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Sunday, May 25, 2025

गुरु नानक देव जी: समानता और समर्पण के प्रेरक - रूबल कौर Arthur Foot Academy

 

गुरु नानक देव जी ने युवाओं को सदा ही समर्पण का मंत्र दिया है।
गुरु नानक सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु थे। उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवंडी में हुआ था। गुरु नानक ने समाज में जाति, लिंग और धर्म के आधार पर भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाई और सभी के लिए समानता का संदेश दिया।

उन्होंने एक ही ईश्वर की पूजा का उपदेश दिया और सभी के लिए ईमानदारी और मेहनत से जीवन जीने के महत्व को बताया। उन्होंने न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए भी प्रयास किए।

गुरु नानक का निधन 22 सितंबर 1539 को करतारपुर में हुआ, जहाँ उन्होंने एक आध्यात्मिक समुदाय की स्थापना की थी।

गुरु नानक की शिक्षाएँ सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं, जिनमें उनके कीर्तन और कविताएँ शामिल हैं।

सिख परंपरा के अनुसार, गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भारतीय चंद्र मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

- रूबल कौर

Sunday, May 18, 2025

आर्थर फ़ुट अकैडमी का संदेश: रुचि से किया कार्य बने जीवन की पहचान

 

संघर्ष ही जीवन का सार है, इसके बिना कोई सफलता नहीं मिलती। अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनो। हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब उसे यह सोचना पड़ता है कि वह कौन सा कार्य अपनाए। यह सोचना जीवन में सफलता की ओर ले जाता है। रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनने से व्यक्ति कठिनाइयों का सामना भी धैर्य और लगन से करता है। यदि कोई व्यक्ति अपने मनपसंद कार्यों को अपने मन और दिल से करता है, तो उसमें उसे सफलता जरूर मिलती है। अगर हम कोई काम करते हैं, तो उस काम में हमारी रुचि होनी चाहिए। अगर कोई काम हम अपनी रुचि और लगाव से करते हैं, तो उस काम में हमें मजा आता है और हमारा ध्यान भी रहता है। इसलिए हमें अपने काम में रुचि और लगाव रखना चाहिए।

– साक्षी खन्ना

"जीवन में सफलता का राज है, संघर्ष को हर दिन नई ऊँचाइयों की ओर धकेलना।"

यह पाठ हमें यह सिखाता है कि जीवन में किसी भी पेशे या करियर को चुनते समय सबसे ज़रूरी बात है — अपनी रुचि। जब हम वही कार्य करते हैं जिसमें हमारी रुचि होती है, तो हम उसे मन लगाकर करते हैं और उसमें सफलता पाने की संभावना बढ़ जाती है। यह पाठ यह भी समझाता है कि समाज और परिवार की अपेक्षाएँ ज़रूरी हो सकती हैं, लेकिन हमें अपने अंदर की आवाज़ को भी सुनना चाहिए।

मुझे यह पाठ प्रेरणादायक लगा क्योंकि यह हमें आत्म-विश्लेषण करने की प्रेरणा देता है। अब मैं समझ सकी हूँ कि केवल पैसा या प्रसिद्धि लंबे समय तक ख़ुशी नहीं दे सकते। असली संतोष और सफलता तभी मिलती है जब हम अपनी रुचि के कार्य करें।

यह पाठ हर विद्यार्थी के लिए मार्गदर्शक की तरह है जो अपने भविष्य के बारे में सोच रहा है।

"रुचि को राह दिखी, फिर से चेहरे पर मुस्कुराहट आई।"

"जो व्यक्ति खुद के बनाए रास्ते पर चलता है, वह हमेशा तरक्की करता है।"
रीना देवी

"जिसमें हो दिल की लगन, वही बने जीवन का चयन!"

पाठ "अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनो" ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि हम अपने जीवन का रास्ता चुनते समय दूसरों की अपेक्षाओं से अधिक अपने मन की आवाज़ क्यों नहीं सुनते। यह पाठ हमें यह समझाता है कि हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई विशेष प्रतिभा और रुचि होती है, और यदि हम उसी दिशा में कार्य करें जिसमें हमारा मन रमता है, तो हम न केवल सफलता पा सकते हैं, बल्कि ख़ुशी और संतुष्टि का भी अनुभव करते हैं।

समाज में अक्सर यह देखा गया है कि बच्चे अपने माता-पिता या समाज के दबाव में आकर कोई ऐसा व्यवसाय चुन लेते हैं, जिसमें उनकी कोई रुचि नहीं होती। इसका परिणाम यह होता है कि वे जीवन भर उस काम को बोझ समझकर करते हैं। जबकि यदि वही बच्चा अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुने — चाहे वह संगीतकार बनना चाहे, शिक्षक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी या फिर कोई कलाकार — तो वह पूरे मन और उत्साह से अपने कार्य को करता है।

यह पाठ मुझे यह प्रेरणा देता है कि मैं स्वयं को बेहतर जानूं, अपने सपनों को पहचानूं और उसी दिशा में आगे बढ़ूं, जहां मेरा मन, मेरी रुचि और मेरी शक्ति एक साथ काम करें।
यही सच्ची सफलता और आत्मसंतोष की कुंजी है।
साक्षी पाल

"जिस काम में दिल लगे, वहीं काम कर — हर दिन हो खुशियों से भरपूर सफर।
रुचि के बिना जो किया जाए, कभी वो बन जाता है बोझ उम्र भर।"

हर व्यक्ति की अपनी अलग-अलग रुचियाँ और क्षमताएँ होती हैं। अगर हम अपने शौक और रुचियों के अनुसार व्यवसाय चुनते हैं, तो न केवल सफलता, बल्कि ख़ुशी और संतुष्टि भी पा सकते हैं। रुचि से किया गया काम बोझ नहीं लगता, बल्कि प्रेरणा देता है। इसलिए व्यवसाय चुनने से पहले अपनी रुचियों को पहचानना और उसी क्षेत्र में करियर बनाना बुद्धिमानी है।

हमें वही व्यवसाय चुनना चाहिए जिसमें हमारी रुचि हो। रुचि अनुसार किया गया काम ख़ुशी देता है और सफलता भी। इससे जीवन में संतोष और तरक़्क़ी दोनों मिलती है।

"मन की मुरादें जब-जब बोल उठें,
रुचि की राहें जब खोल उठें।
चुनो वही व्यवसाय प्यारे,
जो सपनों को दे आकार हमारे।"

-ललिता पाल

"रूचि जीवन की सूची है
जिसके सहारे आप अपना जीवन बुन सकते हैं।" 
रूचि या शौक ऐसी क्रियाएं होती है। जिसमें खेल, कला, और संगीत आदि कार्य सम्मिलित होते हैं। हम रुचि के अनुसार अपने कार्य को करने में समर्थ हो सकते हैं। उन कार्यों को करने से हमें अधिक प्रशंसा मिलती है। हमारे जीवन के लिए अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकते है। यदि हम जिन कार्यों को करने में असमर्थ होते हैं। उन कार्यों को करने में हमें प्रशंसा नहीं मिलती है। और ना ही हम उन कार्यों को पूर्णता से कर पाते हैं। अपनी रुचि के अनुसार अपने व्यवसाय को करना चाहिए। हमारे शौक हमारे जीवन की दैनिक भीड़ से अलग रखकर हमारे दिमाग को ताजा और शांत बनाते हैं।
इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है। कि हमें अपनी रुचि के अनुसार अपना कार्य करना चाहिए।
- रूबल कौर

एक व्यक्ति का जीवन कई विकल्पों से भरा होता है, खासकर तब जब वह अपना भविष्य बना रहा होता है। किसी का पेशा या काम और करियर चुनना जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है, जो न केवल हमारी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है, बल्कि हमारी मानसिक संतुष्टि और जीवन की गुणवत्ता को भी निर्धारित करता है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि हम अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार अपना पेशा चुनें।

जब हम अपनी रुचि के अनुसार काम करते हैं, तो हमें थकान महसूस नहीं होती, बल्कि उस काम को करने में मज़ा आता है, क्योंकि तब काम एक ज़िम्मेदारी नहीं रह जाता, बल्कि यह एक उत्सव बन जाता है। इससे व्यक्ति अधिक आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, अगर हम दबाव में या केवल आर्थिक लाभ के लिए कोई ऐसा काम चुनते हैं, जिसमें हमारी रुचि नहीं है, तो वह समय के साथ बोझ बन सकता है।

इसलिए ज़रूरी है कि हम अपने मन के अंदर झाँककर अपनी रुचियों, योग्यताओं और सपनों को पहचानें और उसी के आधार पर अपना व्यवसाय और करियर चुनें।

"अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनना न केवल एक समझदारी भरा निर्णय है, बल्कि यह एक सुखद और संतुलित जीवन की कुंजी भी है।"
स्वाति

"रास्ते कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे पक्के हैं तो मंज़िल ज़रूर मिलती है।"

पाठ – "अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चुनो"
मैंने इस पाठ से यह सीखा है कि मुझे वही काम करना चाहिए जिसमें मेरी रुचि हो — चाहे वह काम कठिन हो या सरल, मैं उसे करने से पीछे नहीं हटती।

इंसान कोई भी हो, व्यवसाय की ज़रूरत सबको होती है। इसलिए कोई भी काम हो, उसमें रुचि रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि व्यवसाय जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी काम में हमारी रुचि होती है, तो हम उस काम को बहुत अच्छे से करते हैं। जो भी कार्य हम करें, उसमें रुचि होना आवश्यक है।

व्यवसाय कुछ भी हो, हर कोशिश में सफलता नहीं मिलती — लेकिन हर सफलता का कारण कोशिश ही होती है। इसलिए हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपनी रुचि के अनुसार कार्य करते रहना चाहिए।

— सिमरन कौर


Monday, October 12, 2020

कठिन परिश्रम कभी असफल नहीं होता - Ayasha Tak

अगर कोई व्यक्ति कठिन परिश्रम कर सकता है , तो वह सफल जरूर होगा। वह किसी भी तरह से विफल नहीं हो सकता है। हम जानते हैं कि कठिन काम आसान नहीं है , यह सभी तरह के लोगों के लिए बहुत मुश्किल है। हर पेशे को कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इसके बिना कुछ भी सुधार नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि कड़ी मेहनत व्यक्ति को कभी असफल नहीं होने देती। अब मैं एक युवा व्यक्ति की कहानी बता रही हूँ। जिन्होंने कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की।

उन्होनें अपनी मेहनत की शुरुआत अपने स्कूली जीवन से की। लड़के ने कड़ी मेहनत से हाई - स्कूल में अच्छा परिणाम प्राप्त किया। उन्होंने अध्ययन में बहुत अधिक समय बिताया। कई तरह के काम उन्हें बिना अध्ययन के पूरे करने पड़ते थे। वह अपने परिवार के साथ नहीं रहता था। क्योंकि उनका स्कूल उनके गाँव से बहुत दूर था। इसलिए वह स्कूल के छात्रावास में रहता था। वहाँ पर उसे अपना हर काम स्वयं करना पड़ता था। इसलिए वह ठीक से सो भी नहीं पाता था। इसके बावजूद उसने अपनी कड़ी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए। अन्यथा यदि आप कड़ी मेहनत करते है ,तो आपकी प्रतिभा में वृद्धि होगी।

स्कूल की पढाई पूरी होने के बाद में उसे कॉलेज में दाखिला लेना था। परन्तु उसका परिवार गरीब होने के कारण उसकी कॉलेज की फीस भरने में असमर्थ था। उसने अपने लिए नौकरी प्राप्त करके फिर अपनी पढाई और नौकरी दोनों ही कामों में कड़ी मेहनत की। आखिरकार, वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने सफलता प्राप्त करने में सक्षम हुआ। अब वह एक बहुत बड़े व्यवसायी है। उन्होनें अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल किया। अगर वह मेहनत नहीं कर पाता तो उन सफलताओं को कभी हासिल नहीं कर पाता

Ayasha Tak, The Fabindia School <atk@fabindiaschools.in>

Tuesday, July 28, 2020

सफलता - उषा पंवार

"मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।"

सफलता किसी को भी एक झटके में नहीं मिलती या रातों-रात हासिल नहीं होती है लेकिन लगातार प्रयास करते
रहने से एक दिन जरूर मिलती है। सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके जीवन में एक लक्ष्य होता है और वे अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार होते हैं ।अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करें और सभी दूसरे विचारों को अपने दिमाग से निकाल दें यही सफलता की कुंजी है।

अतः सभी छात्रों को अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। हर किसी के पास अपना अलग सामर्थ्य और काबिलियत होती है, कोई छात्र पढ़ाई में अव्वल होता है ,तो कोई छात्र खेलकूद में ,फोटोग्राफी में ,संगीत में, नृत्य में ,तो कोई चित्रकारी और शिल्पकारी मेंअव्वल होते हैं। कई छात्र ऐसे भी होते हैं जो सफल तो होना चाहते हैं लेकिन इसके लिए प्रयास नहीं करते ,जरूरी नहीं है कि आप अपने क्लास में अव्वल आए बल्कि जरूरी है आप अपने अंदर की काबिलियत को समझे और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने लक्ष्य को निर्धारित करें।

रुपया ,पैसा, धन-दौलत कोई भी चुरा सकता है छीन सकता है लेकिन नहीं छीनी जा सकती है तो उसकी काबिलियत गुण। अतः हम में हुनर है तो कदर है।

धन्यवाद,
उषा पंवार

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