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Monday, September 21, 2020

उद्देश्य का महत्त्व - Ayasha Tak

एक सामान्य शब्द में उद्देश्य या लक्ष्य एक उद्देश्य है। एक प्रचलित कहावत है कि बिना उद्देश्य वाला मनुष्य बिना पतवार के जहाज के समान होता है। इसका मतलब है कि बिना पतवार का जहाज खतरे का सामना करता है। इसी प्रकार बिना लक्ष्य आधारित किए कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाता है।  वह  जीवन के रास्ते में ठोकरें खाता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति का जीवन में कुछ न कुछ उद्देश्य अवश्य होना चाहिए, जिससे जीवन में कुछ करने का सही लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। 

बचपन में एक व्यक्ति एक प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री या फिल्म स्टार या फिर पुलिस अधिकारी बनना चाहता है। उद्देश्य का अर्थ है प्रयास करना ,या आकांक्षा करना। प्रत्येक उद्देश्य आमतौर पर एक लक्ष्य की स्थापना की घोषणा के साथ शुरू होता है , फिर इसे एक निर्धारित समय रेखा पर छोटे - छोटे टुकड़ों में तोड़ना होता है। इस प्रकार इसे प्राप्त करने के लिए  समय - समय पर कई बाधाओं एवं असफलताओं का सामना करना पड़ता है। उद्देश्य जीवन में कुछ हासिल करने के मज़बूत इरादे को दर्शाता है।हर किसी के जीवन में एक उद्देश्य अवश्य होना चाहिए। 

बिना उद्देश्य के मनुष्य एक खिलौने के समान होता है। वह लक्ष्यहीन रूप से बहता रहता है और अपने जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है। तो , एक आदमी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। अपने लक्ष्य को पाने के लिए उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अगर दृढ़ निश्चय हो तो सफलता अवश्य मिलती है। 

इस प्रकार यह तथ्य है कि एक लक्ष्य निर्धारित करना और उसे प्राप्त करने के लिए अभिनय करना एक सफल जीवन के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। सभी को इसके लिए काम शुरू करना चाहिए । सक्रिय दृष्टिकोण के साथ कार्य योजना का समय पर क्रियान्वयन सफलता की कुंजी है।

Ayasha Tak 
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Wednesday, May 13, 2020

आदर - Rajeshwari Rathore

आदर, यह एक बहुत ही मूलभूत मानवीय गुण हैं लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह गुण जब तक नहीं सीखा जा सकता है जब तक हम दूसरों का आदर करना नहीं सीखते हैं। यह गुण किसी भी व्यक्ति के चरित्र निर्माण में एक मजबूत स्तंभ का कार्य करता है जैसा कि एक प्रसिद्ध कहावत है " आदर दीजिए आदर पाइए " अर्थात यह एक परस्पर अंतर क्रिया है और एक तरफा नहीं है।

हम किसी से अपने धनबल बाहुबल या अन्य किसी प्रभाव से अपना दिखावटी आदर करवा सकते हैं परंतु सच्चा आदर प्राप्त करने के लिए हमें छोटे बड़े ऊंच-नीच पद को दृष्टिगत नहीं रखते हुए मानव मात्र का सम्मान करना चाहिए। हम किसी का निस्वार्थ भाव से सम्मान करते हैं तो प्रत्युत्तर में हमें भी आंतरिक  ह्रदय से सम्मान प्राप्त होता है यही मानवीय गुण की सच्ची व्याख्या है।

Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

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