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Monday, June 1, 2020

जिम्मेदारी और सहयोग: राजेश्वरी राठौड़


मनुष्य के जीवन में जिम्मेदारी का बहुत महत्व है। उससे भी जरूरी है जीवन में मिलने वाली जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाना अगर बचपन से ही छोटे-छोटे काम करें और उनका महत्व समझे तो वह थोड़ा बड़े होने पर अपने काम के प्रति जिम्मेदार बन जाएगा। यह जिम्मेदारी शुरू से बालक के संस्कार में आनी चाहिए।

शिक्षकों द्वारा भी छात्रों में जिम्मेदारी से कार्य करने की आदत डालनी चाहिए जिससे वह आगे चलकर जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करें जैसे- कक्षा में शिक्षक द्वारा बच्चों को काम दिया जाता है, बच्चे उसे अपनी जिम्मेदारी समझ कर पूरा करके दिखाते हैं। ऐसे ही घर में, छोटे-छोटे काम माता-पिता द्वारा बताया जाना चाहिए, जिससे कि बालक की शुरू से ही काम करने की आदत पड़ जाती हैं।

वह शुरू से ही कार्य में रुचि लेगा, तो उसमें जिम्मेदारी की भावना आएगी अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभाएगा। खुद के प्रति जिम्मेदार होगा, तब ही परिवार के प्रति जिम्मेदार होगा और अपने परिवार का पूरा ख्याल रख सकेगा। इसी तरह समाज के प्रति बालक कार्य करेगा तो जिम्मेदारी निभाएगा। इसी तरह शिक्षा के माध्यम से एक अच्छा नागरिक बन कर देश की सेवा कर सकता है। इसलिए मनुष्य को जिम्मेदारी समझकर हर कार्य को रुचि से करना चाहिए। उसे पूर्ण रूप से निभाना चाहिए। इससे आगे चलकर वह अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

सहयोग का अर्थ है मिलजुल कर कार्य करना । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसे समाज में जीने के लिए मिलजुल कर रहना सीखना चाहिए और यह भावना हम छात्रों में विद्यार्थी जीवन में ही उत्पन्न कर सकते हैं। सहयोग की भावना एक छात्र में जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न करती है, साथ ही अन्य नैतिक मूल्यों के विकास को भी प्रोत्साहन देती है।

संगठित होकर कार्य करने से छात्र-छात्राएँ अभिमान रहित और विनम्रता पूर्वक कार्य करना सीखते हैं, जो उनके विवेक को विकसित करता है। सहयोग पूर्वक कार्य करने से, विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों में रिश्ता जुड़ता है। इसी की नींव पर एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित होता है। इसलिए मिलजुल कर रहना चाहिए व कार्य करना चाहिए।   
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

Monday, May 4, 2020

हमारे जीवन मे शिक्षक की महत्वता - Usman Gani

हमारे जीवन में एक शिक्षक कितना महत्त्वपूर्ण होता है इस बात को *एलेक्जेंडर* महान के इन शब्दों से समझा जा सकता है. *एलेक्जेंडर ने कहा था* –" *मैं जीने के लिए अपने पिता का ऋणी हूँ, पर अच्छे से जीने के लिए अपने गुरु का*".....

भारत भूमि पर अनेक विभूतियों ने अपने ज्ञान से हम सभी का मार्ग दर्शन किया है. उन्ही में से एक महान विभूति शिक्षाविद्, दार्शनिक, महानवक्ता एवं आस्थावान विचारक *डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी* ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है....डॉ. राधाकृष्णन की मान्यता थी कि –" *यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाए तो समाज की अनेक बुराईयों को मिटाया जा सकता है*"

कहा जाता है कि –Teaching is a noble profession यानी शिक्षण एक महान पेशा है. और मैं ये भी कहना चाहूँगा कि यह वह माहन प्रोफेशन है जो बाकी सभी प्रोफेश्न्स की नीव है।

निश्चित ही अगर शिक्षक नहीं होते, टीचर नहीं होते, तो डॉक्टर नहीं होते, इंजिनियर नहीं होते, हर तरफ अशिक्षा और अज्ञानता का वास होता । इसमें कोई शक नहीं कि शिक्षक ही हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी हैं। वे छात्रों के व्यक्तित्व को आकार दे उन्हें देश का आदर्श नागरिक बनाते हैं। इसलिए हमारे जीवन मे शिक्षक का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है और हमे इनका आदर और सम्मान करते रहना चाहिए ।

Usman Gani
The Fabindia School

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