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Tuesday, March 30, 2021

धैर्य सफलता की कुंजी - Kusum Dangi

Courtesy: medium.com
"धैर्य  वह सवारी है जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती ना किसी के कदमों में और ना किसी की नजरों में"
 
संसार में रहते हुए अनेक कठिनाइयों तथा मुश्किल परिस्थितियों का आना   स्वाभाविक हैं। लेकिन जो इंसान अपने विवेक को धारण करते हुए धैर्य  के साथ आगे बढ़ता है वही सफलता को प्राप्त कर सकता हैं। इस संसार में अनेक प्राणी मौजूद हैं ,परन्तु मनुष्य को छोड़कर ऐसा कोई प्राणी  नहीं है जिसके पास विवेक और  सोचने की शक्ति हो सकता है I

"धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए  फल होय "
 अर्थात  एक बीज को पौधा बनने में एवं फल देने में समय लगता हैं जिसका  हम सभी को धैर्य से इंतजार करना चाहिए अर्थात हमें कर्म  करते रहना चाहिए और धैर्य से अपने परिणाम का इंतजार करना चाहिए। हमे बच्चों को भी सीखाना चाहिए कि किसी कार्य में जल्दबाजी ना करे क्योंकि इससे वो कार्य बिगडऩे की संभावना अधिक रहती हैं।और हमे अच्छे परिणाम नहीं मिल पाते हैं। इसलिए धैर्य से हम कठिन से कठिन कार्य को सरल बना सकते हैं जिससे हम सफलता को प्राप्त कर सकते हैं।

Kusum Dangi
The Fabindia School
kdi@fabindiaschools.in

Tuesday, November 24, 2020

जब जागो तभी सवेरा - Krishan Gopal

Courtesy: WordPress.com
सामान्य तौर पर ऐसा कहा जाता है कि समय का पाबंद बनो। समय के महत्व को समझो और निर्धारित समय सीमा में अपने काम को समाप्त करो। यह भी उचित है कि समय पर काम करने वाले को प्रतिष्ठा और पुरस्कार मिलता है। इसके विपरीत देर-सवेर काम पूरा करने वाले व्यक्ति को सम्मान नहीं मिल पाता। इसलिए समय का पाबंद होना बहुत जरूरी है। समय के महत्व को कोई नहीं नकार सकता और यह उचित भी है। 

समय की पाबंदी से हटकर आज कुछ अलग बात करेंगे। जब जागो तभी सवेरा, अर्थात समय रहते सचेत हो जाओ, जब भी सचेत हो जाओगे वहीं से एक नई शुरुआत करो। यदि हम समय का सदुपयोग न करते हुए किसी काम को करें और उसका वांछित परिणाम नहीं मिले तो समय की महत्ता को समझते हुए हमें समय पर काम करना सीख लेना चाहिए।

मान लीजिए कोई व्यक्ति कुछ बुरी आदतों से ग्रसित है और वह अपने दायित्वों को ठीक से नहीं निभा रहा है। परंतु एक समय ऐसा आया कि उसे ठोकर लगी और उसने सब कुछ भुला दिया, अपनी बुरी आदतों को दरकिनार कर दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रतिबद्ध हो गया। यही अवसर नए सवेरे के रूप में देखा जा सकता है। जहाँ उस व्यक्ति से किसी बात की अपेक्षा नहीं की जाती थी वही व्यक्ति एक बार पुनः अपने कर्तव्यों के निर्वहन हेतु तैयार हो जाता है तो इससे सुखद और क्या हो सकता है। 

इसके अतिरिक्त यदि अपने किसी कार्य से अपनी प्रतिष्ठा का हास स्वयं ही कर डाला हो तो उस काम को सुधारा जा सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि ग़लतियाँ  इंसान ही करता है किंतु आगे उन गलतियों को दोहराया न जाए ऐसी अपेक्षा भी इंसान से ही की जाती है। वर्तमान समय में यह बातें सभी को जाननी  परम आवश्यक है क्योंकि हमारे आसपास ऐसे व्यक्ति हो सकते हैं, जो पुनः जागने का प्रयास कर रहे हैं।  ऐसे लोगों को सहयोग की आवश्यकता होती है यदि उन्हें उनकी की हुई गलतियों का ही एहसास कराया जाएगा तो शायद वे कभी जागेंगे ही नहीं। 
दुख है न चाँद  खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर ?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण। 

इन पंक्तियों द्वारा कवि गिरिजाकुमार माथुर आगाह कर रहे हैं कि समय पर प्राप्त परिणामों का आनंद अलग ही होता है किंतु कुछ देर बाद भी परिणाम प्राप्त होता है तो दुख करने का विषय नहीं है। कुछ प्राप्त होना चाहिए था किंतु हमारी गलतियों के कारण वह हमें नहीं मिला, इसका पश्चाताप करने के बजाय आगेऐसी गलतियाँ न हो इसका निश्चय करके भविष्य वरण करना चाहिए। 

प्रत्येक क्षण अपने साथ एक नया अवसर लेकर आता है इन अवसरों को पकड़ कर सफलता के लिए प्रयास करने चाहिए। कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि अब बहुत देर हो चुकी हैं। जब चाहे तब हम अपने जीवन को मनचाही दिशा में मोड़ सकते हैं। तभी यह कहावत भी चरितार्थ होगी कि जब जागो तभी सवेरा। 
  
Krishan Gopal 
kde@fabindiaschools.in
The Fabindia School 

Monday, October 19, 2020

धैर्य - जफर खान

धैर्य हमारे जीवन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि हम अपने जीवन में धैर्य रखते हैं तो बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं, यहां तक की बड़ी से बड़ी सफलता भी हम धैर्य रखकर प्राप्त कर सकते हैं बहुत सारे लोगों ने यह साबित किया है कि धैर्य रखकर हम अपने सारे सपनों को भी पूरा कर सकते हैं हम कोई कार्य शुरू करते हैं उसमें हमको बार-बार असफलता मिलती है तो हम उस कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं यानी हम  धैर्य नहीं रखते हैं तो हमको उसका कोई परिणाम नहीं मिलता है | 

लेकिन यदि हम बार-बार अपने कार्य को करते रहते हैं, तो निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है यदि हमारे पास कार्य करने का सही तरीका और हमने लगातार प्रयास किया है तो हमें सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता है | जिंदगी में हमें हर किसी की जरूरत पड़ती है साथ में धैर्य की भी आवश्यकता पड़ती है क्योंकि किसी भी कार्य में सफलता हमेशा समय से पहले नहीं मिलती है | यदि हम बिल्कुल भी धैर्य नहीं रखेंगे और समय का इंतजार बिल्कुल भी नहीं करेंगे तो हम जीवन में पीछे रह जाएंगे | हमें अपने जीवन में यह सोचने की जरूरत है कि क्या  हम वह कार्य सही दिशा में कर रहे हैं, सही तरह से कर रहे हैं तब हमको सफलता जरूर मिलेगी धैर्य के बिना जीवन में किसी बड़े कार्य में सफलता नहीं मिल सकती  है | 

हम कोई बिजनेस शुरू करते हैं और यदि हम उस में तुरंत ही सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो यह संभव नहीं है | हमको उस बिजनेस को समझने की जरूरत है, उस बिजनेस के हर पहलू के बारे में समझ कर यदि हम बिजनेस को करेंगे तो हमको सफलता मिलेगी इसके लिए हम को कुछ समय तो जरूर ही देना पड़ेगा इसका मतलब है हमको धैर्य जरूर रखना पड़ेगा | धैर्य के बगैर कुछ भी बड़ा हम अपने जीवन में नहीं कर पाएंगे | मानव जाति में  धैर्य की बहुत आवश्यकता होती हैं इसलिए सभीी को धैर्य रखकर कार्य करना चाहिए  जिससे हमारा हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम अच्छा कार्य कर सकते है|

 जफर खान, The Fabindia School <zkn@fabindiaschools.in>


Wednesday, July 29, 2020

परवाह और समझदारी: आयशा टॉक


परवाह का अर्थ है- किसी की सुविधा का ख्याल रखना, किसी की चिंता करना । उदाहरण के लिए एक माँ दुनिया में सबसे ज्यादा परवाह अपने बच्चों की करती है। वह किसी भी हालत में उन्हें दुखी और परेशान नहीं देख सकती है। ठीक इसी तरह एक अध्यापक भी अपने विद्यार्थियों के लिए बहुत ही चिंतित रहते है। उनकी बहुत परवाह करते हैं। उनको हमेशा यही चिंता रहती है, कि जो भी सिखाया जाये, वो सारे बच्चों को आना चाहिए।

इसी प्रकार विद्यार्थियों को भी अपने साथ में पढ़ने वाले अन्य विद्यार्थियों की चिंता करनी चाहिए उनको सहयोग देना चाहिए। बच्चों को बचपन से ही कोमल हृदय वाला बनाना चाहिए। उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि जो व्यक्ति हमारी परवाह करता है, हमें भी उनकी परवाह करनी चाहिए। हमें कोई भी ऐसी बात या ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को कष्ट का अनुभव हो। यह बातें बच्चों को विद्यालय और घर दोनों ही जगहों पर सिखाई जा सकती है। 

समझदारी का अर्थ है- दूरदर्शी, विवेकशीलता का अपनाया जाना। आमतौर पर लोग तात्कालिक लाभ को ही सब-कुछ मान लेते हैं और उसके लिए बुरी बातों को भी अपना लेते हैं। बल्कि जो दूरदर्शी व्यक्ति होंगे वो बहुत ही समझदारी से सोच-समझ कर कोई भी निर्णय लेते हैं। कभी भी बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए। इसके परिणाम अच्छे नहीं होते हैं।

जो समझदार व्यक्ति होगा वह खुद का स्वार्थ कभी नहीं देखता है। बल्कि उसका हमेशा यहीं प्रयास रहता है कि मेरी वजह से किसी को किसी प्रकार की कोई हानि न उठानी पड़े। समझदार व्यक्ति कभी भी बुरी बातों को नहीं अपनाते हैं और ना ही किसी बुरे कार्य में नासमझ व्यक्ति की कोई मदद करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि वह कोई व्यक्ति अगर किसी गलत राह पर जा रहा है तो उसे समझा कर गलत राह पर जाने से रोकने का प्रयत्न  करें। समझदार व्यक्ति हमेशा अपनी समझदारी के बल पर ही जीतता है। वह हर परिस्थिति को अपनी समझदारी से हल कर लेते हैं। 
Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali

सावधानी और समझ: उषा पंवार


शिक्षक की हर कोशिश बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करती है इसलिए उनको तात्कालिक परिणामों की परवाह किए बगैर पूरे मन से बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने की प्रक्रिया जारी रखना चाहिए, कभी-कभी बच्चों में परिणाम आने में समय लगता है इसका अर्थ यह नहीं कि हमारी कोशिशों की कोई उपयोगिता नहीं है।

गुरू ही ब्रह्मा, गुरू ही विष्णु, गुरू ही शंकर” ऐसा इसलिए है क्योंकि एक गुरू ही अपने शिष्य को व्यवहारिक जीवन से रूबरू कराता है। एक शिक्षक और छात्र का रिश्ता उन रिश्तों में से एक होता है जिसे हम जिंदगी भर भूल नहीं सकते हैं। बचपन से बड़े होने तक शिक्षक हमें कई बातों का अनुभव कराते है। हमें जीवन में आगे बढ़ने और सफलता पाने का रास्ता भी दिखाते है।

शिक्षक को समाज की आधारशिला माना गया है। शिक्षक व शिक्षार्थियों को विनम्र होना चाहिए। विनम्रता फूल में महकने वाली सुगंध की तरह एक मानवीय गुण है, वह गुण यदि एक स्थान पर प्रकट होगा तो दूसरे स्थान पर भी ठीक उसी तरह प्रगट होगा। जिस छात्र में गुरु जनों के प्रति भावना होती हैं उसकी प्रतिभा अपने आप परिष्कृत होती रहती है और जल्दी से ज्ञानार्जन करता रहता है। गुरू के प्रति श्रद्धा रखने वाला छात्र शिक्षक की हर बात बड़े ध्यान से सुनता है और विश्वास पूर्वक ग्रहण करता है। वह अपना हितैषी समझ कर गुरू के दिए निर्देशों का आस्था पूर्वक पालन करता है जिससे उसमें चारित्रिक बल का विकास होता है। 

छात्रों को चार दिवारी कक्ष में पढ़ाने के साथ-साथ कभी-कभी बाहर पेड़ के नीचे खुली हवा में पढ़ाना चाहिए, पढ़ाने का अर्थ सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि बाहरी ज्ञान भी देना आवश्यक है। शिक्षकों को समझ होनी चाहिए कि प्रत्येक विद्यार्थी की सोचने समझने की शक्ति अलग-अलग होती है और जरूरी नहीं कि हमारा समझाया गया सबको समझ आए। अलग-अलग विधि से उदाहरण देकर समझाना चाहिए। पढ़ाने के लिए उपकरण हो क्योंकि छात्र सुनने से ज्यादा देखकर वे समझ सकते हैं।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali

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