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Saturday, July 4, 2020

एकता और देखभाल: सुरेश सिंह नेगी


समाज के साथ-साथ पूरे देश के लिए एकता का अत्यधिक महत्व है।  एक साथ मिलजुल काम करने को एकता कहते हैं। एकता में बहुत शक्ति होती है। किसी भी छोटे या बड़े काम को अगर एक साथ किया जाए तो उस काम को बड़ी जल्दी और आसानी से किया जा सकता है। एक साथ काम करने से जहाँ बोरियत का अनुभव भी नहीं होता है वंही दूसरी ओर उस काम में काम करने वालों को आनंद भी आता है। एकता में लोग अपने स्वयं के उद्देश्यों को पूरा करने के बजाय एक सामान्य लक्ष्य की दिशा में काम करते हैं।

एकसाथ काम करने से लोगों में मनमुटाव समाप्त होने के साथ-साथ उनमें आपसी समझ और भाईचारा भी बढ़ता है। लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं। मेरा मानना है कि एकल परिवार के बजाय संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बेहतर जीवन शैली और राष्ट्र के विकास के लिए एकता का आपस में होना अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रकार, हम देखते हैं कि एकता में रहने के बेशुमार लाभ हैं। हम बड़े कार्यों को पूरा कर सकते हैं, जरूरत के समय में लोगों पर भरोसा कर सकते हैं और बेहतर तरीके से युवा शक्ति का पोषण कर सकते हैं।

दूसरों  की परवाह करना, दूसरों के बारें में अच्छा सोचना, आपस में मिलजुलकर रहना, चीजों को एक -दूसरे से साझा करना, दूसरों  के प्रति ईर्ष्या और  मनमुटाव रखना  ही देखभाल कहलाता है। चीजों को एक दूसरे से साझा करने से यह पता चलता है कि आप दूसरों की देखभाल करते हैं साथ ही साथ यह आपको  एक इंसान के रूप में आत्म-विकास करने और दूसरों के प्रति निस्वार्थ, विनम्र और सशक्त बनाने में भी मदद करता है। चीजों को एक-दूसरे से साझा करने से जहाँ एक व्यक्ति में सामाजिक-कौशल का निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास होता है वहीं दूसरी ओर वह हमेशा दूसरों के द्वारा सराहा जाता है।
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

एकता और देखभाल: उषा पंवार


एकता सफलता का आधार है। जब हम एकजुट रहेंगे तो मजबूत बने रहेंगे और किसी भी समस्या का सामना करने में सक्षम हो सकेंगे। यह छोटी कक्षाओं से सिखाया जाता है, कहानियों के जरिए। एकता में अटूट शक्ति हैइसे एक किसान और उसके बेटों की कहानी के माध्यम से अच्छी तरह समझाया गया। किसान के बेटों को व्यक्तिगत रूप से लकड़ियों के बंडल को तोड़ने को कहा तो वे नहीं तोड़ पाए। जब उन्हें यही कार्य संयुक्त रूप से करने के लिए कहा तो वह आसानी से कर पाए। इससे स्पष्ट होता है कि जब लोग एक साथ खड़े होते हैं तो वे आसानी से एक मुश्किल काम भी कर सकते हैं। 

हम एक साथ खड़े हो तो हम हमेशा मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक रूप से मजबूत होंगे। जब टीम वर्क और आपसी सहयोग होता है। अद्भुत प्रगति प्राप्त की जा सकती है। एक व्यक्ति एक मुश्किल काम को पूरा नहीं कर  सकता है या उसे ऐसा करने में बहुत समय और ऊर्जा लग जाती है लेकिन अगर यह काम अधिक लोगों द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है तो यह आसानी से पूरा किया जा सकता है। एकता पशु-पक्षियों मेंजानवरों में भी होती है।

देखभाल कई तरह से होती हैपरिवार में बड़े बुजुर्गों, छोटे बच्चों की, पालतु जानवरों कीसामान की, स्वयं कीबाग-बगीचों की, पेड़-पौधों कीवाहनों की, घर कीदेश कीविद्यालय में अपने मित्रों की, गरीब बच्चों की, माता-पिता शिक्षकों को बच्चों की देखरेख करनी चाहिए। माता-पिता और शिक्षक एक कुम्हार की तरह होते हैं। कुम्हार जैसा चाहे उसी प्रकार से बर्तन को ढाल देता है अतः माता-पिता को अपने बच्चों को बचपन से ही वृद्धों का सम्मान करनादूसरों की मदद करना, वस्तुओं का आदान-प्रदान करनामिल-जुल कर रहना आदि प्रेरित करना चाहिए। माता-पिता, शिक्षक, समाज बालक को सही दिशा देकर व्यक्तित्व विकास कर सकते हैं। 

बच्चों को शिक्षा देने के लिए सबसे पहले तो उन्हें प्यार देना चाहिए। शिक्षक जब बच्चों को प्यार करता है तो अपना प्यार मन बच्चों पर अर्पित करता है तभी वह उनमें खुशी, मित्रता मानवता की भावना भर सकता है। शिक्षक को बच्चों के मन तक पहुँचना है क्योंकि मन तक पहुँचकर ही उनमें अपेक्षानुसार बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षक ऐसा वातावरण बनाए कि विद्यालय घर जैसे बन जाए।
बच्चों की देखभाल करने के लिए कुछ घरों में केयरटेकर रखते हैं लेकिन केयरटेकर बच्चों को वे गुण नहीं सिखा सकती जो कि घर में रहने वाले दादा-दादी सिखा सकते हैं। अतः घर के लोग एकता मजबूती और छोटे बच्चों का सर्वांगीण विकास करने में अहम योगदान निभाते हैं इसी प्रकार पेड़-पौधों की देखभाल (जिम्मेदारीपूरी तरह से करें तो वातावरण शुद्ध रहेगा।
Usha Panwar
The Fabindia School,Bali

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