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Friday, December 6, 2024

विनम्रता: अध्याय 1 आर्थर फुट अकादमी

Arthur Foot Academy - PLP Session 1

5th December 2024


संक्षिप्त विवरण

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीकी समस्याओं को सुधारने, YouTube चैनलों के उपयोग और स्कूल के गौरव को बढ़ावा देने वाले गीत के निर्माण के बारे में चर्चा हुई। टीम ने महात्मा गांधी, सचिन तेंदुलकर और रतन टाटा जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों के उदाहरणों का उपयोग करते हुए व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में विनम्रता और मानवता के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया। अंत में, बातचीत एक नई परियोजना शुरू करने, प्राथमिकताओं को बनाए रखने और एक आगामी कार्यक्रम या समय सीमा के साथ-साथ छोटी उम्र से ही बच्चों में विनम्रता पैदा करने के महत्व पर चर्चा के साथ समाप्त हुई।

अगले चरण

  • मनीषा को विनम्रता पर अध्याय 1 का सारांश टाइप करके व्हाट्सएप पर पोस्ट करना है। 
  • मनीषा को अध्याय 1 के लिए नोट्स और एक प्रासंगिक फोटो या ड्राइंग सहित एक पोस्टर बनाना है।
  • शिक्षकों को विनम्रता पर अध्याय पढ़ाने के लिए पठन, चिंतन और संबंध निर्माण पद्धति को लागू करना है।
  • शिक्षकों को कक्षा की सफाई और कम भाग्यशाली बच्चों के साथ बातचीत के माध्यम से छात्रों को विनम्रता का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • शिक्षकों को छात्रों को विनम्रता पर एक कहानी या व्यक्तिगत चिंतन लिखने का काम देना है।
  • मिनाक्षी को अगले सप्ताह 7वीं कक्षा के छात्रों को विनम्रता पर अध्याय पढ़ाने की तैयारी करनी है।
  • सभी शिक्षकों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में स्कूल गीत गाना सीखना और उसका अभ्यास करना है। 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग से जुड़ी समस्याएँ

इस मीटिंग में मनीषा, स्वाति, नीरज, साक्षी पाल, रीना और अन्य कई प्रतिभागी शामिल हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबंधित विभिन्न तकनीकी मुद्दों पर चर्चा करते हैं, जैसे प्रतिभागियों का नाम बदलना, ऑडियो/वीडियो को म्यूट और अनम्यूट करना और वाई-फाई कनेक्टिविटी। मनीषा अन्य प्रतिभागियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करती है। समूह प्रतिभागियों की उपस्थिति और नामों की भी पुष्टि करता है। अंत में, संदीप वीडियो को म्यूट या अनम्यूट करने और चैट में प्रतिभागियों का नाम बदलने के बारे में पूछता है।

बैंडविड्थ और स्कूल गौरव में सुधार

इस मीटिंग में बैंडविड्थ में सुधार और YouTube चैनलों के उपयोग के बारे में चर्चा हुई। टीम ने अपने स्कूल के बारे में एक गीत बनाने पर भी चर्चा की, जिसका उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच गौरव और सफलता को बढ़ावा देना था। यह गीत सरल होना चाहिए था, जिसमें स्कूल के सकारात्मक पहलुओं और साथ मिलकर सीखने और बनाने के महत्व पर ज़ोर दिया जाना चाहिए। टीम ने अच्छे मूल्यों और कौशल की आवश्यकता और सभी का स्वागत और भागीदारी के महत्व पर भी चर्चा की।

हिंदी अध्याय के माध्यम से छात्रों का मार्गदर्शन करना

प्रतिलेख में एक कक्षा की चर्चा की गई है, जहाँ शिक्षक, संदीप, एएफए शिक्षक गण को हिंदी में एक अध्याय के माध्यम से मार्गदर्शन कर रहे हैं। संदीप ने रीना से खुद को अनम्यूट करने के बाद पहला अध्याय जोर से पढ़ने के लिए कहा। शिक्षक सक्रिय भागीदारी और अध्याय के साथ चलने के महत्व पर जोर देते हैं। चर्चा पाठ की सामग्री और संरचना पर केंद्रित है, जिसमें संदीप छात्रों को निर्देश और प्रतिक्रिया प्रदान करते हैं।

 

गांधी की कहानी में विनम्रता और सम्मान को

रीना और संदीप ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए विनम्रता के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने एक ऐसी कहानी के बारे में बात की जिसमें गांधी का सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जो उनकी सीट की अनुमति से ज़्यादा जगह घेरता था, जिससे उन्हें असुविधा होती थी। इसके बावजूद, गांधी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं करने का फैसला किया। जब उस व्यक्ति को एहसास हुआ कि वह पूरी रात किसके साथ रहा, तो वह गांधी के पैरों में गिर गया और गांधी ने उसे माफ़ कर दिया, हर इंसान के प्रति सम्मान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

सफलता में विनम्रता और मानवता

बैठक में व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में विनम्रता और मानवता के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया। चर्चा प्रसिद्ध क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के उदाहरण के इर्द-गिर्द घूमती रही, जो न केवल एक अनुकरणीय खिलाड़ी हैं, बल्कि महान गुणों वाले व्यक्ति भी हैं। टीम ने एक ऐसी दुनिया में विनम्रता और मानवता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जहाँ नायक पूजा और लगातार प्रदर्शन गर्व का कारण बन सकते हैं। उन्होंने तेंदुलकर की प्रसिद्धि और सफलता के बावजूद विनम्र बने रहने की क्षमता पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे इस गुण ने उन्हें दुनिया भर में लाखों लोगों का दिल जीतने में मदद की है। टीम ने तेंदुलकर के उदाहरण से सीखने और इन गुणों को अपने जीवन में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। 

सफल व्यवसायियों की विनम्रता

बैठक में, संदीप ने रतन टाटा और डॉ. प्रताप सी रेड्डी जैसे सफल व्यवसायियों की विनम्रता पर चर्चा की, जो अपनी उपलब्धियों के बावजूद, जमीन से जुड़े और विनम्र बने रहे। लर्निंग ने डॉ. रेड्डी की विनम्रता के बारे में एक किस्सा साझा किया, जिसमें बताया कि कैसे वे हमेशा सभी का अभिवादन करने के लिए खड़े होते थे, चाहे उनकी स्थिति कुछ भी हो। बैठक में डॉ. रेड्डी के गिरने और उसके बाद चोट लगने के बाद भी अपने काम के प्रति समर्पण पर भी चर्चा की गई। लर्निंग ने विनम्रता के महत्व पर जोर दिया और दूसरों को इन उल्लेखनीय व्यक्तियों से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।

बच्चों में कम उम्र से ही विनम्रता का संचार करना

वक्ता ने अपने बेटे देवांग का उदाहरण देते हुए छोटी उम्र से ही बच्चों में विनम्रता का संचार करने के महत्व पर चर्चा की, जिसे कक्षाओं की सफाई करने और कम भाग्यशाली बच्चों के साथ बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। देवांग को मूवी हॉल में विभिन्न कर्मचारियों का अभिवादन करना और उनका धन्यवाद करना भी सिखाया गया, जिससे उसे विनम्रता की आदत विकसित करने में मदद मिली। वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि विनम्रता का मतलब केवल खुद को कमतर समझना नहीं है, बल्कि दूसरों के बारे में सोचना भी है। उन्होंने यह कहते हुए निष्कर्ष निकाला कि विनम्रता जीवन भर का काम है और अन्य गुणों के उभरने के लिए इसे जीवन में जल्दी से जल्दी पेश किया जाना चाहिए। 

नई परियोजना, घटना और सीख

नीरज एक नई परियोजना शुरू करने और प्राथमिकताओं को बनाए रखने पर चर्चा करते हैं। साक्षी पाल और रीना कुछ हफ़्ते या एक महीने में आने वाले किसी कार्यक्रम या समय सीमा के बारे में बात करते हैं। संदीप मनीषा को चिंतन और संबंध निर्माण पर एक अध्याय के लिए नोट्स टाइप करने का निर्देश देते हैं, और फ़ोटो या वीडियो शामिल करने के बारे में पूछते हैं।

संदीप ने सभी को उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया।

Tuesday, November 24, 2020

जब जागो तभी सवेरा - Krishan Gopal

Courtesy: WordPress.com
सामान्य तौर पर ऐसा कहा जाता है कि समय का पाबंद बनो। समय के महत्व को समझो और निर्धारित समय सीमा में अपने काम को समाप्त करो। यह भी उचित है कि समय पर काम करने वाले को प्रतिष्ठा और पुरस्कार मिलता है। इसके विपरीत देर-सवेर काम पूरा करने वाले व्यक्ति को सम्मान नहीं मिल पाता। इसलिए समय का पाबंद होना बहुत जरूरी है। समय के महत्व को कोई नहीं नकार सकता और यह उचित भी है। 

समय की पाबंदी से हटकर आज कुछ अलग बात करेंगे। जब जागो तभी सवेरा, अर्थात समय रहते सचेत हो जाओ, जब भी सचेत हो जाओगे वहीं से एक नई शुरुआत करो। यदि हम समय का सदुपयोग न करते हुए किसी काम को करें और उसका वांछित परिणाम नहीं मिले तो समय की महत्ता को समझते हुए हमें समय पर काम करना सीख लेना चाहिए।

मान लीजिए कोई व्यक्ति कुछ बुरी आदतों से ग्रसित है और वह अपने दायित्वों को ठीक से नहीं निभा रहा है। परंतु एक समय ऐसा आया कि उसे ठोकर लगी और उसने सब कुछ भुला दिया, अपनी बुरी आदतों को दरकिनार कर दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रतिबद्ध हो गया। यही अवसर नए सवेरे के रूप में देखा जा सकता है। जहाँ उस व्यक्ति से किसी बात की अपेक्षा नहीं की जाती थी वही व्यक्ति एक बार पुनः अपने कर्तव्यों के निर्वहन हेतु तैयार हो जाता है तो इससे सुखद और क्या हो सकता है। 

इसके अतिरिक्त यदि अपने किसी कार्य से अपनी प्रतिष्ठा का हास स्वयं ही कर डाला हो तो उस काम को सुधारा जा सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि ग़लतियाँ  इंसान ही करता है किंतु आगे उन गलतियों को दोहराया न जाए ऐसी अपेक्षा भी इंसान से ही की जाती है। वर्तमान समय में यह बातें सभी को जाननी  परम आवश्यक है क्योंकि हमारे आसपास ऐसे व्यक्ति हो सकते हैं, जो पुनः जागने का प्रयास कर रहे हैं।  ऐसे लोगों को सहयोग की आवश्यकता होती है यदि उन्हें उनकी की हुई गलतियों का ही एहसास कराया जाएगा तो शायद वे कभी जागेंगे ही नहीं। 
दुख है न चाँद  खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर ?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण। 

इन पंक्तियों द्वारा कवि गिरिजाकुमार माथुर आगाह कर रहे हैं कि समय पर प्राप्त परिणामों का आनंद अलग ही होता है किंतु कुछ देर बाद भी परिणाम प्राप्त होता है तो दुख करने का विषय नहीं है। कुछ प्राप्त होना चाहिए था किंतु हमारी गलतियों के कारण वह हमें नहीं मिला, इसका पश्चाताप करने के बजाय आगेऐसी गलतियाँ न हो इसका निश्चय करके भविष्य वरण करना चाहिए। 

प्रत्येक क्षण अपने साथ एक नया अवसर लेकर आता है इन अवसरों को पकड़ कर सफलता के लिए प्रयास करने चाहिए। कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि अब बहुत देर हो चुकी हैं। जब चाहे तब हम अपने जीवन को मनचाही दिशा में मोड़ सकते हैं। तभी यह कहावत भी चरितार्थ होगी कि जब जागो तभी सवेरा। 
  
Krishan Gopal 
kde@fabindiaschools.in
The Fabindia School 

Monday, August 3, 2020

कोरोना काल में जीने का नया अंदाज - Kusum Dangi

इस  थमे  हुए  दौर  से    हम  सब ऊब  जरूर  रहे  हैं  लेकिन  इसके साथ  ही  हमने  बहुत  कुछ  हासिल   किया है और  सीखा  हैं।  इस  समय  में हमने  घर  के  कार्यों  में  मदद  करना  सीखा  और  ज्यादा  से  ज्यादा  अपना  काम खूद करना  तथा  आस-पास  में  रहने  वाले  जरूरतमंदों  की  मदद  करना  जैसे खाना, मास्क  वितरित  करना आदि। 

आम दिनों में  काम  की व्यस्तता  के  कारण  परिवार  के सदस्य  आपस  में एक साथ  समय  नहीं बिता  पा रहे
थे  लेकिन  इस समय परिवार  के  सभी  सदस्य  ज्यादा  से ज्यादा  समय  साथ बिताकर  प्रेम  और  खुशी   से गुजार    रहे हैं  घर  के सभी   सदस्य अपने- अपने पसंद  की  भोजन  की फरमाइश करते हैं  इस समय में  जब  सभी  साथ  हैं तो एक-एक दिन  सभी  के पसंद  के व्यंजनों  को बनाकर  अलग-अलग स्वाद  बदलकर खाने  का मौका भी मिला हैं ।

 इस मुश्किल  समय  में शरीर  को   बिमारियों से   बचाने   के  लिए   सुबह और  शाम को व्यायाम तथा योगा करके शरीर को स्वस्थ तथा तंदुरुस्त बनाने का समय तथा अपने  खूद  के लिए   सोचने का समय भी मिला हैं।

इस समय में हम सबने हर चीजों को गहराई तथा बारीकी से जाना है क्योंकि पहले हर किसी के पास इतना समय नहीं था आज जब सब एक साथ है और सबसे पास समय है हर छोटी-छोटी चीजों का महत्व समझा हैI इसलिए हम सबने इस मुश्किल की घड़ी में भी बहुत कुछ पाया हैं।

Kusum Dangi
The Fabindia School
kdi@fabindiaschools.in

Monday, May 25, 2020

कर्मो का महत्व - Kusum Sharma

आज में कर्मो के महत्व के बारे में अपने विचार व्यक्त करना चाहती हूं! मनुष्य के लिए जीवन में अच्छे कर्म
करना बहुत जरूरी है क्योंकि जिस प्रकार असली फूलों को इत्र लगाने की जरूरत नहीं होती वो तो स्वयं ही महक जाया करते हैं। उसी प्रकार अच्छे लोगों को किसी प्रशंसा की जरूरत नहीं होती। वो तो अपने श्रेष्ठ कर्मों की सुगंधी से स्वयं के साथ - साथ समष्टि को महकाने का सामर्थ्य रखते हैं।

 इत्र की खुशबु तो केवल हवा की दिशा में बहती है मगर चरित्र की खुशबु वायु के विपरीत अथवा सर्वत्र बहती है। अपने अच्छे कार्यों के लिए किसी से प्रमाणपत्र की आश मत रखो, आपके अच्छे कर्म ही स्वयं में सर्वश्रेष्ठ प्रमाणपत्र भी हैं। जीवन में एक बात हमेशा याद रखना कि आपके अच्छे कार्यों को जगत में किसी ने देखा हो या नहीं मगर जगदीश ने अवश्य देखा है। उस प्रभु ने अवश्य देखा है। 

आपके चाहने से आपको कोई पुरस्कार मिले या नहीं मगर आपके अच्छे कर्मों के फलस्वरूप एक दिन उस प्रभु द्वारा आपको अवश्य पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा। ये बात भी सत्य है कि आपकी प्रशंसा तब नहीं होती जब आप चाहते हैं। अपितु तब होती है, जब आप अच्छे कर्म करते हैं। पानी पीने से प्यास स्वतः बुझती है, अन्न खाने से भूख स्वतः मिटती है और औषधि खाने से आरोग्यता की प्राप्ति स्वतः हो जाती है। इसी प्रकार अच्छे कर्म करने से जीवन में श्रेष्ठता आती है और समाज में आपका सम्मान स्वतः बढ़ जाता है। अतः सम्मानीय बनने के लिए नहीं अपितु सराहनीय करने के लिए सदा प्रयत्नशील रहें।

Kusum Sharma
The Fabindia School

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