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Sunday, June 7, 2020

विनम्रता और प्रशंसा: उषा पंवार


विनम्रता एक दूसरे के प्रति प्रेम और विश्वास की भावना में वृद्धि करके एक दूसरे के प्रति विश्वास की भावना को जागृत करना विनम्रता महानता की ओर ले जाती है । विनम्रता मनुष्य का आभूषण है। यह मनुष्य का सर्वोत्तम गुण है क्योंकि व्यक्ति में अगर विनम्रता नहीं हो तो उसके अन्य गुण व्यर्थ है । विनम्रता व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में सहायक है अतः विनम्र होना सबसे बड़ी खूबसूरती है । विनम्र आदमी को डिग्री की जरूरत नहीं होती, विनम्र व्यक्ति में घमंड, अहंकार, दिखावे का कोई भाव नहीं होता।

विनम्रता ही सही मायने में हमें बड़ा बनाती है। विनम्रता व्यक्तित्व में निखार लाती हैं और सफलता का कारण भी बनती है। विनम्रता मनुष्य को बड़ा  ईमानदार बनाती है। विनम्र व्यक्ति के सामने कठोर हृदय वाले व्यक्ति को भी झुकना पड़ता है। जो विनम्र होते हैं हर जगह सम्मान पाते हैं, कोई भी व्यक्ति बिना विनम्र बने धन दौलत तो पा सकता है परंतु लोगों के दिलों में जगह नहीं पा सकता।

जिस प्रकार सूखी मिट्टी पर जल डालकर गीली मिट्टी को मनचाहा आकार दे सकते हैं उसी प्रकार कठोर से कठोर व्यक्ति से विनम्रता पूर्वक व्यवहार कर मनचाहा परिणाम पा सकते हैं विनम्रता से वह कार्य भी बन जाते हैं जो कठोरता से नहीं बन पाते। व्यक्ति को व्यवहार का मिठास नम्रता से मिलता है। यदि विनम्रता का महत्व ना होता तो कृपया, धन्यवाद आदि शब्दों का महत्व भी नहीं होता इन शब्दों में ही व्यक्ति की नम्रता झलकती है।
                          "पोथी पढि पढि जग मुआ पंडित भया कोय,
                            ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।"
संत कबीर दास जी कहते हैं कि बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़ने का कोई लाभ नहीं है जब तक कि आप में विनम्रता नहीं आती और आप लोगों से प्रेम से बात नहीं कर पाते कबीर जी कहते हैं कि जिसे प्रेम के ढाई अक्षर का ज्ञान प्राप्त हो गया वही इस संसार का असली विद्वान है।

ऊंचा उठने के लिए पंखों की जरूरत पक्षियों को पड़ती है,
इंसान जो जितना झुकता है उतना ही ऊपर उठ जाता है।

जो विनम्र होते हैं वही प्रशंसा के पात्र होते हैं। जैसे चांदी की परख घिस कर, सोने की परख भट्टी में होती है वैसे ही मनुष्य की परख लोगों के द्वारा की गई तारीफ से होती है। प्रशंसा व्यक्ति के गुणों का बखान कार्यों की तारीफ करना। प्रशंसा से आत्मविश्वास बढ़ता है।

प्रशंसा करने के कई प्रकार होते हैं जैसे सामान्य प्रशंसा, अधिक प्रशंसा, वास्तविक प्रशंसा, झूठी प्रशंसा। सही प्रशंसा व्यक्ति का हौसला बढ़ाती है, अधिक प्रशंसा व्यक्ति को लापरवाह बनाती है।

सच्चे लोग कभी प्रशंसा के मोहताज नहीं होते क्योंकि असली फूलों को कभी इत्र लगाने की जरूरत नहीं होती। हम किसी बच्चे को जबरन कक्षा कार्य या कोई भी कार्य करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। उनसे अच्छा कार्य लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहन करना उनके अच्छे कामों की प्रशंसा करना जरूरी है। हमें उनके अच्छे कामों के लिए पीठ थपथपाना, और अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali

Wednesday, May 6, 2020

ईमानदारी और सम्मान: सुरेश सिंह नेगी


मानव जीवन में ईमानदारी का होना अति आवश्यक हैं।  अक्सर यह देखा गया हैं, कि जो इन्सान ईमानदार  होता है। वह अपने कर्तव्यों के लिए भी उतना ही जागरूक होता हैं जितना कि वह अपने अधिकारों को लेकर होता है। 

ईमानदारी के चरित्र का निर्माण पूरी तरह से व्यक्ति के पारिवारिक मूल्यों और उसके आस पास के वातावरण पर निर्भर करता है। अपने बच्चों के सामने ईमानदार व्यवहार और चरित्र दिखाने वाले माता-पिता का उनके  बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ता  है।

इसलिए घर और विद्यालय एक बच्चे के लिए उसके बढ़ते समय से ईमानदारी विकसित करने के लिए सबसे अच्छी जगह हैं। ईमानदारी को व्यावहारिक रूप से भी विकसित किया जा सकता है, जिसके लिए उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन, धैर्य और समर्पण की आवश्यकता होती है।

आधुनिक समय में ईमानदारी एक आवश्यक आवश्यकता है। यह सबसे अच्छी आदतों में से एक है जो किसी व्यक्ति को प्रोत्साहित करती है और उसके जीवन में किसी भी कठिन परिस्थिति को हल करने और संभालने के लिए पर्याप्त सक्षम बनाती है। ईमानदारी जीवन में किसी भी बाधाओं का सामना करने और लड़ने की हमारी इच्छा शक्ति को मजबूत करने में उत्प्रेरक का काम करती है।

आदर, जिसे सम्मान भी कहा जाता है, एक सकारात्मक भावना या क्रिया है जिसे किसी महत्वपूर्ण चीज के प्रति दिखाया जाता है। यह अच्छे या मूल्यवान गुणों के लिए प्रशंसा की भावना व्यक्त करता है और यह उनकी आवश्यकताओं या भावनाओं के लिए देखभाल, चिंता या विचार का प्रदर्शन करके किसी को सम्मानित करने की प्रक्रिया भी है।

कुछ लोग दूसरों की सहायता करके या महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका निभाकर व्यक्तियों का सम्मान अर्जित कर सकते हैं। "सुप्रभात," कहना केवल विनम्र नहीं है। बल्कि यह एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति के प्रति एक सम्मान की भावना है।
अतः सबसे पहले अपना फिर अपने माता-पिता, मातृ-भूमि, अपने आस-पास की चीजों का और उस जगह का सम्मान करें जहाँ पर आप रहते हैं।
   Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Monday, March 16, 2020

जिज्ञासा का महत्त्व : आयशा टॉक


किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने और उसे बेहतर करने की जिज्ञासा महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि हम सवाल पूछते हैं, दूसरों से सीखते हैं, और अपने कार्य को बेहतर तरीके से करने के उपाय खोजते हैं। जिज्ञासु लोगों का दिमाग सक्रिय होता हैं। जिज्ञासा हर उम्र में सीखने की प्रक्रिया को दर्शाती है। जिज्ञासु लोग ज्यादा खुश रहते हैं ।

जिज्ञासा हमारे अंदर सहानुभूति का विस्तार कर सकती है। जब हम दूसरों के बारे में जानने के लिए उत्सुक होते हैं और अपने सामान्य सामाजिक दायरे के बाहर के लोगों से बात करते हैं, तो हम अपने जीवन से अलग जीवन के अनुभव और दुनिया के साथ को समझने में सक्षम हो जाते हैं। 

खेल के माध्यम से बच्चे सामाजिक और संज्ञानात्मक कौशल विकसित कर सकते हैं, भावनात्मक रूप से परिपक़्व हो सकते हैं, और नए अनुभवों एवं वातावरण में संलग्न होने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास प्राप्त कर सकते हैं। छोटे बच्चों में जिज्ञासा का पोषण बहुत आवश्यक होता है। उन बच्चों में जिज्ञासा उत्पन्न करने के लिए सर्वप्रथम उन्हें चित्र का ज्ञान करवाया जाए, उनसे प्रश्न पूछे जाए। जिससे बच्चे खुल कर हमारे सामने जवाब दे पाएँ वे कुछ भी जवाब देने में संकोच करें।

इसलिए बच्चों के अनुरूप वातावरण तैयार किया जाए। अगर वे कुछ गलत जवाब भी दें, तो उन्हें एकदम से नकारना नहीं चाहिए। बल्कि उन्हें दोबारा समझाकर उनकी जिज्ञासा को बढ़ाने का प्रयत्न करें, शायद दूसरी बार में वे सही जवाब देने में सक्षम हो जाएँ हमेशा प्रोत्साहन देने का प्रयत्न किया जाना चाहिए। 
Ayasha Tak
atk4fab@gmail.com
The Fabindia School Bali

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