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Wednesday, May 13, 2020

आदर - Rajeshwari Rathore

आदर, यह एक बहुत ही मूलभूत मानवीय गुण हैं लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह गुण जब तक नहीं सीखा जा सकता है जब तक हम दूसरों का आदर करना नहीं सीखते हैं। यह गुण किसी भी व्यक्ति के चरित्र निर्माण में एक मजबूत स्तंभ का कार्य करता है जैसा कि एक प्रसिद्ध कहावत है " आदर दीजिए आदर पाइए " अर्थात यह एक परस्पर अंतर क्रिया है और एक तरफा नहीं है।

हम किसी से अपने धनबल बाहुबल या अन्य किसी प्रभाव से अपना दिखावटी आदर करवा सकते हैं परंतु सच्चा आदर प्राप्त करने के लिए हमें छोटे बड़े ऊंच-नीच पद को दृष्टिगत नहीं रखते हुए मानव मात्र का सम्मान करना चाहिए। हम किसी का निस्वार्थ भाव से सम्मान करते हैं तो प्रत्युत्तर में हमें भी आंतरिक  ह्रदय से सम्मान प्राप्त होता है यही मानवीय गुण की सच्ची व्याख्या है।

Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

Tuesday, March 3, 2020

सम्मान और ईमानदारी - Transformers SHS

सम्मान या आदर के सम्बन्ध में यदि हम विचार करें तो हम पाते हैं कि यह भाव अथवा भावना मानव मन के अंदर अन्तर्निहित होता है | कुछ बच्चों में दूसरे व्यक्ति या अपनों से बड़े के लिए सम्मान व आदर भाव खुद खुद परिलक्षित होते हैं | यह भाव उनमें जन्मजात नहीं होती बल्कि उनके संस्कारसमाज, परिवेश एवं संगत का असर होता है | इसका अर्थ यह बिलकुल ही नहीं है कि इसके विपरीत परिस्थिति में पलने वाले बच्चे बिलकुल असभ्य ही होते हैं |

मुझे इस सन्दर्भ में एक कहानी याद आती हैं | बात सन 1997-98 की हैंउस समय में अपनी घर दार्जीलिंग मोड स्थित पैतृक निवास स्थान पर ही ट्यूशन पढ़ाया करता था एवं स्वयं एक प्राइवेट स्कूल का
संचालन किया करता था |

उस वक्त मैं लेखाशास्त्र और हिन्दी एबं वाणिज्य बिषय से वर्ग एकादस एवं बी कॉम के छात्र-छात्राओं को पढ़ाया करता थाउन दिनों जाने कितने छात्र-छात्रायें पढ़ा करते थे | यदि सत्य कहूँ तो समय के ढलते क्रम में वे सब
बातें एवं घटनाएं सिर्फ यादें बनकर रह गईमैं भी समय के अंतराल के साथ भूलता चला गयामैं बर्ष 2005 मैं सेक्रेड हार्ट स्कूल कर्सियांग और अब सिलीगुड़ी में केवल हिन्दी पढ़ाने में लीन हो गयापिछली सारी यादेंसिर्फ यादें ही रहे गईजो धीरे-धीरे मिटती चली गईमुझे उन दिनों की घटनाओं मे से एक लड़के की छवि याद आती है जो बर्ष 1997 से 2000 तक ही मेरे पास अध्ययन करने आया करता थावह स्वाभाव से बड़ा उद्दण्ड, बेपरवाह एवं कर्तव्यहीन होने के साथ -साथ बड़ा बद्तमीज़ था और मैं उसके व्यवहार से उन दिनों उदाशीन रहा करता था |

समय समय पर मैं अपने घर सिलीगुड़ी अक्सर आया जाया करता थाएक दिन शाम के समय लगभग 4:30 बजे सेठ श्रीलाल मार्केट के समीप मैं किसी कार्यवश खड़ा था, कि अचानक एक युवक और एक युवती पीछे सेसरकहता हुआ आया और मेरे चरण छूने के पश्च्यात अपनी पत्नी और बच्चे से भी चरण छूकर प्रणाम करने को कहा | इसके उपरांत मुझसे आशीर्वाद देनेको कहामैं भौचक्का सा रह गया | मुझे उस युवक कि छवि बिलकुल याद नहीं थीमुझे आश्चर्य चकित होता देख उसे लगा कि मैं पहचान नहीं रहा हूँफिर उसने बड़ी सभ्यता और शालीनता के साथ अपना
और अपनी पत्नी और बच्चे का परिचय करवाया और कहासर आज से लगभग 22-23 वर्ष पहले मैं आपके घर लेखाशास्त्र पढ़ने आया करता थाऔर फिर मेरे मानस पटल पर उसके चेहरे की धुंधली सी छवि मानस पटल पर उभरने लगीमै सोचने लगा यह वही गोपाल है जो उद्दण्ड, लापरवाह, बेपरवाह और शरारती के साथ बद्तमीज भी थाकितना.. बदल.. गयायदि सच कहूँ तो मै इस घटना के बाद सोचने के लिए विवश हूँ कि कैसे लोग कहते है - कि आज कल के बच्चे बड़ो का सम्मान नहीं करतेसमय के सब कुछ बदलता है बच्चों का व्यवहार भी समय के साथ परिवर्तन होता हैजो सकारात्मक और समाजोपयोगी..शाबित होता है...|
- Sangharsh Chettri <sangharsh.chettri88@gmail.com> for Transformers at Sacred Heart School, Siliguri

Friday, August 24, 2018

तरूण मिश्रा : आदर करना

अधिकांशतः लोग सम्मान  बारे में सुनते हैं परन्तु इसका वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाते। सम्मान किसी व्यक्ति के मूल्य या उत्कृष्टता के लिए भावना हैं। जीवन में ऐसी बहुत सारी चीजें है जिनको सम्मान देना आवश्यक है। अपने लिए सम्मान, दूसरों के लिए सम्मान और संपत्ति के लिए सम्मान आदि। सम्मान लोगो को हर जगह सिखाया जाता है। और इसे अपने धर्मों में भी सिखाया जाता है। सम्मान एक ऐसा पहलू है जिसका स्थान महत्वपूर्ण है। 

अपने लिए सम्मान एक व्यक्ति जीवन में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके जीवन का संतुलन कारक हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति में अपने लिए कोई सम्मान नहीं तो इसकी सबसे अधिक संभावना अवसाद में चली जाएगी। अपने आत्मसम्मान के लिए खुद का सम्मान करना भी महत्वपूर्ण है। उच्च आत्मसम्मान होने से हमारी दूसरों के प्रति सम्मान की भावना भी प्रगाढ़ होगी।  हमारे बुजुर्गों  सम्मान होना आवश्यक है क्योंकि वे आपसे ज्यादा  जानते हैं और वे जानते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं। अपने साथियों सम्मान करना भी महत्त्वपूर्ण है। अपने साथियों का सम्मान करने का मतलब है कि उनसे मजाक नहीं करना, लड़ना नहीं और जब वे किसी चीज से परेशान होते हैं तो उनकी मदद करना। 

अंततः संपत्ति  सम्मान करने का मतलब कुछ ऐसा नहीं हैं जो आपका नहीं है। संपत्ति का सम्मान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते है तो यह एक अपराध माना जा सकता है। लेकिन संपत्ति का सम्मान आपके सामान्य ज्ञान पर निर्भर है। एक जापानी संस्कृति है, जो हमें पर्यावरण का सम्मान करने की सीख देती है क्योंकि उनका मानना है कि पृथ्वी पवित्र है जैसे- पेड़, घास और जानवर।  आप खुद  पूछ सकते है कि 'संपत्ति के सम्बन्ध में इसका क्या सम्बन्ध है ?' पर्यावरण हमारे लिए अनमोल संपत्ति ही तो है।  आपके द्वारा उन चीजों को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए जो आपकी नहीं है क्योंकि कोई भी वस्तु किसी किसी प्रकार से हमसे सम्बन्ध रखती है।    
Tarun Mishra , The Fabindia School, Bali 
Tma4fab@gmail.com

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