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Thursday, October 22, 2020

ग्लोबल वार्मिग - Kusum Dangi

पृथ्वी  की  सतह  पर  अधिक  तापमान  का बढ़ना  ग्लोबल वार्मिंग कहलाता  हैं   अर्थात  पृथ्वी  पर  लगातार  गर्मी  का होना  जलवायु  परिवर्तन  के  लिए  सबसे  अधिक  जिम्मेदार  ग्रीन  हाउस हैं। मानवीय गतिविधियों  के  कारण  धीरे-धीरे  तापमान  बढ़  रहा हैं  जो  हमारे  हिम  ग्लेशियरों  को  तेजी  से  पिघला  रहा  हैं, यह  पृथ्वी  के साथ-साथ  हमारे जीवन  के  लिए  भी  बहुत  हानिकारक  हैं। 

ग्लोबल वार्मिग  होने  के  अनेक  कारण  हैं जैसे  पेडों  की  अधिक  कटाई  ,ज्वालामुखी  विस्फोट एवं  आटोमोबाइल और  जीवाश्म  ईंधन  के  अत्यधिक  उपयोग  से कार्बनडाइआक्साइड का  स्तर  बढ़  रहा  हैं  इसी  तरह  मीथेन  भी  ग्लोबल  के लिए सबसे  अधिक  जिम्मेदार हैं। 

प्रत्येक  इंसान  का  कर्तव्य हैं  कि  इसको रोकने  के  लिए  कदम उठाए  इसके  लिए  सबसे  पहला  कदम  हैं हर  इंसान को अधिक  से अधिक  पेड़  लगाए  तथा  रीसाइक्लिंग  को  भी  प्रोत्साहित  किया  जाना  चाहिए।

Kusum Dangi, The Fabindia School <kdi@fabindiaschools.in>


Wednesday, July 29, 2020

सावधानी और समझ: उषा पंवार


शिक्षक की हर कोशिश बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करती है इसलिए उनको तात्कालिक परिणामों की परवाह किए बगैर पूरे मन से बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने की प्रक्रिया जारी रखना चाहिए, कभी-कभी बच्चों में परिणाम आने में समय लगता है इसका अर्थ यह नहीं कि हमारी कोशिशों की कोई उपयोगिता नहीं है।

गुरू ही ब्रह्मा, गुरू ही विष्णु, गुरू ही शंकर” ऐसा इसलिए है क्योंकि एक गुरू ही अपने शिष्य को व्यवहारिक जीवन से रूबरू कराता है। एक शिक्षक और छात्र का रिश्ता उन रिश्तों में से एक होता है जिसे हम जिंदगी भर भूल नहीं सकते हैं। बचपन से बड़े होने तक शिक्षक हमें कई बातों का अनुभव कराते है। हमें जीवन में आगे बढ़ने और सफलता पाने का रास्ता भी दिखाते है।

शिक्षक को समाज की आधारशिला माना गया है। शिक्षक व शिक्षार्थियों को विनम्र होना चाहिए। विनम्रता फूल में महकने वाली सुगंध की तरह एक मानवीय गुण है, वह गुण यदि एक स्थान पर प्रकट होगा तो दूसरे स्थान पर भी ठीक उसी तरह प्रगट होगा। जिस छात्र में गुरु जनों के प्रति भावना होती हैं उसकी प्रतिभा अपने आप परिष्कृत होती रहती है और जल्दी से ज्ञानार्जन करता रहता है। गुरू के प्रति श्रद्धा रखने वाला छात्र शिक्षक की हर बात बड़े ध्यान से सुनता है और विश्वास पूर्वक ग्रहण करता है। वह अपना हितैषी समझ कर गुरू के दिए निर्देशों का आस्था पूर्वक पालन करता है जिससे उसमें चारित्रिक बल का विकास होता है। 

छात्रों को चार दिवारी कक्ष में पढ़ाने के साथ-साथ कभी-कभी बाहर पेड़ के नीचे खुली हवा में पढ़ाना चाहिए, पढ़ाने का अर्थ सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि बाहरी ज्ञान भी देना आवश्यक है। शिक्षकों को समझ होनी चाहिए कि प्रत्येक विद्यार्थी की सोचने समझने की शक्ति अलग-अलग होती है और जरूरी नहीं कि हमारा समझाया गया सबको समझ आए। अलग-अलग विधि से उदाहरण देकर समझाना चाहिए। पढ़ाने के लिए उपकरण हो क्योंकि छात्र सुनने से ज्यादा देखकर वे समझ सकते हैं।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali

Wednesday, May 13, 2020

आदर - Rajeshwari Rathore

आदर, यह एक बहुत ही मूलभूत मानवीय गुण हैं लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह गुण जब तक नहीं सीखा जा सकता है जब तक हम दूसरों का आदर करना नहीं सीखते हैं। यह गुण किसी भी व्यक्ति के चरित्र निर्माण में एक मजबूत स्तंभ का कार्य करता है जैसा कि एक प्रसिद्ध कहावत है " आदर दीजिए आदर पाइए " अर्थात यह एक परस्पर अंतर क्रिया है और एक तरफा नहीं है।

हम किसी से अपने धनबल बाहुबल या अन्य किसी प्रभाव से अपना दिखावटी आदर करवा सकते हैं परंतु सच्चा आदर प्राप्त करने के लिए हमें छोटे बड़े ऊंच-नीच पद को दृष्टिगत नहीं रखते हुए मानव मात्र का सम्मान करना चाहिए। हम किसी का निस्वार्थ भाव से सम्मान करते हैं तो प्रत्युत्तर में हमें भी आंतरिक  ह्रदय से सम्मान प्राप्त होता है यही मानवीय गुण की सच्ची व्याख्या है।

Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

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