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Monday, January 25, 2021

खुद को समय अवश्य दीजिए - राजेश्वरी राठौड़

Courtesy: www.jagruk.in
अगर आपको अपनी जिंदगी को खुशी से जीना है, तो आपको अपने लिए भी समय निकालना चाहिए। आजकल लोग पैसा और नाम कमाने की होड़ में इतना बिजी है की उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए तो दूर की बात, खुद के लिए भी समय निकाल पाना मुश्किल होता है। जब आप अपने कामों और जीवन में से बुरी तरह हताश हो जाएंगे इससे आपको खालीपन  लगने लगेगा और आप तनाव, चिंता आदि के शिकार हो जाएंगे, जिससे आप चिड़चिडे हो जाएंगे।

खुद को समय देने से होते हैं कई फायदे जब आप कोई काम खुशी से करते हैं तो उस काम में आपको जरुर सफलता मिलती हैं। जाहिर है जब आप खुद के लिए समय निकालेंगे तो ,आप दिल से खुश रहेंगे और जब किसी को अंदर से खुशी मिलती है तो उसके चेहरे पर अलग ही मुस्कान होती है। जीवन के लिए योजना बना सकते हैं अगर आपको अपने जीवन को बेहतर मनाने के लिए योजना बनानी हो तो उसका सबसे अच्छा तरीका यह है की आप एकांत में खुद के साथ रहो जाहिर है जल्दी बाजी में आप कई बार अपने लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हो। इसलिए एकांत में रहकर और सोच- समझ कर योजना बनाएंगे तो जीवन सही दिशा में आगे बढ़ेंगे अपनी अच्छी बुरी आदतों को पहचान सकते हैं।

दुनिया में कोई इंसान परफेक्ट नहीं होता है। सभी में कुछ कमियां होती है। अगर आप में भी कुछ है, तो आपको  जानना चाहिए और उनमें सुधार करना चाहिए । इसलिए अच्छी बुरी आदतों को जानने के लिए अपने लिए समय निकाले और उन्हें समझने की कोशिश करें।

राजेश्वरी राठौड़
rre@fabindiaschools.in
The Fabindia School

Friday, January 8, 2021

मन के हारे हार है,मन के जीते जीत - उर्मिला राठौड़

 यह सत्य पूर्वजों द्वारा कथित है जो कि अभी भी सर्वत्र प्रचलन में है। यह कहावत ये कहना चाहती हैं कि अगर आपको किसी चुनौती का सामना करना पड़े और आपके सामने कोई ताकतवर विपक्ष हो और उस समय आपका मन उसके बारे में क्या सोचता है? अगर आप का मन दृढ़ निश्चय से उसका सामना करे तो उसमें आपकी जीत है और अगर आपने उस क्षण कुछ नकारात्मक सोचा तो हमारी हार निश्चित है। यह सब अपनी सकारात्मक एवं नकारात्मक सोच पर निर्भर है। यदि  आपने किसी चीज को पाने की ठानी है और आप उस चीज के बारे में सकारात्मक हो तो आप उस चीज को हासिल कर सकते है। यदि आप नकारात्मक रहे तो आपका मन ही आपको वह कार्य करने से रोकेगा और आपको पराजीत करवाने में आपका साथ देगा।

एक बार दो व्यक्तियों ने एक ही रास्ते पर एक साथ चलना आरंभ किया। एक उत्साह से भर मंजिल की तरफ खुशी से बढ़ रहा था, दूसरा मार्ग की परेशानियों व रास्ते की दूरी को नाप रहा था।  कुछ ही देर में वह मन से हताश हो गया और उसे चलना कठिन लगने लगा। वह थक कर बैठ गया और दूसरे से बोला क्या तुम और चल सकते हो।  मैं तो बुरी तरह थक गया रास्ते में परेशानियां भी बहुत हैं तो मैं आगे नहीं जाऊंगा।  दूसरा बोला - मुझे तो कोई थकावट या परेशानी नहीं है और अभी तो थोड़ा सा चला हूं मैं तो मजे करते-करते यूं ही रास्ता पूरा कर लूंगा। वह उस कार्य में सफल होता है, जबकि निराश व्यक्ति असफल। इसमें हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि जो व्यक्ति मन से हताश हैं उसका शरीर भी साथ नहीं देता।  संसार का प्रत्येक कार्य मन के खेल पर आधारित है जिस कार्य को करने में मन खुशी महसूस करता है वह कठिन होते हुए भी सरल लगने लगता है।  मान लिया हो कि वह फलां काम कठिन है नहीं होगा तो आसान से आसान काम भी करना असंभव लगता है। कोई भी काम या कैसा भी क्षेत्र हो मेहनत तभी सफल होती हैं जब मन में जीत का उत्साह हो, खुशी हो।

कितनी बार यह देखने को मिलता है शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी ऐसा काम कर देता है कि देखने वाले दांतो तले उंगली दबा देते हैं। मन की मजबूती सफलता का द्वार खोलती है,  मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी मन को हतोत्साहित नहीं होने देती हैं और वह व्यक्ति शीघ्रता से उस हालात पर काबू कर कर लेता है और अपनी मनचाही जीत का रास्ता प्रशस्त कर लेता है। मन में अगर विश्वास हो तो छोटा सा काम भी बड़े से बड़ा काम भी आसान हो जाता है मन में जो शक्ति हैं वह अद्भुत शक्ति है। किसी ने ठीक ही कहा है :  " मन के हारे हार है मन के जीते जीत......."
       
उर्मिला राठौड़
The Fabindia school
urd@fabindiaschools.in

Monday, December 7, 2020

साहस - Krishan Gopal

Courtesy: vividcomm.com
जीवन में कई क्षण ऐसे आते हैं जब हमें ऊहापोह की स्थिति छोड़कर साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ती है।  साहस का अर्थ केवल शारीरिक युद्ध से नहीं है। जीवन में कई ऐसे अवसर आते हैं जब हमें निर्णय लेने में परेशानियों का सामना करना पड़े। कई बार स्थिति गंभीरतम हो जाती है, तब व्यक्ति किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता। ऐसी परिस्थितियों से जूझना और स्वयं को तटस्थ रखना ही साहस है। इन परिस्थितियों का सामना केवल एक बार ही नहीं करना पड़ता बल्कि यह तो सीढी की तरह है, हर कदम पर हमें साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ेगी। 

ऐसे कितने ही उदाहरण भरे पड़े हैं जब विपरीत परिस्थितियों में लोगों ने साहस दिखाकर बेहतर काम करके दिखाया। अधिकांशतः नकारात्मक सोच रखते हुए नकारात्मक परिणाम की कल्पना कर लेते हैं, इसी वजह से कोई नया काम करने में कतराते हैं। सोचिए, वैज्ञानिक कितना साहस दिखाते हुए किसी औषधि की खोज करते हैं परंतु कई बार परिणाम अपेक्षाकृत नहीं मिलते।

 इस कारण वे घबराकर या पराजित होकर अपना कार्य बंद नहीं कर देते हैं बल्कि फिर से नई ऊर्जा के साथ जुट जाते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं। इसका ही परिणाम है कि आज विज्ञान के क्षेत्र में हमने इतनी तरक्की की। यदि सकारात्मकता के साथ किसी काम में जुट जाते हैं और फिर भी असफल  हो जाते हैं तो भी हम बहुत कुछ सीख सकेंगे, की हुई गलतियों को समझ कर उसे दोहराएँगे नहीं। और यदि सफल हो जाते हैं तब तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहेगा। 

एक शिक्षक के रूप में हमें कई स्थानों पर साहस दिखाने की आवश्यकता पड़ती है। यदि बच्चों को साहसी बनाना है या ये मूल्य उनमें विकसित करना है तो शिक्षक को स्वयं ऐसा बनना पड़ेगा। क्योंकि बालक देखकर सीखता है जैसा आचरण उसके शिक्षक का होगा वैसा आचरण ही एक बालक द्वारा दोहराया जाएगा। सीखना प्रक्रिया सतत चलायमान है।

साहस के साथ धैर्य की भी आवश्यकता पड़ती है। कई बार किए हुए कामों का परिणाम देरी से मिलता है ऐसे में धैर्य की आवश्यकता होती है। परिणामों को प्राप्त होने में निर्धारित समय से अधिक भी लग सकता है। इसलिए नए काम के साहस के साथ धैर्य की भी आवश्यकता रहती है। अगर वांछित परिणाम मिलने में देर हो जाए तो सकारात्मकता के साथ धैर्य से प्रतीक्षा करनी चाहिए। अपने कार्यों में संलग्न रहे और सृजनात्मकता को भी समय देते रहे, निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।  
    
Krishan Gopal 
The Fabindia School, Bali 
kde@fabindiaschools.in 

Sunday, November 29, 2020

कहानियों की जीवन में भूमिका - सुरेश सिंह नेगी

कुछ लोगों के पास नई चीजों को सीखने और नए विचारों का पता लगाने का हुनर होता है। जबकि कुछ अन्य अपने आसपास के सफल व्यक्तियों को देखते हुए सीखने के लिए स्व -प्रेरित होते हैं। 
हालांकि, यह सभी लोगों के लिए संभव नहीं है और उनमें से कई को अत्यधिक परिश्रम करने के साथ -साथ अपने गुरूओं और माता-पिता से  प्रेरणा लेनी  पड़ती है। इनमें से बहुत लोग ऐंसे भी हैं जो कहानियों से सीखते हैं। क्योंकि कहानियां संस्कृति को संरक्षित करती हैं और सांस्कृतिक ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाती हैं। संक्षेप में, कहानियां संस्कृतियों को जीवित रखती हैं।

कहानियों के माध्यम से, हम जुनून, भय, उदासी, कठिनाइयों और खुशियों को साझा करते हैं। कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। कहानियों के माध्यम से हम समृद्ध भावनाओं और खुशी, दुःख, कठिनाइयों और असफलताओं की भावनाओं का अनुभव करते हैं। हम व्यवहार और परिणामों के बारे में सीखते हैं।कहानियां हमें आपसी मतभेदों के बावजूद दूसरों के साथ जुड़ना सीखाती हैं क्योंकि हम समझते हैं कि वे कौन हैं और हम इस दुनिया में कहां खड़े हैं।

कुछ कहानियां रोचक होती हैं तो कुछ मनोरंजक और  सीख  देने वाली होती हैं। सभी कहानियां हमेशा से ही लोगों  की पसंद रही हैं। सदियों से, कहानियों को ज्ञान के रूप में  इस्तेमाल किया जाता रहा  है। कहानियां सीखने को प्रभावी बनाती हैं, और इसीलिए बच्चे कहानी के साथ बहुत अच्छे से जुड़ते हैं। यही एक कारण है कि शिक्षक-गण  इसे बच्चों को कई क्षेत्रों में प्रेरित करने के लिए एक उपकरण के रूप में अपने आस-पास और कक्षा में उपयोग करते हैं।जो छात्रों को कड़ी मेहनत करने और सफल जीवन के लिए अपनी नींव रखने में मदद करती हैं।

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Saturday, September 26, 2020

Happiness and Tolerance - Triumph DGS

            

       "ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए |
         औरन को सीतल करे, आपहु सीतल होए ||"
जी हाँ ! गहन अध्ययन का विषय है कि खुशी (HAPPINESS) तथा  सहनशीलता (TOLERANCE) एक दूसरे के पूरक हैं | हम यह भी कह  सकते हैं कि यदि आइने के एक ओर खुशी खड़ी है, तो दूसरी ओर सहनशीलता उसके प्रतिबिम्ब के रूप में दिखाई देती है |

एक छोटा सा पौधा उगाया जाए तो उसमें से फल या फूल के उगने तक की प्रतीक्षा, सहनशीलता का प्रतीक है और जिस प्रकार एक माँ अपने नवजात शिशु को देखकर भीगी मीठी आँखों से खुशी का व्याख्यान करती है,उसी प्रकार फल को देखकर हर चेहरे पर खुशी का अनुभव किया जा सकता है |

कक्षा में अध्यापिका सभी को समान रूप से शिक्षित करती है परन्तु हर छात्र प्रथम स्थान अर्जित नहीं कर पाता | जब शिक्षिका उस विद्यार्थी का हाथ थाम कर उसे सबके समान स्थान पर पहुँचाती है, जो शायद पढ़ाई में कुछ कमज़ोर होने के कारण सबसे आँखें चुराता हो,तो थोड़ी सहनशीलता का पालन दोनों ही ओर से करते हुए दोनों के मुख पर जिस खुशी का अनुभव किया जा सकता है, वह खुशी अतुलनीय है।

अपनी खुशी ढूँढना मनुष्य का स्वाभाविक कर्म है,परन्तु अपनी हार्दिक इच्छा के विरुद्ध जाकर भी दूसरे के विचारों को सुनना, समस्याओं को सुलझाना तथा विचारों को सम्मान देना सहनशीलता का सर्वोपरि उदाहरण है और दूसरे की खुशी में जो खुशी ढूँढना शुरू कर दे, वह सृष्टि  का वास्तविक अधिपति कहलाता है |

अध्यापक जीवन की एक सत्य घटना से आपको अवगत कराती हूँ | कक्षा दसवीं की आवासीय विद्यालय की एक छात्रा जो शायद अपने पारिवारिक कारणों से कुछ अनमनी सी विद्यालय में सभी से लड़ लिया करती थी | उसका स्वभाव हमेशा ही चिड़चिड़ा रहता था| कोई भी बच्चा उससे मित्रता करने में कतराता था, यहाँ तक कि विद्यालय के अध्यापक-अध्यापिकाएँ भी उससे बच कर निकलना पसन्द करते थे, यह सोच कर कि वो न जाने कब-किस पर बिगड़ जाए | मुझे उस छात्रा के लिए विशेष अध्यापिका  के रूप में नियुक्त किया गया | कार्य मुश्किल था,परन्तु असंभव नहीं |

उस बच्चे के दिमाग को पढ़ने,समझने तथा उस की मनोस्थिति समझने  में मुझे तकरीबन दो महीने का समय लग गया, परन्तु मेरे द्वारा दिखाए गए सहनशीलता के मार्ग पर जल्द ही वह भी चलने लग गई, और जल्द ही हम दोनों के बीच स्नेह भरा एक प्यारा सा रिश्ता कायम होने लगा जिससे अब मैं उस छात्रा की शिक्षिका कम और मित्र ज़्यादा हो गई |आज वह छात्रा दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में एक सफल मनोचिकित्सक है |

सहनशीलता और खुशी का इससे बेहतर उदाहरण और कहाँ मिलेगा जब आप अपने हाथ से धरती में बीजारोपण करो और आपकी आँखों के सामने उस बीज की बेल निशदिन एक-एक पत्ता, एक-एक फूल के साथ बढ़ती हुई उन्नति की नई सीढ़ियाँ चढ़ती दिखाई दे |
सहनशील धरती जैसा जो हर मन हो जाए, 
                 फल-फूल के रूप में खुशियाँ अपार पाए|  
हर जीवन फलती बेलों सा मंद-मंद मुस्काए, 
                 जो हर प्राणी थोड़ा-थोड़ा सहनशील हो जाए | 

Proudly created by the inspiring team of Triumph DGS @ The Doon Girls' School, Dehradun - Prachi Jain, Mansi Sondhi Arora, Ritika Chandani, Shalu Rawat, Mohini Bohra Chauhan and Prachi Parashar

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