नाना नाम जहाज है,
जो जपे वह उतरे पार।
मेरा सद्गुरु करता मुझको प्यार,
वही तो है मेरा खेलनहार।
गुरु नानक देव जी के उपदेश वह ज्ञान का पवित्र प्रकाश हैं, जिसमें संपूर्ण विश्व को प्रकाशवान किया है।
रीना देवी
नाना नाम जहाज है,
जो जपे वह उतरे पार।
मेरा सद्गुरु करता मुझको प्यार,
वही तो है मेरा खेलनहार।
गुरु नानक देव जी के उपदेश वह ज्ञान का पवित्र प्रकाश हैं, जिसमें संपूर्ण विश्व को प्रकाशवान किया है।
रीना देवी
गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु और महान संत थे जिन्होंने संसार को मानवता, समानता और ईश्वर भक्ति का संदेश दिया। उनका जीवन और उपदेश आज भी हर युग और हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने सिखाया कि ईश्वर एक हैं और हर जगह विद्यमान हैं। वे कर्म, सच्चाई और प्रेम से भरे जीवन की वकालत करते थे। वे जाति, पाति भेदभाव और अंधविश्वास का विरोध करते थे।
गुरु नानक जी ने अपने जीवन में चार बड़ी यात्राएं कीं, जिन्हें "उदासियां" कहा जाता है। यात्राओं का उद्देश्य लोगों को एक ईश्वर का संदेश देना था, धर्म के नाम पर हो रहे भेदभाव और अंधविश्वास को मिटाना था। उन्होंने अपनी यात्राओं में मंदिरों, मठों और बाद में बने गुरुद्वारों में जाकर उपदेश दिया। माना जाता है कि उन्होंने करीब 28 साल तक चार बड़ी यात्राएं कीं, जिन्हें उदासियां कहा जाता है। वे सैकड़ों धार्मिक स्थलों, गुरुद्वारों, मंदिरों, मस्जिदों और अनेक दरगाहों पर भी गए।
दूसरी उदासी दक्षिण दिशा - उज्जैन, नर्मदा तट, श्रीरामेश्वर, तमिलनाडु।
तीसरी उदासी पश्चिमोत्तर दिशा - काबुल, पेशावर, कश्मीर, सियालकोट, तिब्बत।
चौथी उदासी - मक्का, मुस्लिम तीर्थ स्थल, मदीना। यहाँ उन्होंने मुस्लिम फकीरों और पीरों से धर्म और ईश्वर पर चर्चा की।
अंतिम उदासी पंजाब और आसपास - करतारपुर, जहाँ उन्होंने अंतिम समय बिताया। सुल्तानपुर लोधी, अमृतसर, गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर। कहा जाता है कि यहीं 22 दिसंबर 1539 को गुरु नानक देव जी ज्योति-जोति समा गए।
मुझे गुरु नानक जी के बारे में जो हमने क्लास में सुना और उनकी वीडियो देखी, वह बहुत अच्छा लगा। और फिर उसके बारे में और जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। इससे मैंने यह सीखा कि हम सभी धर्मों को समान मानना चाहिए।
- ललिता पाल
गुरु नानक देव जी एक बहुत अच्छे और महान गुरु थे, जिन्होंने हमारे लिए बहुत कुछ किया है। सामाजिक अधिकारों के लिए उनका पूरा परिवार शहीद हो गया, जिसमें कुछ लोगों ने उनके दो बेटों को जिंदा दीवार में गाड़ दिया था। उन्होंने देश के लिए कई तरह के बलिदान दिए। ऐसे ही कई गुरु और भी थे, जैसे गुरु तेगबहादुर जी आदि।
एक बार गुरु नानक जी एक गाँव में गए। वहां गुरु नानक जी एक रात के लिए रुके। वहीं पर कुछ लोगों ने उन्हें खाना खिलाया और उनकी बहुत अच्छी देखभाल की। अगली सुबह गुरु नानक जी वहाँ से जाने लगे। जाते वक्त गुरु नानक जी ने उन सभी लोगों को आशीर्वाद दिया।
ऐसे ही गुरु नानक जी ने अनेक जगहों पर जाकर सभी धर्मों के लोगों से मिले और उन्हें एकता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने सभी के साथ समानता का पाठ पढ़ाया और सिखाया कि सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर एकता के साथ रहना चाहिए। कोई भी धर्म अलग नहीं है और ना ही कोई इंसान अलग है, सब समान हैं और सभी धर्मों और इंसानों का ईश्वर एक है।
"केवल वो बोलो जो तुम्हारे लिए सम्मान लेकर आए।"
– सिमरन कौर
गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक थे और पहले गुरु थे। उन्होंने समानता और मानवता का संदेश दिया, जो आज भी लोगों को प्रेरित करता है। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा सच बोलना और ईश्वर के प्रति भक्ति का संदेश दिया।
गुरु नानक देव जी ने हमें प्रेम, एकता और सच्चाई के मार्ग पर चलना सिखाया। उनका जीवन आज भी हमें सिखाता है कि हम सभी का जीवन एक समान है और हमें मिलजुलकर रहना चाहिए तथा सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। वे न केवल सिख धर्म के संस्थापक थे, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक महान संत और मार्गदर्शक भी थे।
गुरु नानक देव जी केवल एक धार्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि वे समाज सुधारक और प्रेरणादायक भी थे। उन्होंने हमें सिखाया कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और हमें सच्चे मन से ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए तथा मेहनत करके जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
— साक्षी खन्ना
उन्होंने एक ही ईश्वर की पूजा का उपदेश दिया और सभी के लिए ईमानदारी और मेहनत से जीवन जीने के महत्व को बताया। उन्होंने न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए भी प्रयास किए।
गुरु नानक का निधन 22 सितंबर 1539 को करतारपुर में हुआ, जहाँ उन्होंने एक आध्यात्मिक समुदाय की स्थापना की थी।
गुरु नानक की शिक्षाएँ सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं, जिनमें उनके कीर्तन और कविताएँ शामिल हैं।
सिख परंपरा के अनुसार, गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व भारतीय चंद्र मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
- रूबल कौर
"यात्रा सिर्फ स्थानों की नहीं होती, यह आत्मा की गहराइयों में उतरने का माध्यम भी बन जाती है। गुरु नानक देव जी की यात्राएँ हमें सिखाती हैं कि सच्चाइयों, प्रेम और एकता की खोज के लिए सीमाएँ कोई मायने नहीं रखतीं।"
पाठ ‘प्रवास’ से मैंने सीखा है कि कैसे गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्राओं के दौरान अलग-अलग धर्मों, जातियों के लोगों से मुलाकात की, जिससे सीखने को मिलता है कि "ईश्वर एक है और सभी इंसान बराबर हैं, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति से हों। हमें सभी के साथ समानता और भाईचारे का व्यवहार करना चाहिए।"
गुरु नानक जी ने अपने जीवन में लगभग 150 से अधिक स्थानों पर यात्रा की, जिनका उद्देश्य था:
सभी के साथ समानता और भाइचारे से व्यवहार करना और समझना कि सबका ईश्वर एक है।
अंधविश्वास और जात-पात के खिलाफ बोलना।
सभी धर्मों के लोगों के साथ बातचीत करके उनकी भावनाओं को समझना, उनका हल निकालना या उनकी मदद करना।
एकता का संदेश देना; गुरु नानक जी ने सभी धर्मों, जातियों के लोगों से मिलकर एकता, भाइचारे और प्रेम का संदेश दिया।
प्रवास हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमारे जीवन के पड़ाव, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, वे कभी नहीं भूल सकते हैं, बल्कि हर रुके हुए ठहराव को एक प्रेरणा में बदला जा सकता है।
प्रवास एक ऐसा संदेश है जो आज भी हमारे भीतर झांकने और सुधारकर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
"गुरु नानक जी ने सिखाया है कि ईश्वर न तो किसी एक धर्म में सीमित है, न ही किसी एक स्थान में है, वह सबमें और हर जगह मौजूद है।"
"Parvaas" हमें एक आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाता है — ऐसी यात्रा जो केवल रास्तों और स्थानों की नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों की होती है।
अमरदीप सिंह ने गुरु नानक देव जी की यात्राओं को केवल ऐतिहासिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि मानवता, समानता और प्रेम के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया है। यह allegory हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म कोई सीमा नहीं मानता — न भाषा की, न जाति की, न धर्म की।
उन्होंने इंसान के भीतर बसने वाले ईश्वर की पहचान करवाई। उनकी यात्राओं का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि सच्चे धर्म की पहचान कराना था — जो प्रेम, करुणा और सेवा में बसता है।
"Parvaas" में अमरदीप सिंह ने इन यात्राओं को एक Tapestry — यानी चित्रों और प्रतीकों की चादर — के रूप में पिरोया है। इस चादर में हर धागा, हर रंग एक विचार है — कहीं सामाजिक कुरीतियों पर चोट, कहीं स्त्री सम्मान की बात, कहीं जातिवाद का विरोध, तो कहीं एकता और भाईचारे का मंत्र।
लेखक ने allegory के माध्यम से दिखाया है कि गुरु नानक देव जी का हर कदम एक संदेश था, और हर मुलाकात एक क्रांति।
अतः अमरदीप सिंह की यह कृति हमें प्रेरित करती है कि हम भी जीवन को एक पवित्र यात्रा समझें — जहां हर कदम पर सीख हो, और हर मोड़ पर सेवा का संकल्प।
साक्षी पाल