मिल सकती  है | 

हम कोई बिजनेस शुरू करते हैं और यदि हम उस में तुरंत ही सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो यह संभव नहीं है | हमको उस बिजनेस को समझने की जरूरत है, उस बिजनेस के हर पहलू के बारे में समझ कर यदि हम बिजनेस को करेंगे तो हमको सफलता मिलेगी इसके लिए हम को कुछ समय तो जरूर ही देना पड़ेगा इसका मतलब है हमको धैर्य जरूर रखना पड़ेगा | धैर्य के बगैर कुछ भी बड़ा हम अपने जीवन में नहीं कर पाएंगे | मानव जाति में  धैर्य की बहुत आवश्यकता होती हैं इसलिए सभीी को धैर्य रखकर कार्य करना चाहिए  जिससे हमारा हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम अच्छा कार्य कर सकते है|

 जफर खान, The Fabindia School <zkn@fabindiaschools.in>


Wednesday, May 6, 2020

ईमानदारी और सम्मान: सुरेश सिंह नेगी


मानव जीवन में ईमानदारी का होना अति आवश्यक हैं।  अक्सर यह देखा गया हैं, कि जो इन्सान ईमानदार  होता है। वह अपने कर्तव्यों के लिए भी उतना ही जागरूक होता हैं जितना कि वह अपने अधिकारों को लेकर होता है। 

ईमानदारी के चरित्र का निर्माण पूरी तरह से व्यक्ति के पारिवारिक मूल्यों और उसके आस पास के वातावरण पर निर्भर करता है। अपने बच्चों के सामने ईमानदार व्यवहार और चरित्र दिखाने वाले माता-पिता का उनके  बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ता  है।

इसलिए घर और विद्यालय एक बच्चे के लिए उसके बढ़ते समय से ईमानदारी विकसित करने के लिए सबसे अच्छी जगह हैं। ईमानदारी को व्यावहारिक रूप से भी विकसित किया जा सकता है, जिसके लिए उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन, धैर्य और समर्पण की आवश्यकता होती है।

आधुनिक समय में ईमानदारी एक आवश्यक आवश्यकता है। यह सबसे अच्छी आदतों में से एक है जो किसी व्यक्ति को प्रोत्साहित करती है और उसके जीवन में किसी भी कठिन परिस्थिति को हल करने और संभालने के लिए पर्याप्त सक्षम बनाती है। ईमानदारी जीवन में किसी भी बाधाओं का सामना करने और लड़ने की हमारी इच्छा शक्ति को मजबूत करने में उत्प्रेरक का काम करती है।

आदर, जिसे सम्मान भी कहा जाता है, एक सकारात्मक भावना या क्रिया है जिसे किसी महत्वपूर्ण चीज के प्रति दिखाया जाता है। यह अच्छे या मूल्यवान गुणों के लिए प्रशंसा की भावना व्यक्त करता है और यह उनकी आवश्यकताओं या भावनाओं के लिए देखभाल, चिंता या विचार का प्रदर्शन करके किसी को सम्मानित करने की प्रक्रिया भी है।

कुछ लोग दूसरों की सहायता करके या महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका निभाकर व्यक्तियों का सम्मान अर्जित कर सकते हैं। "सुप्रभात," कहना केवल विनम्र नहीं है। बल्कि यह एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति के प्रति एक सम्मान की भावना है।
अतः सबसे पहले अपना फिर अपने माता-पिता, मातृ-भूमि, अपने आस-पास की चीजों का और उस जगह का सम्मान करें जहाँ पर आप रहते हैं।
   Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Monday, March 9, 2020

खेल: कुसुम डांगी


खेल का हर मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। हर मनुष्य के लिए अच्छे स्वास्थ्य का होना आवश्यक है। एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है।

अध्ययन के साथ-साथ व्यायाम भी मनुष्य के सर्वांगिण विकास में सहायक है व्यायाम से मनुष्य तन और मन दोनों रूप से स्वस्थ होता है। खेलों से उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता हैं खेलों से उनमें धैर्य, सहनशीलता का विकास होता हैं तथा इससे हमारे अन्दर आज्ञाकारिता और अनुशासन जैसे गुणों का विकास होता हैं

खेल एक अच्छा मनोरंजन है खे खेलने वालों का भी मनोरंजन होता है और देखने वालों का भी। हमारा जीवन भी खेल जैसा ही है जैसे जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं वैसे ही खेल में भी हार-जीत होती है और हम इससे बहुत कुछ सीखते हैं

खेलों के द्वारा इंसान एक दूसरे के साथ सहयोग से रहता है। इससे हम अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों से कैसे लडा जाता है वो सीखते हैं खेल एक व्यायाम है जो हमारे शारीरिक अंगों के साथ-साथ मानसिक विकास भी करता है। इससे दिमाग का संतुलन बना रहता है। प्रत्येक मनुष्य को नियमित रूप खेलना चाहिए जिससे मस्तिष्क तनाव रहित रहता है तथा शरीर में सुस्ती नहीं रहती है।

इसलिए हम कह सकते हैं कि खेलों का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इससे हमारे अन्दर आत्मविश्वास बढ़ता है एवं प्रगतिशील बनने के गुण उत्पन्न होते हैं
Kusum Dangi
The Fabindia School, Bali <kdi4fab@gmail.com>

Blog Archive