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Tuesday, March 30, 2021

अनुशासन — उषा पंवार

Courtesy: ecoleglobale.com
अनुशासन ही मनुष्य को श्रेष्ठता प्रदान करता हैं। 
अनुशासन से राष्ट्र की उन्नति होती हैं। 
स्वयं पर स्वयं का शासन कहलाता है अनुशासन
यह है नियमों का अनुसरण, बनता है जिससे आदर्श जीवन।
अनुशासन सुसंस्कार है, सफल जीवन का यही आधार है।
अच्छे विद्यालय ही अनुशासन के निर्माता हैं।
सुसंस्कृत परिवार में ही बालक अनुशासन पाता है,
अनुशासित विद्यार्थी बढ़ाते हैं देश का मान।
अनुशासन राष्ट्र हित में है जरूरी, 
कर्तव्यों का पालन हमारी है जिम्मेदारी,
अनुशासित रहना ही है सच्ची समझदारी।।

जीवन में सफल होना है तो अनुशासित होना आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन में तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है क्योंकि विद्यार्थी जीवन को किसी भी मनुष्य के जीवन काल की आधारशिला कह सकते है क्योंकि इस समय वह जो भी गुण अवगुण अपनाता है उसी के अनुसार उसके चरित्र निर्माण होता है। अनुशासित रहने से जीवन में एक तरह की नियम बद्धता आ जाती हैं। नियम बद्ध होकर काम करने मैं बहुत आनंद आता है। कठिन कार्य सरलता से हो जाते हैं ।विद्यालय, परिवार, समाज में भी अनुशासन का होना आवश्यक होता है। अनुशासित व्यक्ति के अंदर साहस, धैर्य जैसे गुणों का विकास होता है।

अपने जीवन को अनुशासित बनाए रखने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि अनुशासन ही सफल जीवन की पहली सीधी मानी जाती है। अनुशासन जैसे कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास करना बुरी आदतों व कार्यों से दूरी बनाना अपने कार्यों के प्रति पूरी लगन रखना यही अनुशासन है।

प्रकृति कभी अनुशासन का उल्लंघन नहीं करती जैसे सूर्य चंद्रमा हर दिन सही समय पर उदय और सही समय पर अस्त होते हैं। हम भी तो प्रकृति के ही अंग हैं तो हमें भी अनुशासन का सदैव पालन करना चाहिए। बचपन से ही बच्चों को अनुशासन का महत्व बताया जाए और उसका पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए।

धन्यवाद,
उषा पंवार
The Fabindia School 
upr@fabindiaschools.in

Monday, May 4, 2020

हमारे जीवन मे शिक्षक की महत्वता - Usman Gani

हमारे जीवन में एक शिक्षक कितना महत्त्वपूर्ण होता है इस बात को *एलेक्जेंडर* महान के इन शब्दों से समझा जा सकता है. *एलेक्जेंडर ने कहा था* –" *मैं जीने के लिए अपने पिता का ऋणी हूँ, पर अच्छे से जीने के लिए अपने गुरु का*".....

भारत भूमि पर अनेक विभूतियों ने अपने ज्ञान से हम सभी का मार्ग दर्शन किया है. उन्ही में से एक महान विभूति शिक्षाविद्, दार्शनिक, महानवक्ता एवं आस्थावान विचारक *डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी* ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है....डॉ. राधाकृष्णन की मान्यता थी कि –" *यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाए तो समाज की अनेक बुराईयों को मिटाया जा सकता है*"

कहा जाता है कि –Teaching is a noble profession यानी शिक्षण एक महान पेशा है. और मैं ये भी कहना चाहूँगा कि यह वह माहन प्रोफेशन है जो बाकी सभी प्रोफेश्न्स की नीव है।

निश्चित ही अगर शिक्षक नहीं होते, टीचर नहीं होते, तो डॉक्टर नहीं होते, इंजिनियर नहीं होते, हर तरफ अशिक्षा और अज्ञानता का वास होता । इसमें कोई शक नहीं कि शिक्षक ही हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी हैं। वे छात्रों के व्यक्तित्व को आकार दे उन्हें देश का आदर्श नागरिक बनाते हैं। इसलिए हमारे जीवन मे शिक्षक का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है और हमे इनका आदर और सम्मान करते रहना चाहिए ।

Usman Gani
The Fabindia School

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