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Tuesday, May 11, 2021

कोरोनावायरस की दूसरी लहर - राजेश्वरी राठौड़

Courtesy: http://ballarataquaticcenter.com/
भारत में कोरोना महामारी को एक साल से अधिक समय हो चुका है। भारत में कोरोना महामारी ने सभी लोगों को हिला कर रख दियाहै। जब पहली बार कोरोना महामारी आई तब 21 मार्च 2020 को संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया है। हमने सोचा यह महामारी कुछ समय रहेगी बीच में थोड़े से हालात सही  हुए है । 

सीनियर कक्षा की स्कूल  खुली सभी विभागों में थोड़ा -थोड़ा काम होने लगा और कोरोना जैसी महामारी की दूसरी लहर आ गई। जब यह महामारी पहली बार आई तब सर्दी जुकाम व बुखार के लक्षण बताए गए। इसके नियम भी बताए गए- सोशल डिस्टेंस रखो, मास्क लगाओ, हाथों को बार-बार में धोना ,सैनिटाइजर करना सभी नियमों का पालन किया गया।लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर मे सांस फूलना व दम घुटना सीधा  फेफड़ों पर असर होकर मनुष्य की मृत्यु हो जाना ।इससे लोगों को पूरी तरह डरा दिया है जन हानी बहुत हो रही है।

सरकार द्वारा चलाया गया अभियान टिकाकरण जनवरी महीने से लोगों के वैक्सिंग लगना शुरू हो गया ।टीकाकरण को 3 महीने हो गए लोग टीका लगवा रहे हैं सोशल डिस्टेंस रख रहे हैं फिर भी सावधानियां रखते हुए भी  महामारी दिन प्रतिदिन संक्रामक होती जा रही है। अतः इसका बचाव का उपाय करें घरों के भीतर मास्क पहनना शुरू करें लेकिन संक्रमण जिस तरह चल रहा है उसे देखते हुए यदि हम घर के भीतर किसी के भी पास बैठे हैं तब भी हम मास्क पहने थोड़ा सोशल डिस्टेंस रखें और खाने में स्वास्थ्य वर्धक चीजे ले। शरीर स्वस्थ है तो सब कुछ ठीक है इसलिए सभी को अपने अपने स्वास्थ्य का पूर्ण रूप से ध्यान रखना है और अपने परिवार का वह अपने परिजनों व मित्रों का भी ख्याल रखना है और नियमों का पालन पूर्ण रूप से करना है । तभी कोरोना जैसी महामारी से हम बच सकते हैं।

राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Tuesday, March 30, 2021

अनुशासन — उषा पंवार

Courtesy: ecoleglobale.com
अनुशासन ही मनुष्य को श्रेष्ठता प्रदान करता हैं। 
अनुशासन से राष्ट्र की उन्नति होती हैं। 
स्वयं पर स्वयं का शासन कहलाता है अनुशासन
यह है नियमों का अनुसरण, बनता है जिससे आदर्श जीवन।
अनुशासन सुसंस्कार है, सफल जीवन का यही आधार है।
अच्छे विद्यालय ही अनुशासन के निर्माता हैं।
सुसंस्कृत परिवार में ही बालक अनुशासन पाता है,
अनुशासित विद्यार्थी बढ़ाते हैं देश का मान।
अनुशासन राष्ट्र हित में है जरूरी, 
कर्तव्यों का पालन हमारी है जिम्मेदारी,
अनुशासित रहना ही है सच्ची समझदारी।।

जीवन में सफल होना है तो अनुशासित होना आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन में तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है क्योंकि विद्यार्थी जीवन को किसी भी मनुष्य के जीवन काल की आधारशिला कह सकते है क्योंकि इस समय वह जो भी गुण अवगुण अपनाता है उसी के अनुसार उसके चरित्र निर्माण होता है। अनुशासित रहने से जीवन में एक तरह की नियम बद्धता आ जाती हैं। नियम बद्ध होकर काम करने मैं बहुत आनंद आता है। कठिन कार्य सरलता से हो जाते हैं ।विद्यालय, परिवार, समाज में भी अनुशासन का होना आवश्यक होता है। अनुशासित व्यक्ति के अंदर साहस, धैर्य जैसे गुणों का विकास होता है।

अपने जीवन को अनुशासित बनाए रखने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि अनुशासन ही सफल जीवन की पहली सीधी मानी जाती है। अनुशासन जैसे कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास करना बुरी आदतों व कार्यों से दूरी बनाना अपने कार्यों के प्रति पूरी लगन रखना यही अनुशासन है।

प्रकृति कभी अनुशासन का उल्लंघन नहीं करती जैसे सूर्य चंद्रमा हर दिन सही समय पर उदय और सही समय पर अस्त होते हैं। हम भी तो प्रकृति के ही अंग हैं तो हमें भी अनुशासन का सदैव पालन करना चाहिए। बचपन से ही बच्चों को अनुशासन का महत्व बताया जाए और उसका पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए।

धन्यवाद,
उषा पंवार
The Fabindia School 
upr@fabindiaschools.in

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