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Tuesday, July 28, 2020

सफलता - उषा पंवार

"मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।"

सफलता किसी को भी एक झटके में नहीं मिलती या रातों-रात हासिल नहीं होती है लेकिन लगातार प्रयास करते
रहने से एक दिन जरूर मिलती है। सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके जीवन में एक लक्ष्य होता है और वे अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार होते हैं ।अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करें और सभी दूसरे विचारों को अपने दिमाग से निकाल दें यही सफलता की कुंजी है।

अतः सभी छात्रों को अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। हर किसी के पास अपना अलग सामर्थ्य और काबिलियत होती है, कोई छात्र पढ़ाई में अव्वल होता है ,तो कोई छात्र खेलकूद में ,फोटोग्राफी में ,संगीत में, नृत्य में ,तो कोई चित्रकारी और शिल्पकारी मेंअव्वल होते हैं। कई छात्र ऐसे भी होते हैं जो सफल तो होना चाहते हैं लेकिन इसके लिए प्रयास नहीं करते ,जरूरी नहीं है कि आप अपने क्लास में अव्वल आए बल्कि जरूरी है आप अपने अंदर की काबिलियत को समझे और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने लक्ष्य को निर्धारित करें।

रुपया ,पैसा, धन-दौलत कोई भी चुरा सकता है छीन सकता है लेकिन नहीं छीनी जा सकती है तो उसकी काबिलियत गुण। अतः हम में हुनर है तो कदर है।

धन्यवाद,
उषा पंवार

Wednesday, June 10, 2020

आशा और मित्रता: कृष्ण गोपाल


हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, कठिन और सुखद दिन तो आते रहते हैं।  निराशा व्यक्ति को पतन की और ले जाती है जबकि आशा एक नई शक्ति का संचार करती है।  परोपकार करने से आशा बलवती होती है।  अपने सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य अवश्य करें। 

आशा जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।  प्रसन्नचित मन और सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति को कभी बीमारियाँ नहीं घेरती। जीवन में लक्ष्य प्राप्ति करनी है तो आशावादी बने रहो, चाहे असफलता मिले किसी काम में, फिर भी आशा  दामन छोड़ो।  राष्ट्रकवि  मैथिलीशरण गुप्त के शब्दों में -

समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।  

सच ही कहा गया है कि आशा अमर धन है।  व्यक्ति जब निराश हो जाता है तब कुछ भी करने की इच्छा नहीं रहती। यदि इसी प्रकार निठल्ला बैठ जाएगा तो प्रगति का चक्र ही रुक जाएगा।  निराशा का भाव मन में जगते  देर नहीं लगती।  ऐसे अवसर तो जैसे तैयार ही बैठे है।  जब कुछ करने की चाह हो और उसमें असफलता मिले तो निराश हो सकते है।  उचित सहयोग  मिले तो निराश हो सकते है।  अर्थात निराश होने के कई बहाने है।  

आशा का एक और रूप है- मित्रता।  मित्र होने पर आशा भी बलवती हो जाती है।  सच्चा मित्र व्याधि हर लेता है जबकि दुष्ट मित्र हमेशा कष्ट देता रहता है। मित्र से सहानुभूति रखें, आवश्यकतानुसार सहयोगी बनें, प्रसन्नचित, उदार और हितैषी बने।  हम सामाजिक प्राणी है अतः मित्रों की आवश्यकता रहती ही है।  मित्रों की संख्या में वृद्धि करें और प्रसन्न रहें। 

मित्र ऐसे हो जो हर कठिनाई में मदद करे, परन्तु केवल अपेक्षा ही रखें।  मित्रता का सठीक नियम है, देना।  पहले देने की मंशा रखें, मिलना तो स्वतः ही होता रहेगा।  यदि लेने की चाह में मित्र का हाथ थामा है, तो यह नियम के विरुद्ध है। सच्चा मित्र संकट में साथ नहीं छोड़ता ये बात आप पर भी लागु होगी।  अपने मित्र का साथ हर परिस्थिति में निभाइए, फिर मित्रता का आनंद लीजिए। 
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

Friday, April 24, 2020

आशा अमर धन: कृष्ण गोपाल

सच ही कहा गया है कि आशा अमर धन है।  व्यक्ति जब निराश हो जाता है तब कुछ भी करने की इच्छा नहीं रहती।  यदि इसीप्रकार निठल्ला बैठ जाएगा तो प्रगति का चक्र ही रुक जाएगा।  निराशा का भाव मन में जगते देर नहीं लगती।  ऐसे अवसर तो जैसे तैयार ही बैठे है। जब कुछ करने की चाह हो और उसमें असफलता मिले तो निराश हो सकते है। उचित सहयोग मिले तो निराश हो सकते है।  अर्थात निराश होने के कई बहाने है।  

जीवन में उम्मीद होना बहुत आवश्यक है। ऐसे जीवन का कोई प्रयोजन नहीं जो निराशा से घिरा हो। आगे बढ़ने के लिए यह आवश्यक है कि मन में आशा की किरण जगाए रखें।  किसी कवि की कविता कहती है -
निराशा के दीप बुझाकर,
आशाओं के दीप जलाएँ,
दसों दिशा में फैले तम को,
मिलकर कोसों दूर भगाएँ  

हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, कठिन और सुखद दिन तो आते रहते हैं।  निराशा व्यक्ति को पतन की और ले जाती है जबकि आशा एक नई शक्ति का संचार करती है।  परोपकार करने से आशा बलवती होती है।  अपने सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य अवश्य करें। 

आशा जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।  प्रसन्नचित मन और सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति को कभी बीमारियाँ नहीं घेरती। जीवन में लक्ष्य प्राप्ति करनी है तो आशावादी बने रहो, चाहे असफलता मिले किसी काम में, फिर भी आशा  दामन छोड़ो।  राष्ट्रकवि  मैथिलीशरण गुप्त के शब्दों में -
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।  
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

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